कैसे हो पूछता हूँ कहते हैं खूब अच्छे हर बार पूछता हूँ, कहते हैं खूब अच्छे। भीतर का दर्द जो है वो भी बता न पाए हम भी न पूछ पाये बस बोल बोलने हैं […]

कूलंकषा बहती रही, निज राह में, किस चाह में, साथ बहते रहे कण पर न जाने किस चाह में। बीतता चलता रहा क्षण निरंतर राह में दे गया खुशियां किसी को, कुछ रहे बस आह […]

नफरतों ने दिशा बदल डाली मन घिरा जाल में स्वयं अपने बांटी नफरत तो पाई नफरत थी फिर भी मन में रही है कुछ गफलत। अपनी मेहनत का फल मिलेगा ही कटु रहे या भले […]

मन के घोटक में बैठ कर दौड़ा किस दिशा में कहाँ चला राही, इस तरफ उस तरफ धरा-अंबर आया क्या हाथ में बता छनकर। खूब रख ईप्सा चला दौड़ा, वैसी ले दीक्षा चला दौड़ा, मन […]

अब भी ऐसे ख्याल आते हैं बिछुड़े गम गीत बन के आते हैं, जो फिसल कर गिरे थे हाथों से दाने मडुवे के गिरा जाते हैं। जिनसे उम्मीद न थी वे ही मिले स्वप्न के […]

पूरब को पत्र भेजा, पश्चिम पहुँच रहा है, भेजी जिसे मुहब्बत नफरत समझ रहा है। खाली पड़ी थी थैली भर दी थी उसमें दौलत हम चाहते थे भरना दिल में जरा मुहब्बत।

आँचल में तेरे ओ माँ! कितना स्नेह है ना, सब कुछ भरा हुआ है मन में तेरे दुआ है। तेरी दुआ से ओ माँ! हर पथ है मेरा रोशन, तूने दिया है इतना अनमोल मुझको […]

सुन्दर हरीतिमा यह फैली हुई धरा में, देती सुकून मन को, लगता है हूँ हरा में। लहलाते पेड़ डाली महकी हुई धरा में देती सुकून मन को लगता है हूँ हरा मैं। अब फूल खिल […]

नयनों की पुतलियां झपकी अनेक बार हृदय की धड़कनें धड़की अनेक बार, पंजों के मोड़ जाने कब-कब खुले जुड़े सच्चे के सामने कब कर खुले जुड़े। साँसें स्वयं चली, आशा कभी बनी आशा कभी गली, […]

आगे बढ़ने की ललक में घमंड आड़े आता है, इंसान बढ़ना चाहता है दम्भ आड़े आता है। जिसके भीतर बारिश तो हो पर दम्भ उग आए, उसे साफ करना होता है वरना वह आड़े आता […]

फुरसतों के पल न जाने हैं कहाँ आजकल गर वो होते तो हमें मिलते जरा मुश्किल के हल। खूब बारिश हो चुकी सूखे पड़े हैं जल के नल, आज जो भी न हो प्रातः होनी […]

तब की बातें अलग थी जब हम भी बिना पते के, पाती लिखा करते थे। बुझते हुए दीये को बाती दिया करते थे। हम सादा लिफाफा भेज दिया करते थे, वे उस पर अपना नाम […]

ख्वाहिशें मेरी मुझे स्वप्न नित दिखाती हैं एक पूरी हुई अन्य उभर आती हैं। जिनको मालूम नहीं पता मेरी निगाहों का नैन के तीर मेरे दिल में चुभा जाती हैं। उड़ रही तितलियां दूर बहुत […]

तुम ककड़ी सी शीतल मैं नमक सा स्वाद, मिर्च सी बहस से होता है विवाद। मुहब्बत नहीं है अपवाद क्यों करना समय बर्बाद आओ स्नेह को कर दें आबाद। खुशियों के पुष्प खिलेंगे जब मूल […]

सीमा में तैनात सिपाही तुझे सलाम है, देश के लिए की जा रही तेरी सेवा बेमिसाल है। सीमा सुरक्षित है तब हम सुरक्षित हैं, तू सीमा में खड़ा है सिपाही! तब हम सुरक्षित हैं।

