बापू पर कविता

HINDUSTAN

जिन्दा रहे मेरा हिंदुस्तान अद्भुत है जिसका गुणगान सशक्त युवा का प्रबल ईमान खुली हवा में भिखरा सम्मान हिमालय जैसा पर्वत तुझको शीश झुका करता प्रणाम.. सबसे प्यारा सबसे न्यारा समुद्र का ये अद्भुत किनारा जहाँ गाँधी में गंगा की धारा कर्क पे चमकता सूरज हमारा शहादत पर जो दे बलिदान पलकें झुका आँखों से सलाम रहे तिरंगा सबसे ऊँचा समृद्ध भारत की बुलंद पहचान जिन्दा रहे मेरा हिंदुस्तान अद्भुत है जिसका गुणगान © M... »

आज़ादी

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- दृढ़ निश्चय लेके निकले मुसीबत को निकाला जड़ से उखाड़ ये देश भक्त हुए दुनिया में विख्यात जब लहू से लिखा इन वीरो ने भारत माँ का नाम करने आये थे व्यापार और कर रहे थे देश को बर्बाद देश के वीरो ने किया इन अंग्रेज़ो से हमे आज़ाद कठिन था हराना मजबूत थे जज्बात अंग्रेज़ो पे फ़तेह पाकर इस देश को किया आबाद मुसीबत की लेहरो को अपने जोश से मोड़ दिया जिस घमंड से आये थे अंग्रेज़ उस ... »

शहीद

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कृतज्ञ देश है उन वीरों का जिसने लहू बहाया अपना देश की खातिर तन मन धन सब कुछ है लुटाया अपना बलिदान दिया है कितनी मां ने कितनी बहनों ने है भाई खोया आज शहीदों को नमन किया आज देश है खूब रोया सारी जवानी भेंट चढ़ा दी अपनी भारत मां के लिए दिवाली पर घर आंगन से पहले शहीदों की चिताओं पर जले दिए अनमोल दिया है तोहफा हमको हम सब की आजादी का गांधी देश के वासी हो तुम तो कपड... »

15 अगस्त , स्वतंत्रता का पर्व

बहुत देखी गमगीन गुलामी आजादी के वीरों ने कतरा कतरा बहा दिया भारत माता के चरणों में भारत देश हमारा सोने की चिड़िया कहलाता था देश का परचम खुले गगन में लहर -लहर लहराता था आजादी का अखण्ड दीप तब नित नवनित होकर जलता था सतयुग ,त्रेता ,द्धापर युग का संस्कार तब मन में बसता था राम कृष्ण के पद चिन्हों पर हर मानव अपनी रचना रचता था आया कलियुग कुटिल नीति का दुश्मन ने पासा खेला भारत माता के चरणों को अपनी गद्दारी ... »

पाकिस्तान के दो टुकड़े

1971 में जब इन्दिरा गाँधी जी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े किये थे। तब चीन मुँह ताकता रह गया था। उफ़ तक ना निकली थी मुँह से और अमेरिका, रूस जैसे देश चूँ तक ना बोले बस दाँतों तले उंगली दबा कर रह गए। ऐसा था आयरन लेडी का फैसला और भारत का औधा। जिसे मोदी जी ने भी बरकरार रखा है। आज भी हर देश भारत की सराहना करता है। और सम्मान से देखता है। मैं इन्दिरा गाँधी जी के इस फैसले की सराहना करते हुए उन्हें नमन करती हूँ।... »

हमन प्रबुधिया नोएन गा

“हमन परबुधिया नोएन गा” ************************** जांगर पेरत पसीना चुचवावत, भुइय्या के छाती म अन उगावत, चटनी बासी के खवैय्या आवन न, येहर धान के कटोरा हावे गा, हमन परबुधिया नोएन रे, सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा || मोर छाती म बिजली पानी, रुख राई अउ जंगल झाड़ी, कोयला के खदान हावे गा, हमन परबुधिया नोएन रे, सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा || चारो मुड़ा हे नदिया नरवा, हीरा लोहा टिन के भंडार हावे, इहाँ ... »

