कश्मीर की घाटियों से ब्रम्पुत्र की नदियों में बहती है हिंदी महाराष्ट्र के रंग और राजस्थानी मिट्टी की खुश्बू में है हिंदी भाषाओं की शान इस देश की पहचान बनकर हर प्यार का इजहार करती […]

भावों की जननी हिंदी है, मां है अपने धाम की। कोरोना काल में हाय, हैलो, छूटा , जय हुई अपने प्रणाम की । हिंदी में अपने भाव रचे , हिंदी ही अधरों पर सजे । […]

अपने देश में अपनी भाषा बदनसीब हो गई आगे आओ युवा देश के हिंदी गरीब हो गई मातृभाषा है राष्ट्रभाषा है फिर क्यों तुम शर्माते हो प्रणाम छोड़कर गैरों से तुम हाय हेलो अपनाते हो […]

रोम-रोम में बसी हमारे हिंदी राजभाषा है बन जाए यह राष्ट्रभाषा इस जीवन की यह आशा है हिंदी है परिपक्व, परिपूर्ण हिंदी ही ममता-सी निर्मल है हिंदी है लहू में अपने हिंदी ही कण-कण में […]

हिंदी दिवस:- चौदह दिसंबर को हर वर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है उसी दिन क्यों हिंदी को सम्मान दिलाया जाता है हिंदी तो ऐसे ही वाणी है जो भारतीय परंपरा पर चलती है देशी हो […]

एकता के सूत्र में विविधता को पिङोती, जनमानस की भाषा है जो देवनागरी लिपि में गुथी हुई,अपनी राजभाषा रूप धर आई है जो। हर जन के दिलों में उमंग सी बहती हुई अभिलाषा सी हमारे […]

अभिव्यक्ति ह्रदय से:- +++++++++++++ आज तोड़ दिया तुमने मेरा टूटा हुआ दिल ! ऐसा लग रहा है जैसे सीने पर एक पत्थर-सा रखा है मेरे। एक तुम ही थे जिससे थोड़ी बहुत उम्मीदें लगा रखी […]

कहाँ रहे अब किताबों के दिन !! अब तो बस अलमारी में रखी हुई किताबें धूल खाया करती हैं गुजरती हूं जब कभी उनके करीब से तो मुझे बड़ी उम्मीद से देखती हैं कि शायद […]

चीखते चेहरों पर चीखने से क्या फायदा सजा मिल जाने पर, बेगुनाह साबित होने से भी क्या फायदा । इज्जत की नाम अपने ही मासूमो की हत्या साथ देने के बदले आरोप लगाते हैं मिथ्या […]

कुकडू -कडू कुकडू -कडू करता रहूँ , करता रहूँ मन में सोच रहा, मैं भी तो एक जीव हूँ, बांग से जगाता हूँ, महफ़िलों की शान हूँ, मैं भी तो एक जीव हूँ, जल की […]

आब-ए-चश्म रातों में न आओ आँख में रात सोने दो, जरा आराम करने दो, सुबह को फिर वही, उनकी जुदाई याद कर के हम, बुला लेंगे तुम्हें, लेकिन अभी आराम करने दो। आब-ए-चश्म – आँसू

मैं तेरी मुस्कान चाहती हूं, तेरा हर अरमान चाहती हूं। तू उड़ सके आजाद, यह पैगाम चाहती हूं। फिरे तू हर उन गलियों से, जो गुजरती हो बुलंद नगरों से। बीच में तू रुके ना […]

सोचता है मन कि पूरी रात भर उडगन, समय कैसे बिताते हैं अपने घौंसलों मे रह। न मोबाइल न टीवी है न खाना बनाना है, साँझ होते ही दुबक कर बैठ जाना है। जो पा […]

तेरी होठों की मुस्कुराहट का, अलग ही फलसफा है । जहां खोता हूं मैं , और दिल हंसता है । भूल जाता हूं , मैं इस अदब को , जिसे मोहब्बत कहते हैं। जहां खोया […]

कबूतरों का झुंड एक उड़ रहा था आकास में। बीच झाड़ियों के बहुत दाने पड़े थे पास में।। युवा कबूतर देख-देख ललचाया खाने के आश में । बोल उठा वो सबके आगे उतर चलें चुगने […]

