एक जैसे मुसफिरोकी मुलाकात हुई थी अर्सो बाद जिंदगी आफरीन हुई थी एक जैसे मुसफिरोकी मुलाकात हुई थी शकसियत तो सबकी बेबाक थी जमुरियत मे थोडी, मुरझा सी गयी थी जब आन पडे आमने सामने […]
एक जैसे मुसफिरोकी मुलाकात हुई थी अर्सो बाद जिंदगी आफरीन हुई थी एक जैसे मुसफिरोकी मुलाकात हुई थी शकसियत तो सबकी बेबाक थी जमुरियत मे थोडी, मुरझा सी गयी थी जब आन पडे आमने सामने […]
जाना चाहता हूँ ये शहर छोंड़कर पर असफल हूँ क्योंकि यहाँ कि एक कवयित्री से प्यार करता हूँ हूँ पुलिसवाला मगर डरता हूँ इजहार करने से क्योंकि प्यार से ज्यादा उसका सम्मान करता हूँ…
‘कुछ तो है कि तुझसे किये वादे की खातिर, खुद से ही उलझ पड़ता हूँ कभी-कभी..’ – प्रयाग
लिखने का शौक जरा कम ही है मुझे पर तेरा लिखा हर पन्ना पढ़ा करता हूँ… हर बार गलतियों पर जुबां बोल पड़ती है बस यही गुनाह बार-बार करता हूँ…
सब कुछ देखा करता हूँ नादान नहीं हूँ मैं पुलिसवाला हूँ गुनाह पकड़ ही लेता हूँ मैं…
आहिस्ता से बोल दो क्या कह रहा मन करोगे मुहब्बत या दुत्कार दोगे। इकबाल है हमारा मिले आप पथ में इजहार कर दिया, क्या स्वीकार लोगे।
हिन्दू से पूछो , मस्लमां से पूछो , पूछना है तो सारे जहां से पूछो , सबका यही होगा कहना स्वर्ग से भी अच्छ है इस हिन्दुस्तान में रहना (संदीप काला)
दिल खाली-खाली क्यू है शाम भी क्यू तन्हा-तन्हा लागे है । बिन कारन, क्यू बेचैनी का साया है यह कैसा उलझन वाला पल आया है उम्मीदों की किरण कहाँ अब, घोर निराशाओं की काली छाया […]
कोई साधारण चीज नहीं ईश्वर की वाणी है कविता, मन के भीतर उग रहे भाव का मधुर प्रकटन है कविता। दूजे का दर्द, स्वयं का मन जीवन के सुख-दुख का लेखन, कुछ अपनी और पराई […]
कौन किस पे कुर्बान होता है इस ज़माने में। कोई वास्ता ही नहीं है यहाँ किसी को किसी से ।।
वो कहते हैं तुम्हारी कविता में भाव नहीं हैं मैं क्या जवाब दूं जब दिल ही नहीं हैं !!
कल रात मैंने अपने आईने से कहा- आजकल मैं बहुत अच्छा लिखने लगी हूँ सब कहते हैं.. आईने ने कहा दिल जो टूट गया ना !!
कबूतर को भेजूं अब वो जमाना नहीं रहा खुद जाकर मिलूं यह सम्भव नहीं रहा कितने खत लिखे हैं उसके लिए मैंने डाकिया कहता है खत का जमाना नहीं रहा कलम में स्याही नहीं बची […]
प्रेम की परिभाषा नहीं जानते वो ही बढ़ चढ़ इसे बखानते चाहतें जो रही कभी हमारी वही चाहत रही होगी तुम्हारी इसलिए कभी मैं ऊब जाता अनमना सा किया जब पाता समाज ने इक बंधन […]
अब हमारे तेवर कम हो गए हैं, क्योंकि अब तुम्हारे हम हो गए हैं। अब कहाँ समय जो कि बेकार घूमें तुम्हारी मुहब्बत में हम खो गए हैं।
यूँ ही सिलसिला चलता रहा कभी मैं कभी वो रूठता रहा टूटने लगे दिल बेतहाशा मगर इश्क आँच पर पकता रहा..
