बेटी पर मार्मिक कविता

बेटी से सौभाग्य

बेटी है लक्ष्मी का रुप, मिलतीं है सौभाग्य से, घर का आंगन खिल जाता है, उसकी पायल की झन्कार से। बेटी ही तो मां बनकर, हमको देती नया जनम, सम्मान करें हर बेटी का, यह है हर मानव का धरम, जनम न दोगे बेटी को तो, संसार ये रुक जाएगा, बिन बेटी के, बेटे वालो, बेटा न हो पाएगा। »

बेटी घर की रौनक होती है

बेटी घर की रौनक होती है बाप के दिल की खनक होती है माँ के अरमानों की महक होती है फिर भी उसको नकारा जाता है भेदभाव का पुतला उसे बनाया जाता है आओ इस रीत को बदलते है एक बार फिर उसका स्वागत करते है »

माँ

तुम शान थी मेरी , तुम मान थी मेरी , तुम अभिमान थी मेरी , इस दुःख भरी दुनिया में ,खुशियों की पहचान थी मेरी ! जब इस दुनिया में आयी ,पहचान कराया माँ तमने , परिवार में बेटो के चाह में पागल , पर मैं बेटो से कम नहीं यह स्थान दिलाया तमने ! बचपन से बेटो बेटियों की भेद भाव की सीडी देख बड़ी हुई , पर तुम हर सीडी के बिच खड़ी हुई , मेरी बेटी बेटो से कम नहीं इस बात पे तुम अड़ी रही ! आज भी याद है माँ स्कूल का वो पह... »

यादें

बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं? चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं, अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं, मेरे साथ दोस्ती निभाने जो आईं थीं। दबे पाँव गुपचुप, न आहट ही की कोई, कनखियों से देखा, फिर नज़रें मिलाईं थीं। मेरा काम रोका, हर उलझन को टोका, मेरे साथ वक्त बिताने जो आईं थीं। भूले हुए किस्से, कुछ टुकड़े, कुछ हिस्से यहाँ से, वहाँ से बटोर के ले आईं थीं। हल्की सी मुस्कान को हँसी में बदल गईं मेरे... »

बहाना

उसको समझना बड़ा मुश्किल होने लगा, कोई भी बहाना न उस पर चलने लगा, छोटी से न जाने कब बड़ी हुई मेरी बेटी, के अब चिंता में ये बाप हर दम डरने लगा।। राही (अंजाना) »

मेरी बेटी

मेरी शान है बेटी अभिमान है बेटी हर मुश्किल में साथ है बेटी -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

बेटी

पायल की खनक रुनझुन सुखद एहसास करती है आंगन में बेटी जब छन छन करती आती है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

बहु

उस पल को तो आना ही था, तुझको विदा हो जाना ही था, ये रीती रिवाजों की ज़ंज़ीर थी, जिसमे तुझे बन्ध जाना ही था, बेटी रही तू मेरी जान से प्यारी, तुझको बहु बन जाना ही था।। राही (अंजाना) »

अजन्मी बेटी की पुकार

माँ मुझे भी इस दुनिया में ले आओ न इस जग की लीला मुझे भी दिखलाओ न खुले आसमान के नीचे मुझको घुमाओ न अपनी ममतामई गोद में खिलाओ न पढ़ा लिखा कर मुझे भी अफसर बनाओ न गर्व से करूंगी नाम रोशन आप सबका माँ मान और सम्मान सब दिलवाऊँगी माँ पापा का भी हाथ मैं बटाऊँगी माँ न मारो मुझको यूं तोड़ कर माँ मौका तो दो कुछ कर गुजरने का माँ।। »

चाहिए सब कुछ जुबाएँ ना साथ देती ।।

चाहिए सब कुछ जुबाएँ ना साथ देती ।।

सब कुछ चाहिए जुबाएँ ना साथ देती, जब आती है रिश्ते शादी की जुबाएँ पर मिठास होती, देख अच्छे से ऐसी — वैसी बात होती– चाहिए सब कुछ जुबाएँ ना साथ होती। बात बन जाती तब होती बात समाधी की तब लम्बी–लम्बी बात होती, चाहिए सब कुछ जुबाएँ ना साथ होती, पहले बार मे लेने देने की बात नही होती, दुसरे बार मे फरमाइस होती, चाहिए सब कुछ जुबाएँ ना साथ देती।। आ जाता जब दिन नजदीक शादी की पड़ोसी का धर भरा ... »