भोजपुरी देशभक्ति गीत-भारत देशवा हमार |

भोजपुरी देशभक्ति गीत-भारत देशवा हमार | जहा बहे गंगा निर्मल धार | उहे बाटे भारत देशवा हमार | उत्तर हिमालय गगनवा के चूमे | दखिन सगरवा लहरवा मे झूमे | लहकल खेतवा बहे पूरवा बयार | उहे बाटे भारत देशवा हमार | जहा के जवान सिमवा पर दहाड़ेले | धई दुशमनवा बहिया उखाड़ेले | एक के बदले बदला चुकावेले हजार | उहे बाटे भारत देशवा हमार | बिंध बिंधवासिनी वैशणु जम्मू बिराजेली | कामरूप कामाख्या दखिन काली माई साजेली | दे... »

भोजपुरी कविता- भारत देशवा

भोजपुरी कविता- भारत देशवा दुनिया मे सबसे महान | भारत देशवा मोर जान | कश्मीर से कन्याकुमारी हऊवे एक ही दुआरी | यूपी बुहार बाड़े शानवा हमार | हरियाणा पंजाब उगावे सोनवा बघार | गुजरात राजस्थान दुधवा अघान | भारत देशवा मोर जान | उड़ीसा बंगाल हऊवे चऊरा के खान | खनिजवा के खान झारखंडवा के नाम | महाराष्ट्र आंध्रा अऊरी मध्य प्रदेश | तमिलनाडु देले सबके सुंदर संदेश | करी केतना देशवा गुणगान | भारत देशवा मोर जान |... »

Ajad Hind

आजाद हिंद के आज आजाद हैं हम, खुला आसमां है आज हमारे सर पर, नहीं किसी की हुकूमत है हम पर, उन्मुक्त गगन के आज आजाद पंछी हैं हम, श्रेय इसका है उन वीर सपूतों का, जिन्होंने हैं प्राण गवाए हिंद पर, महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन का, जिन्होंने भगा दिया अंग्रेज को, उनका कर्ज है हमारे सर पर, हम सारे भूल गए उनके उपकार को, कुछ तो रहम करो मेरे प्यारो, याद करो उनकी कुर्बानी को, जिन्होंने हैं प्राण गवाएं देश पर... »

महात्मा गाँधी

चले हम उस रह पर,जो रह बापू ने दिखाई, छलके चरित्र मे सबके सदा जीवन और सचाई | खुशियों से भर जाये हर एक आंगन, देश को चाहिए गाँधीवादी शासन | बिना खून बहाये, बिना चोट पहुंचाए अंग्रेज उन्होंने मार भगाए उच्च कर्म करके बढाया देश का मान गाते रहते “रघु पति राघव राजा राम पतित पावन सीता राम ” इस दशहरे जाला दो मन का रावन देश को चाहिए गांधीवादी शासन »

महात्मा गाँधी

हर साल मेरी पुस्तक (हिंदी )मे, महात्मा गाँधी का पाठ जरूर होता है | बापू का व्यक्तिव याद करता हूँ, तो “सदा जीवन, उच्च विचार ” याद आता है | बापू फिर से आकर, देश बचा लो, क्रांति बिगुल बजाकर | तुमने जो जलाया उम्मीद का दिया, मशाल वो बन गया था | दुगने लगान के आगे तब, हर किसान तन गया था | भुखमरी, महामारी से अंग्रेजो को क्या लेना था, अकाल से देश शमशान बन गया था | लाठियों की मार से गोलियों की ब... »

गांधी मशाल

जिनके एक आवाहन पर सबने अपने हाथ उठाये थे, कदम-कदम पर अंग्रेजी शासन के छक्के साथ छुड़ाए थे, जिनके कहने पर अस्त्र वस्त्र सब मिलकर साथ जलाये थे, सत्य-अहिंसा के अचूक तब शस्त्र सशक्त उठाये थे, सच की ताकत के आगे जब तोपो के रंग उड़ाए थे, गांधी मशाल ले हाथ सभी ने विदेशी दूर भगाए थे, सत्याग्रह की आग लिए जब मौन रक्त बहाये थे, मानवता और अधिकारों का खुल कर बोध कराये थे, डांडी यात्रा में गांधी जी जब समुद्र किनार... »

