टूटे हुए अरमानों को बचा रखा है, सबकी नजरों से छुपा रखा है , जी तो हम भी रहे हैं लोगों के बीच, मगर अपने जज्बातों को दबा रखा है , किस पर यकीन करें […]
टूटे हुए अरमानों को बचा रखा है, सबकी नजरों से छुपा रखा है , जी तो हम भी रहे हैं लोगों के बीच, मगर अपने जज्बातों को दबा रखा है , किस पर यकीन करें […]
उनसे उम्मीद लगाना बेकार हैं क्योंकि शाम की खिड़की से , सुबह का उजाला नहीं दिखता।
सच की जमीन पर, हम भी चल ना पाए , और औरों से उम्मीद लगा रखी है।
इमारतें मजबूत हो तो, साथ सभी का होता है, वरना खंडहरों को, कौन अपना आशियाना बनाता है।
हमें आता जाता कुछ भी नहीं, सिर्फ शब्दों में खेल रहा हूं| परिणाम का हमें कुछ पता नहीं, मीठा खट्टा बोल रहा हूं| शब्द आन मान शान हैं, शब्द शब्द वेदी बाण है| शब्द राजाओं […]
अपने भाई दूज की तुमको खिला मिठाई आँखों में थी हया ग्लास पानी का लाई… तुम तिरछी नज़रों से मुझको यूँ देख रहे थे मन ही मन में कितने लड्डू फूट रहे थे… ना तुम […]
अध्य्यन-अध्यापन का बढ़ता व्यवसायीकरण राष्ट्र के पतन व जनता के घुटन का है कारण अत्याचार कोई जब हद से अधिक बढ़ जाता है प्रकृति तब बचने का कोई अवसर दिखाता है शिक्षा जन जन की […]
जूम गूगल मीट पे क्लास चल रही है | नेटवर्क भी सही नहीं, फिर भी बात हो रही है| मोर मोरनी बिछड़ गए, राधा बन घर रो रही| है गरीबी की मार से, खुद फोन […]
ख़त्म हो जाएंगी एक दिन ये तन्हाइयां, मिल जाएगी मंज़िल, दूर होंगी रुसवाईयां..
आओ थाली बजाते हैं! गरीबी का मुंह दिखाने वाली, बेरोजगारी के लिए , आओ ताली बजाते हैं! देश की कमर तोड़ने वाली मरी हुई अर्थव्यवस्था के लिए, आओ थाली बजाते हैं! झूठ को सच बनाने […]
तुम नारी हो, यूं अबला न बनो । दुर्गा – अवतारी हो, सबला तो बनो । बीती बातों को छोड़ परे, आगे के रस्ते तय तो करो । रस्ता था, कांटो वाला बीत गया रस्ता […]
वक्त अनमोल है, ना कोई इसका मोल है । मुफ़्त में मिले, कुदरत से, इसकी कीमत पहचान । गर तू करेगा वक्त की कद्र……. तो वक्त भी तेरी कद्र करेगा ऐ इन्सान । जीवन जी […]
जनवरी से दिसंबर गुजर गए, उस बेख़बर को खबर ही नहीं। उसे क्या पता इश्क़ करने वाला कोई आशिक़ ज़िंदा है भी या नहीं।।
शोर भीतर भी है। शोर बाहर भी है । ये ऐसा मंथन हैं। जो चलता रहता है। गुंजता रहता है। हम शांत नहीं कर पाते। बस बना लेते हैं। शोर को अपनी आदत का हिस्सा।
दिल के आगरे में मैं भी एक ताजमहल बनाउंगा। पत्थर ना सही संगदिल से ही महल को सजाउंगा।।
बेफिक्र रहना आदत थी उनकी , कब जिम्मेदारियों ने दस्तक दी पता ना चला ।
बहुत दिनों के बाद , जब खोला मैंने यादों का पिटारा । कुछ बचपन की किलकारियां गूंजी, कुछ मां की मीठी लोरी, कुछ पापा की डांट मिली। कुछ दिखे खेल पुराने जो खेलें अपनों संग, […]
तुमने रुला दिया मन जाने की बात कहकर, क्यों बोलते हो ऐसा कह दो ना आज खुलकर। अब तो हमारे मन में स्थान बन चुके हो, छोड़ा ना बीती बातें बैठो ना अपने बनकर।
