शिक्षा की चौपाल लगी कहाँ रहे अब पढ़ने वाले। संभावित प्रश्नों को रटकर कागज पर हीं बढ़ने वाले।। कई तरह के बोर्ड यहाँ हैं हर भाषा हैं माध्यम के। अंग्रेजी में काम करे सब डाले […]

एक सखी मेरी प्यारी सी, कोमल मन की न्यारी सी। कभी क्रोध की अनल में तपे, कभी स्नेह बरसाती है कभी कहा माने चुपके से, कभी अपनी भी चलाती है.. एक सखी मेरी प्यारी सी, […]

शिक्षा की खदानें बंद करो डिग्री बेचने वाली दुकानें बंद करो छात्रों को डालो जेलों में शिक्षकों की तनख्वाहें बंद करो ना लूटो हमको शिक्षा के नाम से ज़रा डरो राम के नाम से व्यापार […]

आफ़ताब का उजाला औऱ शीतलता हो शशि की आप इस जिन्दगी को बड़ी सौगात रब की। आप गर जिन्दगी में न होते तो कहें क्या कहानी ही न होती बिखर जाती ये कब की।

हम भी हैं मुश्किलों से, हारने वालों में से है नहीं कोई भी चुनौती क्यू न आए, घबरायेगे हम तो नहीं कैसा भी हो अनल, स्वर्ण जैसे जलता है नहीं पर जबतक ना तपे वो, […]

बहुत ही कोशिश की,जरा हम भी बदले से जाएँ पर कैसे अब तक यह मन, बात समझ न पाए । अपनों से दर्द मिले थे अकसर शिकवा-शिकायत चलता ज्यादा- कमतर अनजान भी कैसे चोट पहुँचाए, […]

मेरे मन का मोती, मैं तुझको अर्पण कर जाऊं। मेरे राम मेरे श्याम… प्रभु मैं जपु तेरा नाम पल पल, तुझमें ही खो जाऊं । मेरे मन का मोती , मैं तुझको अर्पण कर जाऊं। […]

हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई | कविता- हिन्दी दिवस आज आया | हिन्दी दिवस आज आया ,सरे हिन्द परचम लहराया | हर भाषा की सरताज है हिन्दी सबने झण्डा फहराया | भोजपुरी गुजराती मराठी बंगाली […]

आज नजदीक से देखा उनको तब से मन में बदल गया सब कुछ, हम तो कुछ और ही सोचे थे मगर उनमें कुछ और ही मिला। हम तो समझे थे वे बड़े वो हैं मगर […]

तन्हाइयों से ही जिसने बात की है जिंदगी भर मेरे आने का उनको एहसास क्या होगा वीरानियां ही जिनका आशियाना हो उन्हें महलों का ख्वाब क्या होगा जिंदगी जिनकी एक सवाल बन चुकी है पास […]

श्रीदरूप हो तुम, मित्रपद विराजित हो बस सदा ही खिलते रहो मण्डली में शोभित हो। श्रोतव्य है मीठी वाणी तुम्हारी बिंदास चेहरे की मुस्कान न्यारी। सदोदित रहें सारी खुशियाँ तुम्हारी, सुस्मित रहे मन, दुख सब […]

मेरी भावनाओं में; जो उत्तथ-पुथल है , उनको शांत ! वो आराम से कर सकती है, माना बहुत सारी है, भाषाएं इस संसार में, मगर मेरी आत्मा को तृप्त! मेरी हिंदी ही कर सकती है। […]

करुण रस की कविता:- ***************** जिसने हमको प्यार किया मेरी राह में सुबहो से शाम किया ना कद्र की हमनें एक पल भी उसकी अपशब्दों का उस पर वार किया एक रोज़ मैं बैठी थी […]

हिंदी दिवस आओ मनाएं औऱ लें संकल्प यह, मातृभाषा को सदा सम्मान, प्यार देंगे। बन जाएं कितने ही बड़े लेकिन रखेंगे ध्यान यह मातृभाषा को नई पहचान देंगे, प्यार देंगे। हर बात में हिंदी रहे, […]

हिन्द भाषाओं का सागर है l मैं हिन्दी उसमें से एक हूँ , उद्भव मेरी संस्कृत से है l हिन्द की सारी भाषाओं में भाईचारा था l अंग्रेजी ने हमें स्वार्थ के लिए बांटा था […]

जिस माथे पे चमके, हिन्द का नाम उन्हें हिंदी से मिलता, हो प्रथम ज्ञान। जन भाषी भाव वही, पथ पावन हो की माँ हिंदी का हिन्द, में सावन हो। की माँ हिंदी का हिन्द, में […]

आंखों का नूर हैं ये आंसू नूर की बूंदें यूं ना बहाया करो, किसी अपने पे तरस तो खाया करो। कहीं कोई परेशां सा हो जाता है , कुछ तो दोस्ती का फ़र्ज़ निभाया करो […]