कुर्सी आप भी निराली हो, तरह तरह के लोगों के लिए तरह-तरह की छवि वाली हो। अलग-अलग लोग अलग अलग तरह की कुर्सी, छोटी-बड़ी, कच्ची-पक्की स्टाइलिश, साधारण लकड़ी की प्लास्टिक की, कठोर, आरामदायक। हर तरह […]

लड्डू कितने मीठे हो तुम गोल-गोल, पीले-पीले, लाल-लाल बेमिसाल। गणपति के प्यारे हो, रसना के दुलारे हो, खुशियों के सहारे हो, खुशी में प्यारे हो, शुभ अवसर पर खाये जाते हो, सफलता पर बांटे जाते […]

पितृ पक्ष आया है श्रद्धा का पक्ष है, विस्मृति पर अब स्मृति लानी है। उन्हें याद करना है जन्म दे गए जो, पाल-पोस कर हमें बड़ा कर गए जो, हमें सौंप संसार, विदा हो गए […]

फूल करेले के हैं फल बहुत कड़वे हैं, पाने तुझे ओ मंजिल ! छिल गए तलवे हैं। खूब बारिश हुई मुहब्बत की, आ गई बाढ और मलवा है, ऐसा लगता है घोंट कर रिश्ते आज […]

फूल करेले के हैं फल बहुत कड़वे हैं, पाने तुझको ओ मंजिल ! छिल गए तलवे हैं। खूब बारिश हुई मुहब्बत की, आ गई बाढ और मलवा है, ऐसा लगता है घोंट कर रिश्ते आज […]

अब धीरे-धीरे समेटने लगी है वह अपने साजो – सामान को, तपती गर्मी से झुलसती धरती को नहलाने आयी थी, प्यासे प्राणियों को खूब पानी पिला गई। धरती पर पड़े बीजों को उगा गई। ये […]

गुनगुना दे कोई तराना तू, सीख ले प्यार को निभाना तू। अपने मन को पहुंचने दे मुझ तक, दूर से मत मुझे लुभाना तू। कोरे कागज में नाम मत लिखना, खाली छाया की भांति मत […]

भारत देश हमारा, खूब फले-फूले, चारों तरफ हरियाली हो जन मन में खुशहाली हो, महके आँगन आँगन महक उठे कोना कोना, खुशियों का उगना खुशियों को बोना। अपना अपना फर्ज निभाएं सब, उन्नति होगी तब।

कविता तुम ही तो साथी हो, संवेदना हो, प्रेम हो, लगाव हो, जुड़ाव हो, भावों का प्रवाह हो। बिछुड़न की आह हो, दिल की चाह हो। संगीत की गान हो, सुर की तान हो, शरीर […]

मन तेरे से पहले भी संसार अपनी मस्त चाल चलता था बाद में भी संसार अपनी गति में चलता जायेगा। सुबह, दोपहर शाम अपनी गति में होते जायेगी, मौसम ठंडा, गर्मी, बारिश अपनी गति से […]

सुबह तुम बहुत मनोहर हो, शीतल, शांत, साफ हो बहुत मनोरम हो। उड़गन का चहचहाना हो नए फूलों का खिलना हो, नई किरणों से मिलना हो नई आशा जगाना हो, बीती को भुलाना हो, नया […]

विष मेरे भीतर जमा मत जमा होना, तनिक भी नहीं, जरा भी नहीं। न चाह कर भी तू बिछाने लगता है परतें, जिससे शिखर के बजाय नीचे की तरफ खींचती हैं गरतें। प्रेम की धारा […]

हिंदी दिवस 14 सितंबर आज मनाया जाता है, राजभाषा बनी थी हिंदी, भारत के मस्तक की बिंदी, इस बिंदी की चमक बढ़ाने दिवस मनाया जाता है। खूब बधाई, खूब बधाई इस अवसर पर आप सबको, […]

हिंदी दिवस आया है मित्रों, आपको शुभकामना, खूब फूले खूब खिल जाये यही शुभकामना। यह हमारी शान है पहचान है, अभिमान है। वाङ्गमय में है भरा खूब सारा ज्ञान है।

