बचपन
पेट की भूख छुड़ा दिया, कापी पेंसिल और चाक। कारखाने में जिंदगी बीता रहा, किया उम्र अपना अब राख।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
पेट की भूख छुड़ा दिया, कापी पेंसिल और चाक। कारखाने में जिंदगी बीता रहा, किया उम्र अपना अब राख।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
उम्मीदों पर बसा है यह संसार, नशे को देगा हालात सुधार । उम्मीद कभी तुम ना हारना, लौट आयेगा एक दिन भटका यार ।। ✍महेश…
जन्नत के आश में लगाते है कस, धुम्रपान करके पाते है नर्क । इतना ही समझ होता तो, क्या रह जाता इनमें और मुझमें फर्क।।…
बालश्रम के कलंक को, चलो मिटाये मिलकर हम। देकर छोटू को विद्या उपहार, सारे कसक को मिटाये हम।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नशे का व्यापार जो करते है, लिप्त होता उनका परिवार। चंद खुशियों के चक्कर में, बर्बाद हो जाता पुरा परिवार।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बच्चें को बचपन तपाना मंजूर था, मेहनत मजदूरी की रोटी कुबूल था। शान से जीना शान से मरना मां ने सिखाया था, इसलिए आत्मसम्मान में…
किस किस से उम्मीद लगा बैठेंगे, चारों तरफ नशे का जंजाल है। गली मोहल्ले चौराहों पर, दुध से ज्यादा नशे का व्यपार है।। ✍महेश गुप्ता…
उम्मीद और प्रेरणा का हम करते हैं सम्मान, बाल बचपन का हम करते हैं सम्मान। भूखे को रोटी खिलाना है मेरा अधिकार, बचपन को संवारना…
इसी समाज में सीता को भी अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी। इसी समाज के कारण निर्दोष जानकी वन के बीच पड़ी थी।।
मां भारती वीणावादनी ये घाव कैसा है, शब्दों की झुंझलाहट में फटकार कैसा है। कण्ड से निकलते झूठ का ये भाव कैसा है, ज्ञान की…
नारी तुम हो बड़ी बलशाली, हारना नहीं तुम कभी हालातों से। लड़ते रहना खुद को साबित करना, मात ना खाना तुम कभी अपने बातों से।।…
कौन किया हालात तुम्हारा हे मां वीणावादनी, शिक्षा के धरोहर ही लगा दिए है दाग मां वीणावादनी। दृष्ट के कण्ठ,ज्ञान के भण्डार को छीन लो…
शिक्षा के आंगन में सौदेबाजी हो रहा, शिक्षक ही शिक्षा का बोली बखुबी लगा रहा। मां सरस्वती को तांक पर रखकर, शिक्षक दिन रात ज्ञान…
धरा पर जब जब बढ़ता अत्याचार, नारी धारण करती रूप विकराल। खुद से करके नारी सोच विचार, पाप के अन्त के लिए उठाती भाल।। ✍महेश…
ज्ञान की दो चार बातें सीखकर इंसान, मां वीणावादनी का करता दुत्कार । सीख पढ़कर शब्दों का वर्ण संसार, अपने ज्ञान को समझता इंसा महान…
कितना भी बना लो शिक्षा को व्यापार, मां वीणावादनी करेंगी अपने बच्चों पर उपकार। शीश आशीष ज्ञान का भण्डार मन मस्तिष्क में भरकर, करती रहेंगी…
शिक्षा को शिक्षा ही रहने दो, मां सरस्वती मुझे वर दो । सौदेबाज शिक्षकों को दण्डित कर, हे हंसवाहनी मेरे उर का तम हर दो।।…
झूठ फरेब की कलंक से कलंकित होती मां, कण्ड ज्ञान का भण्डार देकर खाती अब मात। हिंद के सिपाही थाम लिए अंग्रेजी का हाथ, दाग…
ज्ञान कि देवी सुर कण्ठ वरदायनी, शत् शत् नमन तुम्हें करें हम सब । जीह्वा पर हम सबके करती हो वास, हे वीणावादनी नमन करें…
शत् शत् नमन करेंगे गुरूवर, शिक्षा का वरदान दे दो । मां सरस्वती को प्रणाम करके, विद्या दान का संकल्प हमें दे दो।। ✍महेश गुप्ता…
मन्दिर बन्द है फैक्टरी बन्द है बन्द है कारोबार। घर में सोना बाहर कोरोना जीना है दुश्वार।।
जनताओं को कैद कर दो’कोरोना के नाम पे। बिजली पानी भी मुफ्त करो कोरोना के नाम पे।।
रंग बदलती दुनिया में बेरंग पड़ा है सबका जीवन फूलों से थोड़ा रंग चुरा कर तितली से थोड़ा रंग चुरा कर भर लो अपने जीवन…
इस घर की कैद ने भी क्या खूब काम किया बिखरी तस्वीरों को करीने से सजा दिया फिर से याद आए वह पुराने साथी कुछ…
चलो दर्द को भूल जाते हैं हंसी की ट्रेन पकड़ कर खुशी के संसार में जाते हैं पुरानी यादों में से ‘कुछ’ को चुनकर फिर…
जब हम साथ होते हैं हाथों में हमारे हाथ होते हैं दुनिया की उलझनों से दूर सिर्फ हम और हमारे जज्बात होते हैं❣️❣️
छोटा सा एहसान कर के लोग ताउम्र जताते हैं कितने मासूम है वह मां-बाप जो सब कुछ करने के बाद भूल जाते हैं….
