बह रही प्यार की सरिता

March 26, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

बह रही प्यार की सरिता
कहे मन लिख डालूँ एक कविता
सारा नेह निचोड़ दूँ इसमें
खिल जाये सुन वनिता ।
डोर हमारी और तुम्हारी
मजबूती से बंधी रहे यह
गीत उगें बस, नेह भरे ही,
राग भरे हों ललिता।
लिख डालूँ एक कविता।
प्यार की बह जाये सरिता।
सुर में सुर और ताल मिलाकर
मन के भीतर प्रेम बसाकर
उमंग का मृदङ्ग
खूब बजाकर,
लिख डालूँ एक कविता।

मन बाहर ले आओ

March 26, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

छोड़ो बात दूजे की
मनाओ अपने मन में होली,
खेल सको तो खेलो हमसे
मन बाहर ले आओ।
बाहर-भीतर एक ही रंग हो
अलग-अलग नहीं डालो।
भीतर स्याह बाहर दिलकश
ऐसा मुझे न बनाओ,
मन बाहर ले आओ,
अगर नहीं प्रिय तुमसे हो यह
त्याग मुझे, निज पथ लो,
मैं पाहन तुम भी
बन शिलखंड,
ऐसे ही समय बिता दो।
मन बाहर ले आओ प्रीतम
छोड़ो बात दूजे की
छोड़ो बात दूजे की
मनाओ मेरे संग में होली।

हँसी के फूल खिला दे

March 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

होली में फूल खिला दे
हँसी के, होली में फूल खिला दे।
प्यारे-प्यारे रंग-बिरंगे
फूल ही फूल खिला दे। हँसी के—
ढंग-बेढंदी हुई जिंदगानी,
होली में ढंग दिला दे।
हँसी के होली में फूल खिला दे।
फैली निराशा जिनके पथ में
आस की ज्योति जगा दे।
हँसी के होली में फूल खिला दे।
हारे-थके जो व्यथित पड़े हैं
उनमें जोश जगा दे।
हँसी के, होली में फूल खिला दे।
बिछुड़ गए हैं जिनके प्रियतम
होली में आज मिला दे।
हँसी के, होली में फूल खिला दे।

बिखर रही है लाल अरुणिमा

March 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

छवि तेरी मन भाये
सुबह सब ओर मनोहर कोमल सी,
बिखर रही है लाल अरुणिमा
मिहिका बिखरी मुक्ता सी।
जागूँ देखूँ स्वच्छ सुबह को
त्याग अवस्था सुप्ता सी।
तेरी मन भाये सुबह
सब मनोहर कोमल सी।
छवि तेरी मन भाये सुबह।
चहक रहे हैं खगवृन्द धुन में
महक रहे हैं पुष्प आँगन में
बिखर रही हैं भानु की किरणें
साफ, मनोहर, कोमल सी।
छवि तेरी मन भाये
मनोहर कोमल सी।
नोट – प्राकृतिक सौंदर्य पर लिखने का एक प्रयास।

गाऊँ गीत मनाऊँ होली

March 24, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

गाऊँ गीत मनाऊँ होली
खुशी मनाऊँ मन ही मन
रंग की रौनक जहाँ तहाँ हो
खूब सजाऊँ अपना तन।
लाल व पीले, हरे, गुलाबी
सारे रंग उड़ाऊँ मैं,
खुद का चोला खुद ही रंग लूँ
मन से तन को भिगाऊँ मैं।
बनकर खूब रंगीन सा पुतला
होली आज मनाऊँ मैं।
जो आये रंगों को लेकर
उसको खूब रिझाऊं मैं।

सुन्दर तेरी रचना

March 24, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

सुन्दर तेरी रचना
अति सुन्दर तेरी रचना विधाता
रंग बिरंगी सृष्टि रची,
जा में नाना तरह
जीवजाति बसी।
नाना तरह की, विविध तरह
जीवन ज्योति जगी।
अति सुन्दर तेरी रचना विधाता,
कल-कल करती नदिया-झरने
वन-उपवन, फुलवारी सजी
अति सुंदर तेरी रचना विधाता
अति सुन्दर तेरी रचना।
प्यार मुहब्बत,
भावना कोमल,
दया-ममता सब ओर सजी।
अति सुन्दर तेरी रचना विधाता
अति सुंदर तेरी रचना।

