धूल, कंकड़, पत्थर, पहाड़ सबकी अपनी शान है, अपना मान है; हवा, जल, अग्नि सबकी अपनी पहचान है, कौन किससे भला समान है? समान कुछ नहीं यहां सबका बस अपना स्थान है छोटी सी झोपड़ी […]
धूल, कंकड़, पत्थर, पहाड़ सबकी अपनी शान है, अपना मान है; हवा, जल, अग्नि सबकी अपनी पहचान है, कौन किससे भला समान है? समान कुछ नहीं यहां सबका बस अपना स्थान है छोटी सी झोपड़ी […]
हो चाहे कैसी भी घड़ी, आंधी तूफ़ान की लगी हो लड़ी, या मन को झुलसा रही हो अग्नि, डर हो यदि आगे हार जाने की, या फिर अपना सब खो देने की, शुरुआत जरूरी है; […]
विरोध भी करना है तो जायज कीजिये, अन्यथा विरोध की सोच गायब कीजिये। प्यार से रहना ही सर्वोत्तम है झगड़े में कौन किस से कम है।
निर्भया कितनी दफा रोई दरिंदों की पनाहों में सिसकता ही रहा यौवन वासना की बाँहों में तब तलक रूठेगा बचपन पूँछती है यही नारी मरेगी कब तलक बेटी बचेगा कब तलक अत्याचारी पुरुष की बन […]
आसमान अधूरा है सितारों के बिना ये दिल अधूरा है तेरी दोस्ती के बिना
दो पंक्तियाँ तुम पर न लिख पाऊं तो मैं भी कवि नहीं, स्वप्न तक शायरी न पहुंचाऊं तो मैं भी कवि नहीं। जब कभी मन टूट कर बिखरा हुआ हो, दर्द हो, दर्द तक मलहम […]
मनोरम रात है बिखरी हुई है चांदनी तुम्हारी मुस्कुराहट सी दिखाई दे रही है चांदनी। जिस तरह चाँद खिलता है कभी कुछ दिन महीने में, उसी की भांति तुम भी हो जो हंसते हो महीने […]
दिन गुजर जाते हैं हम वहीं रह जाते हैं नये दिनों की तरह कहां नये हो पाते है पुराने जख्म मिले कहीं क्यों न भुला पाते हैं आये नये जो पल हाथ बीती बातों को […]
सो जा मजे से चैन से तू सोमरस पीकर न कर चिंता हमारी हम भले, भूखे ही मर जाएं, तेरे नशे ने ही हमें सड़कों में ला पटका, तुझे अब भी नहीं है लाज जाएं […]
जब मेरा अंत समय है नज़दीक हो, तब आँखों में छवि मेरे बच्चों की हो, और मेरे हाथों में हाथ तेरा हो… आयी थी जिस क़दर वद्दू बनकर इस घर में, उसी जोड़े में विदा […]
कविता- शास्त्री गांधी से सीख लो | लड़ा जाता कैसे जंगे आजादी गांधी से सीख लो | सत्य अहिंसा की कैसी आजादी गांधी से सीख लो | छोड़ धन दौलत रूप संत का बना लिया […]
पड़ चुकी है साँझ घर घर में चमकते बल्ब ऐसे लग रहे हैं, जैसे तारों ने किया धरती में डेरा। और चंदा आसमां में आ चुका है, फुल चमक में, चाँद-तारे और बल्बों का मिलन […]
पापा की प्यारी हूँ मैं फूलों की क्यारी हूँ मैं पर सबसे पहले नारी हूँ मैं… अहिल्या हूँ मैं सीता हूँ मैं पवित्र पावन गीता हूँ मैं कभी शेरनी तो कभी चीता हूँ मैं पर […]
उसे रूठने में एक पल भी नहीं लगा मनाने में उसे कुर्बान रात-दिन कर दिये हमने..
