समन्दर की गहराइयों में उतर के देखो तो एक बार। बहुत से राज खुल जाएंगे जो छुपे हुए थे हरेक बार।। मोती भी हैं सीप भी प्यारे रत्नों का है बड़ा खजाना। उतरोगे तो पाओगे […]

बिल्ली की पूंछ ——————- रुकी कलम अगर भूत भविष्य बिखर जाएगा रखो न हाथ गिरवी, जमाना भूखे बच्चों को- व्रती बता जाएगा, जिन्हें शुद्ध पानी नसीब नहीं, उन्हें बोतल का- पानी पीने की सलाह दे […]

ज़रा सी बारिश के छींटों से, क्यारी में खिल गए गुलाब। सुहाना सा हुआ मौसम, बहने लगी शीतल पवन। मयूर नृत्य कर उठे बाग में, कोयल गाती मीठे राग। इन्द्रधनुष भी दिखे गगन में, मीठे […]

चिकित्सक डटे हुए हर बार, बीमारों का करें उद्धार। लगाकर दवा ज़ख़्म पर, कर रहे हैं उपचार। शत्-शत् नमन् है चिकित्सकों को, उनके सेवा भाव को प्रणाम। गंभीर व्याधि के मौसम में भी, एक सैनिक […]

हमें तो रोशनी की बात ही उठानी है, जहाँ हो दर्द वहां पर दवा लगानी है। छोड़ भीतर की गुनगुनाहट को, बात अब जोश से सुनानी है। छोड़ मन की समस्त टूटन को आस नवरूप […]

भूखे तक अन्न पहुंचाना होगा गरीब, असहाय, अनाथों को खोज खोज कर अपनाना होगा, भेदभाव की बातों को दफनाना होगा, मनुष्य हैं हम मनुष्यता को अपनाना होगा। यदि अंधेरे का भीषण जंगल हो, न कोई […]

जुबान से मेरी किसी का दिल न दुखे न कभी लेखनी यह, ठेस के भाव लिखे। न निशाना हो मेरा कहीं पर व्यक्तिगत सा न कोई बात बोलूं दिखूँ जो व्यक्तिगत सा। चाह इतनी रखूं […]

सच्चा साथी वही है, जो दुःख में भी साथ दे। हृदय में हो जब संताप, हाथ बढ़ाकर हाथ दे। अमावस सी काली रातों को, जो बना दे चाॅंद रात। ह्रदय में जब शूल चुभें, वो […]

विचार ही तो हैं जो व्यक्तित्व लिखते हैं मेरा, सदविचार उत्साहित कर बाग सींचते हैं मेरा। सकारात्मकता मुझे आशान्वित कर, चाह को मेरी पुष्पित कर पल्वित कर, एक लय देती है, प्रेममय करती है। मगर […]

कविता- भारत रत्न तथा नोबेल —————————————— मेरे बाद ख्वाब सजाएगा कौन, बुझते हुए दिए को जलाएगा कौन, सपना था , भारत रत्न नोबेल का, अब इसे जीतकर लाएगा कौन, अगर मेरा जीवन अधूरा रहा, मेरे […]

गुनगुनाते गीत मेरे जीवन से जुड़े लफ़्ज़ों में बुजुर्गों की दुआओं में, प्रेम की निगाहों में । ममता के अश्कों में, उमड़ते भावों में भर रहे घावों में टूटती चाहों में दर्द में आहों में। […]

जीवन में उत्साह हो मन नाचे बनकर मोर हे युवा ! तू परिश्रम कर सफलता मिलेगी घनघोर अभी तो तूने जीवन की बस एक दोपहरी देखी है अभी तो तूने सावन की बस पहली बारिश […]

मगन हुआ मन आज है, उछल रहा उत्साह, जीवन जी लूँ खुश रहूँ, खुद पर रख विश्वास। खुद पर रख विश्वास, बढ़ूँ, प्रसन्न रहूँ मन, जो दे ईश उसी में हो संतोष मेरा धन। कहे […]

धन्य है किसान तू जो उगाता अन्न है, भाव है जो दान का उसमें तू ही सम्पन्न है। खोद कर माटी डाल कर के बीज उसमें तूने उगाया, खिलाया तू तो सचमुच धन्य है। रात […]

नाम…. यही तो है हमारी पहचान, हमारे व्यक्तित्व की शान। नाम केवल एक नाम ही नहीं है, एक विशेष शख्सियत है… जिसे जानते हैं हम उस “नाम” से, उसके आचरण से और उसके व्यवहार से। […]

