जगमग करती आई दीवाली, बच्चों के मन भाई दीवाली बच्चे सब खुशियों से चहके, पकवानों से घर भी महके बाल-दिवस संग दीवाली है, बच्चों के मुख पर लाली है चौदह नवंबर, बाल-दिवस है, नेहरू जी […]

ये ज्योति-पर्व दिवाली है, अन्धकार को दूर भगाएं पहले स्नेह बरसाएं सब पर, फ़िर खुशियों के दीप जलाएं नव्य-प्रभा, नव-प्रकाश से, नए विचार हों, नई कल्पना चहुं ओर वैभव, सुख बरसे, पूर्ण हो सबका हर […]

दीवाली के दीप जले, हर-घर में ख़ुशहाली हो अपनों का प्यार मिले, ऐसी मंगल दीवाली हो जगमग-जगमग दीपों की माला चारों ओर करे उजाला, खुशियों की मुख पर लाली हो नीरोग रहें सभी जन, ऐसी […]

नभ से सुर सब देख रहे थे, धरा पे कितने दीप जले “जय श्री राम”, के उद्घोष से, गूंजी अयोध्या, सरयू के तीरे लाखों की संख्या दीपों की, कौन कहे निशा अमावस की जगमग-जगमग हुई […]

धनतेरस का पर्व है, सजे हुए बाज़ार, घर में अपने लाओ आज नए-नए उपहार दीपों से सजे हुए हैं, सबके आज सदन आपस में गले मिलें, स्वच्छ करें निज मन सरस्वती के साथ पूजें, लक्ष्मी […]

मिठाई की दुकान से कुछ दूर, एक निर्धन बालक को मैंने कुछ सिक्के गिनते देख लिया हां, मैंने उस बालक की आंखों में, एक सपना पलते देख लिया चाह उसे भी होती होगी, नए वस्त्र […]

वो दूर तक फैला नीला आसमां, सांझ हो रही है,अब तो आजा ना ये लम्हे बिताऊं तुम्हारे साथ, आजा ना, करते हैं कुछ देर बात देखती हूं राह, तेरी इंतजार में *****✍️गीता

दीवाली की धूम मची है, रौनक है बाजारों में लेकिन तुम भूल ना जाना, सुन्दर-सुन्दर दिए बनाए अपने देश के कुम्हारों ने दिए मोल ले कर उनसे तुम, उनका भी पर्व मनवा देना महीनों मेहनत […]

पटाखे नहीं जलाना इस बार, ये नियम अपनाना इस बार पवन प्रदूषित हुई हिन्द की, सांस सुलभ ना आएगी दीवाली का पर्व दोस्तों, बस दीपों से रौशन हो इस बार श्री राम जी के अवध […]

सड़क किनारे बैठ कर, वो कपड़े सिया करता है सर्द हवा का झोंका, उसको भी दर्द दिया करता है कभी जलाकर आग, बदन ताप लिया करता है ये सर्दी का मौसम, उसको भी संताप दिया […]

जब भी होती हूं उदास, बहुत याद आती हो मां याद आती हैं बचपन की बातें, मेरे लिए जागती, तुम्हारी रातें याद आता है…. तुम्हारा नई-नई बातें सिखाना, कभी गुस्से से डांटकर, वो चुपके से […]

बच्चों का मंगल मनाती, आई अहोई-अष्टमी चांदी के मनकों की, मां, मंजुल माला पहनती मां दिन भर व्रत है करती चांदी के मोती-मनके पिरोकर बच्चों की शुभ-कामना करती हलवा-पूरी का भोग बनाकर, अहोई माता की […]

सात रंग की किरणें लेकर, सूर्य-देव का रथ आया सूर्य-रश्मि की सौगात लेकर, रौशन करता पथ लाया नई आशाएं लाता है प्रतिदिन, जीवन कुछ नहीं,आशा के बिन आशा पर ही दुनियां अडिग है, ये सुखद […]