महात्मा गांधी

महात्मा गांधी

महात्मा गांधी —————— 🙈🙉🙊 बाहर से गंभीर धीर,👴 जज्बों से थे तूफानी।🌋 अंग्रेजों के पैर उखाड़ गए, वो नाम था गांधी।🤓 अल्पाहारी, शाकाहारी, 🌿🌾 सत्य निष्ठ, अवतारी,👼 बैरिस्टर से साधु बन गए, मानवता के पुजारी ।👤 आजादी के आंदोलन में थी, उनकी भागीदारी ।👥👥👥👥 सत्य अहिंसा पथ पर चलना, 👣👣 माना जिम्मेदारी। चंपारण ,खेड़ा, के नायक, गांधी थेआंदोलनकारी ।👀 जेल भरो आंदोलन की , कर डाली थ... »

‘गांधी’ एक विचारधारा

गांधी जी पर कविता तो हर कोई रचते हैं। आओ बापू के विचारों पर चर्चा करते हैं। बापू ने कहा था बुरा मत देखो। मैं मुँह फेर लेता हूँ, देख कमजोरों पर अत्याचार होते। मैं आँखें फेर लेता हूँ, देख शोषण और भ्रष्टाचार होते। मुझे वो कागज का टुकड़ा भाता है। जिस पर छपा बापू मुस्कुराता है। बुरा तो मैं देखता ही नहीं, मुझे बस हरा ही हरा नजर आता है। बुरा कर, ईश्वर से हम क्यों नहीं डरते हैं। आओ बापू के विचारों पर चर्च... »

महात्मा गाँधी

गुलामी की धांस में अत्याचारों की बांस में देश था बिलकुल सड़ गया | तब उठ खड़ा हुआ एक अहिंसक योद्धा, जो लाठी लिए फिरंगी से लड़ गया | कुचलता हुआ अंग्रेजी सरकार के इरादे, जनक्रांति लिए वो आगे बढ़ गया | अंग्रेज देना चाहते थे धोखा, पर वो पूर्ण स्वराज पर अड़ गया | बर्तानिया सरकार के खिलाफ, शोले भड़क रहे थे हर मन में | जलाकर विदेशी वस्तुएँ , आजादी की आग लगा दी हर जन में | भारत छोड़ो आंदोलन का तूफान ऐसा चलाया, और... »

मेरे बापू गांधी जी

मेरे बापू गांधी जी

मेरे बापू गांधी दयावान मृदु भाषी बापू का स्वभाव था सत्य अहिंसा मेरे बापू का हथियार था राष्ट्रवादी शांतिप्रिय बापू का उपदेश था हिंदुस्तान के मर्यादा का बापू को ज्ञान था गर्व था देशवासियों को बापू के हुंकार पर ऐंनक पहने लाठी लेकर देश को आजाद किया खट्‌ खट्‌ की आवाज में बापू का प्यारा संदेश था चरखे के बल पर बापू ने रचा स्वर्णीम इतिहास था गोरों को औकात दिखाया उनके ही चालो में राष्ट्रहित में ध्वजा फहराक... »

महात्मा गांधी

गांधी नहीं सिर्फ नाम है, वो देश का मान है नोटों पर देख तस्वीर, ना सोचो खास इंसान है वो हममें से ही आने वाला बिल्कुल आम इंसान है सिर्फ और सिर्फ भारत में ही, बसती उनकी जान है आंख पर चश्मा, हाथ में लाठी, सत्य अहिंसा पहचान है नायक नहीं वे जननायक, अंग्रेज़ो मे खौफ उनकी पहचान है हर जन गण में जगाना प्रेरणा, उनकी ताकत का राज है कठिनाईयों को पीठ नहीं दिखाना, सीखने की जरूरत उनसे आज है मुख पर राम; दिल में रा... »