मृत्योपरांत स्मरण

शीर्षक – मृत्योपरांत स्मरण (एक बेटी के भाव अपने पिता की मृत्यु पर ) जिसने हाथ पकड़कर चलना सिखाया आज साथ छोड़ कर जा रहा है वो… गिरकर सम्भलना सिखाया जिसने आज फिर उठने से कतरा रहा है वो जिसने हर एक को बनाया आज टूटे जा रहा है वो ठहरना सिखाया जिसने आज चले जा रहा है वो पढ़ लेता हैं जो मन की बात को आज ज़ुबा से लफ्ज़ बयां ना कर पा रहा हैं वो जिसने चेहरे से ना झलकने दिया गम कभी आज आँसुओ की बारिश में... »

केवल बेटी ही नही, वेटे भी घर छोड़ जाते।

केवल बेटी ही नही, बेटे भी घर जाते। दो जुम के रोटी के लिए अपना घर– परिवार छोड़ जाते। जो आज तक पला बाप के हाथ के छाये मे, आज वो दुसरे शहर मे भुखे पेट सो जाते, जब पत्नी पुछती कब आओगे लौटकर अपने शहर मे, तो कुछ बहाना बनाकर उसे समझा देते। केवल बेटी ही नही बेटे भी घर छोड़ जाते। जो दिन रात करते थे ,मनमानी आज वो आँसु पी कर सो जाते । दो जुम की रोटी के लिए अपनो का साथ छोड़ जाते, केवल बेटी ही नही बेटे भ... »

बेटी

आँखों ही आँखों में जाने कब बड़ी हो जाती है बिन कुछ कहे सब कुछ समझ जाती है जो करती थी कल तक चीज़ों के लिए ज़िद आज वो अपनी इच्छाओं को दबा जाती है अब कुछ भी न कहना पड़ता है उससे सब कुछ वो झट से कर जाती है एक गिलास पानी का भी न उठाने वाली आज पूरे घर को भोजन पकाती है कभी भी कहीं भी बैग उठा कर चल देने वाली आज वो अपना हर कदम सोंच समझ कर बाहर निकालती है।। »

ताल्लुक संस्कृति से अपना वो खुल के दिखाती है,

ताल्लुक संस्कृति से अपना वो खुल के दिखाती है,

ताल्लुक संस्कृति से अपना वो खुल के दिखाती है, बेटी इस घर की जब गुड़िया को भी दुप्पट्टा उढ़ाती है।। राही (अंजाना) »

जवाब…

जवाब… बस देती ही रही हूं जवाब… घर जाने से लेकर घर आने का जवाब… खाने से लेकर खाना बनाने का जवाब… बस देती ही रही हूं जवाब… चित्र से लेकर चरित्र का जवाब… सीता से लेकर द्रौपदी तक बस देती ही रही हूं जवाब… समर्पण में दर्पण देखने का समय ना मिला मुझे मगर देती रही मैं सबको जवाब… कभी उद्दंड कभी स्वार्थी कभी चरित्र हीन बताया… थोड़ा अपने लिये जी क्या लिया अ... »

भारत के रक्षक

इतिहास है आज भी जिस पर मौन, वह है आखिर कौन, वह है आखिर कौन? जो लड़ता रहा हर समय किसी के लिए, और मरता रहा किसी के लिए| रहता है वो सबसे दूर, देश के प्यार में है वो मजबूर| दो देशों की ‘नेतागिरी’, जिसमे है अब सेना ‘गिरी’| जिसकी माँ करती उसके लिए हमेशा इंतज़ार| बेटी कहती है बार बार,लगता है हो गये साल हज़ार आपका करे दीदार| न जाने क्यों बटा है ये जहां, जिसमे ली है लोगों ने पनाह| हर द... »

भारत के रक्षक

इतिहास है आज भी जिस पर मौन, वह है आखिर कौन, वह है आखिर कौन? जो लड़ता रहा हर समय किसी के लिए, और मरता रहा किसी के लिए| रहता है वो सबसे दूर, देश के प्यार में है वो मजबूर| दो देशों की ‘नेतागिरी’, जिसमे है अब सेना ‘गिरी’| जिसकी माँ करती उसके लिए हमेशा इंतज़ार| बेटी कहती है बार बार,लगता है हो गये साल हज़ार आपका करे दीदार| न जाने क्यों बटा है ये जहां, जिसमे ली है लोगों ने पनाह| हर द... »

