Satish Pandey's Posts

खुद को कमतर आंक मत(कुंडलिया)

खुद को कमतर आंक मत, खुद पर रख विश्वास, दूर रह उन चीजों से, जो देती हों त्रास, जो देती हों त्रास, मार्ग तेरा रोकें जो, उनसे मत कर नेह, तुझे कमतर मानें जो। कहे कलम तू प्यार, कर ले पहले खुद से मुश्किल सारी दूर, रहेंगी खुद ही तुझसे। ************************* करना हो विश्वास जब, खुद में कर विश्वास। बिना कर्म के फल खाऊँ, ऐसी मत कर आस। ऐसी मत कर आस, कर्म ही सर्वोपरि है, कर्म बिना इंसान, स्वयं का ही तो अर... »

भलाई याद रखो

भलाई याद रखो बुराई भूल जाओ डिगो मत सत्यता से भले सौ शूल पाओ। कभी खुशियों के झूले आप भी झूल जाओ, अहो, चिंता की बातें कभी तो भूल जाओ। नजरअंदाज करना कला है सीख लो तुम आजमा कर इसे भी निकलना सीख लो तुम। कई मुश्किल मिलेंगी कई दुश्वारियां भी मगर मुश्किल समय में निखरना सीख लो तुम। कटो मत दोस्तों से घुसो महफ़िल में उनकी जिगर में दोस्तों के चिपकना सीख लो तुम। »

खुद की गलती देख ले(कुंडलिया छन्द)

खुद की गलती देख ले, गर अपनी यह आंख, तब सुधार होगा सरल, खूब बढ़ेगी साख। खूब बढ़ेगी साख, कमी खुद दूर रहेगी, गलत दिशा में न जा, हमेशा यही कहेगी। कहे लेखनी अगर, देख लो खुद की गलती, तब पाओगे स्वयं , आप चारित्रिक बढ़ती। »

गोदामों में अनाज न सड़े

गोदामों में अनाज न सड़े बल्कि जरूरतमंद को मिले गरीब के भूखे बच्चों को पेट भरकर खाने को मिले। सरकारी स्कूलों में तगड़े नियम लगें, गरीब के बच्चे भी उच्चस्तरीय पढ़ें। मध्याह्न भोजन योजना तक सीमित न रहें सरकारी विद्यालय बच्चों के भविष्य को दिखावटीपन न कर सके घायल। गरीबों की ओर प्राथमिकता की दृष्टि रखी जाये, गरीब गृहणी की भी खनकती रहे पायल। »

बेरोजगार की हालत कब सुधरेगी

बेरोजगार की हालत कब सुधरेगी, कैसे सुधरेगी, कब बनेंगी नई नीतियाँ। कब खुलेंगी खूब भर्तियां। कोचिंग कर चुके नौजवान को कब मिलेगा परीक्षा देने का मौका कब चलेगा उनका चूल्हा चौका। परीक्षा कोई पास कर पाए या नहीं कर पाये लेकिन पद तो आएं परीक्षा तो हो, निजी क्षेत्र की हो या सार्वजनिक क्षेत्र की हो लेकिन रोजगार की नीति तो हो। परम्परागत शिक्षा के स्थान पर आम आदमी की पहुँच तक तकनीकी शिक्षा तो हो। कुछ न हो लेकि... »

परहित

चोट दूजे को लगी हो आपको यदि दर्द हो तब समझना आप सचमुच में भले इंसान हो। आजकल सब को है मतलब बस स्वयं के दर्द से औऱ का भी दर्द देखे यह मनुज का फर्ज है। फर्ज अपना भूलकर हम बस स्वयं में मुग्ध हैं चाहना खुद जा भला ही आजकल का मर्ज है। वे हैं विरले जो स्वयं के साथ परहित देखते हैं, खुद के अर्जन से गरीबों का भला भी सोचते हैं। »

मुश्किलें हार जाएं

दर्द का घमंड चूर करो दर्द में खूब हँसो तोड़ पाये न हौसला अब यह खूब हंसकर कर इसे तुम दूर करो। मुश्किलों से न घबराओ कभी बल्कि आ जाओ जिद में मुश्किलें हार जायें उन्हें मजबूर कर दो। समय विपरीत हो जब हौसला साथ हो तब बुरे हालात के भी घमंड चूर कर दो। »