रंग भरी यह कविता (हरिगीतिका)

March 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

मेरे गीतों में बह आई, रंग भरी नव सरिता,
खूब बहारें भरकर गाई, रंग भरी यह कविता।
खूब अबीर गुलाल उड़ायें, गायें और बजायें।
जीवन की सारी उलझन को, आओ दूर भगायें।
खुश रहना ही असल जिन्दगी, है सबको समझायें,
सब लोगों को हर्षित कर दें, खुद मन में हरषाएँ।

मारी नहीं पिचकारी(होली पर )

March 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

गाली न दे मुझे आली
नहीं मारी तुझे पिचकारी
मैंने मारी नहीं पिचकारी,
भर कर रंग, चला कुंज गलियन,
मारी नहीं पिचकारी।
शायद तुझको भूल हुई है
या यह मेरी राह नई है,
मगर यही सच मेरा
रंग नहीं यह मेरा,
नहीं, मैंने मारी नहीं पिचकारी।
मेरा रंग बड़ा अनजाना,
जिसको खुद ही नहीं पहचाना।
मगर आयी अब होली,
तेरी कान पड़ी मीठी बोली,
हाँ, मारी मैंने पिचकारी
तुझे मारी मैंने पिचकारी।

भस्म करूँ खामियाँ स्वयं की

March 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

पावक उग आ तू मेरे मन में,
भस्म करूँ खामियाँ स्वयं की,
एक- एक कर खोज -खोज कर
दुर्बलताएँ दूर करूँ निज।
बहुत हो चुका डगमग डगमग
अस्थिर मन अस्थिर तन लेकर
भटक रहा जो इधर-उधर अब
सारी उलझन दूर करूँ निज।
नहीं किसी से गलत कहूँ मैं
नहीं किसी की गलत सुनूँ मैं,
खुलकर राह चुनूँ मैं अपनी
बाधाएं सब दूर करूँ निज।
अपनी बातें, अपनी राहें
अपनी खुशियाँ, अपनी आहें
अपना प्यार, मुहब्बत अपनी
दूजे को भी नेह करूँ नित।

सत्य पथ चलता रहूँ

March 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

लब खुलें तो सत्य बोलें
अन्यथा पट बन्द हों,
ईश ऐसी शक्ति देना,
भाव में नव छन्द हों ।
याचना है ईश तुझसे,
काम से मतलब मुझे हो,
और राहों और बातों से
नहीं मतलब मुझे हो।
सत्य की हो बात जो भी
वो मेरे मन दर्ज हो,
राह देना पथ भटकते को
मेरा एक फर्ज हो।
कोई कुछ भी बोल दे
मैं कर्मपथ चलता रहूँ
दूसरों से भी उसी पथ में
चलो कहता रहूँ।
कोई माने या न माने
सत्य में कहता रहूँ
प्यार पाऊँ, ठेस पाऊँ
सत्य पथ चलता रहूँ।

ओ याद! भूली बिसरी

March 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

आ बैठ पास मेरे
ओ याद! भूली बिसरी,
आ अश्रु! नैन में आ
या मुँह में आ जा मिश्री।
बीते पलों की खुशबू
तू उड़ कहाँ गई है,
ओ मन की लालसा तू
धुल कहाँ गई है।
बांधी थी जो सहेजे,
भर पोटली में यादें,
वो पोटली न जाने
खुल कहाँ गई है।
यादों में रह गई हैं
यादें थी जो पुरानी
उनमें भी कोई यादें
यादें कहाँ रही हैं।
खो जाओ मत यूँ यादो
आओ जरा बैठो,
रोऊँ, हँसूँ मैं तुम पर
आओ ना, बैठ जाओ।

