सर्दी और बेबस गरीब बच्चे

रूह भी कांपती है ठंडक मे कभी- कभी,

याद आती है हर मजबूरियाँ सभी तभी। 

इन्सान को ज़िन्दगी की कीमत समझनी चाहिये, 

जो हो सके मुनासिब वह रहम करना चाहिये। 

जीवन है बहुत कठिन कैसे यह सब बताऊँ? 

मजारों पर शबाब के लिए चादर क्यों चढ़ाऊँ? 

ठिठुरता हुआ मुफलिस दुआयें कम न देगा, 

खुदा क्या इस बात पर मुझे रहमत न देगा।।


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13 Comments

  1. Pragya Shukla - December 9, 2019, 11:37 pm

    सुन्दर स्वाभविक

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 10, 2019, 7:15 am

    सुंदर

  3. Poonam singh - December 10, 2019, 1:31 pm

    Nice

  4. Ashmita Sinha - December 10, 2019, 1:34 pm

    Nice

  5. देवेश साखरे 'देव' - December 10, 2019, 3:11 pm

    सुन्दर

  6. Abhishek kumar - December 14, 2019, 5:51 pm

    सुन्दर रचना

  7. Monu Sharma - December 15, 2019, 11:52 am

    Good

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