स्वतंत्रता दिवस पर कविता

तेरी सुबह बङी निराली है

तेरी सुबह बङी निराली है.. तेरी शाम मधुर सुहानी हैं.. एे जानो जिगर से प्यारे वतन.. तेरे वैभव की अमर कहानी हैं वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् है चरण पखावत सिंधु तेरे मस्तक पर सजा हिमाला हैं है पुरब लालिमा सूरज की और पश्चिम उदय उजाला हैं है हरी वसुन्धरा सुख दायी.. तेरे वीरों की अमर कहानी हैं ऐ जानो जिगर से प्यारे वतन तेरे वैभव की अमर कहानी हैं वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् है बाईबिल ... »

Aazaadi……..!

Aazaadi……..!

Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai Ye din hai bahut sunhaira, ye din hai bahut pavitra hindustaan ko aazaad rakhne ki ham sab ne kasam khaai hai Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai deshbakhton ne sinchaa hai esko apne khoon se aur bharat maa per apni jaan lutaai hai Aazaadi ki keemat hamne bahut badi... »

हिन्दुस्तान

जहाँ हिन्दू मिले जहाँ पर मुसलमान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं, जहाँ हर मज़हब को एक सा सम्मान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं। कहदो उससे जाकर जहां में हमारे मुल्क से अच्छा कोई मुल्क नहीं, जहाँ गुरुग्रंथ बाईबल गीता और कुरान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं। जिसने सदियों से संजोऐ रख्खा है इन मोतीयों को एकता के धागे में, जहाँ आँगनों में तुलसी घरों में रहमान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं । हमारा वतन हमको ज... »

एकता की जोत

हम भारत मैं एकता की अखंड जोत जलायेंगै बहकावे में किसी के अब न हम आयेंगे दुख और मुश्किलों से अब ना हम घबरायेंगे रोटी एक हो या आधी मिल बांटकर हम खायेंगे अभी प्रेम हमारा देखा है तुमने जिस दिन रोष हमारा देखोगे खुदा भी बचा न पायेगा खूनी दिन और खूनी रातें कब तिलक खेल ये खेलोगे जाग गया है हिन्दूस्तान जाग गया है बच्चा – बच्चा जाग गया हर नोजवान दंगाईयों को मार – मारकर देश से हम भाग देंगे अब देश... »

????आजादी मुबारक हो????

????आजादी मुबारक हो????

????आजादी मुबारक हो???? ???????????? तोते पिंजरे जैसी बोली, खूब बढ़ी आबादी है, पंछी के पर काट दिए है, ये कैसी आजादी है। आजादी ये रूला रही है अब भी भूखे प्यासों को, जाने क्यों ये भुला रही है अब भी भूखे प्यासों को,, आधी आबादी ये अब भी भूख-भूख चिल्लाती है, तन से मन से खाली रहती सब को ही झल्लाती है,, हमने सूखी चिंगारी से, डरते कोई देखा है, हमने एक निवाले खातिर, मरते कोई देखा है,, जन गण मन में बसने वाले... »

स्वतंत्रता दिवस’ प्रतियोगिता सावन

कृपया राष्ट्र गान धुन में गायें ********************** तन मन धन न्योछावर कर दें तुम पर भारत माता विज्ञान ज्ञान भंडार भरें सब रखें सदा मन चंगा करुणा दया प्रेम रस बरसे नही हो देश में दंगा और न कुछ हम मांगें बस यह आशिष मांगें विश्व गाए जय गाथा तन मन धन न्योछावर कर दें तुम पर भारत माता वन्दे   वन्दे   वन्दे जय  भारत  वन्दे जय हिन्द। आनन्द प्रकाश अग्रोही »

कश्मीर जरुरी है

कश्मीर जरुरी है

पितरों के तर्पण को जैसे, थाली में खीर जरुरी है, भारत माँ के श्रृंगार को वैसे, ही कश्मीर जरुरी है| चमकी थी जो सत्तावन में, अब वो तलवार जरुरी है, प्यार मोह्हबत बहुत हो गया, अब तो वार जरुरी है |   खूब बहा लिया लहू सीमा पर, भारत माँ के लालों ने, जागो नींद से देशवासियों अब, इक हुंकार जरुरी है| भेद ना पाए दुश्मन सीमा को, ऐसी पतवार जरुरी है, और देश के गद्दारों को अब, दुत्कार जरुरी है |   ऋषभ जै... »