कविता- फोन चोरी हुआ ——————————– सुनो भाई, कब तक गुजारोगे, जीवन में चोरी करके, मेरा या गैरों का- फोन चुरा करके, इस काम से क्या जीवन सुधर जाएगा, चोरी करके – धन से घर भर […]

कोरोना की फिर तेज़ हुई रफ्तार है, इसके लिए कौन जिम्मेदार है। देश में कोरोना का विस्फोट, फ़िर से हो चुका है अब हम कितने तैयार हैं। वैकसीन भी आई है, कितनों ने लगवाई है?? […]

तलाश तेरी है मेरा पता चले ये नाम मेरा क्यूं अनजान लगे ये काम मेरा इक बोझसा लगे साथी जो बने टिक ना सके चाहा था जिन्हें कबके ओझल हुए दिन हो एकसा यही आस […]

पाकिस्तान दूसरों की बरबादी चाहते खुद बरबाद हो गया उसके राह पर चलने वाले का यही अंजाम होता है अच्छाई फैला कर अमर हो गया जो अदृश्य रहकर भी भलाई का पैगाम देता है देश […]

हमारे परिपक्व बंधन पर था घोर अंधेरा छाया एक भंवरे ने आकर के तेरा हाल बताया तेरी बेचैनी पर मेरी आँख भर आई तेरी नादानी पर मुझको हँसी खूब है आई ये कैसा अल्हण पन […]

आशा भी न थी कि मिल पायेंगे बचपन के कई साल गुजारे साथ दशकों तक सिर्फ याद बन जायेंगे मीठे ख्वाब फिर कहीं गुम जाएगें बहस में पड़ने वाले कई होंगे सामंजस्य बिठाने वाले थोड़े […]

आलोचना का जिम्मा फिर से उठा लिया तूने चल अच्छा है ये काम संभाल लिया तूने साहित्य के मंच पर दूरियां अच्छी नहीं लगती जैसे-तैसे दिल को मना लिया तूने…

जी जला दूँ गीत गाकर फूंक डालूँ स्वर जलाकर भेदभावों को मिटा दूँ, प्रेम भावों को लुटा दूँ। आँसुओं को सब सुखा दूँ, सत्य पर नजरें झुका दूँ, भावनाओं में न बह कर, लेखनी अपनी […]

सुधा बरसे सदा वाणी से, ह्रदय में भी ना कोई गरल हो। कभी किसी का, दिल ना दुखाऊँ मैं मेरी वाणी मीठी और सरल हो। मदद कर सकूॅं पीड़ितों की, ऐसा भाव रहे सदा मन […]

ये दिल… वही क्यूॅं माॅंगता है!! जो अक्सर मिल ना पाए, लब वही क्यूॅं कहना चाहें!! जो अक्सर हम कह ना पाएं। काश!! दिल ही न होता, तो ये दर्द भी ना होता। हम दर्द […]

मेरे अश्क जो गिरे धरा पर, वो चमकीले ओस बने। मुस्कुरा दिए वो दूर से देखकर, मैं मोम सी पिघलती रही.. वो पाहन सम ठोस बने। मेरी सिसकियों में उनको, ठॅंडी पवन का एहसास हुआ […]

साहित्य साहित्य है न हार न जीत है, न जद्दोजहद है, न ही संघर्ष है। न दूसरे पर निशाना है, न कोई बहाना है, साहित्य साहित्य है, संघर्ष नहीं है। साहित्य दर्द है जीवन का […]

कोरोना का कहर हर गली हर शहर फिर से बढ़ रही है यह बीमारी जनता मरती जाती बेचारी आई है वैक्सीन नवेली तुम आज ही लगवाओ सहेली अपनी फिर से करो सुरक्षा फिर से ठप्प […]

यह साहित्य महज चंद लेखनियों का गुलाम नहीं हम जैसे कितने आएगे और कितने जाएगे हर कवि जोड़ेगा एक पन्ना और अनगिनत पाठक पढ़ते जाएगे कुछ ऐसा लिखेंगे हम और कुछ ऐसा कर जाएगे जो […]

स्वयं को निखारना पड़ेगा अभी और अग्नि में तपना पड़ेगा ऐ लेखनी ! अभी तो तुझे दूर तक जाना है पाठक के हृदय में उतरना पड़ेगा इस जिन्दगी के सफर में कोई तो हो आधार […]

