“सावन” पर मुझे मिले, कुछ अनदेखे, अनजाने दोस्त जिनकी समीक्षा पाने की, प्रतीक्षा रहती है हर रोज़ लेखन की इस नगरी में, स्वागत करते हैं सबका शत शत नमन है उन मित्रों को,🙏 मेरा भी […]
“सावन” पर मुझे मिले, कुछ अनदेखे, अनजाने दोस्त जिनकी समीक्षा पाने की, प्रतीक्षा रहती है हर रोज़ लेखन की इस नगरी में, स्वागत करते हैं सबका शत शत नमन है उन मित्रों को,🙏 मेरा भी […]
कहानी लापता है, किरदार की खबर नहीं फिर भी वहम है कि मेरा जाता ही नहीं
अंगारों से खेलूंगा और तूफ़ा से लड़ जाऊंगा मंज़िल मुठ्ठी में होगी ,ऐसे पीछे पड़ जाऊंगा एक हार से कम ना आंको मुझे जरा दुनिया वालों हर मुश्किल घुटने टेकेगी, गर जिद पे अड़ जाऊंगा […]
मजदूर हूं मैं जरूरत तो पड़ेगी मेरी , क्योंकि मैं निर्माता हूं । माना झोली खाली है मेरी, मजदूरी करके खाता हूं। बहा कर खून-पसीना ; खुशहाल देश बनाता हूं। पूछो उन दीवारों से, भवनों […]
गजल- असर दिखाने के बाद | समझा क्या खोया पाया तुझसे बिछड़ जाने के बाद | लूट गया सब कुछ मेरा एक तेरे गुजर जाने के बाद | दिया जवाब मुक्कम्मल दुशमनों घुस आए सीमा […]
लगी है सिन्हे पे, दुश्मनों के गोली, एक तरफ है ,इंकलाब की बोली। मरते दम तक, हिम्मत न हारेंगे, उड़ा देंगे हम, दुश्मनों के टोली।। मुद्दत बाद ,सपना होगा साकार, जाने दे मत रोक, ए […]
दुनिया देखूं या खुद को देखूं , ये कैसी घड़ी आई हैं सब कुछ होकर भी हम अकेले, यह कैसी तन्हाई हैं ख़ुद की इच्छा मार कर मैंने, जो दुनिया संग दोस्ती बड़ाई हैं आज […]
सोना तपा कुंदन बना, कुंदन तप के राख मैं तपी तपती रही, कुंदन बनी ना राख बरखा ऋतु आई, आई नई कोंपल हर शाख मेरे मन भी उठी उमंगें, छू लूं मैं आकाश
आपकी चोटी के पेंच किसी नागन से कम नहीं। कोई आप से टकरा जाए किसी में इतनी शामत नहीं।।
देर नहीं लगती कोई क्यों इतना एहसान फरमा रहा, कुछ तो है जो संग आ रहा खाली जेब को, कभी किसी की नजर नहीं लगती , रिश्ते कब मतलबी हो जाए , देर नहीं लगती। […]
जो अपनी खुद की पहचान छिपाये बैठे है। वो नासमझ मेरे वजूद पर शर्त लगाये बैठे है।।
सबने अपने किरदार पर पर्दे डाल रखे है। फैसला मेरा करेगे यह वहम भी पाल रखे है।
दुआ इतनी है कि रोज इस तरह भी बेशुमार आएं। दिन ढले तो बहार आए रात गुजरे तो बहार आए। घटाएँ चिलमन हैं खुशियाँ हैं रोशनी की किरण, घटाएँ ढलती रहें रोशनी के गुबार आएं। […]
मैं अखण्ड हूं, प्रचंड हूं, निडर हूं ,अजर हूं, संतोषी हूं , मुस्कराती हुई ख़ामोशी हूं, कड़े दर्द से लड़ सकता हूं, मैं सह सकता हूं।- २ लोगो के बहानो को, अपनों के तानों को, […]
झूम के तिरंगा देखो आया। १५ अगस्त में खूब लहराया।। क्या बच्चे क्या बूढ़े क्या जवान। सभी वंदेमातरम के गीत सुनाया।। तिरंगा जब बना देश की पहचान। सुभाष भगत आज़ाद को भी हर्षाया।। हिंदु ,मुस्लिम, […]
गजब संघर्ष सा देखा कवियों के बीच अपनी मौलिकता को छोड़कर होड़ सी करने लगे, नशा इतना किया गहरा कि किसी कवि के विचारों को स्वयं की बोलकर कविता कहने लगे कविता खो दी मौलिकता […]