जब मैं तुम्हे लिखने चली

जमाने में रहे पर जमाने को खबर न थी ढिंढोरे की तुम्हारी आदत न थी अच्छे कामों का लेखा तुम्हारा व्यर्थ ही रह गया हमसे साथ तुम्हारा अनकहा सा कह गया जीतना ही सिखाया हारने की मन में न लाने दी तो क्यों एक पल भी जीने की मन में न आने दी हिम्मत बांधी सबको और खुद ही खो दी दूर कर ली खुदा ने हमसे माँ कि गोदी दिल था तुम्हारा या फूलों का गहना अब जुदाई को तुमसे सदा ही सहना रोता रहा दिल आँखों ने साथ न दिया फैसले क... »

Ghazal

मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत की दुश्मन है औरत सच तो सच है बेशक थोड़ा कड़वा है सबकी हसरत अच्छे घर जाए बेटी लड़का कितना महगां हो पर चलता है शादी क्या है सौदा है जी चीज़ो का खर्च करेगा ज्यादा वो ही बिकता है लुटने वालो को लूटे तो क्या शिकवा आज लकी मै भी लूटूँ तो कैसा है »

Ghazal

मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत की दुश्मन है औरत सच तो सच है बेशक थोड़ा कड़वा है सबकी हसरत अच्छे घर जाए बेटी लड़का कितना महगां हो पर चलता है शादी क्या है सौदा है जी चीज़ो का खर्च करेगा ज्यादा वो ही बिकता है लुटने वालो को लूटे तो क्या शिकवा आज लकी मै भी लूटूँ तो कैसा है »

A pray for india

जब तक है जीवन तब तक इस की सेवा ही आधार रहे विष्णु का अतुल पुराण रहे नरसिंह के रक्षक वार रहे हे प्राणनाथ! हे त्रयंबकम! शिव शंभू के शिव सार रहे हम रहे कभी ना रहे मगर इसकी प्रभुता का पार रहे शेखर के वह उद्गार रहे अब्दुल हमीद सम ज्वार रहे हे पवनपुत्र! हे मारुति! भारत ही बारंबार रहे अब्दुल गफ्फार का शांति मार्ग बूढ़े जफर की तलवार रहे अब्दुल कलाम के प्राण बसे हिंदू मुस्लिम समभार रहे कण कण मिट्टी में वसु... »

तुझे शर्म नहीं आई

नमस्कार दोस्तों आप सब देख रहे हैं आज कल बच्चियों के साथ कुछ बहेशी दरिन्दे जो कर रहे हैं दो शब्द आज लिखने पर मजबूर हो गया ऐसे कुकर्म करते जरा भी शर्म क्या तुझे नहीं आई। उसे देख तुझे अपनी बेटी याद क्या तुझे नहीं आई।। “” “” ” चिखती चिल्लाती तो कभी दर्द से कराहती भी होगी। उस मासूम पर जरा सा भी रहेम क्या तुझे नहीं आई।। ” “” “” वो तुझे चाचा भईय... »

क्या था क़सूर मेरा??????

क्या था क़सूर मेरा????? (पीड़ित बेटी आसिफ़ा के सवाल) 1.गहन गिरवन सघन वन में बहुत खुश अपने ही मन मे मूक पशु पक्षी के संग में था बसा परिवार मेरा….. पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर मेरा ????? 2.बेटी बन में घर तुम्हारे आ गयी थी खुशियां बन परिवार जन पर छा गयी थी दो समय का भोज था और कुछ थे अपने थी भली वह झोपड़ी न थे महल सपने था ये हंसता खेलता संसार मेरा …… पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर म... »

क्या था क़सूर मेरा??????