हिन्दी के व्याख्याता एक बोल रहे थे सेमिनार में। हिन्दी का प्रसार हो जन-जन और सरकार में।। बजवाई खूब तालियाँ बात- बात पे मञ्च से। समय खत्म होते ही बेमन आए मञ्च से।। खूब अनोखे […]

हिन्दी में छंद हैं , अलंकार हैं | कवियों की कल्पना हैं, लेखकों के उद्गार हैं | दोहों की छटा है , रसों की भरमार है | कल्पना और यथार्थ है , नैतिकता भी अपार […]

सीमित अक्षर, सीमित मात्राऐं रचा शब्दों का असीमित भण्डार बना विशाल वृन्द भरे शब्दकोश बेशुमार कैसा खेल रचाया है इन शब्दों ने महकाया काव्य दरबार वही शब्द संभावनाएं अपार क्षमता भरपूर भिन्न भाव अमिल सोच […]

किसी को याद करके रोना नही, ऐ दोस्त.. किसी को याद करके मुस्कुराओ । वरना शिकायत लगा देगी , याद उसी की उसे वापिस आकर , वो भी तो रो देगा.. तो कैसा लगेगा बताओ […]

कश्मीर की घाटियों से ब्रम्पुत्र की नदियों में बहती है हिंदी महाराष्ट्र के रंग और राजस्थानी मिट्टी की खुश्बू में है हिंदी भाषाओं की शान इस देश की पहचान बनकर हर प्यार का इजहार करती […]

भावों की जननी हिंदी है, मां है अपने धाम की। कोरोना काल में हाय, हैलो, छूटा , जय हुई अपने प्रणाम की । हिंदी में अपने भाव रचे , हिंदी ही अधरों पर सजे । […]

अपने देश में अपनी भाषा बदनसीब हो गई आगे आओ युवा देश के हिंदी गरीब हो गई मातृभाषा है राष्ट्रभाषा है फिर क्यों तुम शर्माते हो प्रणाम छोड़कर गैरों से तुम हाय हेलो अपनाते हो […]

रोम-रोम में बसी हमारे हिंदी राजभाषा है बन जाए यह राष्ट्रभाषा इस जीवन की यह आशा है हिंदी है परिपक्व, परिपूर्ण हिंदी ही ममता-सी निर्मल है हिंदी है लहू में अपने हिंदी ही कण-कण में […]

हिंदी दिवस:- चौदह दिसंबर को हर वर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है उसी दिन क्यों हिंदी को सम्मान दिलाया जाता है हिंदी तो ऐसे ही वाणी है जो भारतीय परंपरा पर चलती है देशी हो […]

एकता के सूत्र में विविधता को पिङोती, जनमानस की भाषा है जो देवनागरी लिपि में गुथी हुई,अपनी राजभाषा रूप धर आई है जो। हर जन के दिलों में उमंग सी बहती हुई अभिलाषा सी हमारे […]

अभिव्यक्ति ह्रदय से:- +++++++++++++ आज तोड़ दिया तुमने मेरा टूटा हुआ दिल ! ऐसा लग रहा है जैसे सीने पर एक पत्थर-सा रखा है मेरे। एक तुम ही थे जिससे थोड़ी बहुत उम्मीदें लगा रखी […]

कहाँ रहे अब किताबों के दिन !! अब तो बस अलमारी में रखी हुई किताबें धूल खाया करती हैं गुजरती हूं जब कभी उनके करीब से तो मुझे बड़ी उम्मीद से देखती हैं कि शायद […]

फांसी, एनकाउन्टर जैसी किसी भी सजा का नौनिहालो को न रहा है अब डर जब हो गया हो पतन नैतिक मूल्यों का फिर कैसे हो आदर्शों का असर।

चीखते चेहरों पर चीखने से क्या फायदा सजा मिल जाने पर, बेगुनाह साबित होने से भी क्या फायदा । इज्जत की नाम अपने ही मासूमो की हत्या साथ देने के बदले आरोप लगाते हैं मिथ्या […]

नदी नाम है अविरल बहती जलधारा की त्याग, गतिमय, अवगुण-गुण का भेद मिटाने की कश! हममें भी यह सब आ जाए अपना चित भी तरनी से निश्छल हो जाएँ

कुकडू -कडू कुकडू -कडू करता रहूँ , करता रहूँ मन में सोच रहा, मैं भी तो एक जीव हूँ, बांग से जगाता हूँ, महफ़िलों की शान हूँ, मैं भी तो एक जीव हूँ, जल की […]

आब-ए-चश्म रातों में न आओ आँख में रात सोने दो, जरा आराम करने दो, सुबह को फिर वही, उनकी जुदाई याद कर के हम, बुला लेंगे तुम्हें, लेकिन अभी आराम करने दो। आब-ए-चश्म – आँसू