महात्मा गांधी

कारण जिसके हर हिंदवासी, आजाद हवा में रहता है कारण जिसके आज विदेश में, सर उठा के भारत चलता है उस मां भारत के वीर पुत्र को, श्रद्धा सुमन चढ़ाने आया हूं मै उस आंधी जिसका नाम था गांधी कि गाथा गाने आया हूं 2 अक्टूबर 1869 , पोरबंदर बड़ा हर्षाया था करमचंद और पुतलीबाई के, घर पर मोहन आया था हां करी शैतानी; अठखेली, और कई बदमाशी भी जब पकड़ी राह सत्य के पथ कि, मिली सिर्फ शाबाशी ही वे प्रेरणापुंज वह राष्ट्रकुं... »

महात्मा गाँधी

हर साल मेरी पुस्तक (हिंदी)मे, पाठ महात्मा गाँधी का होता है, बापू का व्यक्तित्व याद है पर, असल जिंदगी मे कोई असर नहीं इसका होता आता है | बापू फिर से आकर, देश बचा लो, क्रांति बिगुल बजाकर | तुमने जो जलाया उम्मीद का दीया, मशाल वो बन गया था | दुगने लगाना के आगे तब, हर किसान तन गया था | भुखमरी, महामारी से अंग्रेजो को क्या लेना था, अकाल पड़ कर देश शमशान बन गया था | लाठियोंऔर गोलियों के प्रहार से, देश का क... »

मेरे बापू गांधी जी

मेरे बापू गांधी जी

मेरे बापू गांधीजी दयावान मृदु भाषी बापू का स्वभाव था सत्य अहिंसा मेरे बापू का हथियार था राष्ट्रवादी शांतिप्रिय बापू का उपदेश था हिंदुस्तान के मर्यादा का बापू को ज्ञान था गर्व था देशवासियों को बापू के हुंकार पर ऐंनक पहने लाठी लेकर देश को आजाद किया खट्‌ खट्‌ की आवाज में बापू का प्यारा संदेश था चरखे के बल पर बापू ने रचा स्वर्णीम इतिहास था गोरों को औकात दिखाया उनके ही चालो में राष्ट्रहित में ध्वजा फहर... »

सच

* सच * अब तो बाज़ारों में बेचारी सच्चाई सिसकियाँ भरती हैं कोई भी ख़रीददार नहीं उनका जो भी आता है बेईमानी , मक्कारी ख़रीद कर ले जाता है हां , कभी कभार भूला भटका कोई जिस्म आ जाता है ‘ सच ‘ ख़रीदने न तन पर पूरे कपडे़ कमबख़्त पेट भी पीठ से चिपकी हुई फ़िर भी ख़रीदने आ जाते हैं सच चंद ऐसे ही लोगों से सच्चाई की झोपड़ी में सब्र ओ सुक़ून की अंगिठियां जलती हैं तभी तो वो आज भी बापू ( गांधी ) के इ... »

Mahatma Gandhi

आजाद भारत के तुम हो मसीहा, गांधी तेरी यही पहचान, सत्य अहिंसा और धर्म का. तूने बनाई एक मिसाल. सादा जीवन उच्च विचार का, दुनिया को सिखलाया पाठ, नतमस्तक होकर अंग्रेज भी, छोड़ कर चले गए अपने देश, आंखों पर चश्मा हाथ में लाठी, कमर में धोती, तेरा था यही लिबास, सिखाया आपने दुनिया को, हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, आपस में है भाई भाई. भारत छोड़ो आंदोलन है तेरा ही नारा, दिया भारतवासियों को तूने, स्वदेशी हो कपड़ा अप... »

महात्मा गांधी

ना उठाया शस्त्र कभी ना हिंसा अपनाई थी , अंत समय पर उनके राष्ट्र में खामोशी छाई थी ; सौराष्ट्र प्रांत का संत वहां था , राष्ट्रप्रेम उसका अनंत था ; देकर आजादी बापू कहलाया , आजादी का गान है गाया ; सत्ता का न लोभ उसे था , राष्ट्रपिता का दर्जा पाया ; विश्वकल्याण स्वप्न था उसका , निर्मल अंतर्मन था उसका ; जीवन समर्पित किया देश को , किया नमन सदैव अवधेश को । सत्याग्रह,असहयोग पर दिया था उसने जोर ; सतत प्रया... »

