बापू हमारे, जन- जन के प्यारे मिली आजादी बापू तेरे सहारे ।। वर्षों से भारत माता सिसक रही थी पाँवो में गुलामी की बेङी पङी थी दिल में हमारे न कोई ललक बची थी स्वाधीन […]

जिनके तेज के आगे, चाँद की चमक फीकी हो ऐसा कौन है जिसने, अहिंसा से लङाई जीती हो । बिन गोली- बारूद के चला था फ़िरंगी से उलझनें सोचा भी नहीं था कभी, चला है […]

बापू तुम्हारे सपनों को हम साकार करेंगे। हम हिन्द के हैं बालक सेवादार बनेंगे।। इसे प्यार करेंगे।। मूल मंत्र जो दिया आपने, सत्य अहिंसा का सबको। अपनाऐंगे हम जीवन में, जीवन को साकार करेंगे।। हम […]

महात्मा गांधी सत्य अहिंसा को अपनाकर जीवन को साकार किया। एक वस्त्र में खुद को रखकर जन जन का उद्धार किया।। बाल्य काल में शिक्षा सेवा योग मार्ग को अपनाया। जन हितकारी न्याय के खातिर […]

मनुष्य कहां कोई सम्पूर्ण जनता की नजर में सब अपूर्ण दुनियां जिन्हें पूजती बारम्बार स्वदेश में उनके निंदक हजार तिनके की तरह ठुकराई सत्ता कभी भी न पाया कोई भत्ता निठल्ले करते उनकी बुरी बातें […]

अहिंसा के पुजारी, सत्य, प्रेम , करूणा जैसे मानवीय गुणों की हमें दरकार है । किसानों के हिमायती की दृढ़ता को अपनाने हेतु क्या हम पुनः तैयार हैं । अपनी मानवीय संवेदना को रखना हमें […]

उन्हें देख हिल गए, कांप गए अंग्रेज, धोती वाले बापू जी की बात ही निराली थी। उखाड़ा फिरंगी राज, एक किया था समाज, राष्ट्रवादी भावना की, लहर सी ला दी थी। सत्य के अहिंसा के, […]

पूर्णिमा का चांद चमका है गगन में आज पूरा। चाँद चमका है तो मन कैसे रहेगा खुश अधूरा। चाँद पूरा मन भी पूरा, क्यों रहे सपना अधूरा। लक्ष्य पर फिर से बढ़ा पग, स्वप्न को […]

विश्व गुरु की संस्कृति की आज ये यात्रा अंतिम निकल रही, चिता जल रही संस्कारो की मर्यादाएं राख हो रही।। धुंआ हैवानियत का उड़ रहा दरिंदगी की लपटें निकल रही, देवी रूप में जिसकी पूजा […]

दुष्टों ने हिंद की बेटी को पलित किया, हिन्द का दिल सहम उठा l वर्षों पहले दुष्टों के विरोध में नारा उठा था, हिन्द ने केंडल मार्च निकाला था l हिन्द ने न्याय के लिए […]

कोई भी कर्म करो, इतना रखो ध्यान स्वर्ग -लोक में भी, जा पहुंचा है ,इंटरनेट श्रीमान प्रभु के पास भी अब हैं,.. टैब , लैपटॉप , मोबाइल, अब रहते हैं प्रभु भी, हमेशा ही ऑनलाइन.. […]

बापू गांधी और लाल बहादुर, दोनों हैं इस देश की शान एक का नारा सत्य , अहिंसा , दूजे का जय -जवान, जय-किसान अपने इस देश की खातिर, दोनों ने अपने प्राण किए न्यौछावर, दिया […]

मेरे बापू के सपनों का भारत, अब है न जाने गुम कहीं। न एकता की भावना है, न देश प्रेम की बात कहीं। सत्ता की खातिर, जनता को मूर्ख बनाया जाता है। मेरे बापू के […]

ईश्वर का खेल निराला है सब कुछ अपने प्रारब्ध और कर्म से ही मिलता है जैसे तुझे ताली मुझे गाली। सृजनहार ही सब सृजन करता है हमने तो बस गलतफहमी पाली, वही सींचता है लेखनी […]

ज़िन्दगी “मोबाइल” की गुलाम हो गई , “मोबाइल” के संग ही सुबह और शाम हो गई लिखना हो तो मोबाइल, पढ़ना हो तो मोबाइल, अब ये बातें तो आम हो गईं मिलने के भी मोहताज […]

दूसरे को मक्कार कहना और खुद को महान मानना छोड़ दे इंसान, मत कर गुमान जीवन है संघर्ष है सब जीते हैं सब चलते हैं, चलने वालों को इस तरह गाली नहीं करते हैं। कलम […]

दुनियां में हैं शख्स लाख ,पर दिल के पास हैं गाँधी अहिंसा ,सत्य ,समता शांति की तलवार हैं गाँधी अटल ,अविजेय ,अविचल ,वज्र की दीवार हैं गाँधी अडिग विश्वास ,जीवन का उमड़ता ज्वार हैं गाँधी […]

कैसे कहें ” सुरक्षित हैं तू” —————–******* हम भारत की आधी आबादी, कबतक सहे दुराचार बढता ही जा रहा, थमता नहीं, हिंसक व्यवहार आख़िर क्यूँ नहीं, कोई कर पा रहा इसका निराकार सारी कोशिशें, सारे […]

मन के इतने खूबसूरत आप कैसे हो गए, आपको किसने सिखाया इस तरह से स्नेह करना। आप मे इतनी अधिक ममता की बातें हैं भरी, कि आप ऐसी लग रही हो एक मिश्री की डली। […]

