सोच समझ के बोल

सोच समझ के बोल रे बंदिया
सोच समझ के बोल
जो तु बोले, तेरा पीछा ना छोड़े
मांगे हर अल्फाज़ अपना हिसाब
मान-अपमान दिलवाते, दिखलाये संस्कार
यही बनाए तेरे वैरी यही बनाए यार
सोच समझ के बोल रे बंदिया
सोच समझ के बोल
छलकेगा प्यार तेरा जिन अल्फाज़ों से
वो तेरा दामन खुशियों से भर देंगे
करेगा क्रोध जब तु इन्ही अल्फाज़ों से
फिर पीछा ना छूटे दर्द भरी तनहाईयों से
सब सच है कहते
सोच समझ के बोल रे बंदिया
सोच समझ के बोल ।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

मुस्कुराना

वह बेटी बन कर आई है

चिंता से चिता तक

उदास खिलौना : बाल कबिता

11 Comments

  1. Anu Singla - January 21, 2021, 10:37 pm

    सुधार के लिए सुझाव का स्वागत है

  2. Satish Pandey - January 21, 2021, 10:58 pm

    कवि अनु जी आपकी यह रचना बहुत ही बेहतरीन है। आपने संवेदनशीलता के साथ सशक्त भाषा के ज़रिए प्रभावशाली ढंग से काव्य रचना की है। पंक्तियाँ विचार, सम्प्रेषण और शिल्प के प्रतिमानों पर खरी उतर रही हैं। वाणी से निकले शब्द ही वास्तव में सम्मान या अपमान दिलाते हैं। बहुत सुंदर कविता। ऐसे ही खूब लिखते रहें।

  3. Anu Singla - January 21, 2021, 11:04 pm

    बहुत बहुत धन्यवाद जी
    आपका प्रोत्साहन लिखने की प्रेरणा देता है।

  4. Piyush Joshi - January 21, 2021, 11:14 pm

    बहुत खूब, वाह

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 22, 2021, 10:26 am

    अतिसुंदर भाव

  6. Geeta kumari - January 22, 2021, 4:23 pm

    “मान-अपमान दिलवाते, दिखलाये संस्कार
    यही बनाए तेरे वैरी यही बनाए यार”
    ___सोच समझ कर बोलने के लिए लिखी गई ,कवि अनु जी की
    यह बहुत सुंदर कविता है । बेहतर शिल्प के साथ यथार्थ कथ्य है कि हमारे शब्द ही हमारे संस्कार दिखलाते हैं और हमारे कथन ही हमारे मित्र अथवा शत्रु बनाते हैं। अति उत्तम लेखन

    • Anu Singla - January 22, 2021, 5:16 pm

      सुन्दर समीक्षा के लिए धन्यवाद गीता जी

  7. vivek singhal - January 22, 2021, 6:18 pm

    Very nice

Leave a Reply