क्या था क़सूर मेरा????? (पीड़ित बेटी आसिफ़ा के सवाल) 1.गहन गिरवन सघन वन में बहुत खुश अपने ही मन मे मूक पशु पक्षी के संग में था बसा परिवार मेरा….. पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर मेरा ????? 2.बेटी बन में घर तुम्हारे आ गयी थी खुशियां बन परिवार जन पर छा गयी थी दो समय का भोज था और कुछ थे अपने थी भली वह झोपड़ी न थे महल सपने था ये हंसता खेलता संसार मेरा …… पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर म... »

उसकी आबरु को यहाँ छीन लिया जाता हैं

उसकी आबरु को यहाँ छीन लिया जाता हैं, जिस देश मे”बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ” का नारा दिया जाता हैं, हर छोटे मसले पर यहाँ बड़े फैसले होते हैं, बस अहम बात को दबा दिया जाता हैं, रौंद देते हो मासूमियत को पैरों तेले, तुम्हारे अंदर का इंसान क्या मर जाता हैं, जब आती हैं बात इंसाफ़ की, मेरे देश का कानून किधर जाता हैं, सीता हो, द्रोपदी हो, या हो निर्भया, आसिफा क्यों,हर लड़ाई में स्त्री के अस्तित्व को नोच ... »

बांधकर बेड़ियों से कोमल पैरों को खींच कर

बांधकर बेड़ियों से कोमल पैरों को खींच कर

बांधकर बेड़ियों से कोमल पैरों को खींच कर, घर की चौखट के बाहर वो कभी जाने नहीं देते, हिम्मत जो जुटाती है बेटी कोई पढ़ने को, तो उसके कदमों को आगे कभी वो जाने नहीं देते, कितने संकुचित मन होते हैं वो, जो झूठी रस्मों से बाहिर कभी आने नहीं देते।। राही (अंजाना) »

वक्त

आज मैंने वक़्त को महफील में बुलाया…. बहस तब छिड़ी जब वक़्त ही वक़्त पर ना आया… सबने आरोप लगाये लोग आगबबूला हुए… और वक़्त बेचारा नज़रे फिराए बैठा रहा… गरीब ने कहा मेरा वक़्त बुरा था सबने परेशान किया तुमने साथ क्यों नहीं दिया… बाप बोला मेरा बेटी ICU में थी उसे थोड़ा वक़्त और क्यों ना दिया… जवां बेटा बोला मैं अफसर बनने ही वाला था तुमने मेरी माँ को थोड़ा वक़्त और क्यों ना दिया... »

अटल अविचल धर पग बढ़ नारी

अटल अविचल धर पग बढ़ नारी जीवन मे नव इतिहास गढ़ नारी नारी है तू यह सोच न कमतर कम॔ कर तू अभिनव हटकर तुझसे बंधा है सुख परिवार का सव॔ सुख दे सदा तू श्रेयस्कर आत्मबल से लक्ष्य पकड़ नारी अटल अविचल धर पग बढ नारी उलझन तनाव डिप्रेशन अवसाद जिंदगी की महज परीक्षा है उत्तीर्ण हो सदा सजग बनकर यही सम्पूर्ण नारी शिक्षा है धीरज से मंजिल राह पकड़ नारी अटल अविचल धर पग बढ नारी जननी माता बहन बेटी तू ही पत्नी प्रेयसी त... »

नारी

शिव की शक्ति बनकर तूने हर एक क्षण साथ निभाया नारी, पिता- पती के घर को तूने हर एक क्षण महकाया नारी, हर एक युग में अपने अस्तित्व का तूने एहसास कराया नारी, प्रश्न उठे भरपूर मगर हर जन को तूने निरुत्तर कर दिखाया नारी, ममता के आँचल में मानुष को तूने प्रेम सिखाया नारी, आँख उठी जो तुझपर तूने काली रूप दिखाया नारी, बेटा-बेटी के बीच पनपते फर्क को तूने मिटाया नारी, कन्धे से कन्धा मिलाकर तूने जग में सम्मान फिर... »

तेरी शान से ही तो हर पल मेरी शान है

महिला दिवस पर प्रत्येक महिला को समर्पित ये छोटा सा लेख।। तेरी शान से ही तो हर पल मेरी शान है, जहाँ-जहाँ तू कदम रखे वहाँ मेरा सम्मान है, निःस्वार्थ भाव से सेवा करके तू माँ होने का बख़ूबी अर्थ समझाती है, तो बेटी के रूप में ईश्वर का अस्तित्व दिखलाती है, जब तू ब्याह कर नए घर में आती है, तब मानो उस घर की तक़दीर ही बदल जाती है, तिरंगा को ऊँचा करके तू देश को गर्व कराती है, विपदा से निपटने के लिए तू ज्वाला ... »

