****** यही सोचा मैं ज़िंदगी की बेहिसी पर ग़ज़ल कहूँगा अज़ाब तेरे, तेरी अज़ीयत की चाशनी पर ग़ज़ल कहूँगा भटक रहा हूँ मैं कबसे तन्हा न हमसफर है न रौशनी है ये सहरा सहरा भटक […]

उठो वीर जवानो भारत माता, तुम्हे पुकार रही, अपने लालों के लहू का, बदला माँग रही, अपने अमर जवानो के पथ पर, चलने को ललकार रही, उठो वीर जवानो भारत माता, तुम्हे पुकार रही, आज […]

काल चक्र में घूम रही, मैं कोना-कोना छान रही, हीरा पत्थर छाँट रही मैं, तिनका-तिनका जोड़ रही, उसमें भी कुछ हेर रही, संजोऊँ क्या मैं भरमाऊँ, कण-कण में फँसती जाऊँ, इस  क्षण  में. डूबूँ या […]

“कहानीयों में था हरा-भरा” “अब कश्मीर का रंग लाल हो गया है” “शहीदों के लहू से रंग गयी है ज़मीन ” “जलीयांवाला बाग जैसा हाल हो गया है ” ~शाबीर

********************************* गोद में लेकर मुझे हे पिता! तुमने कहा था मांग ले गुडिया तुझे जो खिलौना मांगना है ********************** हाथ जिस पर रख दिया तुम्हे कब ना पसंद था उसका क्या मोल है उठा कभी […]

मेरा ख्याल तुमको यादों से चुन लेता है! तेरी ख्वाहिशों से ख्वाबों को बुन लेता है! दूरियाँ मिट जाती हैं इरादों से इसतरह, धड़कनों में तेरी आहट को सुन लेता है! मुक्तककार – #महादेव

हाल ए दिल अपना कभी हमसे सुनाया न गया साथ मुश्किल तो न था तुमसे निभाया न गया। आए महफिल में वो मिलते रहे अपने बनकर जख्म एैसा मिला जो हमसे भुलाया न गया। नाम […]

नाचत हे परिया गावत तरिया घर कुरिया ला, देख बड़े । सुन्ना गोदी अब भरे दिखे आदमी पोठ अब सब झंझट टूट गे सुन के गुरतुर गोठ सब नरवा सगरी अउ पयडगरी सड़क शहर के, […]

फूलों में जैसे लाली शबनम की प्याली तितली की उड़ान जवां इश्क़ ए कव्वाली घुंगरू की छमछम बजे कानों में हरदम तेरी पायल भी बोले हमसे कुछ कमकम हंसी बेपना नूरानी छलके इसकदर जवानी आओ […]

क्या रे! क्यों शोर मचाता है जीवन क़ी आपाधापी में क्यों आपा खो जाता है बनियान तेरी फ़टी हुई जैबों में एक कोढी तक नहीं ब्लैक मनी ब्लैक मनी चिल्लाता है क्या रे! क्यों शोर […]

तुम्हें ज़िन्दगी के उजाले मुबारक अंधेरे हमें आज रास आ गए हैं तुम्हें पा के हम ख़ुद से दूर हो गए थे तुम्हें छोड़कर अपने पास आ गए हैं तुम्हें ज़िन्दगी के… तुम्हारी वफ़ा से […]

हिसाब की पंचायत वहाँ लगती हैं जहाँ दोनो तरफ सौदागर होते हैं लूटतें हैं दिल की दौलत जब चितचोर अक्सर ये लूटरोंसे लोग बेखबर होते हैं बेहिसाब नुक़सान होता है दिलदार का जब दिल्लगी मे […]

लाहौर के उस पहले जिले के दो परगना में पहुंचे रेशम गली के दूजे कूचे के चौथे मकां में पहुंचे और कहते हैं जिसको दूजा मुल्क उस पाकिस्तां में पहुंचे लिखता हूँ ख़त में हिन्दोस्तां से पहलू-ए हुसना […]