जब तक तेरे कदम तल मंजिल शिखर न चूमें थकना नहीं है राही चलते ही रहना तब तक। टकरा ले पर्वतों से तू शक्तिपुंज बनकर, अपनी जगह बना ले अपनी भुजा के बल पर।
तूफ़ान तो नहीं हूँ लेकिन पवन हूँ चंचल तेरे आसपास चलकर शीतल करूंगा पल-पल। संगीतमय करूंगा कविता से तेरा आँचल उन्मुक्त खुशियाँ दूंगा तोडूंगा गम के सांकल।
ऐ जिन्दगी ! कभी तो तू मेरी होती जिधर को मैं कहती, उधर रूख़ करती ।। तू जिधर इशारा करती, मुङ जाते हैं उधर तेरे आगे अपनी मर्जी चलती है किधर काश! बस एक बार […]
इस बार की दुर्गा पूजा फीकी सी होंगी ना भव्य पंडाल होंगे ना भीड़ ना खाने के स्टाल्स होंगे ना पुलिस की बार्रिकडिंग इस बार की दशहरा फीकी सी होंगी रावण तोह बनेंगे पर भीड़ […]
बहुत ही ख़ूबसूरत होती है दोस्ती, निज स्वार्थ से ऊपर होती है दोस्ती। कुछ रिश्ते मिलते हैं, हमें जन्म से, कुछ रिश्ते मिलते हैं, समाज की रीत से मगर निज चुनाव पर होती है दोस्ती […]
लाखों की डिग्री लेकर, खोज सके न वैक्सीन| कवि खोज दिए कलम से अपने, कोरेना का ऐतिहासिक सीन| नेता की नियत बताएं, डॉक्टर मिल करते खेल| लिवर किडनी गुर्दा ही बेचे, कोरोना में गजब ही […]
मुझको सो जाने दो जीवन रात हुई अब बहुत घनी नैनों से ओझल हैं सपनें साँसों से भी ठनी-ठनी आसमान बाँहें फैलाकर मेरे स्वागत को आतुर है धरती पर बस बोझ बनी हूँ मिट्टी में […]
ऋषि मुनियों की जिसकी धरती है स्वर्ग सी जो लगती है गंगा जहाँ पर बहती है दुनिया उसे भारत कहती है इस देश का होने की खुशी मैं मन में अपने भरता हूँ मैं भारतीय […]
बचपन जल रहा है, जल उसे बुझा न सकेगा, जल रहा है बड़ों की इच्छाओं के तले, उनकी आशाओं के तले, चाहते हैं पूरे हो सब ख्वाब, पर कभी पूछते नहीं उनसे, बांधकर एक सीमित […]
लफ्जों की पोटली , बांध लो ना तुम , क्या कहते हैं ,वो जरा सुन लो ना तुम, तब मांपना और तोलना , उनकी बातों को , फिर वह पोटली खोल देना तुम, तर्क वितर्क […]
तलब लग गई उनकी , उस प्याले की तरह है , जो हर बार इंतजार करता है कि वो उसे फिर से भर दे।
जिंदगी को कहीं कैद कहीं आजाद देखा फिर भी न बदलता उसका स्वभाव देखा बुंद बनकर आसमां से लहराते आते देखा कयी बोझिल चेहरे को पल में हर्षाते देखा चूल्हे पर जलकर फिर आसमां में […]
बहुत निराली है ये दुनिया प्रज्ञा ! यादों की बात तो करती है पर याद नहीं करती…
सतयुग में ऋषि – मुनि करते थे हवन, ताकि, ना रहें कीटाणु, शुद्ध हो वातावरण । कलियुग में ऋषि – मुनियों का भेष बनाकर, बैठे हैं कुछ पाखंडी………………….. इनसे बचकर रहना मनुज, जाग सके तो […]
जब से अलग लिखने लगे हम सस्ते में बिकने लगे मौजें अलग होने लगीं पंख भी गिरने लगे बहरूपिया मन मोहकर बन बैठा है मेरा पिया हिय को अलग ना कर सके सपनें जुदा होने […]