हिंदी दिवस की शुभकामनाएं

हमारी आन, मान, शान “हिंदी” ……………………………………… भावनाओं का सागर हो दिल में, तो एक कश्ती उतरती है, विचारों की बाहों में बाहें गूँथ कर, लहरों सी सुंदर पंक्तियाँ बुनती है, ये साहसी काम बस, हमारी प्यारी भाषा ‘हिंदी’ करती है, …………. भाषा के गागर से उछल उछल कर निकलते शब्द, मान, मर्यादा, अपनत्व, प्... »

Naya saal

नये साल की पवन बेला पर पहुचे तुम्हे बधाई.. देश प्रेम है धर्म हमारा,हम सब हैं भाई भाई .. मान और सम्मान बढे,जीवन हो श्रेष्ठ शिखर पर.. मानवता हो कर्म हमारा,हर जाती धर्म से बढ़कर.. भेद भाव और छुआ छूत का नाम ना हो वसुधा पर .. हिन्दू मुसलिम सब साथ रहे, देश बढे उन्नति के पथ पर .. आपस में हम गले मिले है रूत मिलने की आई .. देश के कोने कोने में नारी को अब सम्मान मिले .. हर बाला लक्ष्मी बाई हो, हर बेटी को शिक... »

मानुषी छिल्लर

मानुषी छिल्लर

फ़क्र है हमें, नाज है हरियाणा की बेटी तू भारत की शान है| »

मैं बेटी हूँ

मैं बेटी हूँ….. मैं गुड़िया मिट्टी की हूँ। खामोश सदा मैं रहती हूँ। मैं बेटी हूँ….. मैं धरती माँ की बेटी हूँ। निःश्वास साँस मैं ढोती हूँ। मैं बेटी हूँ…….. मैं गुड़िया मिट्टी की हूँ। खामोश सदा मैं रहती हूँ। मैं बेटी हूँ….. मैं धरती माँ की बेटी हूँ। निःश्वास साँस मैं ढोती हूँ। मैं बेटी हूँ……. »

माँ

‘ माँ ’ माँ को खोकर हुआ माँ की ममता का एहसास, पाना चाहा था माँ को और प्रतिबिम्बों में, पर कहीं नहीं मिला माँ का दुलारता हाथ, वो लोरियाँ, वो प्यार भरी थपकियाँ, वो उलाहने, वो डाँटना फिर पुचकारना | बेटी को पाकर माँ और ज्यादा याद आती है, उसकी एक-एक बातें बचपन को दोहराती हैं, मेरी भीगी पलकों को देख उसका परेशान होना, क्या कहूँ उससे एक माँ को है एक माँ की तलाश | -सन्ध्या गोलछा »

बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ

जिम्मेंदारी को जब उसने महसूस किया तो, ऑटो रिक्शा भी चलाने लगती हैं वो ! पढ़ लिख के सक्षम होकर के वो अब, अंतरिक्ष में वायुयान उड़ाने लगती हैं वो !! कितने उदाहरण देखेंगे आप अब क्योकि, हर क्षेत्र में सकती आजमाने लगी हैं वो ! पति की शहादत पे अर्थी को कांधा दे, सुना हैं शमशान तक जाने लगी हैं वो !! समस्त बाधाओं को वो हरती क्यों हैं, कुछ बोलने से पहले वो डरती क्यों हैं ! प्रश्न ये ज्वलनशील है सबके सामने ये... »

बेटी की चाहत

अँधेरे कमरे से बाहर अब मैं निकलना चाहती हूँ, माँ की नज़रों में रहकर अब मैं बढ़ना चाहती हूँ, धुंधली न रह जाए ये जिन्दगी मेरी, यही वजह है के मैं अब पढ़ना चाहती हूँ, खड़ी हैं भेदभावों की दीवारें यहाँ अपनों के ही मध्य, मैं मिटा कर मतभेद सबसे जुड़ना चाहती हूँ, दबा रहे हैं जो आज मेरी देह की आवाज को, अब धड़कन ऐ रूह भी मैं उनको सुनाना चाहती हूँ॥ राही (अंजाना) »

