मुश्किलें बस ये दिखाने को..

‘हैं जबकि और भी कितने ही दर ज़माने में,
क्यूँ फकत मेरे ठिकाने को चली आती हैं..
कितने मौजूद मददगार हैं यहाँ तेरे,
मुश्किलें बस ये दिखाने को चली आती हैं..’

– प्रयाग

मायने :
फकत – सिर्फ

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Responses

  1. बहुत ख़ूब…
    रहिमन विपदा हो भली,जो थोड़े दिन होय,
    हित – अनहित या जगत में जानी परत सब कोय।
    ————– रहीम दास जी के दोहे को चरितार्थ करती बहुत सुंदर रचना।

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