दिया बनकर लड़ो अंधेरे

दिया बनकर लड़ो अंधेरे से खुद भी रोशन रहो सभी को रोशनी दो, किसी की जिन्दगी में अगर हों स्याह रातें, आप बनकर सहारा उन्हें भी रोशनी दो। प्रेम ही है उजाला उसे बांटो सभी को, और बदले में पाओ मुस्कुराहट का उजाला। अगर आंगन में घर कोई पशु भी खड़ा मिटाने भूख उसकी दान कर लो निवाला। जहाँ पर हो रही हो निरीहों की मदद कुछ वहीं अल्लाह बस्ते वहीं सच्चा शिवाला। बनाओ तन का दीपक बनाओ मन की बाती जलो बिंदास होकर बांट लो ... »

लौट आओ

अंधेरी रात में यूँ छोड़कर रूठ कर चल दिये थे तुम अचानक सोचते रह गए हम कि आगे क्या होगा, मगर देखा सुबह तो रोज की ही भांति सूरज उग आया। उड़गनों ने सदा की तरह ही गीत गाया। जहाँ कल तक थी किरणें अब भी हैं, जहाँ रहती थी अब भी है छाया। नलों में आज भी पानी आया उदर की पूर्ति को है आज भी खाना खाया। धड़कनें आज भी हैं सीने में जिन्दगी आज भी है जीने में। चल रही हैं घड़ी की सुइयां भी रोज की ही तरह तुम नहीं हो कमी है... »

खूब निराश हो ना

हार गए इसलिए उदास हो ना खूब निराश हो ना दिल टूट गया है ना उत्साह रूठ गया है ना सब तरफ से हताश हो ना, हाथों में माथा टेककर सोच रहे हो ना क्या करूँ तो सुनो, सबसे पहले उदासी छोड़ो, निराशा की कड़ी तोड़ो, जीवन की दिशा को आशा और उत्साह की तरफ मोड़ो। जो हुआ सो हुआ, अब करो दुआ खुद के लिए भी दूसरों के लिए भी। ऐसे मथो माखन कि उपजे सुगन्धित घी, मन की हार है अन्यथा कुछ नहीं है, जन्म लेते समय कुछ नहीं लाये थे साथ,... »

वक्त को बदल ले मेहनत से

वक्त ऐसा है हालात इस तरह के हैं कैसे आगे बढूं यह न सोच मन में। वक्त को बदल ले मेहनत से, न रख स्वयं को गफलत में, कि खुद ब खुद होगा सब कुछ, कर्म से तुझे स्वयं की राह बनानी होगी, बहा पसीने को ठंड भगानी होगी। मन में जितनी भी हैं ग्रन्थियां उनको झकझोर कर नई उमंग जगानी होगी। पाने को कल की मंजिल आज ताकत लगानी होगी। »

सच्चा संघर्ष तुम्हें जीत देगा

ओस की बूंद बनकर सूरज के आने पर छुप न जाया करो वरन हिम्मत रखो। रात ही है नहीं तुम्हारे लिए दिवस भी है तुम्हारे लिए मुकाबला कर लो मुकाबला करो हरेक स्थिति से सच्चा संघर्ष तुम्हें जीत देगा सच्चा सा प्रेम तुम्हें मीत देगा। दिल का गुंजार तुम्हें गीत देगा। उठो हौसला रखो और जीत का स्वाद चखो। »

ईश्वर केवल पूजा से

ईश्वर केवल पूजा से प्रसन्न नहीं होते हैं, वे प्राणिमात्र की सेवा से प्रसन्न हुआ करते हैं। किसी तड़पते राही को गर बिना मदद के छोड़ दिया फिर चाहे कितनी पूजा हो मुँह मोड़ लिया करते हैं। रोते दीन-हीन भूखे के आँसू यदि हम पोछ सकें दूजे के हित में भी यदि हम थोड़ी बातें सोच सकें, तब समझो सच्ची पूजा करने में हुए सफल हम हैं, अन्यथा ईश की सेवा और पूजा में हुए विफल हम हैं। »