मेरे बापू गांधी

मेरे बापू चरखा के बल पर जिसने देश भक्ति को जगाया था गजब का हुंकार था बापू के जज़्बातों में सत्य अहिंसा की लाठी से जिसने धुल चटाया था खदेड़ गोरों के सैनिक को देश का मान बढ़ाया था गोरों को लोहे का चना चबवाया देश को अपने आजाद कराया सत्य अहिंसा का लेकर अस्त्र शस्त्र बापू ने भारत देश का गौरव बढ़ाया गोरों के अत्याचारों से गली शहर सहमे थे बापू के आहट से ही गोरे डरें डरें छिपते थे बापू के आगे गोरे भी नतमस... »

बापू

बापू

जिनके एक आवाहन पर सबने अपने हाथ उठाये थे, कदम-कदम पर अंग्रेजी शासन के छक्के साथ छुड़ाए थे, जिनके कहने पर अस्त्र वस्त्र सब मिलकर साथ जलाये थे, सत्य-अहिंसा के अचूक तब शस्त्र सशक्त उठाये थे, सच की ताकत के आगे जब तोपो के रंग उड़ाए थे, गांधी मशाल ले हाथ सभी ने विदेशी दूर भगाए थे, सत्याग्रह की आग लिए जब मौन रक्त बहाये थे, मानवता और अधिकारों का खुल कर बोध कराये थे, डांडी यात्रा में गांधी जी जब समुद्र किनार... »

गांधी

जिनके एक आवाहन पर सबने अपने हाथ उठाये थे, कदम-कदम पर अंग्रेजी शासन के छक्के साथ छुड़ाए थे, जिनके कहने पर अस्त्र वस्त्र सब मिलकर साथ जलाये थे, सत्य-अहिंसा के अचूक तब शस्त्र सशक्त उठाये थे, सच की ताकत के आगे जब तोपो के रंग उड़ाए थे, गांधी मशाल ले हाथ सभी ने विदेशी दूर भगाए थे, सत्याग्रह की आग लिए जब मौन रक्त बहाये थे, मानवता और अधिकारों का खुल कर बोध कराये थे, डांडी यात्रा में गांधी जी जब समुद्र किनार... »

देश भक्ति

गांधी,भगत,चद्रशेखर ,झाँसी की महारानी हम सब की खातिर जिसने,अपनी जान गवा दी अम्बर से धरती पर आये,ये वतन बचाने आज़ादी क्या होती है,ये मूल पाठ पढ़ाने -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

काश मेरे मुल्क मे ना जाती ना धर्म होती

✍✍✍काश मेरे मुल्क मे ना जाती ना धर्म होती , शिर्फ एक इंसायनित की नाम होती,, तो दिल्ली मै बैठे गद्देदार की रोटी नही सिझती। रामायण और कुरान मे भेद बताकर अपनी रोटी सेकते है गद्देदार ,, अगर बच्चे प्रर्थाना करते तु ही राम है,तु रहीम है, तु करीम —– तो सौ वर्षो से हो रही गाथा मे भेद बताकर मुल्क को बाटँते हो गद्देदार, अब बस करो अपनी रोटी सेकना गदे्दार मेरे बच्चे के हाथ मे फुल के बदले हथियार दे... »

टूटे कंगन बोल रहे मेरा न्याय करेगा कौन

मित्रो! अभी हाल ही मे शहीद हुए हमारे देश के चार सैनिको को ,अपनी कविता के माध्यम से श्रद्धासुमन अर्पित करते हुये, मैने आप तक ए कविता पहुचाने की कोशिश की है अगर आपको ये कविता पसंद आये तो ये बात देश के अन्य लोगो तक पहुचाने की कोशिश करे। जय हिंद जय भारत टूटे कंगन बोल रहे मेरा न्याय करेगा कौन । मांगो के सिंदूर पूछते यह अन्याय भरेगा कौन ।। सीमा पर से उस प्रहरी की आवाजे है चीख रही। मेरे बलिदानो की बोलो क... »

