जीवन की अवस्था तीन सही बचपन का कोई जवाब नहीं आनंद भरा रहता तन मन पुलकित होता हरेक का संग शिशु मुख लगता प्यारा प्यारा हर अंग भाता न्यारा न्यारा मुस्कान हो या फिर हो […]
जीवन की अवस्था तीन सही बचपन का कोई जवाब नहीं आनंद भरा रहता तन मन पुलकित होता हरेक का संग शिशु मुख लगता प्यारा प्यारा हर अंग भाता न्यारा न्यारा मुस्कान हो या फिर हो […]
चीनियों को चीनी की बीमारी चींटी की तरह रेंगते रहते खाने तक की है अक्ल नहीं पशु खा पशुता ही प्राप्त कर रहे अंत करना उनका नहीं मुश्किल भालू चूहे बन्दर की जरूरत है कोरोनावायरस […]
खबर नहीं कौन है वो, मेरा लगता है क्या, मगर इतना करीब दिल के, कैसे करूं मैं बयां.. …✍️गीता
मासूम सी ख्वाहिश है इस ज़िन्दगी से, छोटी सी फरमाइश है इस ज़िन्दगी से। ना मांगे चांद,सितारे हम, मिले ना कभी कोई गम.. होती रहे खुशियों की बारिश, इस ज़िन्दगी में। बहुत कश्मकश रहीं इस […]
घबरा जाती हूं, विवादों से, व्यथित हो उठता है मन,। शांत हो पाती हूं एकान्त से, करती हूं दूर ऐसे टेंशन ।
अवनी हूँ मैं अंबर है तू , डूबू जो मैं संबल है तू । ये मन मेरा मन्दिर है जो प्यारे प्रभु की मूरत है वो। भटकू मैं क्यों इधर से उधर मन में ही […]
जफ़ा मत कर, वफ़ा कर ले झियाँ मत बन, मुहब्ब्त कर सभी धोखा नहीं देते मुहब्बत से कभी मत डर।
तबस्सुम से तुम्हारी हम सभी गम भूल जाते हैं, आईन्दा दूर मत जाना जुदाई सह न पाते हैं।
जब सब के भीतर तु है समाया तब भी मुझे कैसे तु नजर ना आया ख़तावार हूँ मैं खुद को ना इसका पात्र बना पाया।
अनमोल थी तेरी यादें, तेरे साथ की। वह किस्सें बयान करती है, चाहते हैं, हम भी अनमोल हो जाते। तेरी यादों की तरह, छू लेते तुम यादों में कभी। पर हकीकत से , उनका राब्ता […]
कुछ तरीके बताओ ना मुझे, कैसे भूले हो तुम मुझे।
क्यों मनाएं किसी को, रूठना हमें भी आता है। जो भूले बैठे हैं हमें, भुलाना हमें भी आता है।
बेखौफ होकर जिंदगी जी लेते, अगर तुम्हें खोने का डर ना होता…
मुझे पता नहीं तुम्हें पाने का तरीका, पर खोने का सबब आज भी याद है……
❤❤ अभिव्यक्ति दिल से ❤❤ *************************** पहली मुलाकात और पहली भेंट आज भी याद है मुझे… वह बरगद के नीचे बैठकर करी थी जो बातें हमने दिल आज भी बेताब है… तुम कुछ लाए थे […]
पापा के लिए तो परी हैं बेटियां हर दुख दर्द में संघ खड़ी है बेटियां फिर क्यों कहते हैं कि तू धन है पराया क्यों बेटी का कमरा भुला दिया जब घर बनाया बेटी नहीं […]
चल साथी चल करें हम नये युग का सूत्रपात बढ़ चलें नवीन पथ पर हाथों में लेकर हाथ ना जाति-पांति के बंधन हों ना मरी हुई संवेदनाएँ ना लाशों के ढेर लगे हों ना आगे […]
विविधता में एकता के सूत्र को सहजता से पिङोती जो संस्कृत की बेटी, विविध भाषाओं की सहचरी है वो। माँ सी ममता जिसके हर वर्ण में समाहित है फिरन्गी भी जिसे सीखने को ललायित हैं […]
