पिता बाँके बिहारी इलाहाबाद में नाजीर थे महारानी विक्टोरिया की आस्था में लीन थे ससुर “राय साहब” उपाधि से दे मण्डित आसपास के सभी ब्रिटिशों में आसक्त थे ऐसी ही आव-ओ-हवा में, दुर्गा के हौसले […]

अनगिनत वर्ज़नाओ की बंदिशो में, नारी जकङी हुई थी क्रांति की अलख जगाने,धधकती विद्रोह में कुद पङीथी मुखबिर, कभी भार्या बन, वतन का कर्ज चुका रही थी नाउम्मीदी के तिमिर में, हर साँस जल रही […]

कुछ लोगों का दूसरों के, नक्शे कदम पर चलना। यह साफ-साफ ज़ाहिर करता है… उनका कोई वजूद है ही नहीं.. यह तो हर दूसरा, तो कोई गैर कहता है…..

कोरे मेरे, सपने मेरे, कोरे ही रह जाएंगे….२ उम्मीदें देंगी,दस्तक उन तक, उम्मीदें ही रह जाएंगी…. कोरे मेरे, सपने मेरे, कोरे ही रह जाएंगे…२ शामें देगी,उल्फत उनको, शामें ही रह जाएंगी… कोरे मेरे,सपने मेरे, कोरे […]

उम्मीद की लौ जल-जल के बुझ रही थी नाउम्मीदी के तिमिर में, हर साँस जल रही थी परालम्बन भरे जीवन से मुक्ति हमें दिलाने वीर- वीरान्गनाओ की टोली कफ़न बाँध चल रही थी ।। दिन […]

हास्य कविता ——————– गारंटी है जरा भी हँसी नहीं आयेगी ! ****************** जर्जर हैं दीवारें इसकी मत तुम जोर लगाओ रहना है तो रहो नहीं तो तुम यहाँ से जाओ दूसरे भी हैं लगे लाइन […]

आठ महीने की गुड़िया ने आज पा पा बोल दिया धीरे-धीरे साफ शब्द कहकर वाणी को खोल दिया। वैसे तो गुड़िया रानी, अपनी भाषा में गाती है, कहती है कुछ, इठलाती है देखो तो मुस्काती […]

मेरा कानपुर वाला दोस्त आज बहुत याद आ रहा है एक अर्से के बाद दिल में उसका खयाल आ रहा है हनी सिंह के गाने मेेरे कहने पर गुनगुनाता था नाराज होती थी जो तो […]

कैसी है ये दरिन्दगी? हाथरस की बेटी संग जो होता है कुकर्म उसे जनता से छुपाया जाता है.. मीडिया की आवाज को आखिर क्यों दबाया जाता है… पहुँचते हैं कुछ राजनीतिक दल राजनीतिक रोटियाँ सेंकने […]

हास्य कविता,सोना बाबू ————————- रात रात जग के हम पढ़ाई करते थे| मेरे पड़ोसी- फोन पकड़ के चुमा करते थे| आया समय जब पेपर का, वो रोया करते थे| सोना बाबू फेल हुए, बाबू लड़की […]

हर एक के लिए सुरक्षित सुनियोजित आयोजन फिर भी क्यूं हम करते रहते भविष्य का प्रबंधन दूरदर्शिता की हुईं हैं सभी को बिमारी वर्ष अंत का आरक्षण शुरू में करायी चहुंओर बंदी से हुई है […]

सुंदरता सुख तो देती है पर साथ दुख भी आता है गुलाब के फूलों के साथ कांटा स्वयं चला आता है नये आकर्षण से बंधकर मन को आराम तो आता है काम का बोझ भी […]

यह दिशा नहीं राजनीति की पीड़ित परिवार के घर जाओ यह दिशा नहीं राजनीति की रेप जैसी घटना पर राजनीतिक रोटियां सेकों यह दिशा नहीं राजनीति की घर में ही नजरबंद करो यह दिशा नहीं […]

हम उस देश के वासी हैं जहाँ तिरंगा लहराया जाता है भारत माता की जय हो’ यह नारा खूब लगाया जाता है पर अफसोस है इस बात का हमको यह कैसी है राजनीति! जब लुटे […]

हो चुकी है रात चारों ओर छाया है अंधेरा चाँद आया ही नहीं तारों में छाई है उदासी। टिमटिमा कर कह रहे हैं किस तरह से अब कटेगी रात तन्हाई भरी। एक पखवाड़े की होगी […]