बदले तो वो थे ….. इल्जाम हम पर लगा बैठे हमने तो ख्वाब सजाए थे वो तो उनको ही जला बैठे।
सब कुछ कहां कह पाते हैं कुछ शब्द अधूरे रह जाते हैं कुछ बातें मन में आती हैं कुछ मन में ही रह जाती हैं…
तुम कृपाण रखते हो तो मैं भी कटार रखती हूँ। तुम एतवार रखते हो तो मैं भी प्यार रखती हूँ।।
बेशक़ कड़ा है लोहे का फिर भी है चूड़ियों का भाई। भाई वीर कहलाता है तो बहना क्यों कहाती अबला दाई।।
जब भी देखता हूँ मैं इस रोटी के खुरचन को तो माँ आ जाती है यादों में। तवे पे रोटियाँ बनाती जब जला -जला के…
मां की लोरी बड़ी सुहाती, मां की ममता याद दिलाती। मां अपनी सर्वस्व अर्पण करती, मां अपने हिस्से की निवाला खिलाती।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मां की ममता बड़ी सुहानी लगती है सबसे न्यारी । बचपन को मेरे सिंच रहीं है बनाकर फूलों की क्यारी, दुध पिलाकर गले लगाकर पलकों…
कांप उठे दुश्मन सुनकर नाम महाराणा का, थर थर कांप उठे देख वीरता महाराणा का। देश के लिए समर्पित प्राणों का दिया आहुति, जयकारा लगाओ…
मां की गोदी में खेलकर बड़ा हुआ, मां के क़दमों को चूमकर खड़ा हुआ। दुध पीकर मां का आंचल का मुझे प्यार मिला, मां के…
फूल खिले हैं डाली डाली भक्तों के हाथ में माला है। तुम तक कैसे पहुँचें भगवन मन्दिर में लटक रहा वस ताला है।।
कोरोना भगाने को हम सब घर में बन्द रहे दिन पचास। कोरोना तो भागा नहीं अब घर भी बन गया एक वनवास ।।
कर्ण ने कवच कुण्डल दान किया दानवीर कहलाने के लिए। दधिचि ऋषि अश्थि तक त्यागे आखिर क्या पाने के लिए।
रंगमंच पर हर किरदार अपना एक महत्व रखता है। गूंगा बनकर चार्ली चेप्लिन दुनिया को खूब हँसता है।।
जो रोने भी ना दे बन के आँख का आँसू बरसे वो प्यारी माँ होती है
क्या लिखूं तुझ पर ? तू खुद शब्दों की माया है, खुद ना आ सका विधाता इसलिए तुझे भिजवाया है। Happy mother’s day
जब से सावन मेरी जिंदगी में बहार बनके आया तब से हम कविताओं को अपने डायरी में जगह नहीं देते।
दिन अरतालिस बन्द रहे सब घर के भीतर काम काज सब छोड़ व्यापार। फिर भी कोरोना जालिम बन हो गया बन्धु साठ हजार।।
कुछ खट्टी कुछ मीठी बातों को सुनने और सुनाने को जी करता है मेरा जब भी तेरी आँचल में आ जाता हूँ। तू जननी है…
देखते देखते हम बदनाम हो गए देखते देखते हम सिरफिरे और नाकाम हो गए, कल कहते थे हम जिंदगी है उनकी आज उनके लिए हम…
सोच विचार करते करते, जीवन की नैया डुब गयी। बैठ कर गलतीयां गिनते गिनते, बटोही आधी उम्र बीत गयी ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
राह में चलते चले मनु, खुद को खुद से ढ़ो रहें। सोच विचार करके मनु, अपने आप को खो रहें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
खोल यादों की पोटली सोच विचार कर रहें, मानव अपने कर्मों पर गहन विचार कर रहें। कैसी ये मुफलिसी है छायी मेरे चेहरे पर, अपने…
आ बटोही बैठकर कुछ स्मरण कुछ चिंतन करें, यादों की पोटली खोलकर आ बटोही मंथन करें। कुछ तेरे कुछ मेरे सपनों का आ बटोही हवन…
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