बेटी हूँ हां बेटी हूँ

बचपन से ही सहती हूँ, मैं सहमी सहमी रहती हूँ, छुटपन में कन्या बन कर संग माँ के मैं रहती हूँ, पढ़ लिखकर मैं कन्धा बन परिवार सम्भाले रखती हूँ, फिर छोड़ घोंसला अगले पल मैं पति घर में जा बसती हूँ, पत्नी रूप में भी मैं हर बन्धन में बन्ध कर रहती हूँ, खुद के ही पेट से फिर माँ बनकर मैं (बेटी) जन्म अनोखा लेती हूँ, पढ़ जाऊ तो नाम सफल और जीवन सरल कर देती हूँ॥ बचपन से ही सहती हूँ, मैं सहमी सहमी रहती हूँ, मैं बेटी... »

मैं बेटी हूँ

मैं बेटी हूँ

मैं बेटी हूँ फिर भी मैं अकेली हूँ मैं सबकुछ नहीं कर सकती क्योंकि मैं बंधन में बंधी हूँ किसी को मैं पसंद नहीं तो कोख में ही मार दी जाती हूँ गर में किसी को पसंद हूँ तो मैं उसको नहीं पाती हूँ रब ने मुझे बनाया दुनियां को यह दिखाया मेरे बिन संसार अधूरा है ये जानते हुए भी दुनियां ने मुझे नकारा है जिस घर में मैं आई खुशियों की सौग़ात लाई बापू की ऊँगली पकड़ के दुनियां की राह पाई माँ ने मुझे सिखाया जीवन का पा... »

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

  माँ,मैं तेरे हर सपने को सच करके दिखाउंगी तेरे हर मुसीबत मे तेरे, मैं भी काम आउंगी रोशन कर दूंगी मैं तेरा नाम इस दुनिया मे मुझे भी आने दे माँ, इस दुनिया मे माँ,मैं तुझे कभी नहीं सताऊँगी तेरे होंठों पर हमेशा मुस्कराहट खिलाऊंगी कर दूंगी मैं भी कुछ ऐसा काम इस दुनिया मे मुझे भी आने दे माँ, इस दुनिया मे माँ,मैं तेरी ज़िन्दगी जीने की वजह बन जाऊंगी तेरे बुढ़ापे मे, मैं तेरी लाठी कहलाउंगी सब देखते रह ... »

बेटी की आवाज

माँ की कोख में ही दबा देते हो, मुझको रोने से पहले चुपा देते हो, आँख खुलने से पहले सुला देता हो, मुझको दुनियां की नज़र से छुपा देते हो, रख भी देती हूँ गर मैं कदम धरती पर, मुझको दिल में न तुम जगह देता हो, आगे बढ़ने की जब भी मै देखूं डगर, मेरे पैरों में बेडी लगा देते हो, पढ़ लिख कर खड़ी हो न जाऊं कहीं, मुझको पढ़ाने से जी तुम चुरा लेते हो, क्यों दोनों हाथों में मुझको उठाते नहीं, आँखों से अपनी मुझको बहा देत... »

मुझको बचाओ मुझको पढ़ाओ

कन्या बचाओ खुद कन्या कहती है- मुझको बचाओ तुम मुझको बचाओ, सपना नहीं अब हकीकत बनाओ, बेटा और बेटी का फर्क मिटाओ, बेटी बचाओ अब बेटी पढ़ाओ, बेटे के प्रति प्यार और बेटी को समझें भार, ऐसे लोगों की गलत सोंच भगाओ, मुझको बचाओ तुम मुझको बचाओ, रखने से पहले कदम ना मेरे निशाँ मिटाओ, आने दो मुझको तुम सीने से लगाओ, फैंको ना मुझको कचरे के देर में, मारो ना मुझको तुम ममता की कोख में, घर के अपने तुम लक्ष्मी बनाओ, मुझक... »

सोच, नए साल की.!.!

  क्या इस साल भी लड़ना है तुमको धर्म और जाति के नाम पर क्या इस साल भी लुटने देनी है लड़की की इज़्जत नीलाम पर क्या इस साल भी सोचा है तुमने फिर से घोटाले करने की क्या नहीं छोड़नी आदत वो गंदी दूसरों की कामयाबी से जलने की क्या इस साल भी तुमने सोचा है मां बाप को अपने ठुकराने का क्या इस साल भी तुमने सोचा है घर की बहुओं को जलाने का क्या इस साल भी तुमको करनी है बेटी की हत्या गर्भ में क्या अब और भी तु... »

अ–परिभाषित सच !