मन बना पाहन

March 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

मन बना पाहन
न कारण है पता,
तोय के धोए से
केवल धुल गया।
फिर मरुत से भाप
बनकर उड़ गया,
राज भीतर का वो
भीतर रह गया।
यामिनी भीतर ही
बैठी रह गयी,
दामिनी बाहर
चमकती दिख रही।
अब जलधि का
कौन मंथन कर सके
उस अमिय की आस
केवल रह गयी।
हाँ, नहीं विष की
कमी है दोस्तों,
व्याल चारों ओर
काफी उग गये।
खुद के भीतर भी
फणी प्रवृति आ,
और पर मन विष
उगलता रह गया।
मैं स्वयं वनराज
खुद को मानकर
पाशविक कृत्यों को
करता रह गया।

बाद में आयेगी गर्मी

March 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

आजकल सो पा रहा है
वह जरा फुटपाथ पर,
ठंड कम लगने लगी
ठिठुरन हुई कम आजकल।
बीते दिन जाड़ों में रोया
रात भर सिकुड़ा सा सोया
बच गया बस जैसे-तैसे
सोच मन में खूब रोया।
धीरे-धीरे ऋतु बदल कर
माह सम मौसम का आया
उग रहे मधुमास में
चैन उसने भी है पाया।
बस यही हैं चैन के दिन
बाद में आयेगी गर्मी,
सोचकर कैसे कटेगी
सोच ने मन है डराया।

एकजुटता

March 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

बालों में लगे रबर की तरह
खिंचे चले जा रहे तो तुम,
खिंच रहे हो मगर बांध रहे हो
सभी को एकजुट,
जिससे निखर रही है चोटी,
एकजुटता से ही हम
छूँ सकते हैं चोटी,
मुश्किलें कर सकते हैं आसान
सफलता पा सकते हैं मोटी।

अब लगो उत्थान में

March 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

खूब बातें हो गई हैं,
अब लगो उत्थान में,
देश आशा में लगा है,
मत चलो अवसान में।
खूब दूजे पर उछाला
कीच अब रहने भी दो,
एक दूजे को समन्वित
बात तुम रखने भी दो।
सब चलो मिलजुल के राही
देश को बढ़ने भी दो,
छोटी-छोटी बात को तुम
मत करो, रहने भी दो।
ताड़ तिल का मत बनाओ
आड़ ओछी छोड़ दो,
पिस न पाए आम जनता
दाढ़ अपना तोड़ लो।
बस चुनावों तक रहे यह
एक दूजे पर निशाना,
बाद में मिलकर चलो सब
देश है आगे बढ़ाना।

जीवन में सद्कर्म कर सकूँ(हरिगीतिका छन्द)

March 22, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

जीवन में सद्कर्म कर सकूँ, यह शक्ति तू दे मुझे,
झूठ को नित करूँ उजागर, यह शक्ति तू दे मुझे।
गा सकूँ खुले मन से गाने, उल्लास भाव अपना,
हे ईश! मुझे वर देना तुम, देखूँ सच का सपना।
रात को रात दिन को दिन कह, लिख पाऊं सच्चाई,
कुछ करूं न कर पाऊँ बातें, करूं जरा अच्छाई,
निरुत्साहितों को दे पाऊँ, गर उत्साह जरा सा,
तब मेरा जीवन मुझे लगे, सफल व भरा भरा सा।

अभिवादन सम्मान

March 22, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

निद्रा में था रात भर, उठूँ धरूँ अब ध्यान,
मात-पिता गुरु देव का, अभिवादन सम्मान,
अभिवादन सम्मान, बड़ों का करूँ पूज लूँ,
ले उनसे आशीष, राह में कदम बढ़ा लूँ।
कहे कलम आशीष, एक अनमोल है मुद्रा,
उसे पास रख कदम बढ़ा तू त्याग दे निद्रा।

ले खुशी के रंग(गीतिका छन्द)

March 21, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

ले खुशी के रंग सबको, रंग देना सीखिये,
रंग उनका रंग अपना, मिल सके यह कीजिये।
रंग मन में रंग तन में, रंग जीवन सींचिये,
बेरंग जीवन जूझते , रंग उनको दीजिये।
दर्द में डूबे हुये को, कुछ सहारा कीजिये,
नफरतों को त्यागकर तुम, प्रेमरस को पीजिये।
दूर कोई जा न पाये, पास सबको खींचिये,
नेह रंगों से सभी की, वाटिका को सींचिये।