देशभक्ति

ये कविता मैने खुद को एक बार बचपन मे रख के,जवानी मे रख के और एक बार खुद को आखिरी सफर मे रह कर महसुस करते हुवे लिखा है,कि हमारे सैनिक भाई क्या सोचते है और ये गंदी सियासत क्या सोचती है, मै आशा करुंगा कि ये आपको पसंद आयेगी, (देशभक्ति के सफ़र मे) बन के बादल तीन रंगो मे निखर आउंगा, एक न्नहा सा देशभक्त हो उभर आउंगा, इस छोटे बदन को वतन से प्रेम है, इस न्नहे कलम को वतन से प्रेम है, जिसे ओढ के मै फक्र से मर... »

श्रधांजलि

आवो ! हम सब नमन करें भारत के वीर सपूतो का ! जिनने आज़ादी के हवन कुंड में अपना सब कुछ होम दिया आवो ! हम सब नमन करें भारत के वीर शहीदों का ! जो नित्य बलिदान दे रहे सीमा पर अपने प्राणों का ! आज़ादी की रक्षा खातिर आवो उनकी आवाज़ सुने पर्वतों के पार से सीमा के हम पहरेदार पड़े रहते खुले मैदानों में नंगी चट्टानों पर बर्फ की सिल्लियों पर या कभी धूल रेत के कोमल गद्दों पर चाँद तारों की महफ़िल को निहारते साथ ही न... »

“आखिरी जंग”

नत मस्तक शीश झुकाए कतारबद्ध खडा हूं मैं लिए लघु हृदय वीरों संग दौड चला घावो की परवाह किए बिना तत्पर हूं कुछ करने को इस देश के लिए मरने को बना लिया है लक्ष्य अब विजय पताका लहराना बस शीर्ष कारज रहेगा अब »

****जकड़ी है****

****जकड़ी है****

****जकड़ी है****   कुर्बानी से उपजी थी अब तस्वीरों में जकड़ी है, ऐ हिंद! तेरी आज़ादी सौ-सौ जंजीरों में जकड़ी है l     हर मुफलिस की भूख ने इसको अपनी कैद में रख्खा है, और यही पैसे वालों की जागीरों में जकड़ी है l     मां-बहनों पर दिन ढलते ही खौफ़ का साया रहता है, और हवस के भूखों की ये तासीरों में जकड़ी है l     भ्रष्टाचार का दानव इसको बरसों-बरस सताता है, ये संसद की उल... »

शत्-शत् नमन करें

शत्-शत् नमन करें उनको , जो राष्ट्र-हित में शहीद हुए। जन-जन रो देता है सुन वे वीर गति को प्राप्त हुए। पुत्र खोने का दर्द भला माता से ज़्यादा कौन सहे! धन्य है वो माँ जिसने ऐसे पुत्र जने! संवल खोने का दर्द भला पिता से ज़्यादा कौन सहे ! धन्य है वो पिता जिसने राष्ट्र को ऐसे पुत्र दिए ! पति-विरह की पीड़ा को पत्नी से ज़्यादा कौन सहे! दुश्मन से लड़ते पति जब वीर गति को प्राप्त हुए! राखी के बंधन का वादा बहन से ज़... »

स्वतंत्रता का नव विहान

स्वतंत्रता का नव विहान– गाओ मंगल गान! लहराते ध्वज को देखो- स्वाभिमान भरे मस्तक ऊँचे! याद करो वीरों की कुर्बानी! ज़ुल्म भरे व्यथा की कहानी। चहुदिश अरुण रश्मि छायी- धरती पर स्वर्ण-आभा आई ! बरस रहे सुधा रस राग रंग जनता में खुशियों की पुरवाई! गगन-धरा-अनिल-क्षितिज प्रदिप्त हो रहे मंगल दीप! त्याग-बलिदान की ज्योति जले कभी न बुझ पाए ये अमर दीप ! बँटवारे का दर्द समेटे आज भेद भाव सब छूटे। जननी नव दुल्ह... »

