भोजपूरी पारंपरिक होली गीत – गोकुला के दुआर | कान्हा आवा हाली हो गोकुला के दुआर | करा ना साजन तू हमके इनकार | कान्हा आवा हाली हो गोकुला के दुआर | बितले जड़वा आइल […]
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भोजपूरी पारंपरिक होली गीत – गोकुला के दुआर | कान्हा आवा हाली हो गोकुला के दुआर | करा ना साजन तू हमके इनकार | कान्हा आवा हाली हो गोकुला के दुआर | बितले जड़वा आइल […]
पर्वतों की गोद से निकल, झरने का जल बह चला। मिलन करूं मैं धरा से, यह कह कर चला। मिलन हुआ धरा से, पर उस मिलन में, घना ताप सहकर जल बना वाष्प,बने मेघ और […]
नारी को न समझो खिलौना मनुज, वह भी एक इंसान है। जन्म देती है इंसान को, सोचो कितनी महान है। बन कर मासूम सी बिटिया, तुम्हारा घर महकाने आई है। बन कर बहन जिसने, सजाई […]
राहों में आपके कोमल सी दूब हो, पाने का हो जुनून मन में उमंग खूब हो। आ जायें जब कभी मायूसियों के दिन कुहरे के बीच भी थोड़ी सी धूप हो। मन साफ हो दिखे […]
जब भी मन घिर जाता है अपने अंतर्द्वंदों की दीवारों से, जब मस्तिष्क के आकाश में छा जाते हैं बादल अवसादों के…!! तब छांट कर संशय के अँधियारों को, ये जीवन को नई भोर देती […]
कुछ दिनों से , एक इमारत का काम चल रहा था। वहीं आस-पास ही, कुछ मजदूरों का परिवार पल रहा था। छोटे-छोटे बच्चे, दिन भर खेलते रहते कुछ खेल। एक दूजे की कमीज़ पकड़कर, बनाते […]
भोजपुरी सरस्वती वंदना – विनवा के तार | झन झंकार बाजे माई तोर वीनवा के तार | हंस चढ़ी चली आवा माई हाली हमरे द्वार | अज्ञानी अनाड़ी तोहके हम हरदम पुकारेली | सुनर गोर […]
मैं अन्नदाता देख अपनी थाली में खाना रूखा सूखा, हो उदास सोचे किसान फ़िर एक बार, हूँ किसान कहलाता मैं जग में अन्नदाता, रहता साथ अन्न के, मिले मुझे ये मुश्किलों से, मेहनत मेरी रोटी […]
ऋतुराज बसंत फिर आया है, जड़ पतझड़ फिर मुस्काया है। पेड़ पर हैं नव कोपल फूटी, फिर कोयल ने राग सुनाया है। पिली – पिली सरसों लहराई, भीनी खुशबू को महकाया है। छिप कर के […]
माघ मास का दिन पंचम, खेतों में सरसों फूल चमके सोने सम। गेहूं की खिली हैं बालियां, फूलों पर छाई बहार है, मंडराने लगी है तितलियां। बहार बसंत की आई है, सुखद संदेशे लाई है। […]
बातें बना रहे हो बेकार में अनेकों चाहत कहाँ है गुम सी पायल की मीठी छम सी। डग-मग कदम चले हैं जिस ओर हम चले हैं नजरों का फर्क क्यों है मन से तो हम […]
अपने मन का हर भाव लिखा करती हूं, कभी-कभी दुख तो कभी, अनुराग लिखा करती हूं। छोटी-छोटी मेरी खुशियां लिखने से बड़ी हो जाती हैं। बड़े-बड़े दुख के सागर, फ़िर मैं पार किया करती हूं। […]
1. जमाने की नजरों मे काफिर हैं हम क्योंकि मोहब्बत की मंज़िल के मुसाफिर हैं हम 2. आने दो गर्मी तो पहाड़ पिघल जाएंगे चट्टानों को तोड़कर समुंदर निकल जाएंगे लड़कपन है नौजवानी है अभी […]
यह जीवन मेरा रहा है समर्पित हां बस तुम्हारे लिए। अपनी इच्छाओं के पंखों को अपने ही इन दोनों बाजुओं से टुकड़ों में बांट बिखेरा है हमने हां बस तुम्हारे लिए। अरमान मेरे ना गगन […]
याद है हमको प्रेम दिवस ऐसा भी एक आया था! थी रक्तरंजित वसुंधरा, और आकाश थरथराया था!! एक कायर आतंकी ने घोंपा था सीने पर खंजर! ख़ून बहा कर वीरों का, बदला था वादी का […]
आज valentine’s day है मौसम मनचला सा हो रहा है हर और इश्क खिल उठा है याद कर रही हूँ खूबसूरत लम्हों को, नही, मुझे नही याद आ रही वो कपड़े, गहने, फूलों की लम्बी […]