Swach bharat banyenge

गांधी जी का सपना सच करके हम दिखाएंगे अपने भारत को हम स्वच्छ भारत बनाएंगे साफ-सुथरी गलियां होगी साफ सुथरा होगा गांव साफ सफाई करने में कभी ना रुकेंगे हमारे पांव हमने वादा कर लिया है वादा हम यह निभाएंगे अपने भारत को हम स्वच्छ भारत बनाएंगे गांधी जी का सपना सच करके हम दिखाएंगे अपने भारत को हम स्वच्छ भारत बनाएंगे घर का कचरा गली का कचरा कूड़ेदान में डालेंगे गांव से लेकर शहर तक नियम हम यह पा लेंगे कचरा ना... »

प्राण से प्यारे गणतंत्र

प्राण से प्यारे गणतंत्र, पल पल कोटि कोटि प्रणाम। “**फूली नहीं समाती,** छब्बीस जनवरी। खुशियों के गीत गाती छब्बीस जनवरी । गांधी भगत बिस्मिल , आजाद बोस की, कुर्बानियाँ सुनाती , छब्बीस जनवरी । रक्षा करने स्वदेश की , हँसते हँसते सर्वस्व लुटाते हैं । उन अमर शहीदों को , स्वदेशवासी श्रद्धानत होकर शीष झुकाते हैं। देशवासियों को शुभकामनाएँ, बधाइयाँ। सविनय, आप सभी का मित्र जानकी प्रसाद विवश »

जंगे आज़ादी (आजादी की ७०वी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर राष्ट्र को समर्पित)

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता बहन बेटियों के, इज्ज़त धन सम्मान लुटे बिक गये धरम लुट गये करम, सब ओर गुलामी बू छायी प्राचीन सभ्यता संस्कृति गौरव, भूल गये हम सच्चाई ब्राह्मण कहता हम सर्वशेष्ट, छत्रिय कहता हम शासक है बनिया कहता हम धन कुबेर, हरिजन अछूत बस सेवक है मंदिर मस्जिद स्कूल सभी, जाना हरिजन... »

कविता — व्यक्ति–विशेष

बंधु ! आज स्व. राजीव गांधी की पुण्य—तिथि है। एक सपना और उसमें समाहित लालसा का स्मरण दिवस। हार्दिक श्रुद्धांजलि के साथ एक व्यक्ति — दो भाव   कविता – 01    व्यक्ति—विशेष || स्वप्न—भंग || : अनुपम त्रिपाठी तब; जबकि, एक समूची पीढ़ी निस्तेज़ कर दी गई   कोई नहीं; देख सका ……….. उन सपनों को, जो समाए थे : इक्कीसवीं सदी के लिए !   काश ! कोई तो होता !! वहीं–कही... »

शहीदी

कुछ मेरी औकात नहीं , कि तुझ पर कलाम चलाऊं मैं कुर्बानी तेरी करे बयां , वो शब्द कहाँ से लाऊं मैं नाम तेरा लेने से पहले पलकों को झपकाउं मैं भूल गए जिन पन्नो को हर्फ़ों से आज सजाऊँ मैं जब भारत माँ का आँचल लगा चीर-चीर होने गोरे बसने आये जैसे नागिन आयी हो डसने जब भारत का सूरज भी त्राहिमाम चीखा था तब खटकड़ में एक सिंहनी की कोख से सूरज चमका था भारत माँ बोली कि मैं गद्दारों पर शर्मिंदा हूँ चीख पड़ा सरदार माँ... »