मेरा जिससे था प्रेम प्रसंग वो रहता था हर पल मेरे संग हम एक दूजे के साये थे जन्मों बाद करीब आए थे.. वो हाथों में हाथ लिए बैठा था बोला मुझसे विवाह रचा लो […]
15अगस्त 1947 की रात को भारत देश नहीं, भारत के लोग आजाद हुए थे। देश और देशवासियों को कुछ भी कहने और कुछ भी करने के लिए, साथ ही आजाद हुए सिर्फ अपने भले के […]
वो रात भर खांसती! चिल्लाती! घबराती! फड़फड़ाती! भुखी-प्यासी, आंसू बहाती, अकेली तड़पती, चलीं गईं! छोड़ सांस , वो चली गई। मगर बेटे बड़े संस्कारी! ऐसे ना भुखा जाने देंगे, जीते जी तो कुछ कर ना […]
सीता वियोग में बहुत विकल थे प्रज्ञा के श्रीराम ! एकाएक याद हो आई सिय से प्रथम मिलन की बेला !! ज्यों घोर तिमिर में कौंध उठी हो अकस्मात दामिनी त्यों राम हृदय में जगमगा […]
बहुत झगड़े हम रात भर दिल से अपने , मगर बदनामी करे, मनमानी करे, दिल मेरा , तुम्हारी ही गुलामी करें , आखिर आना ही पड़ा लौटकर , तेरे शहर में, तेरी गलियों में, हसरत […]
मैं लिखती हूं कुछ अलग-सा, मुझे इंसानों से ,न नफ़रत हैं, बस करती, निंदा बुराइयों की, दुःख देने की , न हसरत है।
कलूआ डोम श्मशान से लाश जला कर शाम के समय घर जा रहा था। अचानक किसी की आवाज़ उसके कानो में टकरायी।वह खड़ा हो कर चारो तरफ देखने लगा। उसे कहीं भी कुछ दिखाई नहीं […]
चाय के कप से उठते धुंए में, तेरी शकल नज़ार आती है, ऐसे खो जाते है तेरे ख्यालों में, की अक्सर मेरी चाय ठंडी हो जाती है। Read Also : Good Morning Shayari
यह न समझो हम बहुत दिल के बुरे हैं बस जरा अनदेखियों से बुझ गए हैं, लक्ष्य के थे पास लेकिन गिर गए थे फिर उसे पाने में पूरे खप गये हैं। इसलिए थोड़ा समय […]
सब कहते हैं! ज़माना बुरा है, मगर ज़माना बना तो हम से ही है, हम ढुंढते है खामियां औरों में, क्या सारी अच्छाईयां हम में ही है!
यदि कभी तुम प्यार की बिल्डिंग बनाओ तो मुझे अस्ल पर रख देना तब इत्माम पाओगे। क्योंकि मैं ही हूँ वो जो अधिकारिणी हूँ प्यार की त्याग कर मुझको कई इल्जाम पाओगे।
सोची समझी चाल से, शायद जानबूझकर पार्टियां वे कर रहे, विश्व को मौत में ढकेल कर। जिस वुहान से इसकी शुरुआत हुई इससे निजात की, तैयारी थी क्या कर रखी। मास्क को दे तिलांजली, दुनिया […]
खलिश जितनी भी है सारी उड़ेलूं सोचता है मन, मगर प्रसन्नता की राह तो यह भी नहीं पक्की। चलो छोड़ो भी जाने दो न आये नींद आंखों में मगर कुछ चैन पाने को जरूरी है […]
पाबंदियों की धज्जियां उङाते, सीधे-सीधे संक्रमण को आमंत्रण देने निकल पङे । गजब की परिस्थितिया, चारों तरफ मंडराते मौत के बीच खुद को चुनौती देने निकल पङे । संकटकालीन दौर में जीते, मन बेचैन जिगर […]
जो भी लिखता हूँ कविता आप इश्रत ही समझना, न मुझसे, न खुद से बस खुदा से तिश्रगी रखना। जब कभी मित्र बनकर बैठना चाहोगे तो मैं भी बिठाउँगा खुशी से आपको दिल के बियाँबा […]
अक्सर मैं भूल जाती हूं , अपनी राह। ख्वाब अनेकों हैं, अब खत्म है चाह। कभी उम्र की सीमा रोक देती है, कभी दूसरों की सलाह। पर भुला कर बढ़ती हूं आगे, फिर से उठते […]
