बड़ा ना समझ है यार मेरा हमसे पूँछता है कौन है वो ? थोड़ा दिमाग नहीं लगा सकता!!
बड़ा ना समझ है यार मेरा हमसे पूँछता है कौन है वो ? थोड़ा दिमाग नहीं लगा सकता!!
आपने जब हमें मित्र अपना कह दिया यकीन मानिए, जलवा हमारा बढ़ गया। अब ये माथा आपका झुकने न देंगे हम कभी आपको सिर-माथ पर हमने सजा कर रख लिया।
तेरी तारीफ में क्या कहूँ लफ्ज कम पड़ रहे हैं तू खूबसूरत है इतना अरमां मचल रहे हैं
।। आवारा से क्या पूछना इश्क़ किसे कहते हैं।। ।। हवस के नजरों से देखना भी क्या इश्क़ है।।
नहीं कुछ और कहना है आपके साथ चलना है ।। स्थितियां अनुकूल हो न हो सुख से मुलाकात हो ना हो पर हर घङी, हर कदम मेरे हमदम, न रुकना है आपके साथ चलना है […]
कब तलक निगाहें यूँ चुराओगे है यकीन एक दिन तो पास आओगे..
आज भी हम तुम्हारी एक ही मुस्कान पर, सैकड़ों शायरी बना सकते हैं तुम मुस्कान तो दो। आज भी शब्दों के फूलों को बिछाकर राह में स्वागत करेंगे, तुम, हमें आने का कुछ पैगाम तो […]
चल हट जा !! नहीं करना है मुझे इश्क़ विश्क़ मैं बर्बाद होता गया ले ले के इश्क़ में रिश्क़।।
कवि कलम कहती है मत रह तू निराशा में पथिक, भूल जा बीती सभी कुछ चुन नई राहें पथिक। याद मत कर दर्द को या दर्द की उस बात को तू, भूल जा बच्चा सा […]
सोच रहा था की काश मोहब्बत मे भी चुनाव होते एकदम खुल्लमखुल्ला प्रचार होते ऐसा गजब भाषण देते के एक ही रॅली मे आपको अपना बना लेते
तेरे प्यार मे इतने दिवाने थे मेरे सनम के तेरे नाम को अपनी हतेली पर जबरन जोड चुके थे हम अच्छी वाली जिंदगी का ख्वाब तेरे संग ही बुना करते थे हम एक पल भी […]
मेरे होंठों की मुस्कान पर ना जाओ दोस्तों! ये तो मेरे यार की तरह फरेबी है! मेरे आँसू हैं मेरी असली पहचान जो बंद कमरे निकलते हैं कभी तकिये से आकर पूँछों हम उसे कितना […]
फिर मुस्कुरा दो ठीक वैसे ही कि जैसे मुस्कुराए थे मिले पहली दफा जब। जिंदगी की आपाधापी चलती रहेगी अंत तक प्रेम को भी दें समय सच्चा यही है फलसफा अब।
मेरे जीवन की कहानी दुःख ही रही आखिर क्या लिखूँ आज जो अभी तक मैंने लिखा नहीं… विधाता ने मेरे भाग्य में आँसुओं के सिवा कुछ भी लिखा नहीं… मेरे पतझड़ समान जीवन पर बरसात […]
दो पल बैठो पास हमारे ये पल यूँ ही गुजर जाएंगे दो पल का है साथ हमारा ये पल लौट कर ना आएंगे दो पल तुमसे बात तो कर लूँ ये पल पलकों में ही […]
कुर्सी क्या है ? कितना मुश्किल है इसे समझना। सब राजनीति की संरचना है, सुन रखे हैं पुराने वादें, अब नए वादों में फंसना है। ये तो कुर्सी का मसला है। कहीं सत्ता की चाल […]
पाक इश्क अक्सर होता नहीं, मगर जब होता है तो बेमौसम बरसता है! और जिस पर बरसता है, वो बहुत भीगता है, आंसुओं से भी और उस खुमार से भी!