रास्ता हूँ मैं

रास्ता हूँ मैं युगों युगों से लोग चलते आये हैं मुझ पर न जाने कितने पदचापों की ध्वनि को मैंने सुना है। न जाने कितनों ने चल कर मुझ पर सपनों को बुना है, लोग आते रहे, जाते रहे नए उगते रहे पुराने विलीन होते रहे, आने और जाने का गवाह हूँ मैं चलती जिन्दगी का प्रवाह हूँ मैं मैं देखता रहता हूँ आते-जाते अस्थिर मानवों को बनती बिगड़ती चाहतों को, हर तरह की आहटों को। उनका आना-जाना लगा रहा मैं स्थिर रहा, आने पर खु... »

अहो! ठंडक अब तो कम हो जा

अब सूर्य उत्तरायण में चले गए हैं, अहो! ठंडक अब तो कम हो जा, ठिठुरते हुए बडी मुश्किल से खुद की, जिन्दगी को अब तक रख पाया हूँ बचा। गलतियां जितनी भी हैं पूर्वजन्म की, लेकिन अब तो बहुत हो गई इस मौसम में सजा, अब धीरे-धीरे गर्मी ला, मच्छरों पर ताली पिटा। इस सड़क के किनारे बहुत हो गया मेरा सिकुड़ना, अब पैर फैला कर लेटने दे, अब बन्द कर दे ठंडी ओस छिड़कना। »

सत्य को भूलना मत

खिलौना मत समझना किसी धनहीन को तुम मन चले तोड़ दिया मन चले जोड़ लिया। भूख पर वार करके दबाना मत उसे तुम, दिखाकर लोभ-लिप्सा दबाना मत उसे तुम। सरल, कोमल व भोला मुफलिसी का हृदय है, दिखाकर शान अपनी लुभाना मत उसे तुम। अहमिका में स्वयं की सत्य को भूलना मत संपदा देखकर तुम मनुज को तोलना मत। अक्ल को साफ रखना शक्ल मुस्कान रखना धन नहीं मन का मानक सदा यह भान रखना। »

ध्येय ऊँचा ही रखो

बुलंद वाणी रखो बुलंद सोच रखो न रह किस्मत भरोसे कर्म की ओर बढो। ध्येय ऊँचा ही रखो औऱ दिल साफ रखो त्याग सब हीनता को तेज नजरों में रखो। भले तूफान आयें या पड़े तेज बारिश एक भी बूँद या कण छूँ न पायेगा यह तन । न रोना है कभी भी बुरे हालात पर अब न जाने जोर पलटी मार ले वक्त यह कब । नहीं मजबूरियों का वश चले आज तुम पर नहीं हो कंटकों का बसेरा कर्मपथ पर। नजर नित न्यूनता से बढ़ाना उच्च पथ पर निडर बढ़ते कदम हों हौस... »

बताओ कैसे निभा सकोगे

जो मन में है तुम उसे कहो ना न बोलो चुपड़ी सी बात ऐसे दिखावा करके दिलों का नाता बताओ कैसे निभा सकोगे। भरा है नफरत का भाव भीतर अधर हैं बाहर खिले हुए से ये दो तरह के दबाव लेकर व्यवहार कैसे निभा सकोगे। निभा लो चाहे किसी तरह से मगर न सच्चे कहा सकोगे, भरी है अंतस में आग अपने उसे कहाँ तक छिपा सकोगे। दिखावा करके सखा का फिर तुम दगा करोगे, बताओ कैसे, बिठा के दिल में छुरा चला दो जमीर देगा सलाह कैसे। सभी को धो... »