मां और पत्नी दोनों गुरू, दोनों से नव-जीवन शुरू। मां कहे , पत्नी सिखाती, पत्नी कहे, मां सिखाती । विनम्रता की पराकाष्ठा देखो, सिखाने का श्रेय एक-दूजे को दिलाती ✍️…गीता
हम उनमें थे — वो मुझमें थे, उफ़ !!!! , वो क्या दिन थे। जब हम रुठ जाते थे, तब वो चाँद सितारे तोड़ लाते थे।।
कई वर्षों से इस पुरानी हवेली में कोई आया ही नहीं। जो भी आया मैं गैर समझ कर उसे अपनाया ही नहीं।।
वफा के बदले उनके शहर में”अमित”बेवफ़ाई ही मिला। चलो गम को भुलाने के लिए मयख़ाने में मय तो मिला।।
अगर जग बदलता है बदलने दीजिए वक्त के साथ ही चलना सीखिए आसमानों को छूने की हसरत है अगर दिल में कोई ख्वाब पालना सीखिए जीवन जीने का आनन्द है तभी दर्द औरों का उठाकर […]
मां ने जब रोटियां बनाना सिखाया , मुझे कुछ समझ ना आया , कभी रोटियां जली तो कभी हाथ, फिर सीख ही गई मैं, रोटियां बनाना, और अब रोटियां नहीं जलती , बस जलते हैं […]
समय नहीं समय नहीं यह कहते थे लोग, लगता था यह ज़िन्दगी बन गयी एक बोझ. जीवन यूँ ही काम करते हुए बीत जायेगा, अपना बस नाम का ही अपना रह जायेगा. समय एक सा […]
वो आये दबे पांव से यूं कानों ने तो कुछ सुना नहीं मगर दिल ने सब सुन लिया
ये कैसा कारवां जो कभी खत्म ना हुआ, वह उम्मीद कभी न धुंधली हुई और न मिटी , वह साथ पाने का जज्बा अभी भी बरकरार है।
हैसियत क्या थी मेरी पूछिए मत, बस किताब के कोरे पन्ने थे , लिखते रहे अपनी रूबानी, जब बनी ना कोई गजल ना कोई नज़्म, फटकर सिमटकर पैरों तले बस कुचले गए।
आज कर दूं, आंखें नम या समंदर कर दूं , मेरे भीतर का वो दर्द ; कैसे संदल कर दूं।
माँ ही है संतान मोह में, सबसे से लड़ जाती है| जिसकी माँ खुद जज वकिल बने, उन बच्चों की हार नहीं हो सकती है| लाख गुनाह छिप जाते है, बस माँ के आ जाने […]
कविता- कंघी —————— कभी इसको रख गोदी मे रोटी देती थी, कभी इसको काजल कंघी तेल कराती थी, कभी इसको कंधो पर रख कर, मेले कि शैर कराती थी, थक! जाता था, लाल मेरा जब, […]
ये कोरोना की बीमारी, ना इंसान से डरी ना हारी । इसने इतने सबक सिखाए , ज़िन्दगी में किसी ने नहीं सिखाए । कोई कहे काढ़ा पीलो, कोई जड़ी – बूटी बताए । तुक्का मार […]
‘वजह हुआ करती है नज़रों के झुक जाने में, बेबाक आँखों में शर्मिन्दगी का सलीका नही होता.. वो तोड़ सकते हैं मेरे यकीं को किसी भी वक्त मगर, बेरुखी जताने का ये आखिरी तरीका नही […]
यह माया नगरी बड़ा परदा लुभाती चकाचौंध रंगीली दुनिया ख्याली मंज़िल एक हादसा परत दर परत खुलते राज डरावने सच नकली चेहरे अंधी दौड़ सर्वोपरि माया धज्जियां उड़ाते रिश्ते बिछा माया जाल दिखा सपने देती […]
हाल ही में सतीश पांडे जी को अगस्त माह में आयोजित काव्य प्रतियोगिता में किये गये सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन के लिये ‘अमर उजाला’ और ‘शाह टाइम्स’ ने अपने अखबार में स्थान देकर सम्मानित किया। सावन परिवार […]
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