मां तेरा लाल आयेगा

माँ तुम राह देखती होगी कि मेरा लाल आयेगा पर सरहद पर जंग इतनी छिड़ी थी कि तेरा लाल नआ पाया वो इतने सारे थे कि माँ तेरा लाल अकेला पड़ गया मैंने एक – एक को मार गिराया वो भी अकेला रह गया अचानक उसने भारत माता का नारा लगाया मैंने जैसे ही भारत माता के चरणों में शीशे झुकाया उसने धोखे से मुझे मार गिराया अब कोई गम न करना मां भारत माता पर कुरबान हुआ हूँ तिरंगे में लिपटा जब मेरा शव आयेगा तो आंसू एक न बहा... »

भारतमाता

स्वर्णिम ओज सिर मुकुट धारणी,विभूषित चन्द्र ललाट पर गुंजन करे ये मधुर कल-कल, केशिक हिमाद्रि सवारकर आभामय है मुखमडंल तेरा, स्नेहपू्र्णिता अतंरमन। अभिवादन माँ भारती, मातृभूमि त्वमेव् नमन।। बेल-लताँए विराजित ऐसे, कल्पित है जैसे कुण्डल ओढ दुशाला तुम वन-खलिहन का ,जैसे हरित कोमल मखमल तेरा यह श्रृंगार अतुलनीय, भावविभोर कर बैठे मन। वन्दे तु परिमुग्ध धरित्री, धन्य हे धरा अमूल्यम्।। वाम हस्त तुम खडग धरे, दाह... »

क्या है भारत।

क्या है भारत । एक कल्पना है ये भारत, हरिअर वन-खलिहानो की रहे सूखी जहाँ ये धरती तो उसे भारत नही समझना एक उम्मीद है ये भारत, जो नित् पथ दिखाए जग को बिखरे जो यूँ तूफाँ से तो उसे भारत नहीं समझना एक आवाज है ये भारत,जो मधुर ज्ञान दे जगत को कहीं गुम अगर हो जाए तो उसे भारत नहीं समझना एक विचार है ये भारत, संगठित करे जो जगत को विभाजन अगर जो चाहे तो उसे भारत नहीं समझना एक कर्म है ये भारत, जो जीवन सिखाए जगत क... »

काश्मीर और अवध हमारा है हिन्दुस्तान हमारा है।

चांद और सूरज हमारा है धरती और आसमान हमारा है कश्मीर और अवध हमारा है हिंदुस्तान हमारा है न कुछ रहा जो तुम्हारा है तोप तलवार गोला बारूद मिसाइल जंखिरा की मात्रा हमपर भारी है अब न कश्मीर बंटने पायेगा धरा पर रामराज ही रहे पायेगा अब जंग छिड़ने वाली है करना यह सरहद तुम्हें खाली है आने वाला तूफान भारी है यदि जान तुम्हें प्यारी है तो भाग चलो यहाँ से कयामत आने वाली है – रीता अरोरा »

माटी का कर्ज

अनजानी राहों पर बिन मकसद के मैं चलती हूँ जबसे तुम से जुदा हुई हूँ तनहाईयों में पलती हूँ कब आओगे तुम प्रियवर अब और सहा नहीं जाता है बिन तुम्हारे जीवन मुझसे अब न काटा जाता है तुम से ही मेरा ये दिन है तुम से ही ये रैना है तुम बिन सूनी ये दुनिया तुम बिन बैचेन ये नयना भीगी पलकें भीगे नैना भीगी दामन चोली है ऑख़ों का काजल माथे की बिंदिया हंस – हंस कर तुम्हें बुलाने हैं सुनो प्रियवरम मेरी भी मजबूरी ... »

तिरंगे का मान

लेखनी को पुष्प चढ़ाकर भाव ह्रदय से सजाकर ज्ञान का भंडार भरकर प्रेम – अश्रु के साज से आज कुछ ऐसा लिखूॅ गीता लिखूॅ कुरान लिखूॅ वेद लिखूॅ ग्रन्ध लिखूॅ राम लिखूॅ – कृष्ण लिखूॅ सच लिखूॅ या झूठ लिखूॅ आईने सा स्पष्ट लिखूॅ आज देश पर छाया जो दुशमनों का कोहराम है देश वासियों का हुआ जीना अब मुहाल है मिलकर सब भारतवासी बचा लें अपना मथुरा कासी अवध और काश्मीर के साथ माँग लें अपना ननकाणां साहब और माँग... »