इंसानियत को सीखना ही होगा

March 21, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

सब कुछ सिखा देगा इंटरनेट
मगर संस्कार तो घर से ही सीखने होंगे,
छोटे बच्चों को खेल लगाना,
उनकी चाहत को पहचानना,
उनकी भूख-प्यास का अहसास
ये सब तो सीखने ही होंगे।
बुजुर्गों का अदब,
उनका सम्मान,
कोई निर्णय लेने से पहले
उनकी भी राय ले लेना,
उनकी जरूरतों का ख्याल रखना
यह सब तो सीखना ही होगा।
दूसरे की पीड़ा को महसूस करना
दया भाव, मुहोब्बत करना,
निरीहों पर स्नेह लुटाना
यह सब तो सीखना ही होगा।
इंसान हो इंटरनेट के अलावा
इंसानियत को सीखना ही होगा।

खिल गई है सुबह

March 21, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

खिल गई है सुबह
जाग जा अब पथिक
हाथ-मुँह धो ले,
न कर आलस अधिक।
काम पर लग गई है दुनिया
चींटीं से लेकर हाथी तक
अपना चुके हैं,
मेहनत का पथ।
उड़गन भी
नित्यकर्म पूरा कर,
चल पड़े हैं ड्यूटी पर,
उठ तू भी,
लिख दे चार शब्द
प्राकृतिक ब्यूटी पर।
रात का अंधेरा बीत गया
सुबह हो गई जवाँ,
उठ जुट जा तू भी
समय मत गँवा।

जो दान भूखे को दे सकेगा

March 20, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

जो दान भूखे को दे सकेगा
असल में सच्चा धनी वही है,
जमा किया बस जमा किया तो
वो सच में कुछ भी धनी नहीं है।
कमाओ लाखों करोड़ों चाहे,
जरा सा उसमें से दान कर लो,
दया धरम ही है साथ जाता
ये सच की बातें हैं कान धर लो।

मुझ में मधुमास

March 20, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

तू रंग कैसा लगा गया है
मुझ में तो
मधुमास सा आ गया है।
ये पीले-पीले व लाल फूलों
से मेरा तन-मन सजा गया है।
खिला के भीतर के फूल मेरे
रंगों का उपवन सजा गया है।
वो कह रहा है कि होली आई
होली से पहले रंगा गया है।

मीठी सी लोरी गाकर सुनाना

March 20, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

अगर मैं रूठूँ
मुझे मनाना,
अगर मैं टूटूँ
मुझे उठाना,
सहारा मेरा बने
मैं तेरा,
यही तो जीवन का है फ़साना।
अगर है दूरी
तो पास लाना,
जरा सा मनुहार से बुलाना,
मीठी सी लोरी गाकर सुलाना,
समय को खुशियों में ही बिताना।

हमेशा सच ही सैल्यूट पाये

March 20, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

जो राह सच्ची चलेगा मित्रों
भले ही गाली वो लाख खाये
मगर है ईश्वर का न्याय ऐसा,
हमेशा सच ही सैल्यूट पाये।
कभी भी जीवन में तुम किसी का
बुरा न करना, बढ़े ही जाना,
कभी भी मेहनत से मत भटकना
चले ही जाना कदम बढ़ाना।
अनेक छींटाकशी भी होगी
अनेक कमियां दिखाई देंगी,
मगर तुझे हिम्मत रख हमेशा
स्वयं की राहें बनानी होंगी।
बना के सीढ़ी, पहुंच के मंजिल
खुशी तुझे भी मनानी होंगी।