वाणी में मधुरिमा चाहिए

नजरों में मुहब्बत और वाणी में मधुरिमा चाहिए इंसान ने इंसानियत को साथ रखना चाहिए। साँस ईश्वर की अमानत है समझना चाहिए, साँस रहने तक उसे नेकी निभानी चाहिए। दूसरे की साँस में अवरोध बिल्कुल भी न कर, जा रही साँसों को मुख से साँस देनी चाहिए। देन हैं प्रकृति की ये जीव सारे दोस्तो, जीभ को देने मजा हत्या न करनी चाहिए। फर्क है मानव व दानव में समझना चाहिए, इंसान को इंसानियत की हद में रहना चाहिए। »

निराशा दूर करो (कुंडलिया छन्द)

अगर निराशा है कहीं, दूर करो तत्काल, मन में अपने जोश को, सदा रखो संभाल। सदा रखो संभाल, जोश में जोश न खोना, आप हमेशा आग नहीं शीतलता बोना। कहे लेखनी नहीं, निराशा में रहना तुम, हिम्मत रखना दूर रहेंगी सारी उलझन। ——- डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय प्रस्तुति- कुंडलिया छन्द »

निन्दारत रहना नहीं (कुंडलिया छन्द)

निन्दारत रहना नहीं, निंदा जहर समान, निन्दारत इंसान का, कौन करे सम्मान। कौन करे सम्मान, सभी दूरी रखते हैं, निन्दारत को देख, सब मन में हंसते हैं। कहे लेखनी छोड़, मनुज निंदा की बातें, अपने में रह मगन, न कर दूजे की बातें। ————– डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय प्रस्तुति- कुंडलिया ,छन्द »

बेकारी (कुंडलिया छन्द)

बेकारी पर आप कुछ, नया करो सरकार, युवाजनों को आज है, राहत की दरकार। राहत की दरकार, उन्हें, वे चिंता में हैं, पायेंगे या नहीं नौकरी शंका में हैं। कहे ‘लेखनी’ दूर, करो उनकी आशंका, आज बजा दो आप, जोश का कोई डंका। ************************* बेकारी पर नीतियां, बनी अनेकों बार, लेकिन उस हुआ नहीं, सच्चा सा प्रहार, सच्चा सा प्रहार, नहीं होने से बढ़कर बेकारी की बाढ़, चली लहरों सी बनकर। कहे लेखनी करो,... »

दिल दुखाओ मत किसी का

ठिठोली करो तुम खूब लेकिन दिल दुखाओ मत किसी का, जोर से गाओ मगर मत चैन लूटो तुम किसी का। किसी बीमार की जब रात को आँखें लगी हों मुश्किलों से जोर से डीजे बजाकर मत बनो जरिया दुःखों का। जब कभी कोई व्यथित हो दुख व पीड़ा से, सामने उसके न प्रदर्शन करो अपने सुखों का। आँख में पर्दा लगाकर मत चलो ऐसे सड़क पर भान रख लो तुम दिखावे के मुखों का। »

कुछ नहीं साथ जाता

सदा को कौन रहता है यहां इस जमीं में समय करके पूरा चले जाते सब हैं। तेरा व मेरा सभी कुछ यहीं पर रह जाता है कुछ नहीं साथ जाता। न आने का मालूम न जाने का मालूम बीच के ही सपनों में होता है मन गुम। खुली नींद सपना जैसे ही टूटा वैसे ही डोरों से नाता छूटा। जद्दोजहद सब यहीं छोड़कर वे सांसें न जाने कहाँ भागती हैं। जानते हुए सब सच्चाइयों को इच्छाएं मानव को नहीं छोड़ती हैं। »

कुछ बोलना होगा

समस्याएं बहुत हैं आपको मुँह खोलना होगा जरा बिंदास होकर आज तो कुछ बोलना होगा। गरीबी मिटाने के लगे जितने भी नारे हैं, उनको हकीकत में हमें अब तोलना होगा। बेरोजगारी से युवा हैं दर्द में काफी, हमारी लेखनी को आज तो कुछ बोलना होगा। न हमें पक्ष से प्यार ना ही है विपक्षी से यौवन का भला तो आज हमने सोचना होगा। »