नमन करो उन वीरों को

शहीदों को नमन ****** नमन करो उन वीरों को जिनसे से यह देश हमारा है उनके साहस के दम पर महफूज घरों में रहते हैं । उन वीरों के दम से अपनी होली और दिवाली है मावस की काली रातें उनके दम से उजियाली हैं उनको अपनी मातृभूमियह प्राणों से भी प्यारी है सीमाओं पर बनकर प्रहरी शेर शूरमा तने हुए । राष्ट्र प्रेम की खातिर अपना वो सर्वस्व लुटाते हैं मातृभूमि की रक्षा हेतू अपनी जान गंवाते हैं तन मन धन से सैनिक अपना पूर... »

स्वतन्त्रता-दिवस

पन्द्रह अगस्त की बेला पर रवि का दरवाजा खुलता है, सब ऊपर से मुस्काते हैं पर अंदर से दिल जलता है जब सूखे नयन-समन्दर में सागर की लहरें उठती हैं, जब वीरों की बलिदान कथाएं मन उत्साहित करती हैं जब भारत माता के आँचल में आग आज भी जलती है, तब भारत के वीरों की कुर्बानी मुझको खलती है जब लाल किले के संभाषण से गद्दारी की बू आये, जब नेता-मंत्री के अधिवेषण मक्कारी को छू जाये जब शब्दों से बनी श्रृंखला में कवि नेत... »

आज कुछ ऐसा लिखूॅ

लेखनी को पुष्प चढ़ाकर भाव ह्रदय से सजाकर ज्ञान का भंडार भरकर प्रेम – अश्रु के साज से आज कुछ ऐसा लिखूॅ गीता लिखूॅ कुरान लिखूॅ वेद लिखूॅ ग्रन्ध लिखूॅ राम लिखूॅ – कृष्ण लिखूॅ सच लिखूॅ या झूठ लिखूॅ आईने सा स्पष्ट लिखूॅ आज देश पर छाया जो दुशमनों का कोहराम है देश वासियों का हुआ जीना अब मुहाल है मिलकर सब भारतवासी बचा लें अपना मथुरा कासी अवध और काश्मीर के साथ माँग लें अपना ननकाणां साहब और माँग... »

भारत माता

भारत माता सिसक रही है भारत माता, आॅचल भी कुछ फटा फटा है चेहरे का नूर कहीं नहीं है,घूंघट  भी कुछ हटा हटा है।। क्या कारण है, सोचा है कभी? क्यों माॅ इतनी उदास है गुलामों  सी सहमी खडी, जब आजादी उसके पास है। पहले चढते थे शीश  सुमन, लहू से तिलक हो जाता था सफेद आॅचल माॅ का तब लाल चूनर कहलाता था आॅखों से बहती थी गंगा जमूना, की पावन अमृत द्यारायें चरणों पे झुककर हिमाचल मस्तक रोत नवाता था। बोते थे बीज चाॅदी... »

एक शहीद का खत

एक शहीद का खत….. ‘माॅ मेरे खत को तू पहले आॅखों से लगा लेना चूमना होठों से इसे फिर आॅचल में छिपा लेना।’ कि….. बेटा तेरा आज अपने कर्तवय  से हट गया युद्ध बाकि था अभी और वो मर गया। पूछे्गे बाबूजी जब क्या किया मेरे लाल ने कह देना बाकि हेै अभी कुछ सांसे बाल में ऐसा पूत नही जना मैंने जो पीठ दिखा आ जाये मरेगा सौ मार कर, नही ंवो, जो मेरा दूद्य लजा जाये सीने पर खायेगा गोली, छाती पे तमगे होगें उस... »

“छल छद्म”

मैं नेत्रहीन नहीं आंखे मूंदे बैठा हूं मैं भी अवगत था सत्य से पर विवश रहा सदा अन्तर्मन  मेरा क्या मिलेगा व्यर्थ में लड़ने से समस्त भारत के लिए कुछ  करने से विदित था सब मुझे मृत्यु तो मेरी ही होगी अंत भी ही मेरा होगा और शेष सभी विजयी होंगे यहां योंही मरने से तो रक्त ही बहेगा पीड़ा ही मिलेगी नही नहीं नहीं मैं मूढ़ नहीं इस धर्मक्षेत्र में या कर्मक्षेत्र में मैं मर ही नहीं सकता निस्वार्थ क्यों मैं कुछ ... »

