बहुत ही ख़ूबसूरत होती है दोस्ती, निज स्वार्थ से ऊपर होती है दोस्ती। कुछ रिश्ते मिलते हैं, हमें जन्म से, कुछ रिश्ते मिलते हैं, समाज की रीत से मगर निज चुनाव पर होती है दोस्ती […]

लाखों की डिग्री लेकर, खोज सके न वैक्सीन| कवि खोज दिए कलम से अपने, कोरेना का ऐतिहासिक सीन| नेता की नियत बताएं, डॉक्टर मिल करते खेल| लिवर किडनी गुर्दा ही बेचे, कोरोना में गजब ही […]

मुझको सो जाने दो जीवन रात हुई अब बहुत घनी नैनों से ओझल हैं सपनें साँसों से भी ठनी-ठनी आसमान बाँहें फैलाकर मेरे स्वागत को आतुर है धरती पर बस बोझ बनी हूँ मिट्टी में […]

बचपन जल रहा है, जल उसे बुझा न सकेगा, जल रहा है बड़ों की इच्छाओं के तले, उनकी आशाओं के तले, चाहते हैं पूरे हो सब ख्वाब, पर कभी पूछते नहीं उनसे, बांधकर एक सीमित […]

लफ्जों की पोटली , बांध लो ना तुम , क्या कहते हैं ,वो जरा सुन लो ना तुम, तब मांपना और तोलना , उनकी बातों को , फिर वह पोटली खोल देना तुम, तर्क वितर्क […]

जिंदगी को कहीं कैद कहीं आजाद देखा फिर भी न बदलता उसका स्वभाव देखा बुंद बनकर आसमां से लहराते आते देखा कयी बोझिल चेहरे को पल में हर्षाते देखा चूल्हे पर जलकर फिर आसमां में […]

सतयुग में ऋषि – मुनि करते थे हवन, ताकि, ना रहें कीटाणु, शुद्ध हो वातावरण । कलियुग में ऋषि – मुनियों का भेष बनाकर, बैठे हैं कुछ पाखंडी………………….. इनसे बचकर रहना मनुज, जाग सके तो […]

जब से अलग लिखने लगे हम सस्ते में बिकने लगे मौजें अलग होने लगीं पंख भी गिरने लगे बहरूपिया मन मोहकर बन बैठा है मेरा पिया हिय को अलग ना कर सके सपनें जुदा होने […]

मां और पत्नी दोनों गुरू, दोनों से नव-जीवन शुरू। मां कहे , पत्नी सिखाती, पत्नी कहे, मां सिखाती । विनम्रता की पराकाष्ठा देखो, सिखाने का श्रेय एक-दूजे को दिलाती ✍️…गीता

वफा के बदले उनके शहर में”अमित”बेवफ़ाई ही मिला। चलो गम को भुलाने के लिए मयख़ाने में मय तो मिला।।

अगर जग बदलता है बदलने दीजिए वक्त के साथ ही चलना सीखिए आसमानों को छूने की हसरत है अगर दिल में कोई ख्वाब पालना सीखिए जीवन जीने का आनन्द है तभी दर्द औरों का उठाकर […]

मां ने जब रोटियां बनाना सिखाया , मुझे कुछ समझ ना आया , कभी रोटियां जली तो कभी हाथ, फिर सीख ही गई मैं, रोटियां बनाना, और अब रोटियां नहीं जलती , बस जलते हैं […]

समय नहीं समय नहीं यह कहते थे लोग, लगता था यह ज़िन्दगी बन गयी एक बोझ. जीवन यूँ ही काम करते हुए बीत जायेगा, अपना बस नाम का ही अपना रह जायेगा. समय एक सा […]

हैसियत क्या थी मेरी पूछिए मत, बस किताब के कोरे पन्ने थे , लिखते रहे अपनी रूबानी, जब बनी ना कोई गजल ना कोई नज़्म, फटकर सिमटकर पैरों तले बस कुचले गए।

माँ ही है संतान मोह में, सबसे से लड़ जाती है| जिसकी माँ खुद जज वकिल बने, उन बच्चों की हार नहीं हो सकती है| लाख गुनाह छिप जाते है, बस माँ के आ जाने […]

कविता- कंघी —————— कभी इसको रख गोदी मे रोटी देती थी, कभी इसको काजल कंघी तेल कराती थी, कभी इसको कंधो पर रख कर, मेले कि शैर कराती थी, थक! जाता था, लाल मेरा जब, […]

ये कोरोना की बीमारी, ना इंसान से डरी ना हारी । इसने इतने सबक सिखाए , ज़िन्दगी में किसी ने नहीं सिखाए । कोई कहे काढ़ा पीलो, कोई जड़ी – बूटी बताए । तुक्का मार […]