हिंदी दिवस की है बधाई खूब सारी आप सबको, मातृभाषा के दिवस की है बधाई आप सब को। आज के ही दिन बनी थी राजभाषा हिन्द की, एकता में बांधने की एक आशा हिन्द की।

नहीं भुलाता है मन दर्द मिला हो जिस पथ चल रहे थे स्वयं की गति में छिला था कंटक बन पग। लहूलुहान हो गया था मन लगाई मरहम पट्टी वैद्य बनकर जिसने दर्द दूर किया […]

तुम्हारी तरह खूबसूरत, हरियाली, खुशहाली चारों तरफ, खिली हुई है, प्रेम की हवा चल रही है, दर्द की दवा बन रही है, यूँ ही दिखते रहना नजरों के सामने ही रहना ऐसा कह रही है।

कुछ तो करना होगा बेरोजगारी को मिटाने के लिए कुछ नई नीतियाँ कुछ नए प्रयास, करें जिससे युवा अहसास कि जीवन की गाड़ी वो भी चला लेंगे, दो रोटी कमा लेंगे।

एक जैसी नहीं रहती परिस्थितियां सुधरती हैं बिगड़ती हैं परिस्थितियां परिस्थितियां हैं जिनसे हर प्राणी जूझता आया उन्हीं ने है तपाया और खरा सोना बनाया है। चमक खाली नहीं होती वरन खाकर थपेड़ों को किया […]

उम्मीद छोड़ कर तुम थक हार कर न बैठो जब तक न पा सको तुम तब तक न हार बैठो। पाने का यदि इरादा सचमुच रखोगे मन में, पा लोगे मन की मंजिल तुम आजमा […]

नींद भी आखिर बनाई क्या रब ने पूरा इंसान खो जाता है, दिन भर संघर्ष करता है रात को सो जाता है। कभी-कभी असलियत में सपने बो जाता है, हँसते हँसते रो जाता है, जागता […]

मौसम तुम भी बदलते रहे, बदलते रहे। कभी सुखा गए, कभी अंकुर उगाकर फूल खिलाकर फल लगाकर, फल पकाकर, बांट गए। फिर पतझड़ बना गए। फिर नई कोपलें फूटी पुरानी धारणाएं टूटी, नई जुड़ी, फिर […]

गुलाब खिल जाना, सुंगध मिल जाना हवा चले जब भी, पात हिल जाना, पता चले कि गीली मिट्टी है, भावना लिख दी है, कहीं है रेत पड़ी कहीं पे गिट्टी है। कहीं हैं ठोस ईंटें […]

सोच बिंदास है आपकी दान है यह महा दान है, दान अंगों का करने की सोच का दिल से सम्मान है। मुक्ति की चाह में खाक होकर उड़ते रहे हम धुँवा बन सीमित रहे निज […]

जमाना खराब है, भरम पाल बैठा हूँ। आगे सुधार होगा, आशा में बैठा हूँ। गलत ही गलत है, नहीं कुछ सही है, सब कुछ गलत है भरम पाल बैठा हूँ। खुद ही सही हूँ, बाकी […]

कोपल दया की अब तो, उग जा, नमी नमी है, बरसात का यौवन, किस बात की कमी है। अब तो हवा भी सूखी-सूखी नहीं है बिल्कुल। आकाश भी है गीला गीली हुई जमीं है। अब […]

सावन उन्हें भिगो दे सूखे पड़े हैं जो दिल राही हैं प्रेम के जो मिल जाये उनको मंजिल। मुस्कान उनके लब पर उस वक्त जाये खिल जिस वक्त रास्ते में हमको वो जायें मिल। रिश्ते […]

मुस्कुराहट फूल का ही रूप है मुस्कुराओ और खुशबू को बिखेरो खुद रहो खुश और सबको प्रेम दो नफरतों को छोड़कर बस प्रेम दो। खूब भीगो नेह की बरसात में, धुन में गाओ खूब झूमो […]

बूंदें टपक रही हैं नभ से सावन आया है जब से कोपल फूटी है चाहत की सावन आया है जब से। जिनकी राहें देख रहे थे मेरे नयन उन्हीं ने आकर पूरा घेर लिया मन […]