काव्य-गोष्ठी का हुआ, कार्यक्रम, शानदार सावन का धन्यवाद है, आयोजन किया है पहली बार सावन कवि सतीश जी ने, लिया संचालक भार कविताओं की गूंज उठी मधुर झंकार सभा सजी सहज सुंदर बज उठे सितार.. […]

कभी सुख,कभी दुख यही देती है ज़िन्दगी स्वर्ग यहीं है, नर्क यहीं है, ऊपर, नभ में कुछ नहीं है ये धरा है , माया नगरी, स्वर्ग के दर्शन हों कभी, कभी नर्क भी दिखे यहां […]

आहटें आती रहें, सदा उनके आने की सदाएं भी सुनती रहें, सदा उनके गाने की मैं नज़्म लिखती जा रही थी, फ़कत पन्नों पर, यही तो बात है लफ़्ज़ों के मुस्कुराने की.. *****✍️गीता

ज़िन्दगी का सफ़र है, कभी कड़वा कभी सुहाना मिलते हैं अच्छे दोस्त यहां, कभी दुश्मन भी मिले माना पर तू चल अपनी राह पथिक, ज़िन्दगी है, सब चलता है कभी भला लगे, कभी खलता है […]

हार हुई आज नारी की, चढ़ी भेंट दुराचारी की सारे-आम कत्ल कर गया, ना आई उसे कुछ दया बेहया घूम वो रहा है, समाज क्यूं सो रहा है मानवता मर रही है, दानवता फली फूलती, […]

दीप जलता रहा, जब बहुत देर तलक लौ भी टिमटिमाने लगी, लो तेल भी हुआ ख़त्म और उसकी जान भी, डगमगाने लगी…. *****✍️गीता

प्रदूषण की मार, सह रहा संसार रोको इस प्रदूषण को मनुज, वरना फिर पछताओगे दूषित होती रही धरा यूं ही तो कैसे रह पाओगे वायु प्रदूषण यूं ही होता रहा तो, शुद्ध पवन की सांस […]

दोस्तों का दिल से सम्मान है, उनकी दोस्ती पर हमें,अभिमान है दोस्ती होती है ,सुधा समान, सुधा की एक बूंद ही महान है निज स्वार्थ से ऊपर उठी जो दोस्ती, उस दोस्ती में दोस्तों की […]

धनुष उठा श्री राम का, रावण की अब खैर नहीं चलो आज विजय की बात करें, हो कहीं किसी से,बैर नहीं त्रेता युग में रावण ने, श्री राम को ललकारा था सीता माता का हरण […]

*****हास्य – रचना***** कछुए और खरगोश की, पांच मील की लग गई रेस तीन मील पर खरगोश ने देखा, कछुआ तो अभी दूर बहुत है थोड़ा सा आराम करूं ना…ना वो सोया नहीं ये पुरानी […]

वो, लेखन में मेरी बहुत मदद करता था कहीं कुछ कभी ग़लत लिख देती तो, काट के ठीक किया करता था सुन्दर-सुन्दर समीक्षाएं भी उसके ही दम पे किया करती थी वो ना दिखता था […]

राजा दशरथ ने माना कहना, अपनी पत्नी कैकेई का एक वचन की खातिर देखो, बहु-बेटे वन में जाते हैं, प्राण त्यागने पड़े भले ही, आज दशरथ जी पूजे जाते हैं। श्री राम ने माना, कहना […]

जब हम चले जाएंगे, ये दुनियां छोड़कर करोगे याद हमको, कभी ना कभी तो ऐसा क्या हुआ था, जो हम चल दिए सोच कर फरियाद करोगे, कभी ना कभी तो बस, इतनी सी इच्छा है […]

ज़िन्दगी से कुछ लम्हे, बचाती रही एक बटुवे में उन्हें, सजाती रही सोचा था कि फुरसत से करूंगी खर्च, ज़िन्दगी में इसीलिए बचाती रही, कुछ लम्हे कुछ अपने लिए, कुछ अपने अपनों के लिए फ़िर […]

***ये तो कमाल ही है*** सहेली, नहीं है किस्मत फ़िर भी रूठ जाती है पहेली,नहीं है बुद्धि, फ़िर भी उलझ जाती है आत्म-सम्मान, नहीं है बदन फ़िर भी चोट खाता है और इंसान, नहीं है […]

करके भ्रूण-हत्या दो बेटियों की, उसने दो बेटे फ़िर पाए खुश हो कर मस्त घूमता, कहता सौभाग्य जगाए बड़े हुए जब बेटे उसके, दो बहुएं घर में आईं सास-ससुर की अवहेलना करने में, कोई कसर […]

कतल कर दो मेरा तुम, ज़रा सी फुरसत निकाल के यूं इंतजार में तुम्हारे, हमसे तड़फा नहीं जाता… *****✍️गीता