छलक कर आँख से आँसू पन्नों पर बिखर गया हर तरफ ढूंढता है दिल वो मोती किधर गया….
अचरज भरा आकाश है कहीं धूप है कहीं छांव है आसमान की चादर में सितारों के बूटे हैं बादलों के घोड़े हैं जो दौड़ते हैं इधर-उधर जुगनू भी अपनी प्रेयसी को ढूंढते हैं रात भर […]
कविता- सयानी ———————– तेरी एक ज़िद से, सभी रो रहे हैं| पापा मम्मी चिंता करके, ओ भी रो रहे हैं| इण्टर के बाद दीदी, घर से ही बाहर हो SSC मे जाॅब बा, देके गई […]
दूर – दूर से कवि पधारे, कोई पर्वतीय, कोई मैदानों से । यहां पे आकर , धूम मचा कर, लिखें बड़े अरमानों से । मैं भी आई, नाम है गीता , लिख दी मैनें, भी […]
अचरज भरा आकाश है कहीं धूप है कहीं छांव है आसमान की चादर में सितारों के बूटे हैं बादलों के घोड़े हैं जो दौड़ते हैं इधर-उधर जुगनू भी अपनी प्रेयसी को ढूंढते हैं रात भर […]
नीले आसमान पर सूरज की उपस्थिति सौंदर्य की पराकाष्ठा किरणों की लालिमा से चमक रहा है पृथ्वी का हर कण हर क्षण…. पत्तियों की सरसराहट से मधुमास का सुंदर आगमन चमन की सुगंध से महक […]
विविध काव्यों से सजा है न्यारा कविवर ने है जिसे संवारा समालोचना की मुखरता से मिलकर सबने जिसे निखारा छन्द- अलंकार की बहती धारा हाँ, वह है “सावन” मंच हमारा। बनी एक पहचान हमारी खुद […]
कोई ख्वाहिश कहाँ कोई पछतावा भी नहीं पतझङ-सी है वीरानी बसंत आया ही नहीं दूर तक फैला है सूनापन जैसे शून्य निकल आया हो हाँ, कुछ इस तरह तेरा ख़याल आया हो । काली निशा […]
कुछ वक्त की ज़िन्दगी है, फ़िर तो हमको है जाना कुछ समझौते भी हुए यहां, कुछ उपहार मिले माना खाली हाथ ही तो आए थे, खाली हाथ ही है जाना ये तो निर्भर, करता है […]
बातों का सिलसिला कुछ यूं ख़त्म हो गया, कि कायनात से दूरियां, मांगी होंगी उसने ।।
तीर, तलवार और तंज की धार से, जब निष्प्राण हुआ शरीर अनुप्रास ही दिखे कवि को, यहां घायल पड़ा शरीर ।। *****✍️गीता*****
ओस की बूंद अब तुम भी न दो यूँ ठेस पांवों में अभी तो चुभ रहे हैं हम कई पैनी निगाहों में।
चाँद देखो, चाँद की शीतल छटा का लाभ लो। दाग-धब्बे खोजने की मंद आदत त्याग दो। इंसान में कमियां भी होंगी और अच्छाई भी होगी बस कमी ही खोजने की मंद आदत त्याग दो। हो […]
दिल वालों की दिल्ली देखो , हो गई है बीमार कहीं किसी का साथी छूटा, कहीं किसी का प्पार दिल्ली का तो अब ये नसीब हो गया हो गया वहीं दूर, जो करीब हो गया […]
बेरुखी से बड़ी सजा ही नहीं , खता क्या थी, पता ही नहीं वो इस कदर दूर हो गए , कभी पास भी थे क्या, अब तो ऐसा लगता ही नहीं ।।
चले जाएंगे तेरी अंजुमन से हम, सुना है किसी के जाने से सूना नहीं होता ।। *****✍️गीता*****
ना मुस्कुराएंगे कभी वैसे, मुस्कुराते थे कभी जैसे कुछ टूट सा गया है अंदर , दिखाई देगा नहीं बाहर से ।।