शहीद

कुछ मेरी औकात नहीं , कि तुझ पर कलाम चलाऊं मैं कुर्बानी तेरी करे बयां , वो शब्द कहाँ से लाऊं मैं नाम तेरा लेने से पहले पलकों को झपकाउं मैं भूल गए जिन पन्नो को हर्फ़ों से आज सजाऊँ मैं जब भारत माँ का आँचल लगा चीर-चीर होने गोरे बसने आये जैसे नागिन आयी हो डसने जब भारत का सूरज भी त्राहिमाम चीखा था तब खटकड़ में एक सिंहनी की कोख से सूरज चमका था भारत माँ बोली कि मैं गद्दारों पर शर्मिंदा हूँ चीख पड़ा सरदार माँ... »

उठो वीर जवानो

उठो वीर जवानो भारत माता, तुम्हे पुकार रही, अपने लालों के लहू का, बदला माँग रही, अपने अमर जवानो के पथ पर, चलने को ललकार रही, उठो वीर जवानो भारत माता, तुम्हे पुकार रही, आज फिर भारत माता , पर आघात हुआ, देश के हुकूमरानो की, विफलता का आभास हुआ, आतंक और दंगा अब आम हुआ, उठो वीर जवानो भारत माता, तुम्हे पुकार रही, चण्ड बनो,दबंग बनो, साहस और उमंग भरो, देश के गद्दारों का,आतंकियो का, हत्यारों का दम्भ तुम भंग ... »

नौकरशाही आस्था

ये कैसी है आस्था, जिसमे समाई नौकरशाही | ये कैसी है व्यथा, जिसे सुन कर मन डगमगाई || ये कैसी है अखंडता, जिसमे धर्मनिरपेक्षता की नींव मरमराई | ये कैसी है अटूटता, जिसमे भ्रमता की नक्काशी समाई || वो कौन सी है व्याख्या, जिसे सुनाकर हुए हैं विख्यात | वो कौन सी है अदा, जिसे प्रदर्शित कर करते हैं आयात || वो कौन सा है व्यवसाय, जिसमे पाते हैं लाभ अकस्मात | वो कौन सा है पाप, जो धुलता है करने के पश्चात || किस ... »

आजादी

आजादी

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाये। गुलामी में भी हमारे दिल में देश की शान काफी थी, तोड़ देते थे होंसला अंग्रेजो का हममे जान काफी थी, पहनते थे कुर्ता और पाजामा खादी की पहचान काफी थी, गांधी जी के मजबूत इरादों की मुस्कान काफी थी, आजाद भारत देश को स्वतंत्र भाषा विचार को, लड़ कर मर मिट जाने की तैयार फ़ौज काफी थी, गुलामी की जंजीरों से जकड़े रहे हर वीर में, स्वतंत्र भारत माँ को देखने की तस्वीर काफी थी॥ राही (अंज... »

हम सबका हिंदुस्तान

इस देश में अजीब किस्म की बात चल रही है, हिन्दू , मुस्लिम ,सिख ,ईसाई कहने को है सब भाई-भाई ख़ास तौर पर हिन्दू और मुस्लिमान इस कविता में न कोई ऐसा नाम हैं जो हिन्दू या मुसलमान हैं , बल्कि एक हिंदुस्तान हैं सदियों लंबा इतिहास है ये , सारे देशों में ख़ास हैं ये दुनिया कहती है क्या चीज़ हैं ये , गंगा , जमुना तहज़ीब है ये ये देश शिवा,राणा का हैं ; यह देश महाराणा का हैं जय हो , अशोक , महावीर , विक्रमादित... »

स्वतन्त्रता की कहानी

स्वतन्त्रता की कहानी

गुलामी में भी हमारे दिल में देश की शान काफी थी, तोड़ देते थे होंसला अंग्रेजो का हममे जान काफी थी, पहनते थे कुर्ता और पाजामा खादी की पहचान काफी थी, गांधी जी के मजबूत इरादों की मुस्कान काफी थी, आजाद भारत देश को स्वतंत्र भाषा विचार को, लड़ कर मर मिट जाने की तैयार फ़ौज काफी थी, गुलामी की जंजीरों से जकड़े रहे हर वीर में, स्वतंत्र भारत माँ को देखने की तस्वीर काफी थी॥ राही (अंजाना) »