“आज जरुरत है हिंदी की” आज जरुरत है हिंदी की हम सबको जोड़े रखने की शोषण – अत्याचार मिटा कर देश में अमन जगाने की आज जरुरत है हिंदी की ……………. स्वतंत्रता के घन-घोर संघर्ष […]
हमें क्या गिरा पाओगे, हमें क्या मिटा पाओगे, जो जवानी में गिर गिर के चलना सिखा हो, कभी आंसू तो कभी जहर पीना सिखा हो, आज खुश है हमें छोड़ कर, यारों हम भी खुश […]
कुछ भी उसमें खास नहीं था, फिर भी उसे दिल में बसाया था, कोई हमसे छीन ना ले.. हर दिन खुदा से दुआएं किया करता था मेरी तकदीर है, मेरी जन्नत की लकीर है, खुदा […]
अपने चहरे को इस तरह अपनी शक्सीयत के अनुरूप बनाइए… कि अपके पूरे विवरण के लिए… केवल चहरा ही काफी हों।। HEMANKUR❤️
दर्द का आलम सहसा बाढ़ बन गया, जब किताब के पन्नो में; उनकी तस्वीर रूबरू हुई।
कौन सा क़ासिद तुम्हारे पास भेजूं जो मुहब्बत की बता दे असलियत कौन सी कविता दूँ लिखकर साथ में प्यार की समझा दे थोड़ा अहमियत।
साँवरे, इसमें हमारा नही कोई दोष तुम्हारा ख्याल आते नही रहता होश हमारी तो क्या बिसात जब खयाल तेरा राधे को करता मदहोश।
का दूर राहतेस तू , स्वप्नात पटकन येत जा डोळ्यांच्या पडद्यामागे , सुंदर आठवणी देत जा तुझी आठवण आली कि जीव कासावीस होतो whatsapp facebook चे फोटो बघून तात्पुरता मी खुश होतो का दूर राहतेस […]
बड़ी बेबाक बातें करते हैं वो, जमाना कब तक उन्हें चुप कराता। जो खौफजदा है नहीं, उन्हें खौफ कौन दिलाता….!
झुक कर उठ जाती थी, उनकी नज़रें, हमारी मौजूदगी में। और अब आलम ऐसा है, कि उनकी नज़र, अब उठती ही नहीं।
मय से मैने पूछा ग़म की दवा है क्या आपके मयख़ाने में। मय कहा किस ग़म की दवा चाहिए आपको मयख़ाने मे।
तुम्हें ढूंढती रही निगाहें, बरसों बीतने के बाद। कभी तुमने ना खबर दी, न ही तुम तक आने का पता।
खोखलापन है तुम्हारी बातों में अब ना रही तेरे लिए मेरे दिल में वो जगह ! जो हुआ करती थी पिछली बरसातों में..