मेरी कलम नहीं उलझी है माशूका के बालों में, मेरे लफ्ज नहीं अटके हैं राजनीति की जालों में, मैने अपने अंदर सौ-सौ जलते सूरज पाले हैं, और सभी अंगारे अपने लफ्जों में भर डाले हैं, […]

करीब आओ तुम नूरानी सी रातें हैं! बाद मुद्दत़ के मस्तानी सी रातें हैं! छुप गये हो किसलिए उम्र की तस्वीरों में? शबनमी ख्याल की दीवानी सी रातें हैं! मुक्तककार #महादेव’

ठहरा दे इस वक़्त को ये वक़्त गुज़र जाएगा कुछ बात अब भी है हलक तक वो एहसास बयां ..करने तो दे | गफलत हुए अरसा हुआ पर मलाल उसका.. ज़िंदा है गर ना करे […]

दुखी हो जाता है मन मेरा भी जब जब दुखी तुझे मैं पाता हूँ क्या बोलूँ मैं दर्द मेरा टूट सा पूरा जाता हूँ   कभी सुनकर खबर शहीदों की आत्मा मेरी भी रोती है […]

इस लहलाती हरियाली से , सजा है ग़ाँव मेरा….. सोंधी सी खुशबू , बिखेरे हुऐ है ग़ाँव मेरा… !! जहाँ सूरज भी रोज , नदियों में नहाता है……… आज भी यहाँ मुर्गा ही , बांग […]

पहली बारिश मे टहलना…. देखना कभी शाम ढलना… तितलियों के पर पकड़ना…. ख्वाब का आँखो मे पलना.. बात छोटी है मगर मायने रखती है…. रूठे बच्चे को मनाना…. दर्द मे भी मुस्कुराना… काँच रस्ते से […]

नाम साधना के अभ्यास के दौरान उभरा हुआ यह गीत प्रस्तुत करने बहुत ख़ुशी महसूस कर रहा हूँ  ..! “नाम”  में  प्रभू  के  हम,   मस्त  हो  के  जी  रहे ……! (गीत)   हम  है  भक्त  […]

समय बदलने लगा तो खेल बदलने लगे, दोस्त साथ घूमना और बाहर निकलना भूलने लगे, खिलौने भी बदलने लगे खिलाड़ी भी बदलने लगे, जो संग साथ लगाते थे मेले खुले आंसमा के निचे, आज अकेले […]

हम हिन्दुस्तानी हैं हिन्दुस्तान हमें जां से ज्यादा प्यारा है हम भारत माता के लाल हैं जो करेगा भारत मां का अपमान उसे आज हमने ललकारा है काश्मीर और अवध हमें जा से ज्यादा प्यारा […]

किसने  मानव  को  सिखाया, करना  अभेद  में   भेद। एक  निराकार  परमात्मा, अनन्त, अविनाशी, अभेद, हम  मानव  झगड़  रहे , कर  उसके  भेद। एक  हीं  जमीं  एक  आसमां, एक  हीं  सूरज- चाँद, फिर  क्यूँ  मानव […]

चिर आनन्द की अभिलाषा में, चंचल मन व्याकुल रहता है, अंधियारे-उजियारे में, कुन्ज गली के बाड़े में, देवालय में,जीव-निर्जिव सारे में, ढूँढ़़-ढूँढ़ थक हारी मैं, इस जग की सारी कृति, कराहती  पुकारती आनन्द की, चाह […]

महक रही है फिजा कुछ इस तरह, खुली पलकों में तसव्वुर अब पलने लगे है। पिंघल रही है चांदनी कुछ इस तरह , ख्याल तेरे गज़लों में अब ढलने लगे है। उभर रही है आंधियां […]

शीशे का एक महल तुम्हारा, शीशे का एक महल हमारा. फिर पत्थर क्यों हाथों में आओ मिल बैठें , ना घात करें । प्रीत भरें बीतें लम्हों को, नवदीप जलाकर याद करें – पूनम अग्रवाल

जन-जन की भाषा है हिंदी, भारत की आशा है हिंदी । जिसने पूरे देश को जोड़े रखा है, वो मजबूत धागा है हिंदी । हिन्दुस्तान की गौरवगाथा है हिंदी, एकता की अनुपम परम्परा है हिंदी […]