मिथ्याओं पर आधारित है साहब ! सोंच तुम्हारी अब तो सारी बातें हैं लगती झूँठ तुम्हारी मेरी अभिलाषा का है तुमने जो उपहास किया मेरी करुण व्यथा का है तुमने जो अपमान किया ना कभी […]

नायक अपनी नायिका के प्यार मे पड़ा हुआ कुछ पक्तियों के माध्यम से अपने इम्तिहान ए मोहब्बत की सच्ची दास्तान बताता है – सोचता हूँ कि कहूँ ना कहूँ दास्तान ए मोहब्बत की कुछ बुरा […]

नायिका के प्यार में पड़ा हुआ नायक सुंदर पक्तियों के माध्यम से अपने दिल के जज्बातों को बयां करता है – सोचता हूँ कि कहूँ ना कहूँ दास्तान ए मोहब्बत की कुछ बुरा मानेंगे तो […]

सिक्सर कौन लगायेगा कौन नाम बनायेगा किसके सिर पर सजेगा ताज यह अब तय हो जायेगा सही गिरेगी गुगली या स्विच हिट लग जायेगा बाउंसर गुजरेगी कानों से या हुक शॉट खेला जायेगा क्या गेंद […]

खूबसूरत सुबह तुझे प्रणाम है मेरा, सूर्य की रश्मियों को आज प्रणाम मेरा। खिल रही दिशाएं चहकते खग वृंदों, चमकती ओस बूंदो तुन्हें प्रणाम मेरा। तुम्हें प्रणाम मेरा।

मायूसियों ने मेरा, पता ढूॅंढ लिया है लगता है अब हम को, बदलना पड़े ठिकाना । मायूसियाॅं देने लगी हैं दर्द ज्यादा, अब यहाॅं रहने का नहीं है कोई फ़ायदा। सामान अपना उठाकर, हम रुख़सत […]

माफी एक हुनर है, सत्य अहिंसा का पूरक है, राम कृष्ण ईशा को प्यारा है, बच सकते है शान तुम्हारे बिगड़े काम बने तुम्हारे झुक कर देखो एक बार, बागों में फूल खिले रोज तुम्हारे, […]

माफी तो मजबूत का, गुण होता है नेक, कमजोरों की मदद को, उठ तू जगा विवेक। उठ तू जगा विवेक, दिखा मत नाड़ी का बल, यह बल हो कमजोर, तुझे फिर रौंद न दे कल। […]

साहित्य है सबके लिए, यही समाज का है दर्शन। रुचिकर भी हो पढ़ने में, हो उस काल का दर्पण। जीवन की समस्याओं पर भी करे विचार, ऐसा हो साहित्यकार। कठिनाइयों पर विजय पाने की, नैराश्य […]

साहित्य है केवल वह रचना, जिससे प्रकट हो समाज की सच्चाइयाॅं। भाषा और शिल्प भी उत्तम हो, दिलो-दिमाग पर असर डालने का हो गुण समाज का भला हो, हो यही भावना । प्रस्तुत करे जीवन […]

21 मार्च के बाद, प्रथम पूर्णिमा के पश्चात आने वाले पहले रविवार ईस्टर संडे मनाया जाता है। गुड फ्राइडे के बाद, आने वाला प्रथम रविवार ईस्टर संडे कहलाता है। उषा काल में महिलाओं द्वारा, की […]

मित्रता में राम हो मित्रता में श्याम हो बस अंगुली पकड़ के चलने दो दिल में अपने रहने दो, सत्य वचन, सत्य के प्रेमी, ना बड़बोला, हक है इतना सब कुछ कहना, स्व हित परहित, […]

सावन तुमसे माफी है माफी दिनकर कालिदास के बच्चों से है, काफी दिन मै दूर रहा दूर कारण- फोन मेरा चोरी हुआ था, अभी फोन लिया नही पर सावन तुमसे दूर हुआ नही, कहां गए […]

सूरज जलकर कब रोया संध्या रातों मे कब सोई गुलमोहर का साख से झरना कब बंद हुआ दशरथ माझी का हथौड़ा कब बंद हुआ, क्यों रोता है मूरख बंदे सत्य प्रकृत , प्रकृत अनोखा, बस […]

ख़ास लोग जिन्दगी के, दिल की धड़कन जैसे हैं। दिखते नहीं हों चाहे वो, जिन्दगी के ख़ामोश सहारे से हैं। दिल की धड़कन के बिन जैसे, वजूद नहीं है जीवन का वैसे ही उनके बिना, […]