मुहब्बतों में मुझे झुका दे

March 20, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

तू टिमटिमा मत चमकते तारे
बिना रुके रोशनी दिखा दे,
अंधेरा घनघोर सा घिरे जब
तू कर उजाला मुझे सिखा दे।
चलूँगा कैसे अंधेरी राहें,
मुझे तू सारी कला सिखा दे,
मनाने प्रीतम को क्या लिखूं अब
दो बात अच्छी मुझे लिखा दे।
अगर कलम से गलत लिखूं तो
मुझे बताये बिना मिटा दे।
अकड़ न जाऊँ कभी किसी से
मुहब्बतों में मुझे झुका दे।

ये गुनगुनाहट कहाँ हुई है

March 20, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

ये गुनगुनाहट कहाँ हुई है
जो लेखनी ने बयान की है,
जो ध्वनि सुनी थी कभी मुहोब्बत की
आज फिर से सुनाई दी है।
निगाहों से मिलने को निगाहें
पलक झपकते मिला ही दी हैं।
सुहाना मौसम सुहाने पल-क्षण,
ये आहटें सी सुनाई दी हैं।
कभी हैं खट्टे फलों सी खुशबू
कभी वे लगती मिठाई सी हैं।
जो कह रहे हैं वो कुछ नहीं है
असल की बातें छुपाई सी हैं।
बयां न कर पाये थे मुहब्बत
मगर जिगर में सजाई सी हैं।

सलामी कुबूल हो

March 20, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

बाजार में प्रविष्ट करते ही
छोटे-छोटे बच्चे पीछे लग जाते थे,
बाबू जी दे दो, माताजी दे दो,
भैया जी दे दो, दीदी जी दे दो।
स्कूल का समय होता
लेकिन वे माँग रहे होते।
पेट की खातिर हाथ फैला रहे होते।
तभी युवा अजय ओली की
स्नेहिल नजर पड़ी उन पर,
मानवता की भावी पीढ़ी
भीख मांग रही थी इस कदर।
पर्वतीय बाजार में
छोटे बच्चे ठंड में
भूखे प्यासे, नंगे पैर
दौड़ रहे थे मांगने के लिए
राहगीरों के पीछे-पीछे
दृश्य दयनीय था,
हृदय पसीज गया उस
समाजसेवी युवक का,
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में
संकल्प लिया उसने,
खुद भी नंगे पांव चलकर,
निरीह बच्चों के दर्द को मिटाने का।
लाखों रुपये की नौकरी का
छोड़कर पैकेज,
नंगे पांव निकल पड़ा वह युवक
देने मैसेज।
आज पिथौरागढ़ में बच्चे
भीख मांगते नहीं दिखते हैं।
अब उनके पढ़ने व खाने की
व्यवस्था कर दी है, उस युवक ने
हजारों किमी की पैदल यात्रा कर
देश भर में बच्चों के लिए
जागरूक कर रहा है समाज को
ऐसे कर्मठ युवा को
कवि की कविता की
सलामी कुबूल हो।
———– डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय, जेआरएफ-नेट, पीएचडी, संप्रति- चिकित्सा विभाग, चंपावत।

आकाश

March 20, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

बिम्ब बनाना चाहता हूँ
तेरा आकाश,
मगर कहाँ से शुरू करूँ
सोच रहा विश्वास।
सोच रहा विश्वास,
इस कदर विस्तृत है तू
आदि अंत का नहीं
पता बस विस्तृत है तू।
कहे लेखनी भानु,
चमकता जीवनदायी,
चंदा-तारे, नखत,
सभी ने छवि बिखरायी।

तनिक भी न मन बोझ रखना

March 19, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

नींद आये अगर आपकी आंख में
तब समझना कि संतोष जीवन में है,
नींद उड़ जाये तब सोचना आप यह,
मन के भीतर भरा कोई बोझ है,
या किसी बात भर गया सोच है,
कहीं ना कहीं पर कोई लोच है।
लोच कर दूर मन में संतोष रखना
खूब मेहनत से निज राह में खोज रखना
चैन से चार घंटे बिता नींद में
उस समय तनिक भी न मन बोझ रखना।