बादलों से चाँद जैसे निकल आया हो आके अपनी छटा से सारी गम की परछाई को मुझसे छिपा आया हो हाँ, कुछ इस तरह तेरा ख़याल आया हो।
क्या ग़लत है क्या सही, बात बस इतनी सी है तुमने वो समझ लिया, जो हमने कहा ही नहीं ।।
कड़ी बेरोजगारी से दुखी है हर युवा देखो धरी ही रह गई तैयारियां परीक्षा रुक गयीं देखो। निराशा के भंवर में पड़ न जाए देश का यौवन समय रहते करो मिलकर संवारो देश का यौवन।
न कह मुझसे सुनाने को नज्म कोई मुहब्बत की सयाना हो रहा हूँ अब ज़रा सा शर्म करता हूँ।
अधूरे अरमानों की झांकी आज गुजरी मेरे दरम्यां से इक जिंदगी जो जी नहीं, वो देखी आज मैनें
तुम्हारे हाथ में अपनत्व की जो कुछ लकीरें हैं उन्हीं में एक मैं भी हूँ जरा सा गौर से देखो। आईना सामने रख खुद की नजरों में जरा देखो, मिलूंगा नीलिमा में तुम जरा सा […]
आपकी और अपनी दोस्ती साबुन व पानी की तरह हो एक दूसरे का साथ देकर अपने भी और संपर्क में आने वालों के भी। दाग -धब्बे दूर कर दें
वे सो रहे हैं व्यवस्था को, जेब में लेकर, हम रो रहे हैं , हाथ में मोमबत्तियां लेकर! वे जागते हैं अक़्सर चुनाव में, और हम हादसों में ….
डगमगा जाते हैं कदम आजकल एक जरा से झोंके से मगर, एक वक्त था जब हमारे इरादे बुलंद हुआ करते थे..
हुनर सब में है बस तराशने की जरूरत है हीरा बन सकता है हर पत्थर बस पारखी नजर की जरूरत है…
निरुत्तर हो गए हम आपकी बात सुनकर निकल पाया न मुंह से एक भी शब्द छनकर। कह दिया आपने सब कह नहीं पाए थे जो हम, आपकी बात सुनकर सोचते रह गए हम। कभी उस […]
जिंदगी की आरजू में दफ्न हो गये सुकून के कुछ पल थे और कुछ अधूरे ख्वाब !!
वो कहते हैं बलात्कार की घटना हमने सबसे पहले दिखलाई है पीड़िता के घर तक सबसे पहले हमारी पत्रकार पहुंच पाई है हमने दिखलाया सबसे पहले पीड़िता के भाई को पीड़िता की आवाज सबसे पहले […]
मैं जब-जब अकेला होता हूं, दर्द के संताप को, बाहों में लेकर रोता हूं। खो जाता हूं ,उन यादों में, उलझे हुए उन ख्वाबों में, वक्त की जबरई को, गले लगाकर; खोता हूं, जब-जब अकेला […]
जरा सोंच कभी हम ना हों तेरी जिंदगी में कोई गम ना हों कैसे कटेगा वक्त तेरा अगर जुबां हो पर लफ्ज ना हों.
आखिर डूब ही गया ख्वाबों का महल, कितनी दफा रोंका था दिल ने समुंदर पर आशियां बनाने से…
रोज यूं ही नहीं बन जाते हैं अफसाने नये-नये लकीरें वक्त की बनती बिगड़ती रहती हैं…
हैं कितनी कड़वाहटें मन भरी आजकल किसी को देखकर नफरत के दिल में ज्वार उठते हैं…
यूं तो बड़े -बड़े तूफ़ानों से भी गुज़र जाती हूं और कभी एक आंसू , से भी पिंघल जाती हूं । *****✍️गीता *****
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