दोस्ती ना सही, दुश्मनी तो मत निभाओ। चार बातें बनाकर, यूं ठहाके तो मत लगाओ। यूं तो दिल सबका दुखता है, उसे और ना दुखाओ। माना तुम काबिल हो , अपने मुकाम पर। मगर मेरी […]
दोस्ती ना सही, दुश्मनी तो मत निभाओ। चार बातें बनाकर, यूं ठहाके तो मत लगाओ। यूं तो दिल सबका दुखता है, उसे और ना दुखाओ। माना तुम काबिल हो , अपने मुकाम पर। मगर मेरी […]
वक्त का समुंदर भी कम पड़ गया, जब भूलने की बारी आई तो….
कितना समझें तुमको , यह तुम ही बता दो, एक ही सवाल है तुझसे जिन्दगी, तू क्या है? और क्यों है ? बता दो , ना एक पहेली है , ना एक आईना है , […]
आंसू ठहरे थे उनकी पलकों पर , मगर गिरना नहीं चाहते थे , भीतर उठा था तूफान, पर बहना नहीं चाहते थे।
ऐ !आयतें मुझे नजरबंद, कर ले कहीं , काश ! कोई दुआ में, पढ़ ले कहीं।
वक्त की सुई कभी टूटती नहीं , मेरे साथ भी चलती है, तेरे बाद भी।
क्या है आरक्षण और क्यों है आरक्षण ? क्यों हमें जाति के नाम पर अलग करते हो ? जब देखो तब हम युवाओं का बँटवारा करते रहते हो.. सवर्ण के हों इतने नंबर तब ही […]
जब तलक राह में आपके गम की छाया न हो तब तलक, आप महसूस कैसे करोगे स्वाद इसका है बिल्कुल अलग। जब तलक कोई ठोकर तुम्हें गिराती नहीं भूमि पर, तब तलक किस तरह इल्म […]
ज़िन्दगी के कुछ पल बदलना चाहता हू काश रोक लिया होता तुम्हे तोह हालत कुछ और होते मुहब्बत तुम्हारे सपनो के आगे बहुत छोटी थी इसलिए तुम्हे जाने दिया तुम्हे मुझे गलत समझने का कारण […]
किसी को भी किसी से प्यार कैसे हो जाता है, किसी पर भी ये दिल जांनिसार कैसे हो जाता है, कैसे ये दिल किसी की एक झलक को तरसने लगता है, और कैसे एक अजनबी […]
अपनी सुताओ को वह ज्ञान दे दे माँ की तरह उन्हें भी थोङा प्यार वो दे दे। दोष उनका क्या जो हदन में अकेले हैं दूर सुत उनका क्यूँ स्वप्नों से खेले हैं । बङी […]
चाय गरम है, मीठा कम है जीवन में गम है लेकिन अपने जीने का ढंग भी क्या कम है। हमें रुला दे, वक्त में ऐसा कहाँ दम है।
मैं अंतर्मुखी हूं, इसीलिए कभी – कभी कुछ दुखी हूं, और कभी – कभी कुछ सुखी हूं । बोलने से पहले तौलती हूं, यदा – कदा मन का कह नहीं पाती, तो थोड़ी खौलती हूं […]
दुःखी क्यों होते हो मित्र मैं बढ़ रहा हूँ, तुम भाग्य से पा चुके हो में संघर्ष से पा रहा हूँ। तुम कहते हो तो रुक जाता हूँ गुमनाम हो जाता हूँ, तुम्हारे या तुम्हारे […]
आज क्यों एकांत में याद तेरी आ रही है, क्यों हुआ बेचैन यह मन क्यों उदासी छा रही है। शायद किया बेचैन तूने इसलिए ही मैं व्यथित हूँ पर करूँ क्या प्रिय मेरे तुझ से […]
एल एसी में शान्ति, विश्वास बहाली को हम प्रतिबद्ध हैं मातृभूमि की अखंडता, संप्रभुता की रक्षा को तत्पर हैं । हमारा भारत शान्ति का हिमायती, हिंसा से दूर रहता है बातचीत से ही मसले सुलझाने […]
एक परदेशी ने तुम पर भरोसा किया। तुम कपटी हुई , उससे धोखा किया ।। नारी तो होती है ममता की मूरत। क्या तुझको नहीं थी उसकी जरुरत।। ज़िन्दगी के बदले मौत का तोफा दिया। […]
कोरोना में लगा हुआ लॉकडाउन तो हट गया मेरी जिंदगी तो लॉकडाउन में ही बसर करती है..