‘किससे शिकवा करें दामन ये चाक होना था, मगर करते भी क्या, ये इत्तेफाक होना था.. गमों की भीड़ हमारी कश्मकश में उलझी रही, तय हुआ यूँ हमें गम-ए-फिराक होना था.. जिसे हवाओं से हमने […]

भोजपुरी कविता- राजनीति होखे के चाही | केहु मरे चाहे जिये राजनीति होखे के चाही | केहु आबरू लूट जाये राजनीति होखे के चाही | औरत ना ई खिलौना हई जब चाहे खेल ला | […]

प्रेमी दिवस को यदि तुम्हें मैं दे न पाया था गुलाब तो न समझो बेवफा हूँ व्यस्त था मैं बेहिसाब। प्यार की निचली अदालत में सबूतों की जगह ले न जाना तुम इसे टिक न […]

सच बोलने को हिम्मत चाहिए मीठा झूठ सभी को भाता है सच सदा से कड़वा होता है मधुमेह वालों को भी न सुहाता है तब रावण एक अकेला था हर घर अब रावण का मेला […]

बस-दस पंद्रह साल में, इस दुनियां के माया – जाल से, एक पीढ़ी विदा हो जाएगी अफसोस ,जुदा हो जाएगी इस पीढ़ी के लोग ही कुछ अलग हैं रात को जल्दी सोने वाले, भोर होते […]

मत हिलो देखकर दूजे की चकाचौंध को तुम जो भी है पास अपने खुश रहो, संतुष्टि पाओ। पेट भरने को भोजन और वस्त्र हों ढके तन सिर छुपाने को छोटा सा भवन हो खुश रहे […]

करो कितनी भी कोशिश आप हमसे दूर जाने की, मगर जिद है हमें भी आपको अपना बनाने की। मगर हम वो नहीं जो एकतरफा प्यार से छीनें, जबर्दस्ती करें पाने को गंदी राह अपनाएं। हमें […]

तुम्हे याद हैं वो लम्हे जब हम साथ पढ़ा करते थे तुम्हारी कॉपी से देखकर परीक्षा में लिखा करते थे तुम मुझे कॉफी के लिए रोज़ पूंछते थे और हम मना कर दिया करते थे […]

दरख्तों से गिरते पत्ते उठा करके रोये जब भी खुल गई आँखें फिर हम ना सोये जब भी आई मेरे सामने तुम्हारी सहेली लिपट करके उससे तेरी यादों में रोये…

दुबले-पतले बापू जी ऐनक पहने बापू जी राष्ट्रपिता कहलाते सबकी नोट पे रहते बापू जी नमक आन्दोलन हो या फिर असहयोग आन्दोलन हो सबका नेतृत्व आगे बढ़कर करते बापू जी देश को किया आजाद और […]

बार-बार वही खत खोलकर पढ़ती हूँ मैं कि आखिर क्या लिखा करते थे तुम हमारे लिये उठाकर तुम्हारा खत सीने से लगा लेती हूँ जब भी कभी तुम्हारी याद आती है यूँ महसूस कर लेती […]

देख प्रज्ञा! तेरी मोहब्बत में दीवाने हो बैठे हैं वो हँस रहे हैं मुझ पर जो लोग सामने बैठे हैं तुमने जो शर्माकर फेर दीं निगाहें मुझ पर आबरू की आरजू में बेआबरू हो बैठे […]

दुबली-पतली कद काठी थी धोती पहनकर चलते थे आँखों में थे अनमोल सपने ऐनक लगाकर चलते थे राष्ट्रपिता थे प्यारे बापू सबकी आँख के तारे थे अंग्रेजों के छक्के छूटे जब वह सत्याग्रह पर जाते […]

हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती एक बार फिर साबित यह होता है मत भागो चमकती चीज़ों के पीछे यह सब एक छलावा हैं उस चमक के पीछे भाग कर हम सबने खुद को ही […]

लैला मजनू ने सिखाया मोहब्बत में फना होना वरना हम तो तेरे साथ जीने के ख्वाब देख रहे थे जो ख्वाब कभी पूरे हो नहीं सकते थे हम तुझसे जुदा रह नहीं सकते थे मरने […]

बंदिशें कितनी लगाई गईं पहरे कितने दिये गए फिर भी ना मिट सकी मोहब्बत हीर-रांझा कितने ही चल बसे प्रगाढ़ होती गई मोहब्बत हद से बढ़ता गया जुनून जितनी तकलीफें मिली मजनुओं को सब सहते […]