आज कुछ गा लूँ मैं

आज कुछ गा लूँ मैं तुम्हें सुना लूँ मैं, गीत ही गीत में भुला कर के दिल में अपने बसा लूँ मैं। मिटा दूँ सब की सब गलतफहमी, सच्चा गायक हूँ यह बता दूँ मैं, पूरा लायक हूँ यह दिखा दूँ मैं निकाल कर पलों की फुर्सत तुम बैठ जाओ, तुम्हें सुना दूँ गीत के बोल की देकर थपकी गोद में प्यार से सुला दूँ मैं। तुम्हारे स्वप्न में भी शामिल हो आज अपना तुम्हें बना दूँ मैं। »

चलो पतंग उड़ाएं

चलो पतंग उड़ाएं लूट लें, काट लें पतंग उनकी सभी रंगीनियां अपनी बनायें चलो पतंग उड़ाएं चलो पतंग उड़ाएं। उनके चेहरे की खुशियों को चुराकर चलो आनंद मनायें चलो पतंग उड़ाएं। कटी पतंग दूसरे की जिस दिशा में हो उस तरफ दौड़ लगाएं चलो पतंग उड़ाएं। वो उड़ाने में कुशल हों न हों मगर हम काटने में कुशल बन जायें, न कोई प्यार, न झिझक रखनी बस काटने में लग जाएं चलो पतंग उड़ाएं। आंख से आंख लड़ाकर उनसे खुद की आंखों में जरा उलझा ... »

आपको नींद आ गई आधी

आपको नींद आ गई आधी और हम गीत लिख रहे हैं अब क्या करें यह कलम भी चंचल है जागती तब है, सो गए जब सब। स्वप्न में भी मनुष्य की पीड़ा भाव को शिल्प को जगाती है तन अगर चाहता है सोना भी ये कलम खुद ब खुद लिखाती है। कुछ न कुछ बात उठा जीवन की लेखनी नींद उड़ा देती है, आपके स्वप्न में भी आकर यह हंसाती और रुला देती है। »

इस सड़क पर लिखी कहानी है

राग कहाँ रागिनी कहाँ मेरी इस सड़क पर लिखी कहानी है, दो घड़ी आप भी खड़े होकर देख लो क्या है मेरी कहानी है। लोहड़ी क्या, कई त्यौहार आये आपने खीर पुए खूब खाये मगर मुझे तो बस सुगन्ध आई वो भी जब यह हवा बहा लाई। कभी तो सोचता हूँ मैं नहीं मानव मगर ये हाथ-पांव, मुंह-आंखें किसी मनुष्य की तरह ही हैं जो मुझे भी मनुष्य कहती हैं। ठंड क्या गर्मियां हों बारिश हो कोई त्यौहार हो या रौनक हो मगर मैं एक सा रहा अब तक पड़ा ... »

मदद की तरफ बढ़ना है

ठोस के साथ हमें कुछ उदार रहना है अपनी आदत में हमें अब सुधार करना है। स्वहित के साथ हमें दूसरों के हित में भी थोड़ा रुझान रखना है मदद की तरफ बढ़ना है। जिन्हें जरूरत है उन्हें मदद करने डगर उनकी सरल करने हमें भी बढ़ना है, इंसान की तरह बर्ताव कर इंसान से प्रेम करना है इंसानियत में रख निष्ठा इंसान बनना है। महान बन सकें न हम भले मगर महानता की सीख लेकर उसे व्यवहार में उतारना है, खुद के व्यक्तित्व को निखारना... »

जीवन का दर्द लिखो कहती है

जीवन का दर्द लिखो कहती है कलम आज बोलो कहती है उपेक्षित-शोषित-उत्पीड़ित की आवाज बनो कहती है। प्यार-मुहब्बत पर लिखता हूँ रोमांचित होने लगता हूँ, जैसे ही रमने लगता हूँ कलम मुझे कहने लगती है, भूखे-प्यासे जीवन की आवाज लिखो कहती है कर्तव्य न भूलो कहती है। मानव आधारित भेदभाव को दूर करो कहती है, समरसता हो जीवन में कुछ ऐसा लिखने को कहती है। सबके अधिकार बराबर हों ऐसा प्रसार करो कहती है, मानव-मानव में एका का ... »