मेरे लबों की आप सदा बनके आइए। खुद जाम पीजिए, हमें भी पिलाइए। नज़रों में आपकी मयखाना नज़र आये। मखमूर क्यों न हो इनमें जो उतर जाए। मयकश की लाज रखिए तशरीफ़ लाइए। खुद जाम […]
वो मेरी बचपन की सखी, मिली मुझे कितने दिन बाद जानती थी मैं ये कबसे, आएगी उसे एक दिन मेरी याद घर गृहस्थी में व्यस्त रही थी, चेतन मन में थे कितने काम पर अवचेतन […]
हम भी रोये नहीं मुद्दतें हो गयीं। पत्थरों की तरह आदतें हो गयीं। जबसे बेताज वह बादशाह बन गया, पगड़ियों पर बुरी नीयतें हो गयीं। जख्म भी दर्द देते नहीं आजकल, कम सितमगर तेरी रहमतें […]
जय महादेव जय मृगपाणी दक्षाध्वरहर जय कामारी शशिशेखर ,नीलकंठ भगवन जय महाकाल जय त्रिपुरारी शिव शंकर, गंगाधर शंभू जय जगद्गुरू जय व्योमकेश मुझे अपनी शरण में लो भगवन ,सर्वज्ञ अनिश्वर जय महेश। ✍️ देव 🙏
जिसको पल-पल खोजू बाहर, ढूंढे से न मिलता हैं ऐसी भी क्या ख़ता हुई जो, हर बार आशा का दीपक बूझता हैं एक छोटी सी चाह थी मेरी, कि सबके सपने पूरे करूँ टूटा हुआ […]
हास्य कविता बिट्टू घूम रहा था गुमसुम, हाथ में लेकर एक फोटो मां ना जाए छोड़कर कहीं, इस उलझन में था वो नाना जी को फोन लगाया, अपने मन का हाल बताया नाना -नानी अचरज […]
उदासी मधुमक्खी के छत्ते सा है ये ज़हान , यहां सब, मतलब से झांकने वाले हैं। अब किसे मैं यहां अपना कहूं, यहां सब काटने वाले हैं । मां को छोड़कर, सब लोभी है, ढोंगी […]
चला शावर है अंबर से भिगोने धरती का आंगन खिला हर पात डाली का बही गंगधार भी कलकल करे कलरव हर पंछी चली है नाव कागज की समेटे ख्वाहिशें मन भर हुआ है बालमन उच्छृंखल […]
माँ मेरी ****** मुझे मेरा खोया बचपन लौटा दे विकल हुआ मेरा क्यूँ मन ,फिर आंचल लहरा दे मुझे मेरा खोया बचपन लौटा दे । छूट गये क्यू खेल- खिलौने, जिम्मेदारी से घिर गए सपने- […]
आज जब मानव के बजूद पर बन आई है फिर भी जाति-धर्म की ये कैसी लङाई है गरीब देखे न अमीर ये वैश्विक महामारी है मानव बनकर रहने में हम सब की भलाई है मानव […]
तुझे मैं भूल नहीं सकता तू मेरा पहला प्यार है तू ही मेरा इकरार है तू ही मेरा इज़हार है मैं तुझे भूल नहीं सकता तू मेरा पहला प्यार है तू मेरी मंजिल है तू […]
मेरी ख्वाहिशें समुंदर जैसी गहरी हैं, और तेरा प्यार आँखों के आँसू जितना छिछला।
मैं लिखता हूँ रात भर कविता तू सुबह पढ़ कर खुश होती है। मैं जब कभी हँसता हूँ खुशियों में मुझे तू हँसता देख कर रोती है।
ख्वाइशें पूरी करूंगा मैं तेरी आखिरी दम तक साथ निभाऊंगा तेरा धरती से फलक तक
बेफिक्र बचपन और जिन्दगी है न्यारी, थोड़ी शरारत और साँवली सूरत है प्यारी। मम्मी की गुड़िया और पापा की दुलारी, रहती उनके दिल में बनकर राजकुमारी। ख्वाहिशें हुई हैं पूरी चाहे जितनी हो गरीबी, भूल […]
प्यारे बच्चों, प्यारे बच्चों आओ मेरे पास, दूर वहाँ क्यों बैठो हो तुम हो क्यों इतने उदास? आओ मिलकर पाठ पढ़ें कुछ सीखें नयी बात, मिल जुलकर हम साथ रहें और मन में हो विश्वास। […]
सूरज की किरणें भी सुबह-सुबह कयामत ढा रही हैं, पूछ रही हैं, कैसे हैं वो? जिनकी तुम्हें याद आ रही है।
बुरा उन्हें कहूँ तो ये बिल्कुल गलत बात होगी……. शायद मैं ही बुरा हूँ तो उनसे मुलाकात क्यों होगी..?
