गलतफहमी

तीरे-नज़र से दिल जार-जार हुआ।
ऐसा एक बार नहीं, बार-बार हुआ।

देख उनकी तीरे-निगाहें, ऐसा लगा,
कि उन्हें भी हमसे, प्यार-प्यार हुआ।

करीब आते, हकीक़त से वास्ता पड़ा,
मोहब्बत नहीं, दिल पे वार-वार हुआ।

जिंदगी की रहगुज़र में ‘देव’ अकेला,
ना कोई हमसफर, ना यार-यार हुआ।

देवेश साखरे ‘देव’

Comments

18 responses to “गलतफहमी”

  1. Anil Mishra Prahari

    बहुत सुन्दर।

  2. Amod Kumar Ray Avatar
    Amod Kumar Ray

    वाह-वाह

  3. सुन्दर रचना

  4. Satish Pandey

    वाह बहुत खूब

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