वक्त मत हाथ से जाने देना

वक्त मत हाथ से जाने देना वक्त को खूब भुना लेना तुम कभी आलस अगर आना चाहे उसको तुम पास मत आने देना। वक्त जब हाथ से निकल लेगा तब नहीं लौट कर वो आयेगा खर्च कितना भी करो धन लुटा लो मगर वो बीत चुका वक्त नहीं आयेगा। याद वो बालपन करो अब तुम क्या दुबारा बुला सकोगे उसे, क्या फिर खेल सकोगे माटी में क्या फिर से लिख सकोगे पाटी में। वक्त जो है उसी में खुश होकर जिंदगी जियो यूँ हल्के में बोझ सब दूर कर लो मन के तु... »

बड़े आदमी कब कहलाओगे तुम

बड़े आदमी कब कहलाओगे तुम जमीं पर नजर जब रख पाओगे तुम। इंसानियत को बचाकर के मन में रख पाओगे जब बड़े आदमी तब कहलाओगे तुम। जब तक न दोगे दूजे को इज्जत जब तक न समझोगे इज्जत की कीमत। जब तक रहोगे मान-मद में अपने बड़े आदमी क्यों कहलाओगे तुम। नहीं धन किसी को बनाता बड़ा है, वरन साफ मन ही बनाता बड़ा है। धनवान होकर मदद कर न पाए गरीबों को इंसाँ समझ तक पाए, समझते हो खुद को बड़ा आदमी हूँ, गलतफहमियां क्यों पाले हो तुम। »

कुछ भी कह देना सरल है

दगा करना सरल है वफ़ा करना कठिन है गिराना सरल है किसी को उठाना कठिन है। दिल जोड़ लेना और अपना बोल लेना सरल है, निभाना कठिन है। कुछ भी कह देना सरल है कर पाना कठिन है, चाँद तोड़कर लाने की बात करना और भी सरल है, हर परिस्थिति में मुहब्बत करना और भी कठिन है। »

पूँजी तेरे खेल निराले

पूँजी तेरे खेल निराले जिसकी जेब में भर जाती है उसका संसार बदल जाती है, धीरे-धीरे आकर तू मानव व्यवहार बदल जाती है। दम्भ, दर्प, मद, गर्व आदि संगी साथी ले आती है। तेरे आने से मानव की आंखों में पट्टी बंध जाती है, सब कमतर से लगते हैं फिर अहं भावना आ जाती है। पूँजी तेरे खेल निराले किसी को नहला जाती है, लद-कद कर घर भर जाती है, किसी को सूखा रख देती है, भूखा ही रख देती है। कोई मेहनत कर के भी दो रोटी नहीं क... »

क्यों इस तरह हो रूठे

बातें बताओ खुल कर क्यों इस तरह हो रूठे कहते थे प्यार दूँगा अब बन गए हो झूठे। बिन बात मुँह फुलाकर चुपचाप क्यों हो बैठे, क्या कह दिया है हमने जो इस तरह हो ऐंठे। लगता है पड़ गए हैं कुछ नफ़रतों के छींटे, कसमें थीं प्यार की जो वो भूल कर यूँ बैठे। आशा थी जिन फलों से वे बन रहे हैं खट्टे छोड़ो ये राह आओ दो बोल बोलो मीठे। »

घमंड तेरा शत्रु है

घमंड तेरा शत्रु है उसे कभी न पास रख तेरा करेगा अवनयन उसे कभी न पास रख। घमंड से कटेंगे तेरे मित्र और दोस्त सब, घमंड लील जायेगा ये आत्मीय भाव सब। तू शिखर को चूम ले गगन की यात्राएं कर मगर न भूल मूल को सभी से प्रेम भाव रख। अगर घमंड भाव है तो पूछता ही कौन है, स्वाभिमान सब में है दिख रहा जो मौन है। न धन बड़ा न तन बड़ा ये नाशवान चीज है फिर घमंड क्यों करे घमंड दुख का बीज है। »