बहुत दुख भरा दिवस है, आज राष्ट्रीय शोक का। टूटी थी किसी की राखी, और किसी मां की उजड़ी कोख का। इस दुख भरे दिवस को , आज,प्रेम दिवस ना कहना। आज ही के दिन….. […]
प्रेम के इजहार का दिन है प्यारे तू क्यों पीछे होता है, दे दे प्रिय को तोहफे में फूल, नहीं तो चुभेगा हृदय में शूल आँखों से बहेगी लघु सिंचाई की गूल इससे पहले कि […]
हे भारत कोकिला! मुबारक हो तुम्हें जन्मदिन तुम्हारा। वतन के लिए कर खुद को समर्पित जीवन तेरा स्वतंत्रता को अर्पित हैदराबाद में जन्मी अघोरनाथ की सुता कहाई माता दी कवयित्री निज रचना की लोङी सुनाई […]
वो भटकता रहा लफ़्ज़ दर लफ़्ज़ गढ़ने को परिभाषायें प्रेम की, रिश्तों की, विश्वास की…!! और मैंने अंकित कर दिया हर एहसास उसके दिल में सिर्फ चूम के उसके माथे को…!! ‘दरअसल चुम्बन, आलिंगन और […]
भारत की राजधानी दिल्ली के बॉर्डर सिंघु और टिकरी में यह कौन लोग का हुजूम है? देखो देखो यह लोग और कोई नहीं हमारे देश के अन्नदाता जो रोज मेहनत की पसीना बहाकर औरों का […]
●थकान  ̄ ̄ ̄ ̄ किसान के पास फ़सल की बोरियां भरते वक्त बोरियां भर थकान भी होती है…. लेकिन वह नहीं भरता थकान की बोरियां…. क्योंकि- वह जानता है थकान खरीद सके उतना दम नहीं फ़सल खरीदने […]
चिड़ियों के चहचहाने से पहले, बैलो के रंभाने से पहले जो जाग जाता है, ये तो वही मेहनत का पुजारी किसान है| अन्न को उपजाने में जिसकी दिन-रात बहती लहू और जिसकी लगती जान है, […]
सत्य का पालन करना श्रेयकर है। घमंडी होना, गुस्सा करना, दूसरे को नीचा दिखाना , ईर्ष्या करना आदि को निंदनीय माना गया है। जबकि चापलूसी करना , आत्मप्रशंसा में मुग्ध रहना आदि को घृणित कहा जाता […]
रिश्ते क्षितिज की तरह मिले से प्रतीत होते हैं बंधन में बंधे लोग कब इक दूजे करीब होते हैं आकर्षण करीब लाता है विकर्षण भी खूब भाता है पास में टकराव है लेकिन दूरी से […]
सांसारिक कुचक्रों में उलझ कर अपनी मौलिकता से समझौता करते मानव सुनो..!! अपने भीतर हमेशा बचा कर रखना इतना सा प्रेम…!! कि जब भी कोई व्यथित हृदय तुम्हारा आलिंगन करे तो उस प्रेम की ऊष्मा […]
कोई सो रहा हो, शयन कक्ष में अंधकार भी हो रहा हो, सूर्य की किरणें आएंगी, आ कर उसे जगाएंगी ऐसा वह सोच रहा हो किंतु यदि उसी ने, किरणों के प्रवेश का, बंद कर […]
यदि बाँधने जा रहे हो किसी को वचनों की डोर से, तो इतना स्मरण रखना कहीं झोंक न दे वचन तुम्हारा उसे उम्र भर की अनन्त प्रतीक्षा में… क्योकि, प्रतीक्षा वह अग्नि है जो भस्म […]
खेतों के सब बीज शज़र हो जाते हैं सरहद पर वीर अमर हो जाते हैं तुम वर्दी पहने मिट्टी साने क्या बतलाते हो हम भी इनके जैसे हैं ये दिखलाते हो, सीखो जरा लाल अटल […]
भूमिपुत्र किसान भाई, तुम जिद्द अपनी छोड़ दो धरना प्रदर्शन की दिशा भी घर की तरफ मोड़ दो देश पर मण्डरा रहे ख़तरे को गम्भीरता से भांप लो तुम्हारी आड़ में मचा आतंक अब तुम […]
गीत – जान ए जिगर | तेरी नजर का करम मुझपर अगर हो जाये | मिल जाये साथ तेरा आसान सफर हो जाये | लहराकर तेरी जुलफ़े हवाओ जब बलखाती है| सच कहूँ बिन मौसम […]
खेतों से निकल कर सड़को पर क्यों उतर आना पड़ा, लाल किले पर उत्तेजित हो क्यों झण्डा लहराना पड़ा।। लेकर ट्रेक्टर रैली में बढ़ चढ़के क्यों डण्डा खाना पड़ा, रस्ते पर लगा टेण्ट रातों में […]
इंसान तेरे रूप अनेक कोई ईमानदारी का प्रतीक कोई बेमानी की मिसाल, कोई जलता दीपक मंद करता है कोई जलाता है मशाल, कोई शांति का प्रतीक कोई करता है बवाल कोई बेशर्मी की हद पार […]