सावन तक दुशमनों का विनाश

देखो फिर से सावन आया। सरोवर में कमल मुस्कराया।। भॅवरों ने गीत गुरगुनाया । कोयल ने की कुहू – कुहू ।। सारा घर आंगन खुशियों से भर आया । दूर बैठे सेना के जवानों ने अबकी बरस सावन पर दुशमनों को मार भगाने का बिगुल बजाया देश की कई बहिन – बेटियों ने भी कसमें खाई तभी तिरंगे में लिपटा एक जवान का शव अपने घर आंगन में आया माँ ने अश्रुधारा के बीच केसरिया तिलक अपने लाल के भाल लगाया मानो लाल का मुखमंडल... »

आज़ाद हिंद

आज़ाद हिंद

सम्पूर्ण ब्रहमण्ड भीतर विराजत  ! अनेक खंड , चंद्रमा तरेगन  !! सूर्य व अनेक उपागम् , ! किंतु मुख्य नॅव खण्डो  !!   मे पृथ्वी भूखंड ! अति मुख्य रही सदा   !! यहा पर , सप्त द्वीप ! जॅहा पर , उन समस्त !!   द्वीप मे प्रमुख रहा  ! भारत का द्वीप सदा !! यहाँ पर , भारत को ! नमाकन कर सोने की !!   चिड़िया ,हिंदोस्ताँ व भारत ! की उपाधि दे डाली !! भारत मेरा प्रतिभाशाली रहा ! पृथ्वी के आरंभ से  !!... »

“जश्ने आजादी”

जश्ने आजादी का पल है,आओ खुशी मनाएँ। आसमान फहरे तिरंगा, जन गण मन हम गाएँ। कालिमा की बीती रातें ,आया नया सवेरा। प्रगति -पथ परआगे ,बढ रहा देश अब मेरा। अरूणदेव की नूतन किरणें ,नया सवेरा लाई। नयी रोशनी पाकर देखो ,कलियाँ भी मुस्काई। नहीं खैरात में मिली आजादी,खून बहाकर पाई है। खूली हवा में साँसें ले हम,लाखों ने जान गँवाई हैं। याद करो वो कहर की बातें ,दुश्मन ने जो ढहाया था। मित्रता का हाथ बडा,गुलाम हमें ब... »

“कायर”

कायर ——- दरवाजे पर आहट हुई अधखुला दरवाजा खुला परिचित सामने खड़ा आस्तिने चढाए पैर पटकता लौट गया बोलकर कुछ अनसुने,अनकहे शब्द एक चुप्पी और गहरा अटहास स्मरण था मुझे सब कि सत्य अकस्मात् ही लौटेगा कटु सत्य लिए एक दिन मैं हारा सिपाही सा भागा था बिन समर किये उस दिन जब वीरों ने ललकारा था और हम दास थे गुलाम भारत के »

निवेदन

निवेदन ——– ऐ पथिक राह दिखा मुझे मुख न मोड़ चल साथ मेरे भारत आजाद कराना है धर्म मेरा ही नहीं तेरा भी है भयभीत न हो विचार तो कर ध्वज हाथों में है अब आगे जाना है कालान्तर में तुम होगे न हम किन्तु कर्म सदैव साथ रहेगा मेरा निवेदन स्वीकार कर विजयी होकर ही आना है समर में हम ही वरन हम जैसे सैकड़ो है खड़े लड़ने को मरने को और देश के लिए बहुत कुछ करने को – मनोज भारद्वाज »

“आरती माँ भारती की”

माँ भारती तेरी आरती । तेरी आरती माँ भारती ।। माँ भारती तेरे निगहबान सीमा प्रहरी हम पाकर अजेय वरदान डटे हैं सीमाओं पर इस कर्म-भूमि की माटी है मस्तक का टीका है कसम मिटा देंगे सब कुछ तेरी आहों पर माँ भारती तेरी आरती । तेरी आरती माँ भारती ।। देकर अपना लहू सरहदों पर जो सबक बना है देख तिरंगा गौरव-गाथा का सम्मान तना है चरण-धूलि जननी तेरी है मलहम इन घावों पर है कसम मिटा देंगे सब कुछ तेरी आहों पर माँ भारती... »