दूध के दाँत पालने में ही टूट गये गरीबी का थप्पड़ इतनी जोर से पड़ा लाद दी जिम्मेदारी की पोटली कंधों पर बचपन के खिलौने पल में टूट गये थमा दी चाय की केतली जब […]
जब उसने आँखे खोली, तब पाया एक नया संसार, रंग बिरंगी थी दुनिया उसकी, और खुशिया आपार, खेलती थी आँख मिचौली, संग अपने हमजोली, न पड़ती थी डॉट उन्हें, दो बोल मीठे बोलते, पा लेते […]
लड़का – मैं वो आशिक़ नहीं जो अपनी, फ़ितरत को धूल में मिला दे। गर यकीन न हो तो एक मर्तबा, दिल दे के तू मुझे अपना बना ले।। 💇 — अपना दिल ए पागल […]
साथी मेरा नटखट कम नहीं है वो, हमारे नयनों पे हाथ रख के.. पूछे कौन है , बताओ तो, हम भी कम नहीं हैं , कुछ.. आहट से जान लेते हैं , ख़ुशबू से पहचान […]
शिक्षा की चौपाल लगी कहाँ रहे अब पढ़ने वाले। संभावित प्रश्नों को रटकर कागज पर हीं बढ़ने वाले।। कई तरह के बोर्ड यहाँ हैं हर भाषा हैं माध्यम के। अंग्रेजी में काम करे सब डाले […]
एक सखी मेरी प्यारी सी, कोमल मन की न्यारी सी। कभी क्रोध की अनल में तपे, कभी स्नेह बरसाती है कभी कहा माने चुपके से, कभी अपनी भी चलाती है.. एक सखी मेरी प्यारी सी, […]
शिक्षा की खदानें बंद करो डिग्री बेचने वाली दुकानें बंद करो छात्रों को डालो जेलों में शिक्षकों की तनख्वाहें बंद करो ना लूटो हमको शिक्षा के नाम से ज़रा डरो राम के नाम से व्यापार […]
यहाँ धोखा वहाँ धोखा, चारो तरफ धोखा ही धोखा है। कैसे कोई इश्क़ करे इसलिए हमने फैसला बदल दिया है।।
आफ़ताब का उजाला औऱ शीतलता हो शशि की आप इस जिन्दगी को बड़ी सौगात रब की। आप गर जिन्दगी में न होते तो कहें क्या कहानी ही न होती बिखर जाती ये कब की।
हम भी हैं मुश्किलों से, हारने वालों में से है नहीं कोई भी चुनौती क्यू न आए, घबरायेगे हम तो नहीं कैसा भी हो अनल, स्वर्ण जैसे जलता है नहीं पर जबतक ना तपे वो, […]
बहुत ही कोशिश की,जरा हम भी बदले से जाएँ पर कैसे अब तक यह मन, बात समझ न पाए । अपनों से दर्द मिले थे अकसर शिकवा-शिकायत चलता ज्यादा- कमतर अनजान भी कैसे चोट पहुँचाए, […]
कहां आ गए हैं हम, जहां खामोश-सी शामें हैं। और चुप-सा सूरज उगता है। ना बांटता है मुस्कान, ना रौनकें फैलाता है।
नहीं मानते तकलीफ हम, लहू के बहने का । जब मन के घाव गहरे हो, जो न भरते हैं, ना दिखते हैं।
मेरे मन का मोती, मैं तुझको अर्पण कर जाऊं। मेरे राम मेरे श्याम… प्रभु मैं जपु तेरा नाम पल पल, तुझमें ही खो जाऊं । मेरे मन का मोती , मैं तुझको अर्पण कर जाऊं। […]
अपनी आंखों में दया भाव रखो मदद करो गरीबों की उनकी सेवा में खपो। मिलेगा सुख स्वयं के भीतर से कभी हरि नाम जपो, मदद में लगो।
आज से नहीं तुम अज़ल से हमारे हो, गैहान जब से बना होगा तब से, दिल मे हमारे हो गजल में हमारे हो। अज़ल – अनादिकाल गैहान – सृष्टि
कहां ढूंढू में ऐसी भाषा कहीं, जैसा बोलूं वैसा लिख पाऊं, वो मैं मेरी हिंदी में ही पाऊं….
