दूध का जला

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जो जैसा दिखता है,
वो वैसा होता नहीं है।
दूध का जला बगैर फुंके,
छाछ भी पीता नहीं है।।

लोग चेहरे पर चेहरा लगाए होते हैं,
सूरत से सीरत का पता चलता नहीं है।
मुंह में राम बगल में छुरा छिपाए होते हैं,
अब तो अपनों पर भी यकीं होता नहीं है।।

देवेश साखरे ‘देव’

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15 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 15, 2019, 6:20 pm

    Nice

  2. nitu kandera - November 15, 2019, 8:57 pm

    वाह

  3. NIMISHA SINGHAL - November 16, 2019, 12:49 am

    🤐

  4. Sukhmangal - November 16, 2019, 7:52 am

    वाह

  5. Abhishek kumar - November 23, 2019, 10:33 pm

    बेहतरीन

  6. Pragya Shukla - December 10, 2019, 11:16 am

    👏👏

  7. Pragya Shukla - December 10, 2019, 11:17 am

    सही

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