जरूरत पड़ने पर आज मुकर गये हो तुम, जमाने की तरह कितना बदल गये हो तुम। दोस्त!ये मंजर भी गुजर जायेंगे किसी तरह से, पर आज चुप रहकर बहुत दर्द दे गये हो तुम।।
गरीब की कब्र पर कहाँ कब दीप जलते हैं , रेगिस्तान में आसानी से कहाँ फूल खिलते हैं। चाँद-तारों की ख्वाहिश तो महल वाले रखते हैं हम जुगनू हैं अपनी फिजाओं के….हम तो खुद से […]
आरज़ू नहीं रखता कि पूरी कायनात में मशहूर हो शक्सियत मेरी। जनाब! आप जितना जानते हो सच में उतनी ही है पहचान मेरी।।
मोमबत्ती जलाने से अब कुछ न होगा, कोर्ट के चक्कर लगाने से कुछ न होगा। बलात्कारियों को एक बार जिन्दा जलाकर तो देखो….. फिर किसी ‘निर्भया’ और ‘आसिफा’ का बलात्कार नहीं होगा।।
संवर कर आऊँगा जब तुम्हारी महफिल में , निगाहें तुम्हारी सिर्फ मुझ पर ठहर जायेगी। देखेंगे जब सब तुम्हारे होंठो पर हल्की-सी हँसी, महफ़िल में हमारी मोहब्बत ही चर्चा बन जायेगी।
उम्मीदों का दीया जलाकर इस आशा में बैठे हैं कल सूरज खुशियाँ लाएगा चाँद सजाकर बैठे हैं
तेरी सारी सच्चाई जानता हूँ मैं पर तेरी खुशी की खातिर मुझे अनजान बनना अच्छा लगता है। मैं चाहता हूँ तू अपने मुंह से अपनी सच्चाई बता! तुझे बेवफा बुलाना ना मुझे खराब लगता है।
सच बोलने वालों की जहां में कदर नहीं होती इमानदारों के पास मखमल की चादर नहीं होती। सो जाते हैं वह तो धूप की चादर बिछाकर उनके सपनों में पंखों की उड़ान नहीं होती।
तुझसे लंबी जुदाई सही ना जाएगी तेरे जाने से मेरी आँख भी भर आएगी हो ना जाना कहीं दूर मुझसे तू तेरे बिन यह दीवानी मर ही जाएगी।
शाम से ढूंढती थी मैं तुझको तू न जाने कहाँ खो गया मैं तुझे प्रेम की धरती समझती थी तू नफ़रत का आसमान हो गया।
तुम्हारी ख्वाहिशों को पूरा करने आऊंगा जरूर ना उतरा है ना उतरेगा तुम्हारी आँखों का सुरूर
संकल्प लें कि समाज में शिक्षा का संदेश फैलाएंगे, बेटा हो या बेटी सभी को एक साथ पढ़ाएंगे।
किसी की अहमियत हमें तभी होती है जब वह हमें छोड़ कर चला जाता है। ——————————————– और किसी की चाहत हमें तभी होती है जब वह हमारे मुकद्दर में नहीं होता है।
नारी का सम्मान करो हर पल आने ना दो उसकी आँखों में आँसू, ना धन चाहे ना दौलत चाहे वह तो है प्रेम-पिपासु।
तुम्हारे सपनों में कोई आता है क्या? तुम्हारे ख्वाब कोई सजाता है क्या? जिस तरह मैं तुम्हारे आगे बिना गलती घुटने टेक देता हूँ उस तरह तुम्हें कोई प्यार जताता है क्या?
सीमा पर यह बम बारूदें बंद करो लड़ना है तो सामने आकर जंग करो हम भारतवासी हैं तुम को धूल चटा देंगे तुमको तुम्हारी सीमा पर आकर मिट्टी में मिला देंगे
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