समा लेती है , हर भाषा को, अपने भीतर , जिसकी कोई सीमा नहीं , वो पूर्ण है खुद से, मेरी हिंदी जैसी कोई नहीं…
हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई | कविता- हिन्दी दिवस आज आया | हिन्दी दिवस आज आया ,सरे हिन्द परचम लहराया | हर भाषा की सरताज है हिन्दी सबने झण्डा फहराया | भोजपुरी गुजराती मराठी बंगाली […]
किंकणी न बाँधिये पैरों में अपने, बिना खन-खनाहट के पहचान लेंगे। कभी आजमा के देख लीजियेगा, तुन्हें बन्द आंखों से पहचान लेंगे।
आज नजदीक से देखा उनको तब से मन में बदल गया सब कुछ, हम तो कुछ और ही सोचे थे मगर उनमें कुछ और ही मिला। हम तो समझे थे वे बड़े वो हैं मगर […]
तन्हाइयों से ही जिसने बात की है जिंदगी भर मेरे आने का उनको एहसास क्या होगा वीरानियां ही जिनका आशियाना हो उन्हें महलों का ख्वाब क्या होगा जिंदगी जिनकी एक सवाल बन चुकी है पास […]
बालू के रेत में हमने आशियाना बनाया समंदर से कोरे कागज पे एग्रीमेंट करके । अचानक अमित ने कहा ए पागल आशिक़ लहरों पे यकीन करना जरा सोच समझ के ।।
श्रीदरूप हो तुम, मित्रपद विराजित हो बस सदा ही खिलते रहो मण्डली में शोभित हो। श्रोतव्य है मीठी वाणी तुम्हारी बिंदास चेहरे की मुस्कान न्यारी। सदोदित रहें सारी खुशियाँ तुम्हारी, सुस्मित रहे मन, दुख सब […]
मेरी भावनाओं में; जो उत्तथ-पुथल है , उनको शांत ! वो आराम से कर सकती है, माना बहुत सारी है, भाषाएं इस संसार में, मगर मेरी आत्मा को तृप्त! मेरी हिंदी ही कर सकती है। […]
करुण रस की कविता:- ***************** जिसने हमको प्यार किया मेरी राह में सुबहो से शाम किया ना कद्र की हमनें एक पल भी उसकी अपशब्दों का उस पर वार किया एक रोज़ मैं बैठी थी […]
हिंदी दिवस आओ मनाएं औऱ लें संकल्प यह, मातृभाषा को सदा सम्मान, प्यार देंगे। बन जाएं कितने ही बड़े लेकिन रखेंगे ध्यान यह मातृभाषा को नई पहचान देंगे, प्यार देंगे। हर बात में हिंदी रहे, […]
गिले-शिकवे जरा कम कर दिये हमनें जब से वो दूजी गली जाने लगे वो हमसे दूर रहकर खुश रहेंगे इसलिए हम ये दुनिया छोड़ आज जाने लगे।।
जिस माथे पे चमके, हिन्द का नाम उन्हें हिंदी से मिलता, हो प्रथम ज्ञान। जन भाषी भाव वही, पथ पावन हो की माँ हिंदी का हिन्द, में सावन हो। की माँ हिंदी का हिन्द, में […]
आंखों का नूर हैं ये आंसू नूर की बूंदें यूं ना बहाया करो, किसी अपने पे तरस तो खाया करो। कहीं कोई परेशां सा हो जाता है , कुछ तो दोस्ती का फ़र्ज़ निभाया करो […]
हिन्दी के व्याख्याता एक बोल रहे थे सेमिनार में। हिन्दी का प्रसार हो जन-जन और सरकार में।। बजवाई खूब तालियाँ बात- बात पे मञ्च से। समय खत्म होते ही बेमन आए मञ्च से।। खूब अनोखे […]
हिन्दी में छंद हैं , अलंकार हैं | कवियों की कल्पना हैं, लेखकों के उद्गार हैं | दोहों की छटा है , रसों की भरमार है | कल्पना और यथार्थ है , नैतिकता भी अपार […]
सीमित अक्षर, सीमित मात्राऐं रचा शब्दों का असीमित भण्डार बना विशाल वृन्द भरे शब्दकोश बेशुमार कैसा खेल रचाया है इन शब्दों ने महकाया काव्य दरबार वही शब्द संभावनाएं अपार क्षमता भरपूर भिन्न भाव अमिल सोच […]
किसी को याद करके रोना नही, ऐ दोस्त.. किसी को याद करके मुस्कुराओ । वरना शिकायत लगा देगी , याद उसी की उसे वापिस आकर , वो भी तो रो देगा.. तो कैसा लगेगा बताओ […]
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