“देर तलक”

ღღ_कल फ़िर से दोस्तों ने, तेरा ज़िक्र किया महफ़िल में;
कल फ़िर से अकेले में, तुझे सोंचता रहा मैं देर तलक!
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कल फ़िर से तेरी यादों ने, ख़्वाबों की जगह ले ली;
कल फ़िर से मेरे यार, तुझे देखता रहा मैं देर तलक!
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कल फ़िर से तेरी गली में, भटकने की आरज़ू हुई;
कल फिर से एक बार, ख़ुद को रोकता रहा मैं!
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कल फिर से तेरा एहसास, मुझे छूकर गुज़र गया;
कल फिर से तेरी तलाश में, यूँ ही भागता रहा मैं!
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कल फिर से मैंने नींद से, वादा कियां था सोने का;
कल फिर नींद में “अक्स”, जागता रहा मैं देर तलक!!…..‪

#‎अक्स‬

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