किसी ने पूछा पंडितजी क्यों लिखते हो आखिर कविता। क्या कुछ हासिल होता है या फिर यूँही रहे हो समय बिता।। छन्द हमारा पिता बन्धुओं और भाषा अपनी जननी प्यारी। बेशक तुकबन्दी हो अपनी पर […]

सदा सड़क पर बांध के मुखरा घूमने वाली मैं थी जिसका घुटन भला क्यों हो रही आली घूंघट में ,क्या कारण इसका? बेपर्द बनाया जग ने मुझको या दोषी हूँ खुद हीं इसका ? सिर […]

डिप्रेशन सी जिंदगी मे चाय सा सुकून हो तुम सुखे हुए खयालो की संजीवनी बुटी हो तुम तपते रेगीस्तान मे मिली मधुर पानी की बुंद हो तुम बांधे हुए दिल को मिली जशन-ए-आजादी हो तुम […]

पति पत्नी का सम्बन्ध,मनभाव का एक आनन्द होता है यह पुष्पित सुमन का मकरंद होता है यह है पावन प्रणय की उद्भावना यह कविता का एक अनछुआ छन्द होता है यह अन्धेरे में राह दिखाता […]

रात भर मैं नींद में सोया रहा जब उठा अहसास सा होने लगा बीतता बातों ही बातों में चला यह समय तेरा व मेरा जा रहा।

मानवता पर प्रहार कर रहे बेटियों पर अत्याचार कर रहे राक्षसों को मिटाने के लिए अवतार का इंतजार नहीं करना है, बल्कि जोरदार मुहिम चलानी है, कुकर्मियों को नानी याद दिलानी है, बुरी नजर को […]

आह लगेगी उस गुड़िया की, बच तो तुम भी ना पाओगे हर बेटी देश की, आवाज़ उठाएगी, तुम भी बख़्शे नहीं जाओगे “सूली चढ़वाऊंगी, फांसी लगवाऊंगी, अपने हत्यारों को सज़ा दिलाने, पुनर्जन्म ले कर भी […]

इक अरदास करूं तुमसे प्रभू ! मैं रो लूंगी भाग्य को अपने, हर दुःख को चुप्पी से सह लुंगी। बना देना मुझे निर्भया की मां, दिल को अपने समझा लुंगी। मगर न बनाना मुझे, बलात्कारी […]

माँ भारती, अब भी चुप क्यों, फिर बिटिया हुई शिकार दुष्कर्म, असह्य पीङ, कत्ल, कर दिया अंतिम संस्कार । अपमान हर महिला का, हर पिता हुआ शर्मसार अनवरत् चलता है, थमता नहीं, होता बारम्बार ।। […]

नहीं हूं मैं हिन्दू पहले, न ही दलित की बेटी हुं। मैं निर्भया आज की , इंसाफ़ मांगती, मैं पहले देश की बेटी हुं। क्यों नहीं पसीजा तुम्हारा हृदय, जब हैवानों ने मुझे शर्मसार किया, […]

इस महामारी में आमजन के कष्टों की दासताँ जानना हो तो बस एक दिन गुजारिए उनके बीच, उनसे मिल, जिनके दिन बितते आजीविका तलाशते रातें बीतती आने वाली परेशानियोंको गिन। हमें तो बस उन्ही नीतियों […]

मैं कितना भी हूं उदास, वो हंसा ही देते हैं, मुरझाईं कली को , फिर से खिला ही देते हैं, करता होगा जमाना मोहब्बत, अपने महबूब से, मगर वो है कि उसे अंजाम तक पहुंचा […]

कौन है यहां अपना मेरा, तुझ पर ही है, अर्पित जीवन सारा। कौन-सी मैं व्यथा सुनाऊं, प्रभु! मैं तुझको कैसे पाऊं। कब तक यूं आस लगाऊ। कुछ तो बोलो, हे प्रभु! कब तक मैं यह […]

सागर-सी गहराई बिन। नदी सुहानी पानी बिन।। नाच के हाथी नहा रहा था। और जहाज भी आ रहा था।। बूटा-बूटा पत्ता -पत्ता गिरिवर भी हर्षा रहा था। ‘विनयचंद ‘ ले रिक्त घड़ा बीच नदी पछता […]

जब याद करती हूं, उन लम्हों को। एक टीस सी उठती है। यह आंखें नम हो जाती है। अगर तुम साथ होते। जिंदगी खुशियों से भर जाती, हम उदास हैं, यह गम नहीं। पर यह […]

एक तन्हाई, मैं खुद से पाना चाहती हूं। अपने संग, कुछ पल बिताना चाहती हूं। जिंदगी में हर रंग भर कर, उसे मिटाना चाहती हूं। जहां कोई न हो मेरे साथ, बस तुम्हें देखकर, मैं […]

मैं देख नहीं पाता हूं तो क्या? महसूस करता हूं, लोगों की खुशियां, और उनके गम । वो जो देखकर भी नहीं करते। इतना महसूस कर चुका हूं। इस दुनिया को, लोगों से कहीं बेहतर […]

रात का पागलपन भी देखो! खत्म होती ही नहीं रात भर, जब होता था, सुकून , तब सोता था, मगर अब , नींद की हिम्मत भी देखो! आती ही नहीं रात भर।

ये जो वक्त का सितारा है, वो बेहिसाब- सा बदलता है , और जब बदलता है, तो सारी कयानात बदलती है, फिजाएं भी बदलती हैं, और इंसान भी बदलता है।