रात रूपहली रजत छिड़कते, झिलमिल तारों संग आ गए चंद्र-किशोर देख ऐसी छटा अम्बर पर, किसका मन ना हो विभोर एकान्त रात्रि, शान्त पवन है, कुछ शान्त-अशान्त सा,मेरा मन है रात रूपहली, प्रतीक्षा में पिया […]

महफ़िलों से डरने लगे हम, कोरोना का जबसे हुआ है सितम महकती थी जिन लोगों से ज़िन्दगी, उनसे अब मिलना हुआ है कम कम क्या, समझो बंद ही हो गया, कोरोना तेरा बहुत सितम हो […]

भाभी के पीछे-पीछे, देवर डोल रहा है भाभी-भाभी, कहता-कहता, देखो क्या बोल रहा है बोला, भाभी तुम सबसे सुन्दर भाभी बोली काम बताओ, यूं ना मुझे मक्खन लगाओ देवर थोड़ा शरमाया,थोड़ा सा वो घबराया बोला, […]

किसने कहा कि, बेटी पराई है ये वो शख्सियत है, इस दुनियां की जो मायके और ससुराल, दोनों जगह ही छाई है ससुराल में सब कहें, क्या रौनक लगी है, देखो, घर में बहू आई […]

करवा पूजन चली सखी संग, देखो आज सुहागन आज चांद की राह देखती, पहन के चूड़ा, कंगन धूप,दीप से रौशन करती घर, गौरी मां से, मांगे साजन का साथ चांद देख , साजन की करे […]

आज सजूं साजन की खातिर, ओढ़ के सुर्ख चुनरिया हाथों में मेंहदी पिया नाम की, पहनूं लाल चूड़ियां माथे पर बिंदी चमके सदा, साजन तेरे नाम की तेरी हो गई साजन मैं तो, जबसे बाहें […]

संघर्ष ही विजय है, ये वो पथ है ज़िन्दगी का, जिसमे,सदा जय ही जय है विजय है मंज़िल अगर, संघर्ष ही रास्ता है इस जीवन की बस, यही दास्तां है.. *****✍️गीता

जो हरदम काम करे, तनिक भी ना आराम करे वो दिल ही तो है, ख़ुश रखना उसे सर्वदा, औरों का हो, या हो अपना.. *****✍️गीता

सावन पर इतना सन्नाटा, ना देखा पहले कभी क्या हुआ, ये क्यूं हुआ, कहां चले गए सभी सावन सूना सा है, कवियों कलम उठालो फ़िर से भर दो रंग अपनी कलम से, फ़िर से सभा […]

जब चारों ओर अंधेरा हो, किसी डर ने आपको घेरा हो छोड़ के उस डर को, आगे की जीत का सोचो जो ख़्वाब सजाए थे कभी, आपने अपने अपनों के लिए उन ख़्वाबों की ही […]

जिस वतन का खाना खाते हो, डाल के अपनी थाली में आज उसी वतन के हित की खातिर, उसी वतन की मिट्टी के, दीए जलाना अबकी बार दिवाली में चीन की लड़ियां नहीं जलाना, सरहद […]

शस्त्र उठा लो अब सीते, श्री राम नहीं आएंगे करनी होगी खुद अपनी रक्षा, श्री रघुनाथ नहीं आएंगे शस्त्र उठा लो हे द्रौपदी, श्री श्याम नहीं आएंगे सभा में अपने भी,अपने ना रहे बिगुल बजा, […]

मेरा नाम बाबूजी ने, बड़े लाड से रखा था बेला…… मेरे जन्म पर एक पौधा भी रोपा था, बेला का….. बेला के फूल की तरह, खिलती रही, बढ़ती रही यौवन की दहलीज चढ़ती रही, बेला […]

किसी का कोई हमसफ़र, कहीं खो जाए अगर तो ज़िन्दगी की ख़ुशी के लिए, उसे ढूंढ़ कर ले आएं घर गलती किसकी है, किस से हुई, ये सुलझ ही जाएगा मगर, खो ना जाए , […]