तुमको रक्त चढ़ाया है

मातृभूमी पर दिल करता है हो जाऊं कुर्बान बना रहे ये प्यारा झंडा भारतवर्ष की शान देश के कितने ही भक्तों ने तुमको रक्त चढ़ाया है तब जाकर ये प्यारा झंडा लालकिला लहराया है आज है फिर वो दिन आया हो इसका गुणगान बना रहे ये प्यारा झंडा भारतवर्ष की शान इस झंडे की ओर जो देखे दुश्मन गन्दी दृष्टी से कसम है भारत माता की वो रह न पाये सृष्टी पे तीन रंग के इस झंडे में कितनो का बलिदान बना रहे ये प्यारा झंडा भारतवर्ष ... »

15 अगस्त

हम स्वतंत्र होगे एक दिन ये आस लिए कुछ प्रण किया था आह! क्या थे वो क्षण जब मैं नहीं हम थे सब ध्येय एक लिए हृदय में बढ़ चले थे ओज लिए सोज़ लिए स्वय को अर्पित कर कर्मपथ पर बढ़ते थे नित्य उत्साह,उल्लास संग भारत माता की जय उदघोष गुंजते थे मेहनत रंग लाई 15 अगस्त 1947 स्वप्न सत्य हुआ उल्लास लिए हम स्वतंत्र हुए नयी सूबह नयी शफ़क मेहताब नया उदित हुआ तदोपरान्त यह खास दिन आजादी के लिए हर वर्ष अवतरित हुआ &nbs... »

“प्रतिभाओं का धनी”

???????? ————————- प्रतिभाओं का धनी ————————— सत्य-बोध के मूल-बीज को प्रकृति ने स्वयं निखारा है प्रतिभाओं का धनी आदि से भारत-वर्ष हमारा है श्वर-व्यञ्जन को गढ़कर हमने शब्द, वाक्य मे ढ़ाल दिया मन की अभिव्यक्ति ने पहली-भाषा रूपी ‘भाल’ लिया “पाणिनि” की कल्पना ने ध्वनि का सूत्रव... »

“मानव”

मानव ^^^^^^ अहंकार का पुतला बन जा तज दे भली-भला, अरे क्या करता है मानव होकर सत्य की राह चला | तू मानव रहकर क्या पाएगा दानव बन जा, दुष्कर है नम रहना सहज है मुफ्त मे तन जा || हो जाए जब पुष्टि वहम की श्रेष्ठ है सबसे तू ही उस दिन ही तेरी काया रह जाएगी न यूँ ही हर प्राणी मन मैला होगा तू ही दूध-धुला अरे क्या करता है मानव होकर सत्य की राह चला तू मानव रहकर… दुष्कर है नम… दुर्लभ तन मे वाश मिला ... »

“शब्दों के सद्भाव”

” माँ ” ——- शब्दों के सद्भाव ^^^^^^^^^^^^^^^^^^ मानवता भी धर्म है जैसे इन्सानियत मज़हबी नाम, शब्दों के सद्भाव भुलाकर जीवन बना लिया संग्राम | सच्चाई के पाठ को पढ़ कर एक किनारे दबा दिया अपनी पनपती नश्लों से ही खुद हमने ये दगा किया इन्हे बताना बताना त्याग दिया क्युँ एक ही हैं अल्लाह और राम शब्दों के सद्भाव भुलाकर जीवन बना लिया संग्राम | मालिक ने तो एक जात इन्सान की सिर्फ बनाई ... »

” देश की आश “

देश की आश ^^^^^^^^^^^^^^^^   आशा है अब आज़ादी के मैं   सपने   देख  सकूंगा, आशा  है    मै   फिर  से प्यारा भारत देश बनूंगा| आशा  मेरे      आँगन मे राहत के सुमन महकेगें, आशा है आने वाले कल को”राम-राज्य” मै दूँगा||   आज़ाद हूँ मै यह सुन-सुन के बस घुट-घुट के रोता हूँ इस आज़ादी को कैसे कहूँ किस हालत मे ढ़ोता हूँ   कलि-काल चक्र यूँ घूमा है चहुँ ओर शोर आतंक का है यूँ उग्र हुआ ह... »

कूटनीति

कूटनीति… राजनीति वट वृक्छ दबा है घात क़ुरीति की झाड़ी मे धूप-पुनीति को अम्बु-सुनीति को तरसे आँगन-बाड़ी ये कूटनीति सा कोई चोचला मध्य हमारे क्युं आया ये चिन्तन भी त्यागा हमने ह्रदय से इसको अपनाया दूर हुए भाई से भाई नीति-ज्ञान की कमी तले “सत्यमेव-जयते” भी भूले सिर्फ अनैतिक पंथ चले निजी स्वार्थ समयानुकूल निज राष्ट्र-धर्म से बड़े हुए परहित,त्याग से आदि-मूल सद्भाव अचेत हैं पड़े हुए सच्... »

