इतने हैं तेरे रूप के मैं सबको गिना नहीं पाउँगा, खोल कर रख दी पल्लू की हर एक गाँठ तुमने, मैं तुम्हारे प्रेम का किस्सा सबको सुना नहीं पाउँगा, डर कर छिप जाता था अक्सर […]

जो ऊँगली पकड़ चलाती है, जो हर दम प्यार लुटाती है, जो हमको सुलाने की खातिर, खुद भूखी ही सो जाती है, खेल खिलौने कपड़े लत्ते जो हमको दिलवाती है, खुद एक ही साड़ी में […]

चन्द अल्फाज़ो में बयां होगी नहीं, ये कहानी किताबों में जमा होगी नहीं, यूँही सरेआम हो जायेगी दास्ताँ सारी, बस दो एक रोज़ में हवा होगी नहीं, मुहब्बत पुरानी है लम्बी टिकेगी दोस्तों, ये ज़िन्दगी […]

बनाकर कागज़ की कश्तियाँ पानी में बहाते नज़र आते थे, एक रोज़ मिले थे वो बच्चे जो अपने सपने बड़े बताते थे, बन्द चार दीवारों से निकलकर खुले आसमान की ठण्डी छावँ में, इतने सरल […]

बदलते रहते हैं ज़ुबा लोग पल दो पल में कई बार, मगर एक चेहरा बदलने में मुकम्मल वक्त लगता है, छुपाने से छिप जाते हैं राज़ सिरहाने में कई बार, मगर झूठ से पर्दे उठ […]

किनारे पर भी रहूँ तो लहर डुबाने को आ जाती है, बीच समन्दर में जाने का हौंसला हर बार तोड़ जाती है, दिखाने को बढ़ता हूँ जब भी तैरने का हुनर, समन्दर की फिर एक […]

वो परछाईं सा साथ चलता रहा है, कभी दिखता तो कभी छिपता रहा है, दिन के उजाले की शायद समझ है उसको, तभी अंधेरे में ही अक्सर मिलता रहा है, कभी चाँद सा घटता तो […]

बचपन से ही जीवन के रंग में, मैं धीरे धीरे ढ़ल लेती थी, छोटे छोटे पैरों से अक्सर, मैं खुद अपने दम पर चल लेती थी, रिश्तों की एक मोटी चादर को, मैं साँझ सवेरे […]

जो करता रहा इंतज़ार पल पल, आज हर पल का वो हिसाब माँगता है, दिल के रिश्तों की कीमत और प्यार का खिताब माँगता हैं, कितना बदल गया है वो, हर बात पर अब ईनाम […]

आसमान में पतंग, यारों का कोई यार नहीं दिखता, आज के रिश्तों में वो गहरा कोई प्यार नहीं दिखता, मिलते हैं ख़्वाबों में आकर चेहरे अंजाने अक्सर, मगर हकीकत में चेहरा कोई क्यों साफ़ नहीं […]

चुप्पियाँ कहती हैं कितना बोलता हूँ मैं, सपने कहते है कितना जागता हूँ मैं, रास्ते कहते हैं कितना ठहरता हूँ मैं, लम्हें कहते हैं कितना सिमटता हूँ मैं, चादर कहती है कितना लिपटता हूँ मैं, […]

अँधेरे और रौशनी के बीच का फर्क मिटाना चाहती हूँ, माँ की कोख से निकल बाहर मैं आना चाहती हूँ, जो समझते है बोझ मैं उनको जगाना चाहती हूँ, कन्धे से कन्धा मिलाकर अब दिखाना […]

तेरी आँखों के बिस्तर पर अपने प्यार की चादर बिछा दूँ क्या? तेरे ख़्वाबों के तकिये के सिरहाने मैं सर टिका लूँ क्या? कर दूँ मैं मेरे दिल के जज़्बात तेरे नाम सारे, दे इजाज़त […]

बन्द पिंजरे से उड़ जाने का अरमान लिए बैठे हैं, कुछ परिंदे अपनी आँखों में आसमान लिए बैठे हैं, बनाये थे जो कभी रिश्ते इस ज़ालिम ज़माने से, आज उसी की बनाई सलाखों में नाकाम […]

खुद ही से खुद ही के परिचय की तलाश में, लोग भटकते हैं दरबदर कस्तूरी की तलाश में, यूँ तो तय हैं सभी किरदार कहानी के मगर, हर मोड़ पर बदलते हैं चेहरे नए चेहरे […]

मिल जायेगी ताबीर मेरे ख्वाबों की एक दिन, या ख्वाब बिखर जायें कुछ कह नहीं सकता। बह जाउं समंदर में तिनके की तरहं या फ़िर, मिल जाये मुझे साहिल कुछ कह नहीं सकता। इस पार […]

डूबती कश्तियों के सहारे बैठ कर क्या होगा, समन्दर के इतने किनारे बैठ कर क्या होगा, तैरना है तो लहरों के बीच जाना ही होगा, यूँ डर के दायरे में सिमट कर क्या होगा।। ~ […]

अपनी पलकों को इतना मत झपकाया कर, तू मेरे दिल को इतना मत धड़काया कर, हर बात तेरी किसी ज़ुबां की मोहताज तो नहीं, तू चुप रहकर भी अपने एहसास मुझे बताया कर, हवाओं को […]

अनुभव की राहों पर चलकर खुद मैंने भी देखा है, अपनों को अपनों से छलते खुद मैंने भी देखा है, आसमान को धरती से मिलते खुद मैंने भी देखा है, ख़्वाबों को यूँ पूरी रात […]