मन भाये बहुत संगीत

March 19, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कौन सुनाए गीत
मुझे मन भाए बहुत संगीत।
गुन गुन करते भँवरे ने बोला
चूँ चूँ करती चिड़िया ने चहका,
मन के भीतर पुष्प सा महका,
जब आया मेरा मीत,
मुझे मन भाये बहुत संगीत
सुना दे सुर देकर दो गीत
न रह यूँ चुप मेरे ओ मीत
सुना दे कोई भी संगीत।

बना रहे बस संग तेरा

March 19, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

ठेस न दे मुझे आली
तेरी यह रंग भरी पिचकारी।
श्वेत पहनकर, निकला था घर से
तूने निशाना दे मारी, रंग भरी पिचकारी।
मन गीला कर, तन गीला कर
वसन सभी रंगों से तर कर
बदल दिया रंग मेरा,
बदल दिया ढंग मेरा।
रंग भी बदले ढंग भी बदले
बना रहे बस संग तेरा।

भरूँ रंग मन में

March 19, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

गाऊँ गीत, भरूँ रंग मन में
होली मनाऊँ, प्रीतम संग में।
लाल रंगाऊँ प्रीति की चोली
पीत-हरे से खेल लूँ होली।
रंग उड़ाओ मारो न बोली
आओ ना हम संग खेलो होली।
तन मन रंगों से भरपूर रंग दो
ऐसे मनाओ हम संग होली।
गाओ-बजाओ प्रीति के सुर दो
नेह से मेरी गागर भर दो,
ले आओ तुम मित्रों की टोली
गाओ-बजाओ खेलो होली।

मेहनतकश की जिन्दगी

March 19, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

वो दिन भर
मेहनत करते हैं,
रात को सड़कों पर
शयन करते हैं।
ऊपर से पाला पड़ता है,
नीचे से शीत लगती है,
मेहनतकश की जिंदगी,
कठिन गीत लिखती है।
सपने में गुनगुनाता है,
रोकर मुस्कुराता है,
पैर खुले रख मुंह ढकता है
मुँह खुला रख पैर छुपाता है,
मच्छर गीत सुनाता है,
मच्छर के चक्कर में
खुद के कान में चपत लगाता है,
मच्छर के चुभाए शूल में भी
मेहनत की नींद सोते हैं।
कभी हँसते कभी रोते हैं,
थकान की नींद सोते हैं।

रंग के त्यौहार में

March 19, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

ऐसी सुना दे पंक्तियाँ
जो मधुर रस सींच दें,
रंग के त्यौहार में
रंगीनियों को सींच दें।
अश्क सारे सूख जायें
होंठ गीले से रहें,
नैन में काजल लगा हो
खूब नीले से लगें।
गाल पंखुड़ियां गुलाबी
लाल हो अधरों में रंग
देख कर के लालिमा भी
आज रह जायेगी दंग।
चाँद चमका हो मस्तक में
और दस्तक हो दिलों में
भर तेरे रंगों को खुद में
आज फूलों सा खिलूँ मैं।
प्रेम पिचकारी भरी हो
मारकर बंदूक सी
फिर उठे थोड़ी सी सिहरन
ठंड सी कुछ हूक सी।
खिलखिला भीतर व बाहर
खुशियां मनाऊं इन पलों की
खूब रंगों को उड़ेलूँ
होली मनाऊं इन पलों की।
ऐसी सुना दे पंक्तियाँ
जो मधुर रस सींच दें,
रंग के त्यौहार में
रंगीनियों को सींच दें।

सच की बनती है बात

March 19, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

बात केवल सच की हो,
सच का हो सम्मान,
झूठ त्याग दे आज ही,
बात समझ इंसान।
बात समझ इंसान,
राह सच की अपना ले,
सच पर चल कर राह
स्वयं की आज बना ले,
कहे लेखनी सुबह
के बाद जन्मती रात,
जो सच रखता साथ
उसकी बनती है बात।

श्रम करने की ओर

March 18, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

नींद में इस कदर न खो जाओ
ओ युवा! श्रम करके बढ़ जाओ,
छोड़ आलस्य की सभी बातें,
कर्म करने की ओर लग जाओ।
भूख मेहनत की आज सोने न दे,
हौसला एक पल भी खोने न दे,
प्यार की पेटियां भरी हों सब,
नफरतों का जमाव होने न दे।

