1. हम जमाने से बेहद सताए हुए हैं मगर अपनी इज्जत बचाए हुए हैं मार डालेगा दुश्मन जमाना तेरा इसलिए तुझको दिल में छुपाए हुए हैं भले जुल्म कर ले ये सारा जमाना मगर फिर […]

1. जो कल था वही आज हूं थोड़ा खफा हूं थोड़ा नाराज हूं 2. जिस दिन किस्मत के सितारे बदल जायेंगे देखते ही देखते नजारे बदल जाएंगे नाव क्या चीज है खरीद लेंगे समुंदर बस […]

खामोंश रहना जज्बात बयां करने से अच्छा है दिल की बातें दिल में छुपाना अच्छा है काश ! ये पहले ही समझ जाते हम, चलो वक्त ने समझा दिया ये भी अच्छा है….

यह जो नाजुक सा दौर है आहिस्ता आहिस्ता खत्म हो जाएगा बस उम्मीदों का दीपक तुम यूं ही आगे भी जलाए रखना। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

मुह्हबत में तुम्हे आशु बहाना तक नहीं आया बनारस में रहे और पान खाना तक नहीं आया ये कैसे राश्ते से लेकर चले आये तुम मुझको कहा का मयकदा एक चाय खाना तक नहीं आया […]

तेरी परछाई को देख लेता हूँ चेहरे को देखने का मौका कहाँ मिलता। ज़िन्दगी के इस खेल में दौड़-दौड़ दौड़ लेता हूँ चौका कहाँ मिलता।।

सिलसिले वार दम टूटता गया उम्मीदों का अब क्या करेंगे हम सुनहरे सपनों का अब तो अपना जीवन भी किराये का लगता है क्या करेंगे अब हौसलों के पंखों का ???

बहक ना जाएं कहीं कदम हमारे डरते हैं इसी बात से हम क्योंकि गुजरते हैं हर रोज हम भी मैखानें के करीब से। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

समवेत स्वर में जय हिंद बोल दो कभी प्यार के पट खोल दो कभी ये मुल्क तुम्हारा ही है दोस्त! इसे प्यार और सम्मान से देख तो कभी… *****************************

मेरा गम तेरे दर्द से ज्यादा है मेरी आँख में आँसू तुझसे ज्यादा है एक बार देकर प्यार की थपकी सुला दे साथी ! मेरे दिल में जख्म़ तुझसे ज्यादा है…

तुम कहते रहे और हम सुनते रहे आख़री वक्त तक सपने बुनते रहे, उठ गई डोली मेरे अरमानों की फिर भी हम तुम्हारे नाम की मेंहदी रचते रहे…

आज तुमने मुस्कुराकर बात की कुछ रोने वाली और कुछ हँसने वाली बात की, अच्छा लगा मुझको तुम्हारा झगड़ा करना भी खुशी इस बात की है कि तुमने हमसे बात की…

सौ दफा मैं हारा बेशक जिद है फिर भी जीत की सरहद नहीं होती कोई परिंदों और प्रीत की। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

आपकी आंखों में खोना चाहता हूं आपकी जुल्फों में सोना चाहता हूं । अर्जी डाल रखी है हमने भी इजाजत की मंजूरी मिल गई, तो आपका होना चाहता हूं। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

ये पता है कि दुश्वारियां बहुत हैं मोहब्बत की पथरीली राहों में । न जाने फिर भी क्यों बेचैन रहता है दिल सिमटने को किसी की बाहों में। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

इश्क़ ने हमें बर्बाद किया; फिर भी दिल ने; खुद को आबाद किया।-२ अरे! ना आती है , तो ना आए ! नींदें रात को, मैं भी चौकीदार ! गर्व से! मोदी जी को याद […]