‘वजह हुआ करती है नज़रों के झुक जाने में, बेबाक आँखों में शर्मिन्दगी का सलीका नही होता.. वो तोड़ सकते हैं मेरे यकीं को किसी भी वक्त मगर, बेरुखी जताने का ये आखिरी तरीका नही […]

यह माया नगरी बड़ा परदा लुभाती चकाचौंध रंगीली दुनिया ख्याली मंज़िल एक हादसा परत दर परत खुलते राज डरावने सच नकली चेहरे अंधी दौड़ सर्वोपरि माया धज्जियां उड़ाते रिश्ते बिछा माया जाल दिखा सपने देती […]

हाल ही में सतीश पांडे जी को अगस्त माह में आयोजित काव्य प्रतियोगिता में किये गये सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन के लिये ‘अमर उजाला’ और ‘शाह टाइम्स’ ने अपने अखबार में स्थान देकर सम्मानित किया। सावन परिवार […]

हां, झूठी है औरत, अपनी ख्वाहिश तक ही नहीं सीमित, औरों के लिए जगे रात तक हां, झूठी है औरत। मायके की तारीफ़ करे ससुराल में, ससुराल की कमी ,ना बताए किसी हाल में। कोशिश […]

इस तरह क्यों भेद का तुम भाव रखते हो, बताओ, मैं तुम्हारी ही तरह इन्सान हूँ इंसान समझो। मुफलिसी है श्राप मुझ पर बस यही है एक खामी, अन्यथा सब कुछ है तुम सा एक […]

आपको लगता है क्या मैं चाँद हूँ या चाँदनी रात के झुरमुट में बैठी हूँ मैं कोई अप्सरा गीत हूँ या हृदय की टूटी-फूटी रागिनी… आपको लगता है क्या.. अमरत्व का वरदान हूँ या करुणत्व […]

हर क्यूं का जवाब नहीं होता, हर जवाब लाजवाब नहीं होता । यूं तो हम ख्वाब देखते हैं बहुत सारे, पर, हर ख्वाब तो पूरा नहीं होता ।

नातियाँ धरातल तक पहुंचें बेरोजगारी पर नया करो कुछ यह सबसे प्रमुख मुद्दा है इस मुद्दे पर किया करो कुछ। देखो ! देश के नौजवान कैसे सड़कों पर भटक रहे हैं, रोजगार का संकट सिर […]

इन्सानियत को हमने रुलाया है आज डर ने मुकाम दिल में बनाया है मंदिर से अधिक मधुशालाएं हैं ऐसा बदलाव अपने देश में आया है ये वस्त्रहीन सभ्यता अपने देश की नहीं पर्दा ही आज […]

सुबह सुबह में चलो साफ करें अपने घर और दिल को साफ करें, सोहती फेर लें, पोछा लगा के साफ करें अर्श से फर्श तक न दाग रहें। यदि कहीं लूतिका ने जाल बुन के […]

आज का यह भारत प्रतिफल है उनके अथक प्रयासों का सावित्री बाई फूले जो थी शिक्षिका, उनकी शिक्षा नीतियों का भूलेगी कैसे भारत की बेटियां, ऋणी है जिनकी संकल्प शक्ति का जिनके जज़्बातो से, बल […]

लडकियों की पथप्रदर्शिका थी जो घर से निकल पाठशाला का रूख करवायी थी जो पति ज्योतिबा संग शिक्षा की अलख जगाने चली थीं जो तमाम बाधाओं पे पार पाते हुए, पहली पाठशाला बालिकाओं की खोली […]

बबीता मैम , बहुत सारे शिक्षकों का मुझे मार्गदर्शन प्राप्त हुआ परन्तु आपनें मुझे जीवन जीना सिखाया आपने । मैं तो कुछ भी नहीं थी परन्तु आपने मेरी सुप्तावस्था की क्षमताओ को उजागर किया आपने […]

तुम्हारी एक हंसी सारे गम भुलाती है, इस तरह हँसते रहो और खिलखिलाते रहो। गीत खुशियों के गुनगुनाते रहो जिंदगी को हंसीं बनाते रहो। बात ही बात में ढूँढो खुशियां, पलों को भोग, मुस्कुराते रहो।

मेरी शिक्षक मेरी मां ही तो है , सिखाया उसने चलना , बोलना और पढ़ना -लिखना। अर्थ न जाने कितने समझाएं । पूछो कितनी ही बार ;वह प्रश्न , फिर भी कभी ना डांट लगाए […]