॥ बेटी के लिए एक कविता ॥  “अ—परिभाषित सच !” डरते—सहमते—सकुचाते मायके से ससुराल तक की अबाध—अनिवार्य यात्रा करते हुए मैंने; गांठ बांधी पल्लू से साथ में; ढेरों आशंकाएं …………. कई; सीख—सलाइयतें ……………   हिचकियों के बीच; हिचकोले लेता मेरा अबोध मन—-आँसूओं से भीगा अपरिचित दायरों में कसमसाता रहा “ कोई अपना तलाशता रहा “ ‘अपने&... »

नन्ही चिड़िया है बेटी

नन्ही चिड़िया है बेटी आँगन के बीच चहकने दो कली कमल की है बेटी बगिया के बीच महकने दो मीठी सी मुस्कान है बेटी हर्षित पुलकित होने दो इसको भी जीने का हक है जग में आ जाने दो । ~ कमलेश कौशिक गुरुग्राम 106 »

देशभक्ति का भाषण तब तक देशभक्ति को गाली है

एक शहीद सैनिक दिल्ली से क्या कहना चाहता होगा इसी विषय पर मेरी एक कल्पना देखें- सुलग उठी है फ़िर से झेलम हर कतरा अंगारा है, हिमगिरी के दामन में फ़िर से मेरे खून की धारा है, चीख रही है फ़िर से घाटी गोद में मेरा सिर रखकर, पूछ रही है सबसे आखिर कौन मेरा हत्यारा है, मेरे घर में कैसे दुश्मन सीमा लांघ के आया था, छोटी सी झोली में बाईस मौतें टांग के लाया था, क्या मेरा सीना उसके दुस्साहस का आभूषण था, या मेरे ही... »

अब डर सा लगता है

“अब डर सा लगता है सुबह-सुबह अखबार पकड़ने से” “न जाने कौन देश की बेटी, देश का जवान या देश का स्वाभीमान , लूट लिया हो ” ! ~शाबीर »

मेरी मौतों पर सरकारें

मेरी कलम नहीं उलझी है माशूका के बालों में, मेरे लफ्ज नहीं अटके हैं राजनीति की जालों में, मैने अपने अंदर सौ-सौ जलते सूरज पाले हैं, और सभी अंगारे अपने लफ्जों में भर डाले हैं, मैने कांटे चुन डाले फूलों का रास्ता छोड़ दिया, जकड़ रहा था जो मुझको उस नागपाश को तोड़ दिया, अब मैं जख्मी भारत के अंगों को गले लगाता हूं, कवि हूं लेकिन मैं शोलों की भाषा में चिल्लाता हूं l     एक शहीद सैनिक दिल्ली से क्या कहना च... »

रो देता है मन मेरा भी!!

दुखी हो जाता है मन मेरा भी जब जब दुखी तुझे मैं पाता हूँ क्या बोलूँ मैं दर्द मेरा टूट सा पूरा जाता हूँ   कभी सुनकर खबर शहीदों की आत्मा मेरी भी रोती है एक माँ को बार-बार टूटता देख तकलीफ मुझे भी  होती है   हर पल धर्म पर लड़ते लोग समझ मुझे न आते हैं भाईचारे की भावना को ये सब शर्मशार कर जाते हैं   माँ बेटी की इज्जत करना हमारी संस्कृति ही हमे सिखलाती है फिर भे रो देता है मन मेरा जब निर्भया... »

Article

लेख जिस तरह से एक शिकारी जाल फैलाता है और उसके जाल में शिकार खुद व खुद आकर फंस जाता है, उसी तरह कलयुग के कई नौजवान देश की नारियो, (बहन, बेटियो) की जिन्दगी को नरक के सामान दुःख दायी बर्बाद करने में लगे है और नारी को प्रेम जाल में फसाकर उसका उपयोग करके छोड़ देते है। जब तक नारी इस बात को समझती है, बहुत देर हो जाती है, और कही मुँह दिखाने के काबिल तक नही रहती, आत्म हत्या जैसा कदम उठा लेती है। हर महिला क... »

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