प्रतिभाओं का धनी

???????? ————————- प्रतिभाओं का धनी —————————   सत्य-बोध के मूल-बीज को प्रकृति ने स्वयं निखारा है प्रतिभाओं का धनी आदि से भारत-वर्ष हमारा है   श्वर-व्यञ्जन को गढ़कर हमने शब्द, वाक्य मे ढ़ाल दिया मन की अभिव्यक्ति ने पहली-भाषा रूपी ‘भाल’ लिया “पाणिनि” की कल्पना ने ध... »

हे भारत ! भारत बनो।

अपनी जो आज़ादी थी, मानो सदियों के सर्द पर, इक नज़र धुप ने ताकी थी। ‘पर’ से तंत्र, ‘स्व’ ने पायी थी, पर ‘संकीर्ण-स्व’ से आजादी बाकी थी। अफ़सोस…! ये हो न सका, और अफ़सोस भी सीमित रहा। आज इंसानियत की असभ्य करवट से आहत, तिरंगे की सिलवटी-सिसक साफ़ है; बस अब तो भारत चाहता है, हल्स्वरूप हर खेत में हल ईमान से उठ जाए। हे भारत! तीन रंगों का एहसास करो, फिर शायद तुम समझोगे,... »

sone Ka Bharat mera

Sone ka Bharat,mera Chandi ka Gujarat Hai -2 Tajmahal Dekhke,Lalkila Dekhke Dushman bhi Hairan Hai -2 Sone ka Bharat… Gandhi ka jawab Nahi,Nehruji Lajwab Hai-2 Modi Ko Dekhke,Kejriwal Ko Dekhke,mushraf Bhi Hairan Hai -2 Sone ka Bharat… Sachin ka jawab Nahi,Viru Bhi Lajwab Hai-2 Dhoni Ko Dekhke Kohli Ko Dekhke Watson Bhi Hairan Hai-2 Sone ka Bharat… Bacchan ka jawab Nahi,Dharmendr... »

आज़ादी का जश्न

आज़ादी का जश्न

आज़ादी के जश्न बहुत पहले भी तो तुमने देखे माँ के दिल से बहते वो आंसू भी क्या तुमने देखे, भूखे बच्चे लुटती अस्मत व्यभचारी ये व्यवस्था है क्या सच में हो गए वो पुरे सपने जो तुमने देखे , हर किसान गमगीन यहाँ हर पढ़ा लिखा बेचारा है छिपे हुए उनकी आँखों के आंसू क्या तुमने देखे , पर संकल्प आज ये करते हम सब मिल कर है सारे करेंगे सपने वो पूरे जो मिलकर हम सबने देखे , न हिन्दू न मुसलमान न सिख न कोई ईसाई है लड़ कर... »

तिरंगा हमारा भगवान है

तिरंगा हमारा भगवान है

तिरंगा बस झण्डा नहीं हम सब का सम्मान है। तिरंगा कोई कपडा नहीं पूरा हिन्दुस्तान है।। तिरंगा कोई धर्म नहीं सब धर्मों की जान है। तिरंगा बस आज नहीं पुरखों की पहचान है।। तिरंगा बस ज्ञान नहीं ज्ञान का वरदान है। तिरंगा कोई ग्रंथ नहीं पर ग्रंथों का संज्ञान है॥ तिरंगा में दंगा नहीं हिन्दु और मुसलमान है । तिरंगा कोई गीत नहीं प्रार्थना और अजाने है॥ तिरंगा कोई मानव नहीं मानवता की पहचान है। तिरंगा में जाति-धर्... »

तिरंगा

तिरंगा

माँ की गोद छोड़, माँ के लिए ही वो लड़ते हैं, वो हर पल हर लम्हां चिरागों से कहीं जलते हैं, भेज कर पैगाम वो हवाओं के ज़रिये, धड़कनें वो अपनी माँ की सुनते हैं, हो हाल गम्भीर जब कभी कहीं वो, चुप रहकर ही वो सरहद के हर पल को बयाँ करते हैं, रहते हैं वो दिन रात सरहद पर, और सपनों में अपनी माँ से मिलते हैं, वो लड़कर तिरंगे की शान की खातिर, तिरंगे में ही लिपटकर अपना जिस्म छोड़ते हैं, जो करते हैं बलिदान सरहद पर, चल... »

