वफा से बे – वफा

माथे पे आज पसीना के बूंद आया है क्यों।
जो कल तक थे हमारे आज अजनबी है क्यों।।
दामन – ए – यार का जब साथ पकड़ा था मैने।
हल्की मुस्कान से हम पर वार किए थे क्यों।।
जन्म जन्म का वादा था साथ निभाने का ।
आज वादे को कबर में दफना के मुस्करा रहे है क्यों।।
गैर के हाथों में है आज उनके नाजुक से हाथ।
वफा के दिलासा दिलाने वाली तू बे-वफा बनी क्यों।।
सोचा था सारी खुशियां तुम्हारे दामन में डाल दूँगा।
ए मेरे खुदा मेरी मुहब्बत में तूने नजर लगायी ही क्यों।।


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5 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - April 9, 2020, 8:53 pm

    Nice

  2. Pragya Shukla - April 10, 2020, 2:28 pm

    Good

  3. NIMISHA SINGHAL - April 14, 2020, 2:53 pm

    Nice

  4. Abhishek kumar - May 10, 2020, 10:46 pm

    गुड

  5. Satish Pandey - July 12, 2020, 2:39 pm

    बेवफा से वफ़ा, वाह

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