एक जैसे मुसफिरोकी मुलाकात हुई थी अर्सो बाद जिंदगी आफरीन हुई थी एक जैसे मुसफिरोकी मुलाकात हुई थी शकसियत तो सबकी बेबाक थी जमुरियत मे थोडी, मुरझा सी गयी थी जब आन पडे आमने सामने […]
जाना चाहता हूँ ये शहर छोंड़कर पर असफल हूँ क्योंकि यहाँ कि एक कवयित्री से प्यार करता हूँ हूँ पुलिसवाला मगर डरता हूँ इजहार करने से क्योंकि प्यार से ज्यादा उसका सम्मान करता हूँ…
‘कुछ तो है कि तुझसे किये वादे की खातिर, खुद से ही उलझ पड़ता हूँ कभी-कभी..’ – प्रयाग
लिखने का शौक जरा कम ही है मुझे पर तेरा लिखा हर पन्ना पढ़ा करता हूँ… हर बार गलतियों पर जुबां बोल पड़ती है बस यही गुनाह बार-बार करता हूँ…
सब कुछ देखा करता हूँ नादान नहीं हूँ मैं पुलिसवाला हूँ गुनाह पकड़ ही लेता हूँ मैं…
आहिस्ता से बोल दो क्या कह रहा मन करोगे मुहब्बत या दुत्कार दोगे। इकबाल है हमारा मिले आप पथ में इजहार कर दिया, क्या स्वीकार लोगे।
हिन्दू से पूछो , मस्लमां से पूछो , पूछना है तो सारे जहां से पूछो , सबका यही होगा कहना स्वर्ग से भी अच्छ है इस हिन्दुस्तान में रहना (संदीप काला)
दिल खाली-खाली क्यू है शाम भी क्यू तन्हा-तन्हा लागे है । बिन कारन, क्यू बेचैनी का साया है यह कैसा उलझन वाला पल आया है उम्मीदों की किरण कहाँ अब, घोर निराशाओं की काली छाया […]
कोई साधारण चीज नहीं ईश्वर की वाणी है कविता, मन के भीतर उग रहे भाव का मधुर प्रकटन है कविता। दूजे का दर्द, स्वयं का मन जीवन के सुख-दुख का लेखन, कुछ अपनी और पराई […]
कौन किस पे कुर्बान होता है इस ज़माने में। कोई वास्ता ही नहीं है यहाँ किसी को किसी से ।।
वो कहते हैं तुम्हारी कविता में भाव नहीं हैं मैं क्या जवाब दूं जब दिल ही नहीं हैं !!
कल रात मैंने अपने आईने से कहा- आजकल मैं बहुत अच्छा लिखने लगी हूँ सब कहते हैं.. आईने ने कहा दिल जो टूट गया ना !!
कबूतर को भेजूं अब वो जमाना नहीं रहा खुद जाकर मिलूं यह सम्भव नहीं रहा कितने खत लिखे हैं उसके लिए मैंने डाकिया कहता है खत का जमाना नहीं रहा कलम में स्याही नहीं बची […]
प्रेम की परिभाषा नहीं जानते वो ही बढ़ चढ़ इसे बखानते चाहतें जो रही कभी हमारी वही चाहत रही होगी तुम्हारी इसलिए कभी मैं ऊब जाता अनमना सा किया जब पाता समाज ने इक बंधन […]
अब हमारे तेवर कम हो गए हैं, क्योंकि अब तुम्हारे हम हो गए हैं। अब कहाँ समय जो कि बेकार घूमें तुम्हारी मुहब्बत में हम खो गए हैं।
यूँ ही सिलसिला चलता रहा कभी मैं कभी वो रूठता रहा टूटने लगे दिल बेतहाशा मगर इश्क आँच पर पकता रहा..
दूध के दाँत पालने में ही टूट गये गरीबी का थप्पड़ इतनी जोर से पड़ा लाद दी जिम्मेदारी की पोटली कंधों पर बचपन के खिलौने पल में टूट गये थमा दी चाय की केतली जब […]
जब उसने आँखे खोली, तब पाया एक नया संसार, रंग बिरंगी थी दुनिया उसकी, और खुशिया आपार, खेलती थी आँख मिचौली, संग अपने हमजोली, न पड़ती थी डॉट उन्हें, दो बोल मीठे बोलते, पा लेते […]
लड़का – मैं वो आशिक़ नहीं जो अपनी, फ़ितरत को धूल में मिला दे। गर यकीन न हो तो एक मर्तबा, दिल दे के तू मुझे अपना बना ले।। 💇 — अपना दिल ए पागल […]
साथी मेरा नटखट कम नहीं है वो, हमारे नयनों पे हाथ रख के.. पूछे कौन है , बताओ तो, हम भी कम नहीं हैं , कुछ.. आहट से जान लेते हैं , ख़ुशबू से पहचान […]
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