चलिए एकबार फिर से, खुद पर एतवार करते हैं । बहुत कर लिया गैरो से, इसबार खुद से ही प्यार करते हैं ।। बहुत किया भरोसा, जो भरोसे के हरगिज़ काबिल नहीं थे, खुद पर […]

************ हास्य रचना********* एक सखी ने पूछा वॉट्सअप पर दूजी से, क्या चल रहा है ज़िन्दगी में… दूजी वाली बोली… Jsdfghyybttuiokhfeyppourebm पहली ने कहा, ये क्या है,कुछ समझ नहीं आया.. दुजी वाली बोली, वो ही […]

बेजान है ये जिस्म मेरा लफ्ज भी लड़खड़ा रहे हैं भाव हैं बिखरे हुए हम सिमट ना पा रहे हैं ख्वाहिशों के पन्ने भीगे हैं अश्कों से मेरे बोलना बहुत कुछ चाहते हैं पर कुछ […]

गायब इस धरा से आज, इंसान क्यूं है।। कोई हिन्दू, कोई यहां मुसलमान क्यूं है, एक थाली में खाने वाले, सुख दुख में साथ निभाने वाले मिलके त्यौहार मनाने वाले बने आज शैतान क्यूं हैं, […]

तुझे क्यों दर्द होता है, जरा सा आह से मेरी मुहब्बत गर नहीं है तो बता क्या बात है तेरी। बता पाये न मुँह से तो, इशारों में ही समझा दे मदद लेकर तू औरों […]

तेरे तस्वीर को देखे अरसा हो गया इस तपते रेगिस्तान मे पानी गिरने पर भी तरसा रह गया तेरे बिना बारिश की बूदे बेगाना सा लागे है ठंडी परी शाम मे कम्बल की गर्माहट सी […]

कविता- शिद्दत ——————- बड़ी शिद्दत से उसे चाहा था, खुदा से दुआओं में उसे मांगा था| पर समझ न सकी हमको यारो, वह भरी महफिल में हमें रुलाया था| उसके होठों की मुस्कुराहट ही , […]

गफलत में कहीं खो न दें हम दोस्ती उनकी, ए खुदा ऐसा न हो इतनी सी है गुजारिश। मौसम समझ न आया थोड़ी हवा है चंचल बाहर है धूप निकली भीतर लगी है बारिश।

जीवन की अवस्था तीन सही बचपन का कोई जवाब नहीं आनंद भरा रहता तन मन पुलकित होता हरेक का संग शिशु मुख लगता प्यारा प्यारा हर अंग भाता न्यारा न्यारा मुस्कान हो या फिर हो […]

चीनियों को चीनी की बीमारी चींटी की तरह रेंगते रहते खाने तक की है अक्ल नहीं पशु खा पशुता ही प्राप्त कर रहे अंत करना उनका नहीं मुश्किल भालू चूहे बन्दर की जरूरत है कोरोनावायरस […]

मासूम सी ख्वाहिश है इस ज़िन्दगी से, छोटी सी फरमाइश है इस ज़िन्दगी से। ना मांगे चांद,सितारे हम, मिले ना कभी कोई गम.. होती रहे खुशियों की बारिश, इस ज़िन्दगी में। बहुत कश्मकश रहीं इस […]

अनमोल थी तेरी यादें, तेरे साथ की। वह किस्सें बयान करती है, चाहते हैं, हम भी अनमोल हो जाते। तेरी यादों की तरह, छू लेते तुम यादों में कभी। पर हकीकत से , उनका राब्ता […]

❤❤ अभिव्यक्ति दिल से ❤❤ *************************** पहली मुलाकात और पहली भेंट आज भी याद है मुझे… वह बरगद के नीचे बैठकर करी थी जो बातें हमने दिल आज भी बेताब है… तुम कुछ लाए थे […]

पापा के लिए तो परी हैं बेटियां हर दुख दर्द में संघ खड़ी है बेटियां फिर क्यों कहते हैं कि तू धन है पराया क्यों बेटी का कमरा भुला दिया जब घर बनाया बेटी नहीं […]