गलतफहमी

तीरे-नज़र से दिल जार-जार हुआ।
ऐसा एक बार नहीं, बार-बार हुआ।

देख उनकी तीरे-निगाहें, ऐसा लगा,
कि उन्हें भी हमसे, प्यार-प्यार हुआ।

करीब आते, हकीक़त से वास्ता पड़ा,
मोहब्बत नहीं, दिल पे वार-वार हुआ।

जिंदगी की रहगुज़र में ‘देव’ अकेला,
ना कोई हमसफर, ना यार-यार हुआ।

देवेश साखरे ‘देव’


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18 Comments

  1. PRAGYA SHUKLA - December 19, 2019, 1:10 pm

    Waah

  2. Abhishek kumar - December 19, 2019, 3:50 pm

    Good

  3. Kanchan Dwivedi - December 19, 2019, 4:08 pm

    Nice

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 19, 2019, 7:41 pm

    Nice

  5. Anil Mishra Prahari - December 19, 2019, 8:01 pm

    बहुत सुन्दर।

  6. Amod Kumar Ray - December 19, 2019, 9:12 pm

    वाह-वाह

  7. Pragya Shukla - December 20, 2019, 10:33 pm

    सुन्दर रचना

  8. Reema Raj - December 21, 2019, 12:46 pm

    वाह वाह!

  9. Satish Pandey - July 31, 2020, 11:25 am

    वाह बहुत खूब

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