देशभक्ति का पाठ पढ़ाना होगा

जाति धर्म देखे बिना, देशद्रोहियों को अपने हाथों से मिटाना होगा नई पीढ़ी को अभिमन्यु सा, गर्भ में देशभक्ति का पाठ पढ़ाना होगा तुम्हें व्यक्तिवाद छोड़कर राष्ट्रवाद अपनाना होगा हर व्यक्ति में भारतीय होने का स्वाभिमान जगाना होगा लोकतंत्र को स्त्तालोलुपों से मुक्त कराना होगा देशभक्ति को भारत का सबसे बड़ा धर्म बनाना होगा वीरता की परम्परा को आगे बढ़ाना होगा हर भारतीय को देश के लिए जीना सिखाना होगा – Fer... »

कविता

कविता

मेरा देश महान घनघोर घटा में अलख जगा कर देख रहा मतिहीन, जाग सका ना घन गर्जन पर जग सोने में लीन, इस निस्तब्ध रजनी में मै और मेरा स्वप्न महान, खोज रहा अधिगम जिससे जग सच को लेता जान ! देह थकी तो बहुत जरूरी है उसको विश्राम किन्तु न चिंतन को निद्रा गति इसकी है अभिराम | जला हुआ है दीप तो एक दिन उजियाली लायेगा अंधकार से मुक्त मही को लौ भी दिखलायेगा गंगा के तट बैठ पुरवैया के मस्त हिलोरे माँझी की गीतो में क... »

स्वतंत्र भारत

जब स्वतंत्र भारत राज तो और स्वतंत्र हैं विचार तो, फिर घिरे हुए है क्यों सुनो तुम आतंक में भारतवासियों, वीर तुम बढ़े चलो अब आतंकी सारे मार दो, सरहद पर तुम डटे रहो, गद्दार सारे मार दो, जब स्वतंत्र भारत…. भरा हुआ है भ्रष्टो से समाज ये सुधार दो, करो खत्म भ्रस्टाचारी और भ्रष्टाचार को उखाड़ दो, छुपा हुआ काला धन उस धन को भारत राज दो, जब स्वतंत्र भारत…. तुम सो रहे घरों में हो बेफिक्र मेरे साथियो... »

मेरा भारत मा

तुम्हारी कंधे पर, झुकती है हिमालय तुम्हारी छाती से फूटती है गंगा तुम्हारी आचल के कोने से  निकलती है हिंद महासागर मुझे गर्व है कि जन्म इस भूमी के जिसके लिए विश्व तरसे मा तुम्हे प्रणाम है, मुझे हिन्दुस्तानी कहलाते छोटी उच्चा हो जाता है, तिरंगा लहराते ।। »

स्वतंत्रता दिवस

कदम कदम बढ़ा रहे हैं, अपनी छाती अड़ा रहे हैं, कश्मीर की धरती पर वो सैनिक अपनी, माँ का गौरव बढ़ा रहे हैं, तोड़ रहे है दुश्मन पल पल, सरहद की दीवारे हैं, वीर हमारे इनको घुसा के धूल चटा रहे है, जो साथ में रहकर साले पीठ में छुरा घुसा रहे हैं, देश के जवान सामने से इनको इनकी औकात दिखा रहे हैं॥ राही (अंजाना) »

स्वतंत्रता दिवस

चलो मिलकर एक नया मुल्क बनाते हैं, जहाँ सरहद की हर दिवार मिटाते हैं, छोड़ कर मन्दिर मस्ज़िद के झगड़े, हरा और भगवा रंग मिलाते हैं, चलो मिलकर एक….. जिस तरह मिल जाते हैं परिंदे परिंदों से उस पार बेफिकर, चलो मिलकर हम भारत और पाकिस्तान को एक आइना दिखाते हैं, जब खुदा एक और रंग एक है खून का तो, चलो मिलकर हम सारी सर ज़मी मिलाते हैं॥ चलो मिलकर एक नया मुल्क बनाते हैं॥ राही (अंजाना) »

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