तुमने जो किया सब भला ही किया, तुमने जो दिया सब भला ही दिया। आरम्भ भी तुम्हीं से और अन्त भी तुम्हीं तक, तुम्हारा बहुत-बहुत आभार ज़िन्दगी । बिखरते ही जा रहे थे, एक माला […]
आप खो गए थे मन उद्वेलित था अब आ गए हो है प्रफुल्लित सा। नभ में सूरज उदित सा, मन है मुदित सा। आपका होना रात को चाँद सा, काजल लगी आंख सा। मगर प्रविष्टि […]
उत्तराखंड की ऋषि गंगा में, ढह गया एक हिम-खंड। कुछ ही पलों में गिरी हिम-शिला, और नदिया उफन गई, ढह गए और बह गए, उस नदिया में घर कई। एक सुरंग में काम कर रहे, […]
वाणी से ही विष बहे, और वाणी से ही,बहे सुधा-रस धार। मीठी वाणी बोलिए, यही जीवन का सार। कण-कण में ईश्वर बसते, यही प्रकृति का आधार। निज वाणी से मनुज, न करना किसी पर प्रहार। […]
निकाल कर फेंक दिया है मैने अपने भीतर से हर अनुराग, हर संताप… अब न ही कोई अपेक्षा है बाक़ी औऱ न ही कोई पश्चाताप..!! मैं मुक्त कर चुकी हूँ स्वप्न पखेरुओं को आँखो की […]
वो पलकों की सजावट से, वो गलतियों की बिछावट से, दिखावटी फिसलन की दौड़ में…. मैं नदी से हौसला भर लाऊंगा, ‘सच’ बस तु हौले से चल… मैं पगडंडी से दूर निकल जाऊंगा|| ऐ जिंदगी […]
आजकल चाय कॉफी का है सहारा, इसके बिना दिन कटे ना हमारा। हमें सिर उठाने की भी फुर्सत नहीं है, कभी कॉपी जांचो कभी प्रश्नपत्र बनाओ, कोई छात्र विद्यालय न आए तो उसको मनाओ। करके […]
आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही है चाय और काफ़ी रहती थी सगी बहनों सी ग्रीन टी आकर सौतन सी अकड़ रही है आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही […]
राम, राम, राम तु रटते जा मन से मन की विकार तु हटाये जा राम से ही जन्मों का पाप धुलता राम से ही राम मिलता राम, राम, राम तु रटते जा मन से मन […]
जब आंख से एक आंसू छलका, हो गया मन कुछ हल्का-हल्का। निकल गया था कुछ रुका-रुका सा, एक गुबार बीते कल का। वजन था आंसुओं में भी, कभी सोचा नहीं था ये संयम रखते रखते, […]
कभी धूप सुहाती है कभी भाती है छाया, कभी विरक्ति आती है कभी लुभाती है माया। कभी मीठा कभी खट्टा कभी कड़वा कसैला, बदलते स्वाद भाते हैं अलग से ख्वाब आते हैं। समय अस्थिर, न […]
विद्यालयों में रौनक लग गई, देखो फ़िर से कक्षाएं लग गई। फ़िर से बच्चों का है शोर, प्री बोर्ड का अब है जोर। बच्चों मास्क लगाकर आओ, शिक्षा संग सेहत भी पाओ। मिल-जुल कर रहो […]
⏱गाँधी⏱ **************** ये गाँधी की धरती है, राम रहमान भी बसते है, साफ नियत बनते है, ये गाँधी के चश्मे से, हाथ थामे जो डंडे को, नेक पथ पर ओ चलते है, ओढ़े जो खादी […]
लक्ष्य कहता है कि पथ में लाख बाधाएं रहेंगी, जब व्यथित हो जाओगे टूटने वाले ही होगे, तब समझना आ गए हो पास मेरे, सौ निराशा मार्ग घेरें, रोकना मत तुम कदम को, एक दिन […]
खेल चल रहा था बच्चों का छोटे छोटे बच्चे थे, आपस में वे प्यारी प्यारी बातें बोल रहे थे। कोई थे धनवान घरों के कोई थे धन से कमजोर, लेकिन बच्चे सभी बराबर बात कर […]
गलत को यदि गलत बोलें नहीं तब कवि कहाँ हैं हम, बन्द आंखें कर चलें तब कवि कहाँ हैं हम। जी हुजूरी में रहे आदत कलम की है नहीं यदि किसी से दब गए तब […]
दूर तलक तनहाई का आलम अकेली बिरह वेदना सहती ख़ामोशी की गहरी चादर ओढ़े चुपचाप रहती है रात। किसको अपनी पीङ सुनाए कैसे उसको अपना मीत बनाए जिसके लिए कयी ख्वाब सजाए उधेड़-बुन में रोती […]
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