स्वतंत्रता दिवस

पंद्रह अगस्त का पावन दिन , वीरों की याद दिलाता है | शहीद हुए जो देश के खातिर , उनकी कथा सुनाता है | तेरह वर्ष की उम्र में आकर , चौदह कोड़े थे खाये | भारत माँ के लिए लड़े और , आजाद चन्द्र शेखर कहलाये | गांधी ,सुभाष, बिस्मिल, रोशन ने , देश के खातिर प्राण दिये | भारत की आजादी के हित , सारे सुख थे त्याग दिये | लाल ,बाल और पाल ने मिलकर , आजादी का बिगुल बजाया | लक्ष्मी, तात्या तोपें ने था , विद्रोह का स्व... »

हमारा हिंदुस्तान ….. बक़ौल; मेरा देश महान !

यह हिन्दुस्तान है ……………………………………….. कहना आसान — समझना मुश्किल — सहेजना असंभव फिर भी हमें ये गुमान है गांधी का अरमान है — सपनों का जहान है ————-मेरा देश महान है————– ……………….. क्या, यही ‘वो’ हिन्दुस्तान ह... »

“जश्ने आजादी”

जश्ने आजादी का पल है,आओ खुशी मनाएँ। आसमान फहरे तिरंगा, जन गण मन हम गाएँ। कालिमा की बीती रातें ,आया नया सवेरा। प्रगति -पथ परआगे ,बढ रहा देश अब मेरा। अरूणदेव की नूतन किरणें ,नया सवेरा लाई। नयी रोशनी पाकर देखो ,कलियाँ भी मुस्काई। नहीं खैरात में मिली आजादी,खून बहाकर पाई है। खूली हवा में साँसें ले हम,लाखों ने जान गँवाई हैं। याद करो वो कहर की बातें ,दुश्मन ने जो ढहाया था। मित्रता का हाथ बडा,गुलाम हमें ब... »

वंदेमातरम् गाता हूँ

वंदेमातरम् गाता हूँ

नारों में गाते रहने से कोई राष्ट्रवादी नहीं बन सकता। आजादी आजादी चिल्लाने से कोई गांधी नहीं बन सकता। भगत सिंह बनना है तो तुमको फांसी पर चढ़ना होगा। देश के लिए कुछ करना है तो हँसते-हँसते मरना होगा॥ संग आओ तुम भी मेरे, मैं सरहद पर गोली खाता हूँ। क्रांति पथ पर निकला हूँ मैं वंदेमातरम् गाता हूँ।। नारों में हम कहते हैं जम्मु और कश्मीर हमारा है। पंडित वहाँ से बेघर हो गये, क्या यही भाईचारा है।।अपमान तिरं... »

लौट आओ अपने खेतों पर

लौट आओ अपने खेतों पर

लौट आओ अपने खेतों पर अब हरित क्रान्ति लिख देंगे। उजाड़ गौशाला को सजाकर अब श्वेत क्रान्ति लिख देंगे। फिर से नाम किसानों का  लाल बहादुर शास्त्री लिख देंगे। अपनी लहू सिंचित करके माटी को अन्नदात्री लिख देगे॥ कर्ज से तुम मत घबराना धान की बाली से वादी लिख देंगे। गेहूँ मक्का गन्ना जौं  की फसलों को सोना चांदी लिख देंगे॥ बीती बात बिसार दो नई तकनीकों से अमिट कहानी लिख देंगे। खेतों पर तपने वाली माँ, बहनों को... »

” किस्सा–कुर्सी — का “

व्यंग्य गीत ———– अनुपम त्रिपाठी ” किस्सा–कुर्सी — का ” बचपन में किस्सों में कुर्सियों की बातें सुनते थे।आजकल कुर्सियों के किस्से आम हैं । लेकिन ये कुर्सियाँ मिलती कैसे हैं ? इस लोकतंत्र की महती विडम्बना भी यही है कि ; कुर्सी सेवा पर हावी है। बेशक ; लोकतंत्र जीवित है ——– जीवन्त नहीं बना पाए हम इसे । क्या अपने वर्तमान — अपने इति... »