बोलो उसकी क्या गलती थी

तुम्हारी नादानी थी बोलो उसकी क्या गलती थी वो पेट में खेला करती थी, बाहर आकर दुनिया देखूंगी मन में सोचा करती थी। वो कलिका अपने जीने के सपने देखा करती थी, तुम से मम्मा कहने को मन ही मन आतुर रहती थी। लेकिन पैदा होते ही अपनी लाज बचाने को तुमने उसका गला दबाया मार दिया बेचारी को। तुम्हारी नादानी थी बोलो उसकी क्या गलती थी उसको तो कुछ पता नहीं था वो तो नन्हीं सी कोपल थी। »

ठेके का रिक्शा खींच दिन भर

आ बैठ जा मैं गीत लिख दूँ आज तुझ पर है उपेक्षित तू सदा से ठण्ड की रातों में सोता है खुली ठंडी सड़क पर। ठेके का रिक्शा खींच दिन भर जो कमाता है उसे भेजता है गांव में परिवार को, रोज खपता है भले रविवार हो शनिवार हो। हांफ जाता है चढ़ाई पर जोर टांगों से लगाकर शक्ति को पूरी खपाकर मंजिलें देता पथिक को, सब यही कहते हैं कम कर कोई नहीं देता अधिक तो। जो मिला कम खा बचा कर्तव्य अपने है निभाता पत्नी-बच्चे, वृद्ध वा... »

दुख-सुख का निरंतर चक्र है

मन !!जरा सी बात पर तू मत दुखित हो इस तरह जिन्दगी है हार भी है जीत भी, संघर्ष भी। गर कभी है अवनयन तो है यहां उत्कर्ष भी। डूबने का भय कभी है तो कभी है नाव भी है कभी ढलती पहाड़ी और है चढ़ाव भी। है कभी खुशियों की बारिश है कभी दुःख की डगर इन सभी को देखकर अब मन मेरे तू दुख न कर। सब लगा रहता है दुख-सुख का निरंतर चक्र है ईश खुश है तो कभी उसकी नजर भी वक्र है। राह में कंटक भले हों हैं सजे कुछ फूल भी, याद रख ख... »

झूठ में सच मत छिपाने दो

भ्रष्टाचार खत्म करो ऊपर की कमाई पर रोक लगाओ सत्यता के भाव जगाओ रातों-रात करोड़पति बनने की प्रवृत्ति पर विराम लगाओ नियम कानून जो बने हैं उन्हें काम पर लगाओ, गरीबों की योजनाओं को उन तक पहुंचने दो बिना लिए-दिये काम होने दो हकदार तक हक पहुंचने दो। राशनकार्ड में जितना मिलता है मिल जाने दो, मत बचाकर रखो गरीबों में राशन बंट जाने दो। अब कुहरा छंट जाने दो। गांव के रास्ते में खड़ंजे बिछ जाने दो, उस पर कंकरीट ... »

सत्य के लिए लड़ना पड़ता है

यह संसार है यहां के कुछ नियम होते हैं यहाँ दिखावे की बजाय लोग दिल से अपने बनाने होते हैं। यहां इज्जत पाने से पहले दूसरे को सम्मान देना पड़ता है। शिखर में चढ़ने के लिए झुकना भी पड़ता है, दिलों में राज करने के लिए त्याग करना पड़ता है, स्वार्थ त्याग कर दूसरों के लिए भी कुछ करना पड़ता है। सत्य के लिए लड़ना पड़ता है, अन्यथा सब नहले के दहले होते हैं, कौन किस से कमतर होता है, वक्त आने पर सीधा भी प्रखर होता है। »

विचार कर सको तो जरूर करना

विचार कर सको तो जरूर कर लेना, असुर हो या मनुज हिसाब रख लेना। अपने कृत्यों की सजाकर डायरी जा रहे वक्त के पन्नों में आप लिख लेना। जिन माता-पिता ने जन्म दिया, पालन किया उनकी सेवा का था कर्तव्य जो, क्या उसे आप निभा पाये हो सच्ची संतान कहा पाये हो, सात फेरों की सपथ खाकर तुम जिस अर्धांगिनी को लाये हो क्या उसे सच में जिम्मेदारी से खूब सम्मान दिला पाये हो। जा रहे वक्त के पन्नों में आप लिख लेना, अपने बच्चो... »