दोस्तों में उल्लास रहे जब हमारे, मुस्कुरा उठते हैं, तब लब हमारे व्यथित हो जाए कोई दोस्त गर, व्याकुल हो जाएं हम भी इधर कोई दुखी होता है गर उधर कहीं, कैसे खुश रहेंगे हम […]

कविता में वो भाव नहीं हैं, जो मैं कहना चाहूं स्वर में वो माधुर्य नहीं है जो तुम्हें सुना मैं पाऊं वाणी में वो चातुर्य नहीं है कैसे मैं समझाऊं कविता में वो भाव नहीं […]

*****हास्य रचना***** कल शाम को बाज़ार गई थी लाने को अपना कुछ सामान सात महीने पहले सिलाया , नया सूट पहना, लॉक डाउन ना होता तो अब तक तो हो जाता वो पुराना पहले चुनरी […]

कल्पना की दुनियां, बहुत ख़ूबसूरत हकीक़त इससे कहीं तो जुदा है कभी मेल खाती, कभी दूर जाती हकीक़त की दुनियां है, कल्पना सी कहां है .. *****✍️गीता

क्रोध ना किया करें, क्रोध से रहें परे गुस्सा है माचिस की तीली सा, औरों को जलाने से पहले खुद को जलना पड़ता है ये वो विष हैं जो, औरों को पिलाने से पहले खुद […]

कर के शेर की सवारी, आई माता रानी प्यारी आई शुभ नव-रात्रि, मांग लो मुरादें ,माता रानी से ऊंचे पर्वत पर मंदिर मां का, बेहद लंबा रस्ता है, यहां का बाण-गंगा का शीतल जल, करता […]

ऑन लाइन कक्षाएं चल रही थी, हमें कुछ बातें भी खल रही थी आज शोर कुछ ज्यादा ही था, किसी से किया एक वादा भी था अपने भी काम कुछ कम नहीं होते, पढ़ाने का […]

गोल-गप्पे खाने का, बहुत ज्यादा मन किया कोरोना के कारण, बाज़ार जाना भी बंद हुआ तो…., यू-ट्यूब खोला, रेसिपी उठाई जो-जो उसने बोला, वैसे ही हाथ चलाए अरे वाह, मेरी कड़ाही में भी देखो स्वादिष्ट […]

कागज़,कलम की बातें सुनकर, मैं लिखना सा भूल गई कागज़ ने कहा कलम से, जब तुम चलती हो मुझपे कहो ये कैसा अहसास है, कलम ने कहा…… हमें भी नहीं पता, बस यही लगता है […]

वक्त ने फंसा दिया है, कभी रुला, कभी हंसा दिया है उनसे कहो, परेशान नहीं हैं हम वक्त की ही बात है, नहीं है कोई गम

हास्य – रचना ************* श्रीमान जी थके – थकाए घर आए, आते ही पत्नी से बोले… गर्मी बहुत है,थोड़ा पानी लाना, पत्नी बेचारी, बड़ी आज्ञाकारी बोली ,अभी आई और, आधे का भी आधा ग्लास पानी […]

जन्म लेने पर बंटी मिठाई, श्राद्ध हुआ तो खीर खिलाई जन्म की मिठाई से, शुरू हुआ एक मेल श्राद्ध पर आ कर, ख़त्म हुआ वो खेल और विडम्बना ये है कि, जिसके नाम का मीठा […]

आलू, मटर,टमाटर की, सब्जी बनी स्वाद नमक डालना भूल गई, जब आई आपकी याद मैसेज टोन सुनाई दी, तो भागी-भागी आई इस चक्कर में देखो मैंने, रोटी एक जलाई फ़िर टोन सुनी, पर मैसेज ना […]

सुन्दर सा वो हिंडोला था, जिसमें बैठ के , मन मेरा डोला था सुन्दर सी वादियां हैं सुहाना सा समां है, बढ़ती ही जा रही हूं डरती भी जा रही हूं, ना नभ है, ना […]

ये कैसी राइड है, ना कर रहा कोई गाइड है लंबी – लंबी सी राहें हैं, मानो प्रियतम की बाहें हैं नदिया भी बह रही है, हमसे ये कह रही है आना फिर दोबारा यहां, […]

ये कश्मीर है, कहते हैं, धरती का स्वर्ग इसे पर कहां रहा ये स्वर्ग अभी, बदल गई इसकी तस्वीर है चप्पे-चप्पे पर सैनिक खड़े हैं, फ़िर भी आतंकवादी यहां आकर लड़े हैं शॉल, फिरन मिलें […]

हो गई है भोर, गुनगुनी सी धूप है, ना व्यर्थ का कोई शोर बदल रहा है मौसम, तुम ना बदल जाना अच्छा लग रहा है, सर्दी का यूं धीरे-धीरे आना *****✍️गीता