मुझे मिटाकर कहता है वो तुम पहले जैसी नहीं रही, फकत शक्ल ही बची है खुशबू नहीं रही…
तू मेरी नज्म़ बन जाए मैं तेरी नज्म़ बन जाऊं तू मेरा राग बन जाए मैं तेरा राग बन जाऊं कुछ इस तरह जुड़ जाएं अलग ना कर सके कोई तू मेरी रूह बन जाए […]
” गीता” इस संसार में, दो तरह के लोग, परवाह नहीं इस भयंकर रोग की, भागे फिरते रोज़ । दूजे वाले डरकर रहते, घर से बाहर कम निकलते, मगर मज़े की बात देखो, ……. दोनों […]
लड़की हूं लड़की होने का, दस्तूर निभा रही हूं। न जता सकी उस प्यार को, फिर भी निभा रही हूं। शौक रखती थी कुछ पाने का, अब उसे दबा रही हूं। कभी कोई सोचता नहीं, […]
कौन बचा है पूरा, किसका दिल टूटा नहीं। इन हसरतों की दौर में , कौन रोता नहीं !
पाकीज़गी अब दिखती नहीं , इन आबो-हवा में भी । कभी दम घुटता है तो, कभी मन । कभी सास भी बेपरवाह हो जाती है , हां, यह रुख भी बदला है , अब सुकून […]
रची जाती यहां, प्यारी-प्यारी रचनाऐं मन के भावों को दर्शाती सामाजिक मुद्दों पर जागरूक कराती संस्कृति का दर्शन करवाती मन को आनंदित कर जाती रचनाओं उपरांत, समीक्षा पढ़ने की बारी आती जिसमे समीक्षकों की भिन्न […]
कितनी पी लेते हो जो होश नहीं रहता है जमाना तुम्हें शराबी कहके हँसता है… इतना धुत हो जाते हो कि कुछ भी याद नहीं रहता है! किसे क्या कहते हो कुछ होश तुम्हें रहता […]
पुरानी सी डायरी के फ़टे पन्ने पर लिखी अधूरी नज्म हूं मैं जिसकी खूशबू बरकरार है अभी भी कई मौसम गुजर जाने के बाद
हाल ही में प्रज्ञा जी की कविता ‘वनिता’ को प्रेस में काफ़ी सराहना मिली। सावन परिवार प्रज्ञा जी के लिये कामना करता है कि उनको काव्य की दुनिया में हर दिन नई ऊंचाई और दिशा […]
दिन रात घर घर की यही कहानी है। सास बहू के झगड़े युग युगांतर पुरानी है।। सास की कड़वी – बोली मैं तुमसे कम नहीं कलमुंही। बहू की कड़वी जबाब – तू ही जहर की […]
दो पल का साथ, पर था तो सही। मुस्कुराए थे हम , कभी तो सही । क्यों दोष दें तेरे जाने का, चंद लम्हे थे न मीठे। तेरे साथ ,पर थे तो सही।
बड़े शहर की जिंदगी को छोड़ , अब छोटे शहर की जिंदगी को, जीकर देख रहे हैं यहां भी लोग हैं; वहां भी लोग थे, यहां सोच बड़ी, वहां सोच छोटी , न निभाते हैं […]
कलियुग ही सही, मुझे सीधे रस्ते चलने दे, सतयुग न सही ,मुझे टेढ़े रस्ते रास नहीं आते हैं। ……………✍️गीता..