हो अदब बड़ों का

March 18, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

नींद तू रात को
सताना मत,
ऐसे सपनों को तू
दिखाना मत,
टूट कर गम मुझे
बहा जाये,
दर्द ऐसा हो जो
सहा जाये,
बोल ऐसा हो
जो मैं कह पाऊं,
रोल ऐसा हो
जो मैं कर पाऊं,
हो अदब बड़ों का
ऐसा कुछ,
उनकी नजरों से थोड़ा
भय खाऊँ,
ताकि गलती से पहले
थोड़ा सा,
बात समझूँ, जरा संभल जाऊँ।

मन की आशाएँ

March 18, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

राशिफल पढ़ते रहे हम उम्र भर
खुद ब खुद कुछ भी नहीं हो पाया है,
जो मिला मेहनत का फल था दोस्तो !!
बिन किये कुछ भी नहीं हो पाया है।
मन की आशाएँ धरी ही रह गईं,
जिस तरफ प्रयास हो पाया नहीं,
कर्म के फल से अधिक देना कभी
भाग्य की रेखा को भाया ही नहीं।
दे स्वयं की भावना को नेक स्वर
चार शब्दों को किया अंकित सदा
गम उठा लिपिबद्ध करते ही रहे
दूसरे का गीत गाया ही नहीं।

बिन कहे बात बताकर आये

March 18, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

सामने बोल भी नहीं पाये
आँख हम खोल भी नहीं पाये
था वजन बात में भरा कितना
उसको हम तोल भी नहीं पाये।
आँख चुँधिया गई थी जब अपनी
धूल औरों में झोंक कर आये,
गा चुके गीत जब थे वे अपने
तब कहीं फाग हम सुना आये।
उनकी कोशिश थी जल छिड़कने की
उस जगह आग हम लगा आये,
साफ कालीन-दन बिछाए थे,
उनमें नौ दाग लगाकर आये।
जितनी शंका भरी थी उनके मन
सारी हम दूर भागकर आये,
तुम हमारे हो हम तुम्हारे हैं
बिन कहे बात बताकर आये ।
वे कभी खत लिखें या आ जायें,
सोचकर हम पता लिखा आये,
दिल की सुनते हैं नहीं ठुकराते
यह नियम हम उन्हें सिखा आये।

प्यारे से पल

March 18, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

जल बरसा आकाश से, तृप्त हो गई भूमि,
पौधे फिर से जी उठे, हरी हो गई भूमि।
हरी हो गई भूमि, आज रौनक प्यारी लिख,
उग आई खुशहाली लेकर सुन्दर नख-शिख।
कहे लेखनी रंग भरे प्यारे से यह पल,
ओस रूप में मोती बन बिखरा सा है जल।

सादगी भाती है

March 18, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

गरम चाय पीने से
ताजगी आती है,
तुम्हारे व्यक्तित्व की
सादगी भाती है।
सवेरा भी जरूर
होता है राह दिखाने को
अंधेरा भी मिटता है,
रात भी जाती है।
मेहनत का फल
जरूर मिलता है,
ऊँची सफलता
हाथ भी आती है।
धरती में अर्जित धन
यहीं रह जाता है,
अच्छाई- बुराई तो
साथ भी जाती है।
तुम्हारे जाने के बाद
भुला नहीं देते हम
कभी कभी तो
याद भी आती है।

मुस्कान आपकी

March 17, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

मुस्कान आपकी
खिले फूल जैसी,
भुलाने सक्षम है
गम हमारे।
वाणी में इतना
मीठा भरा है,
विरोधी भी हो
जाते हैं तुम्हारे।
चमकता हुआ बल्ब
बोलूँ न बोलूँ,
मगर इस अंधेरे में
हो तुम दुलारे।
निराशा के कुएं में
पड़ने लगे थे
मगर तुमने आकर
किये नौ सहारे।

