कोशिश करूंगा तुम्हे भूलने की, पर जानता हूँ मैं नाकाम ही रहूंगा. ——————❤❤ By Vivek singhal
कोशिश करूंगा तुम्हे भूलने की, पर जानता हूँ मैं नाकाम ही रहूंगा. ——————❤❤ By Vivek singhal
यह साल हमेशा रहेगा यादगार, ज्यादा ना सही पर कुछ तो दे गया, यह साल बहुत सारे सबक दे गया… ——————❤❤ By Vivek singhal
यह जो नाजुक सा दौर है आहिस्ता आहिस्ता खत्म हो जाएगा बस उम्मीदों का दीपक तुम यूं ही आगे भी जलाए रखना। वीरेंद्र सेन प्रयागराज
मुह्हबत में तुम्हे आशु बहाना तक नहीं आया बनारस में रहे और पान खाना तक नहीं आया ये कैसे राश्ते से लेकर चले आये तुम मुझको कहा का मयकदा एक चाय खाना तक नहीं आया […]
तेरी परछाई को देख लेता हूँ चेहरे को देखने का मौका कहाँ मिलता। ज़िन्दगी के इस खेल में दौड़-दौड़ दौड़ लेता हूँ चौका कहाँ मिलता।।
ज़िन्दगी भर सहा जिसने अत्याचार, नारी और दलित का किया जिसने उध्दार , कलम था, जिसका हथियार वास्तव में वह था , साक्षात् ईश्वर अवतार
सुख की तलाश में हम अनगिनत इच्छाओं की पूर्ति करते रहे आशाओं के अम्बार लगाते रहे परंतु सुख तो केवल आत्मा की संतुष्टि से ही मिलता है…
बेगाने हो गये हैं लोग अब कतराने लगे हैं लोग अपने साये से भी अब कोई उम्मीद ना रही जाने क्यूं इतना दिल दुःखाने लगे हैं लोग…
मेंने आशियाना बनाना छोड़ दिया। जब से, आंधी के मौसम आ गया।।
कुछ दिन संभालो जरा, अपनी याद- ए -उल्फत तुम, कि पुरानी चोट सर्दी में दर्द बहुत देती हैं।। AK
सिलसिले वार दम टूटता गया उम्मीदों का अब क्या करेंगे हम सुनहरे सपनों का अब तो अपना जीवन भी किराये का लगता है क्या करेंगे अब हौसलों के पंखों का ???
बहक ना जाएं कहीं कदम हमारे डरते हैं इसी बात से हम क्योंकि गुजरते हैं हर रोज हम भी मैखानें के करीब से। वीरेंद्र सेन प्रयागराज
ऐ खूबसूरत बहारों की मलिका कहां से लाऊं ढूंढ कर तेरा जवाब आसमां में चमकता है जो चांद लगा है उसमें भी दाग। वीरेंद्र सेन प्रयागराज
कलम भी वही है दावात भी वही है। दिल में भरे मेरे जज़्बात भी वही है ।। लिखना चाहूँ मै एक गजल आप पर पर क्या करे अपनी मुलाकात नहीं है।।
समवेत स्वर में जय हिंद बोल दो कभी प्यार के पट खोल दो कभी ये मुल्क तुम्हारा ही है दोस्त! इसे प्यार और सम्मान से देख तो कभी… *****************************
मेरा गम तेरे दर्द से ज्यादा है मेरी आँख में आँसू तुझसे ज्यादा है एक बार देकर प्यार की थपकी सुला दे साथी ! मेरे दिल में जख्म़ तुझसे ज्यादा है…
ताश के पत्तों की तरह बिखर गई मैं जब तूने कहा मैं तेरा नहीं किसी और का हूँ…!!
किस्मत से ही बनते हैं, दिलों के रिश्ते वरना चंद मुलाकातों से, कहां रिश्ते बना करते हैं.. *****✍️गीता
कुछ ख्वाब भी झूठे हैं, और ख्वाहिशें भी अधूरी हैं पर खुश रहने के लिए, कुछ सपने भी जरूरी हैं *****✍️गीता
तुम कहते रहे और हम सुनते रहे आख़री वक्त तक सपने बुनते रहे, उठ गई डोली मेरे अरमानों की फिर भी हम तुम्हारे नाम की मेंहदी रचते रहे…
आज तुमने मुस्कुराकर बात की कुछ रोने वाली और कुछ हँसने वाली बात की, अच्छा लगा मुझको तुम्हारा झगड़ा करना भी खुशी इस बात की है कि तुमने हमसे बात की…
इल्जाम पर इल्जाम लगाता ही रहा वो हम चुपचाप सहते रहे, जब हद हो गई सहने की तो हमने कुछ ना कहा बस दामन छोंड़कर चल दिये….