*****हास्य-रचना***** परदेस में कहते हैं मेरा बेटा प्यार में है युवा हो गया है.. किसी के प्यार में पड़ गया भारत में कहेंगे, सुनती हो.. मैं तो शर्म से गढ़ गया अपना ये बरखुरदार, किसी […]

ज़िन्दगी मोहब्बत के बिना, नहीं चलती है एक साथी है जरूरी, ना हो किसी का कोई, हमसफ़र, तो उसकी कमी खलती है हमसफ़र की आंखों में, दिखें चांद-सितारे आंखें आइना हैं, मोहब्बत का ज़िन्दगी जी […]

झरने झर-झर बह रहे थे, समीर के शोर कुछ कह रहे थे कितना आनन्द आता होगा उन्हें, जो यहां पे रह रहे थे ये सोचती-सोचती मैं चली जा रही थी, वहीं कहीं अंदर को, एक […]

तस्वीर में नाचती थी वो, रात को घुंघरू बजते थे गीली मिलती थी दीवार सदा, उसके आंसू उसे भिगोते थे चूल्हे पे बनाती रोटी मां, उसकी, ये तस्वीर बना देता सोचती रहती थी वो, उस […]

पनघट से पानी लाती नारी की तस्वीर सजाली कमरे में, उस रईस ने ये कभी ना सोचा, ये कौन से गांव की है । *****✍️गीता

आज वो नज़र चुराए बैठे हैं, जज़्बात अपने छिपाए बैठे हैं, हमसे छिपा ना पाएंगे जज़्बात लेकिन, जाने क्यूं शर्त लगाए बैठे हैं .. *****✍️गीता

*******हास्य – रचना******* वो बाहर आना चाहता था, पर कुछ था.., जो उसको रोकता था कोई तो था.., जो उसको टोकता था कोरोना काल में , व्याधि के इस हाल में सब घर में ही […]

विद्यालय से अवकाश लेकर, हमने बहुत आराम किया सारे ताम-झाम से मुक्ति लेकर, कल, ना कुछ भी काम किया बचपन की एक सखी से, दूरभाष पर बात करी कुछ अपनी कही, कुछ उसकी सुनी ख़ूब […]

शरद पूर्णिमा का चांद आया झिलमिल सितारों को लिए, खीर भी बनाई है कल चाव से सब खाएंगे, वो अमृत-रस बरसाएगा सौभाग्य देकर जाएगा सुन्दर सजीला चांद शरद का, आंगन में रौनक ख़ूब लगाएगा । […]

रंग दो अपने दिलों को, कुछ इस कदर प्यार से कि जैसे रंगा हो आसमां, शाम की बहार से ना कोई द्वेष हो मन में, ना कोई दुर्भावना स्नेह ही बरसे, चहुं ओर, हो प्रेम […]

कागज़ की कश्ती चलती थी कागज़ का जहाज़ भी उड़ता था, थे अमीर बहुत तब हम, वो बचपन कितना, अच्छा था सखियों संग ,उपवन में जाकर आंख-मिचौली खेली थी, स्वादिष्ट बहुत लगता था वो आम […]

इस भ्रामक दुनियां में, बनूं आशा की किरण अन्दर ही अन्दर आहत हुई, फ़िर भी मैं, मुस्काती हूं कोमल हूं, कमज़ोर नहीं हूं, खुद को ये समझाती हूं राह कितनी भी कठिन हो, देखना चाहती […]

भाग्य भरोसे भूल से, नहीं बैठना है मनुज प्रभु भी करते हैं, उनकी ही मदद जो अपनी मदद, आप, किया करते हैं.. यहां “आप” शब्द का प्रयोग सर्वनाम में किया गया है, जिसका अर्थ “स्वयं” […]

कर्म ही जीवन का सार, कर्म ही प्राणों का आधार कर्म करते हुए हो इच्छा, सौ वर्ष तक जीने की कर्म नहीं तो इस दुनियां में जीना है बिल्कुल बेकार कर्म,परिश्रम नहीं हुआ तो, जीवन […]