प्यार के चक्कर मे

प्यार के चक्कर में
मत लिख सैकड़ों कविता,
ये सब तो पूर्व में
कह कर गए हैं सब वियोगी कवि।
तब भी पसीजा क्या कभी
दिल बेवफाओं का।
कलम मत घिस वियोगों पर
नए योगों की रचना कर।
—- डॉ0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत,


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12 Comments

  1. MS Lohaghat - July 13, 2020, 9:35 am

    वाह जबरदस्त बात कह दी

  2. Indra Pandey - July 13, 2020, 10:45 am

    Kamal hai

  3. Satish Pandey - July 13, 2020, 10:54 am

    Thanks

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 13, 2020, 12:17 pm

    Wah

  5. Suraj Tiwari - July 13, 2020, 7:15 pm

    वाह.. वाह… जबरदस्त शत प्रतिशत सत्य बात हैं…

  6. Abhishek kumar - July 13, 2020, 9:24 pm

    नए योगों की रचना कर
    👏👏👏👏👏

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