सौ दफा मैं हारा बेशक जिद है फिर भी जीत की सरहद नहीं होती कोई परिंदों और प्रीत की। वीरेंद्र सेन प्रयागराज
जिसकी जैसी थी कहानी, वो वैसा किस्सा कह गया कोई चुनता रहा तिनके यहां, कोई मोती चुराकर ले गया *****✍️गीता
अच्छी किस्मत वाले लोग आसानी मिल जाते हैं पर दिल के अच्छे लोग बड़ी मुश्किल से रहते हैं…
वो हमें छोंड़कर गैरों के हो गये चलो स्वाद ले लेने दो उन्हें भी गैरों की मोहब्बत का, जब वो हमारे नहीं हुए तो किसी और के क्या होंगे ??
आपकी आंखों में खोना चाहता हूं आपकी जुल्फों में सोना चाहता हूं । अर्जी डाल रखी है हमने भी इजाजत की मंजूरी मिल गई, तो आपका होना चाहता हूं। वीरेंद्र सेन प्रयागराज
तेरी मोहब्बत में, इस कदर मसरूफ़ रहे तेरी मोहब्बत ने, तन्हाई में भी तन्हा रहने ना दिया *****✍️गीता
आज चांद आधा है, पर उसकी याद पूरी आ रही सितारे हंस रहे मुझ पर, मेरा ख्वाब अधूरा रह गया *****✍️गीता
आह ! ना लेना कभी, किसी गरीब की हर किसी को मिल जाती है, अपने नसीब की.. *****✍️गीता
धीरे-धीरे लौ जलती रही, धीरे-धीरे शमा पिघलती रही परवाना दूर से ही मचलता रहा, हर मोहब्बत की कहानी है यही *****✍️गीता
तू जब हुआ करता था मेरे करीब तो एक अलग एहसास हुआ करता था आज जब दूर है मुझसे तो कोई एहसास ही नहीं होता…!!
कोशिश बहुत करता है वो मुझे तोड़ने की, मगर मैं वो चट्टान हूँ जो पिघल तो सकती है मगर टूट नहीं सकती…
ये पता है कि दुश्वारियां बहुत हैं मोहब्बत की पथरीली राहों में । न जाने फिर भी क्यों बेचैन रहता है दिल सिमटने को किसी की बाहों में। वीरेंद्र सेन प्रयागराज
कुछ इस तरह से बढ़ता गया दायरा मोहब्बत का कि हम जान भी ना पाए कि दिल ने कब करवट बदल ली।
जाने क्यूँ तुम मुझे इतना चाहते हो ना चाहते हुए भी प्यार जताते हो हम किसी और की अमानत हैं साहब! क्यों हम पर इतना प्यार लुटाते हो ?
गुज़रे पलों को याद ना कर, ख़ुदा से उनकी फ़रियाद ना कर जो नसीब में है वो होकर रहेगा, तू कल के लिए… अपना आज बरबाद ना कर..
थकान नहीं मुझे,आराम चाहिए तू दूर नहीं, मेरे पास चाहिए आंख लग जाए आज जी भर के मेरी, मां, तेरी गोदी का वही एहसास चाहिए.. *****✍️गीता
न होती हर रात अमावस की न होती हर रोज दिवाली है। जब दीप जले दिल का दिलबर समझो उस रोज दिवाली है।।
अब चलें काफी रात हो गई । आपसे मेरी दो बातें हो गई।। वक्त और ठंड के तकाजा है। चलो आप से दीदार तो हो गई।।
इश्क़ ने हमें बर्बाद किया; फिर भी दिल ने; खुद को आबाद किया।-२ अरे! ना आती है , तो ना आए ! नींदें रात को, मैं भी चौकीदार ! गर्व से! मोदी जी को याद […]
मुखौटे से भरे हुए मैंखाने हैं…. किस पे भरोसा करें यहां तो अपने ही बेगाने हैं।
आज वो नज़र चुराए बैठे हैं, जज़्बात अपने छिपाए बैठे हैं, हमसे छिपा ना पाएंगे जज़्बात लेकिन, जाने क्यूं शर्त लगाए बैठे हैं .. *****✍️गीता
हम हर किसी में कमियां ढूंढते थे, जब आईने के सामने आए तो निःशब्द हो गये..
बहुत उंगली उठाते थे हम उस पर, आज वो चला गया तो भी बेचैन-से हैं हम..
जब वो रोता हुआ घर से गया तो समझ आ गया हमको, वो इतना भी बुरा ना था जितना हम उसे समझते थे..
रो रहा था वो भी रो रहे थे हम भी.. लेकिन ना उसे हमारे आँसुओं की परवाह थी और ना हमें उसके जाने की..
हालात इतने भी बुरे ना थे कि वो रुक नहीं सकता था, हम इतने भी मजबूर ना थे कि उसे रोंक नहीं सकते थे..
मुखौटे लगा कर, आए हैं कुछ लोग महफ़िल में आज का, मज़मून क्या है.. *****गीता
तहे-दिल से शुक्रिया ! मोहब्बत में जो रुसवा किया तुमने, ————————————————- हम तो बर्बाद हो जाते जो थोड़ा प्यार दे देते…
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