चलो विदा करते हैं उन यादों को, कब तक कैद रखे ! उन्हें यादों के पिटारों में।
आज भी आंखें सिर्फ उम्मीद के रंग ही तलाशती है, क्या रंग नहीं देखे! इन आंखों से पूछो।
अभी भी उम्मीद बाकी है, अभी मेरी सांसों में सांस बाकी है। कुछ छूने की ऊंचाईयां, कुछ पाने की इच्छा अभी मेरे सपनों में जान बाकी है।
लगता था जिंदगी बहुत बेमानी हो गई पहले-पहल ऐसे लगा कुछ छूट रहा यह जग सारा टूट रहा फिर कुछ दिन बीते मन शांत होने लगा छूटने का गम नहीं कुछ पाने की चाह हुई […]
सुनो ए दोस्त तुम ए काम न किया करो। मुहब्बत को यों बदनाम न किया करो।। माना कि रास्ते बहुत कठिन है इश्क के। फिर भी अपनी इश्क़ पे यकीन किया करो।। जो हर मर्तबा […]
टूट कर चारों तरफ बिखरा हुआ हूँ दोस्तो। काँच सा तीखा, दिलों में, चुभ रहा हूँ दोस्तो। फर्क इतना है कि मैं टूटा नहीं हूं खुद ब खुद। मार कर पत्थर बड़े, रौंधा गया हूँ […]
तुम्हारे अंजुमन में जब कभी दो शब्द बोलूंगा, हिला दूँगा मैं भीतर तक सामने सत्य ला दूँगा। नहीं चिंता मुझे है अब कि मैं बदनाम होऊँगा कर दिया खत्म सब तुमने कहाँ अब नाम पाऊँगा।
पढ़ लेते हैं पन्ने जिंदगी के, जब हंसना हो या रोना हो। अब भी उसी तरह दिखते हैं , वो बदलते ही नहीं , बीते वक्त के बाद भी।
आजाद किसे कहें? सब बंधे हैं बंधन में। हर शाम पंछी, अपना घोंसला तलाशता है। जहां चाह होती है, अपने आशियाने की। वह बोलते नहीं तो क्या, दिख जाती है उनकी ममता, जब चुग कर […]
कितनी जाजिब हो तुम कितना मीठा कहती हो, सबको खुश रखने को सब कुछ खुद पर सहती हो। परिवार बनाने वाली हो प्यार लुटाने वाली हो खुद तो सब कुछ हो मेरा मुझको सब कुछ […]
कविता – तेरी खता ————————- तेरी खता फिर से तुझे, बदनाम कर सकती| तेरे लफ्जों के कारण ही, तुझे शैतान कह सकती| कहां अगर तू ये सच्चाई, तुझे बदनाम करते हैं| करें सबसे शिकायत जो […]
हमारी और उनकी एक सी बात कहां, वो हैं सच के पुजारी झूठ की बोरियां हम। रात सोती है दुनियां जागते खामखां हम दिल्लगी कर न पाए बन गए बेवफा हम। शक उठा आज मन […]
एक सवाल पूंछना है तुमसे एक बार आकर तो मिलो सब कुछ तो ठीक हो गया है तुम्हारे जाने के बाद… पर नींद कहाँ गुम हो गई यही पूंछना है मुझे रातें चाँद, तारे देखकर […]
तू शक्तिशाली!,मैं दलित ! तू स्वर्ण ! मैं नीच! यह शब्द स्वार्थ में , तूने ही मुझे दिए। तू मालिक, मैं दास, तेरी विचारधारा में; मेरा उपहास, शोषण का खाता, यहां हर रोज खुलता है, […]
आंगन में एक पाटा रखकर पण्डित और परिचितों को बुलाकर लगा तैयारी में पूरा घर पकवान और मिष्ठान बनाकर हाथ जोड़कर सब बैठे हैं दादी की बरसी है आज एक बरस होने को आया पर […]
नन्ना-सा ,एक छोटा-सा , टहनी बड़ी, मगर कोमल-सा, अकेला मनोहर पौधा, तेज हवाओं में ,वो झूला झूले, कभी इधर कभी उधर, क्रीडा ललाम बड़ी सुहावनी, बारिश में वो नृत्य करें, मगर माली ठहरा क्रुर-सा, पौधा […]
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