मुक्तक

बरसात हो रही है मन झूम रहा है ऐसे ऊँचे ऊँचे पेड़ों की पंत्तियां झूम रही हैं जैसे, रिम झिम छम छम छम छम छम…

मुक्तक

संवेदनाएं मर चुकी हैं आज सब किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो सब दिखावा है मेरे व्यवहार में किस तरह कविता कहूं तुम ही…

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