तुम्हारी भाग वाली खोपड़ी है

हमारी मुफलिसी को क्या समझो तुम तुम्हारे महल, हमारी झोपड़ी है, हमारी राह में संघर्ष खड़ा तुम्हारी भाग वाली खोपड़ी है। हमें नसीब बड़ी मुश्किल से रोटियां पेट भर को खाने को, तुम्हारे पास फेंकने को है, कूड़ेदानों में डालने को है। तुम्हें तो मूल्य का पता ही नहीं दाने-दाने में कितना जीवन है, उसके एवज में रात-दिन खपते तब कहीं साँस लेता जीवन है। तुन्हें जीवन मिला है वरदानी विधाता ने दिया है धन-पानी उड़ाओ खूब मजे... »

आ मेरे मीत!! कर बहाने मत

आ मेरे मीत!! कर बहाने मत दे मुझे अश्रु से नहाने मत, बह रहे भाव खूब आंखों से अब इन्हें रोक ले, दे आने मत। जब से फेरी है तूने पीठ मुझे तब से मन के चिराग मेरे बुझे, ऐसा लगता है तनिक सी भी नहीं रही परवाह मेरे मन की तुझे। यह हवा चल रही है छू कर तन तेरे बिन हो रही है बस सिहरन चैन लेकर चला गया है तू अब यहां बच गई केवल उलझन। आ मेरी उलझी लट बना जा तू विरह के गम को अब मिटा जा तू, आ भले दो घड़ी को आ जा तू खुद... »

पहली जरूरत हो तुम

सुबह सुबह की गरम चाय हो तुम आलस्य छोड़ने में सहाय हो तुम, खुद ही बुनता रहा उधेड़ रहा, उलझी बातों में मेरी राय हो तुम। जिन्दगी को जरूरी मुहब्बत हो तुम दिल में राज करती हुकूमत हो तुम। कुछ कर सकने की कूबत हो तुम, पहली से भी पहली जरूरत हो तुम। »

पलायन

गांव वीरान हो गए छोड़कर वे मनोरम वादियां शहर की ओर चल दिये, फिर नहीं लौट पाये वापस शहर में भीड़ थी वे भीड़ में समा गये। उधर वे खो गए इधर गांव के आंगन के पत्थर तक रो दिए। खेत-खलिहान में झाड़ियां उग गईं, उनकी यादें धीरे-धीरे मिट गईं। »

बेकारी ने छीन लिया

कुछ जहाँ थे वहीं हैं कुछ पहुँचे आकाश कुछ की हालत दीन है कुछ हैं मालामाल। बेकारी ने छीन लिया युवा दिलों का जोश, मेहनत की मजदूर ने फिर भी खाली कोष। फिर भी खाली कोष कभी कुछ बचा नहीं रोज कमाया, खाया हाथ कुछ रहा नहीं। कुछ के पास अपार संपदा पड़ी हुई है, कुछ की निर्धनता अपने में ही अड़ी हुई है। »

कमा लो धन भले कितना

कमा लो धन भले कितना मगर नजरें धरा पर हों, किसी को तुच्छ मत समझो, नजर से सब बराबर हों। पढाई उच्च हासिल कर मिला प्रमाण कागज में वही व्यवहार में दिख जाये तब है बात कागज में। अन्यथा कुछ नहीं है शून्य है जो भी पढ़ा हमने अगर व्यवहार में लाये नहीं तब क्या पढ़ा हमने। कमाया हो अरब से भी अधिक लेकिन किसी धनहीन का सहारा बन न पाये गर कमाया क्या भला हमने। भलाई साथ जाती है अधिक रहता यहीं पर है, किसी को भी हमेशा को... »

मन अगर साफ है

मन अगर साफ है सभी कुछ साफ है अगर है मैल मन में दिखावा पाप है। वार आगे न करके करे जो पीठ पर, उसे मत वीर कहना समझ जाना समय पर। रखे जो ख्याल दूजे का सहारा बेसहारे को उसे कहते फरिश्ता सब उसे सच में समझना रब। »

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