बिट्टू लेता था आंखे मींचे, मैंने सोचा सोया है वो। मैंने एक सखी को फ़ोन लगाया, सुबह पति से हुई लड़ाई का सारा वृतांत सुनाया । फोन रख के जब मैं पलटी, बिट्टू मुझको घूर […]
कविता : सच्ची मोहब्बत ही, ताजमहल बनवाती है जो खो गया है मेरी जिंदगी में आकर उस पर गजल लिखने के दिन आ गए हैं दिल दिमाग का हुआ है बुरा हाल अब तो रात […]
मैं पीङ तेरी अपनाना चाहती हूँ तेरे आँसूओ की वज़ह जानना चाहती हूँ ।। तेरी साधना, तपस्या, त्याग के भाव को बस अपने में समाना चाहती हूँ ।। तेरी करूणा वात्सल्य ममत्व के गुणों को […]
किसी की रूसवायी की वज़ह क्यूँ बनें ऐ मेरी जिंदगी, चलो हम ही चले जाते हैं । औरों की परेशानी का सबब क्यूँ बने किसी की आँखों की चुभन क्यूँ बने तेरा चैन यूँ ही […]
खुदा ने पत्थर को वनडोल बनाया। दम है उस जौहरी में जो अनमोल बनाया।।
आंखे मीच कर भी में तुम्हे पहचान लेती हूं जिंदगी तुम्हे मैं जीने से पहले जान लेती हूं
मीच के आँखें रोते -रोते खोज रहा हूँ होकर मौन। मुझको रुलानेवाला जग में छुपकर बैठा आखिर कौन? नजर भला वो आए कैसे घर में बैठा बनकर डाॅन ।।
बात 4-5 साल पहले की है। मेरे छोटे भाई ने एक लड़की पसंद कर ली। लड़की विजातीय थी, बस घर में कोहराम मच गया। जो चाचा,मामा फूफा मेरे भाई पर लाड लुटाते थे, मानो उसके […]
गीत, गज़लें लिख रही हूँ कुछ अलग ही दिख रही हूँ होंठों पर हैं लफ्ज अटके मन ही मन में पिस रही हूँ आ गई अब शाम, दिन की दोपहर ही लग रही हूँ गुनगुनी-सी […]
पाकर सब नदियों का पानी सागर को खूब मचलते देखा। पत्थर के कलेजे रखनेवाले हिमालय को पिघलते देखा।। गम्भीर बड़ा आकाश मगर हमने उसको भी रोते देखा। सबको पाक करे जो नदियाँ बीच कीचड़ में […]
जिसके साथ कोई घात होता है, यकीनन ख़ुदा उसके साथ होता है।
चलो जरा इश्क़ करके देखे, किसमें कितना है दम । सुनता हूँ जिसको डस ले , उसको निकल जाता है दम ।।
वक्त की कद्र ,न करते कुछ लोग। बस ,परछाइयों के पीछे भागते रहते हैं।
पल पल सोचूं कहाँ से ढूँढूं खुशियों की चाबी वो बचपन वाली मिल जाए तो फिर से जी लूँ ।
नारी हो निराशा नहीं, टूटे ना तेरी आशा कहीं,। निशा है तो नव – प्रभात भी आएगा । तेरी जीत का परचम लहरएगा । खोखले, ढकोसले, न तुझे रुलाएं, खुदी को कर बुलंद इतना, कि […]
खैरात में दे दी है हमने ,अपनी जीत किसी को, लोगों को लगा ,हम हार के आ गए।
हर फासलें की गहराई होती है और कोई उतर कर नहीं देखता ….
तेरे हर दर्द की तासीर जानते हैं, तेरे हर रंजो गम की वजह जानते हैं, वो बेपरवाह है ,तेरे इश्क से , लेकिन तेरी रज़ा क्या है? वो सब जानते हैं।
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