मैं तेरी मुस्कान चाहती हूं, तेरा हर अरमान चाहती हूं। तू उड़ सके आजाद, यह पैगाम चाहती हूं। फिरे तू हर उन गलियों से, जो गुजरती हो बुलंद नगरों से। बीच में तू रुके ना […]

सोचता है मन कि पूरी रात भर उडगन, समय कैसे बिताते हैं अपने घौंसलों मे रह। न मोबाइल न टीवी है न खाना बनाना है, साँझ होते ही दुबक कर बैठ जाना है। जो पा […]

तेरी होठों की मुस्कुराहट का, अलग ही फलसफा है । जहां खोता हूं मैं , और दिल हंसता है । भूल जाता हूं , मैं इस अदब को , जिसे मोहब्बत कहते हैं। जहां खोया […]

कबूतरों का झुंड एक उड़ रहा था आकास में। बीच झाड़ियों के बहुत दाने पड़े थे पास में।। युवा कबूतर देख-देख ललचाया खाने के आश में । बोल उठा वो सबके आगे उतर चलें चुगने […]

चलिए एकबार फिर से, खुद पर एतवार करते हैं । बहुत कर लिया गैरो से, इसबार खुद से ही प्यार करते हैं ।। बहुत किया भरोसा, जो भरोसे के हरगिज़ काबिल नहीं थे, खुद पर […]

************ हास्य रचना********* एक सखी ने पूछा वॉट्सअप पर दूजी से, क्या चल रहा है ज़िन्दगी में… दूजी वाली बोली… Jsdfghyybttuiokhfeyppourebm पहली ने कहा, ये क्या है,कुछ समझ नहीं आया.. दुजी वाली बोली, वो ही […]

बेजान है ये जिस्म मेरा लफ्ज भी लड़खड़ा रहे हैं भाव हैं बिखरे हुए हम सिमट ना पा रहे हैं ख्वाहिशों के पन्ने भीगे हैं अश्कों से मेरे बोलना बहुत कुछ चाहते हैं पर कुछ […]

(आपने भाग १ में पढ़ा – वीराने में कलूआ की मुलाकात एक अदभुत गिद्ध से होता है। वह मनुष्य की भाषा में बात करता है। वह अपने घर परिवार व समाज को छोड़ चूका है। […]

गायब इस धरा से आज, इंसान क्यूं है।। कोई हिन्दू, कोई यहां मुसलमान क्यूं है, एक थाली में खाने वाले, सुख दुख में साथ निभाने वाले मिलके त्यौहार मनाने वाले बने आज शैतान क्यूं हैं, […]

तुझे क्यों दर्द होता है, जरा सा आह से मेरी मुहब्बत गर नहीं है तो बता क्या बात है तेरी। बता पाये न मुँह से तो, इशारों में ही समझा दे मदद लेकर तू औरों […]

तेरे तस्वीर को देखे अरसा हो गया इस तपते रेगिस्तान मे पानी गिरने पर भी तरसा रह गया तेरे बिना बारिश की बूदे बेगाना सा लागे है ठंडी परी शाम मे कम्बल की गर्माहट सी […]

कविता- शिद्दत ——————- बड़ी शिद्दत से उसे चाहा था, खुदा से दुआओं में उसे मांगा था| पर समझ न सकी हमको यारो, वह भरी महफिल में हमें रुलाया था| उसके होठों की मुस्कुराहट ही , […]

गफलत में कहीं खो न दें हम दोस्ती उनकी, ए खुदा ऐसा न हो इतनी सी है गुजारिश। मौसम समझ न आया थोड़ी हवा है चंचल बाहर है धूप निकली भीतर लगी है बारिश।

जीवन की अवस्था तीन सही बचपन का कोई जवाब नहीं आनंद भरा रहता तन मन पुलकित होता हरेक का संग शिशु मुख लगता प्यारा प्यारा हर अंग भाता न्यारा न्यारा मुस्कान हो या फिर हो […]

चीनियों को चीनी की बीमारी चींटी की तरह रेंगते रहते खाने तक की है अक्ल नहीं पशु खा पशुता ही प्राप्त कर रहे अंत करना उनका नहीं मुश्किल भालू चूहे बन्दर की जरूरत है कोरोनावायरस […]

मासूम सी ख्वाहिश है इस ज़िन्दगी से, छोटी सी फरमाइश है इस ज़िन्दगी से। ना मांगे चांद,सितारे हम, मिले ना कभी कोई गम.. होती रहे खुशियों की बारिश, इस ज़िन्दगी में। बहुत कश्मकश रहीं इस […]

अनमोल थी तेरी यादें, तेरे साथ की। वह किस्सें बयान करती है, चाहते हैं, हम भी अनमोल हो जाते। तेरी यादों की तरह, छू लेते तुम यादों में कभी। पर हकीकत से , उनका राब्ता […]

❤❤ अभिव्यक्ति दिल से ❤❤ *************************** पहली मुलाकात और पहली भेंट आज भी याद है मुझे… वह बरगद के नीचे बैठकर करी थी जो बातें हमने दिल आज भी बेताब है… तुम कुछ लाए थे […]

पापा के लिए तो परी हैं बेटियां हर दुख दर्द में संघ खड़ी है बेटियां फिर क्यों कहते हैं कि तू धन है पराया क्यों बेटी का कमरा भुला दिया जब घर बनाया बेटी नहीं […]

चल साथी चल करें हम नये युग का सूत्रपात बढ़ चलें नवीन पथ पर हाथों में लेकर हाथ ना जाति-पांति के बंधन हों ना मरी हुई संवेदनाएँ ना लाशों के ढेर लगे हों ना आगे […]

विविधता में एकता के सूत्र को सहजता से पिङोती जो संस्कृत की बेटी, विविध भाषाओं की सहचरी है वो। माँ सी ममता जिसके हर वर्ण में समाहित है फिरन्गी भी जिसे सीखने को ललायित हैं […]

मेरा जिससे था प्रेम प्रसंग वो रहता था हर पल मेरे संग हम एक दूजे के साये थे जन्मों बाद करीब आए थे.. वो हाथों में हाथ लिए बैठा था बोला मुझसे विवाह रचा लो […]

वो रात भर खांसती! चिल्लाती! घबराती! फड़फड़ाती! भुखी-प्यासी, आंसू बहाती, अकेली तड़पती, चलीं गईं! छोड़ सांस , वो चली गई। मगर बेटे बड़े संस्कारी! ऐसे ना भुखा जाने देंगे, जीते जी तो कुछ कर ना […]

सीता वियोग में बहुत विकल थे प्रज्ञा के श्रीराम ! एकाएक याद हो आई सिय से प्रथम मिलन की बेला !! ज्यों घोर तिमिर में कौंध उठी हो अकस्मात दामिनी त्यों राम हृदय में जगमगा […]

बहुत झगड़े हम रात भर दिल से अपने , मगर बदनामी करे, मनमानी करे, दिल मेरा , तुम्हारी ही गुलामी करें , आखिर आना ही पड़ा लौटकर , तेरे शहर में, तेरी गलियों में, हसरत […]

कलूआ डोम श्मशान से लाश जला कर शाम के समय घर जा रहा था। अचानक किसी की आवाज़ उसके कानो में टकरायी।वह खड़ा हो कर चारो तरफ देखने लगा। उसे कहीं भी कुछ दिखाई नहीं […]

यह न समझो हम बहुत दिल के बुरे हैं बस जरा अनदेखियों से बुझ गए हैं, लक्ष्य के थे पास लेकिन गिर गए थे फिर उसे पाने में पूरे खप गये हैं। इसलिए थोड़ा समय […]