कुछ कहती नहीं बहुत कुछ कह जाती है कविता, खामोश दिखती है पर बहुत बोल जाती है कविता, चन्द शब्दों से नहीं एहसासों से बुनी जाती है कविता, खुद बंधती नहीं मगर सबको बाँध जाती […]

बांधकर बेड़ियों से कोमल पैरों को खींच कर, घर की चौखट के बाहर वो कभी जाने नहीं देते, हिम्मत जो जुटाती है बेटी कोई पढ़ने को, तो उसके कदमों को आगे कभी वो जाने नहीं […]

सुबह सुबह घर के आँगन में वो फुदक फुदक इठलाती थी, गोरैया चिड़िया जब अक्सर हमसे मिलने आती थी, विलुप्त हो रही है जो पंछी वो चूँ चूँ करके गाती थी, छोटे छोटे बच्चों को […]

ना जाने कितने मौसमों की हवा ली हमने, ना जाने कितने साँसों को सदा दी हमने, कहने को कह दी हर बात सरसराहट से हमने, ना जाने कितने ही दिलों को दवा दी हमने।। राही […]

बहुत दूर तलक जाकर भी कहीं दूर जा पाते नहीं, परिंदे यादों के तेरी मेरे ज़हन से उड़ पाते नहीं, बनाकर जब से बैठे हैं मेरी रूह पर घरौंदा अपना, किसी जिस्म पर चैन से […]

जोड़कर तिनका-तिनका घोंसला बनाने में, वक्त के साथ भावनाओं के मोती सजाने में, बड़ी हिफ़ाज़त से रखती है चिड़िया जिन परिंदों को, वो एक पल भी नहीं लगाते फिर अपने पर को फैलाने में, हवाओं […]

खोकर अपना वजूद फिर बनाने की कुब्बत रखता है, ये सूखा हुआ पेड़ फिर हरा हो जाने की सिफत(गुण)रखता है, उजड़ी हुई शाखों पर मत जाओ इसकी यारों, ये हर शख्स की साँसों में जीवन […]

अभी ज़िन्दगी की किताब के चन्द पन्नों को पटल कर देखा है। अपने बचपन को जैसे सरसरी निगाहों से गुजरते देखा है, यूँ तो खुशियों के पायदान के पृष्ठ पर आज पैर हैं हमारे, मगर […]

किसी रस्म किसी किस्म का ताला नहीं लगता, इस जीवन के पौधे पर कोई जाला नहीं लगता, जंक लग जाती है बाँधने वालों की ज़ुबाँ पे मगर, इस रूह की माटी पे कोई गाला (उत्सव) […]

सुकून का सागर जैसे आँखों से बाँध बैठे हैं, चेहरे चेहरों से ही जैसे अपना रिश्ता मान बैठे हैं, चाहत नहीं है के मिल जाए ख़बर ज़मी से आसमान की, वो तो हवाओं के हवाले […]

किताबों के बनाकर छप्पर अक्षरों के बिस्तर लगाये बैठे हैं, ज्ञान की सारी पोथियाँ आज हम लेपटॉप में दबाये बैठे हैं, कलम की स्याही के वजूद को मिटाने की खातिर जैसे, हम की-बोर्ड पर अपनी […]

एक नज़र चाह कर भी मिलाने को तैयार नहीं, ज़िन्दगी एक पल भी सर उठाने को तैयार नहीं, नोच खाने को बैठी है एक ज़िन्दगी ज़िन्दगी को कैसे, क्यों एक लम्हा भी कोई ठहर जाने […]

स्वच्छता सम्बन्धी कुछ बातों को सबके दिल तक पहुँचाना होगा, ये जागरूकता फैलाने में हम सब को साथ निभाना होगा, फैल रहा जा कूड़ा करकट उसको मिल जुल कर साफ़ कराना होगा, बचना हो गर […]

  अभी ज़िन्दगी की किताब के चन्द पन्नों को पटल कर देखा है। अपने बचपन को जैसे सरसरी निगाहों से गुजरते देखा है, यूँ तो खुशियों के पायदान के पृष्ठ पर आज पैर हैं हमारे, […]

कौन कहता है के खेल को सीखना होगा, खेल है तो खेल को खेलना ही होगा, हार जीत की परवाह कहाँ है किसी को, पर अपने हिस्से का टुकड़ा तो छीनना होगा।। – राही (अंजाना)

शिव की शक्ति बनकर तूने हर एक क्षण साथ निभाया नारी, पिता- पती के घर को तूने हर एक क्षण महकाया नारी, हर एक युग में अपने अस्तित्व का तूने एहसास कराया नारी, प्रश्न उठे […]

जो भी रस्म थी हर रस्म निभाता रहा हूँ मैं, तेरे माथे से हर शिकन मिटाता रहा हूँ मैं। खुद को समन्दर किया तेरी ख़ातिर, तेरी प्यास बुझाता और खुद को सुखाता रहा हूँ मैं, […]

यार इसमें तो मज़ा है ही नहीं, यार इसमें तो मज़ा है ही नहीं, कोई हमसे ख़फ़ा है ही नहीं, इश्क है मर्ज़ है इसकी कोई भी दवा है ही नहीं।।। राही (अंजाना)

जरा सा मुस्कुरा?☺ देना होली मानाने से पहेले हर गम को जला ??देना होली जलाने से पहेले मत सोचना की किस किस ने दिल?? दुखाया है अब तक सबको माफ़ ??कर देना रंग लगाने से […]

सोंचा नहीं था समन्दर के इतना किनारे निकल जाऊंगा, जिनसे डरता था उन्हीं लहरों के सहारे निकल जाऊंगा, जहाँ बनाता ही नहीं बह जाने के खौफ से रेत के मकाँ कोई, वहीं शौक से किरदार […]