नदिया बहती है

March 16, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कल कल कल कल
नदिया बहती है,
साफ स्वच्छ है पानी,
जी करता है खूब नहा लूँ,
मगर डर रही है रानी,
मन की रानी का डरना
मेरे मन में करता हैरानी।
पूछा तो कहती है वो
क्यों करते हो इतनी नादानी
मौसम बदल गया है लेकिन
अभी भी है ठंडा पानी।
भरी दोपहर भी गर होती
तब भी थोड़ा कहते हम,
मगर सुबह में ठंड बहुत है
छींटे से धो डालो गम।

उनके बिन

March 16, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

मिला हुआ प्रेम खोना मत
दिल मेरे जोर से तू रोना मत
शूल चुभ जायें उनकी राहों में
ऐसे बीजों को आज बोना मत।
अब पता खुद का तू बदल लेना
ताकि पाऊं नहीं मैं उनका खत,
खुद की नजरों में गिर पडूँ चाहे
खोज लूँ खो गई स्वयं इज्जत।
आ रही नींद को रोकूँ कैसे
उनके बिन अश्क को सोखूँ कैसे,
शूल गमले में दिल के उग आये
फूल रंगीन मैं रोपूं कैसे
हो सके तो कभी भी आ जाना
बैठ पलकों में मन लुभा जाना
दो घड़ी देख कर के खिल जाऊं,
उनके नैनों से आज मिल आऊं।

रहती हैं यादें

March 15, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

यादें ही बस साथ हैं, जीवन में अवशेष,
बाकी सब मिटता रहा, नहीं बचा कुछ शेष,
नहीं बचा कुछ शेष, उग रहे सूख रहे सब,
नाशवान है जिन्दगी, जाने रुक जाए कब,
कहे लेखनी करें, भले कितनी फरियादें,
बीता नहीं लौटता बस रहती हैं यादें।

छोड़ सब राहें झूठी

March 14, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

झूठी सीढ़ी मत बना, मंजिल चढ़ने हेतु,
खाली ऐसे बना मत तू कागज के सेतु,
तू कागज के सेतु, से स्वयं से मत कर छल,
ऐसे कैसे पार, होगा लक्ष्य का पथ कल,
कहे लेखनी आज जेब में रख सच बूटी,
बढ़ना है गर तुझे, छोड़ सब राहें झूठी।

रंग भरी है जिन्दगी (कुंडलिया)

March 14, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

रंग भरी है जिन्दगी, रंगों में रह मस्त,
कष्ट से भी खोज खुशी, कभी न होगा पस्त,
कभी न होगा पस्त, समय रंगीन बनेगा,
मन में खिलता रंग, तुझे प्रवीण करेगा,
कहे सतीश होली में पुलकित कर हर अंग,
जहां न अब तक लगा, वहां तू लगा ले रंग।
—— डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय,

सच्चाई की डोर

March 13, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

अपनी राहों को पकड़, चल मंजिल की ओर,
पकड़े रख मजबूत हो, सच्चाई की डोर,
सच्चाई की डोर, तुझे ऊंचाई देगी,
नहीं हारने देगी जीत कदम चूमेगी,
कहे लेखनी छोड़, तुझे क्यों चिंता रखनी,
सच्चा व्यक्ति सदा, पाता है मंजिल अपनी।

याद रहे जन दर्द

March 13, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

सत्ता में जाकर जिसे, याद रहे जन दर्द,
वही मिटा सकता यहाँ, धूल और सब गर्द,
धूल और सब गर्द, पड़ी हो जो विकास में,
पहले वो हो साफ, रिआया इसी आस में,
कहे लेखनी सोई, रैयत बिछा के गत्ता,
नजरे इनायत कर, ले उस ओर ओ सत्ता।

नहीं छोड़ना तू अच्छाई

March 12, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

सच्चाई की जीत है, सच्ची बातें बोल,
पाप न रख मन में कभी, मन की आंखें खोल।
मन की आंखें खोल, हो सके तो अच्छा कर,
अच्छा होगा सदा, सदा सच की चर्चा कर
कहे लेखनी नहीं छोड़ना तू अच्छाई,
सदा रहेगी साथ, तेरे तेरी सच्चाई।

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