अपनी अदा यों न दिखाएँ
जब जब मैं कलम उठाना चाहा हसीन शेर लिखने के लिए उसने कहा लगता है मैं हो जाउंगी बदनाम शायद तुम्हारे लिए मैं चाह के…
जब जब मैं कलम उठाना चाहा हसीन शेर लिखने के लिए उसने कहा लगता है मैं हो जाउंगी बदनाम शायद तुम्हारे लिए मैं चाह के…
बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू व सुर्ती छीन लेंगे तेरी सारी फुर्ती, छोड़ दे तू सहारा नशे का, इस नशे से बुरा भी न देखा।
मुझे समझने की कोशिश मत करना, मैं उलझा-सा कोई जाल हूं, जितना सुलझाओंगे , उतना ही उलझ जाओगे अगर सुलझा लिया तो, फिर खुद को…
ये राजनीति बड़ा ही मीठा जहर, मानवता पर बड़ा ढहाती कहर , होते दंगे ,बिखर जाती लाशें, फिर मिडिया हमारी, दिखाती दलाली, हाए! हिन्दू मर…
पत्थर का दिल कभी पिघलता नहीं इसलिए तो इसमें गुमान भी नहीं होता। तभी तो इसकी पूजा होती, हर घर में नित सम्मान हीं होता।।
युग युग से तू ,आंसू बहाती आई पुरुष के अधीन तू, सदा रहती आई अपने घर, अपने बच्चो के लिए युग युग से तू ,मर…
कब से तुम्हारी राह में नजरें बिछाए बैठे हैं। चले भी आओ कि महफिल सजाए बैठे हैं।।
मैं सैनिक हूं, मैं देश को संभालता हूं, हर रोज मृत्यु को मारता हूं, मैं मौत से नहीं डरता हूं, मौत को तो मुठ्ठी में लेकर…
शैतान की नानी, बन्दर-सी शैतानी, जादू की पुड़िया, सोने की गुड़िया, परियों सी रवानी, प्रेम की निशानी, बालों को नोचे, कान को खींचे, शरारतें उसकी…
चार दिन की जिंदगी है चैन से जीना है, बीड़ी-सिगरेट जहर हैं इन्हें नहीं पीना है।
ए दोस्त सोचो,अगर राह में रोड़े न होते। जीवन के परिभाषा, हम कैसे समझ पाते।। यही रोड़े सभी को जीवन धारा बदल दिया। वरना संसार…
यदि नारी से निर्माण हुआ है नया संसार। फिर क्यों नारी पे हुआ घोर अत्याचार।। हम कहते है नारी होती है ममता के सागर। फिर…
शब्दों की सीमा लांघते शिशुपालो को, कृष्ण का सुदर्शन दिखलाने आया हूं, मैं देश दिखाने आया हूं।। नारी को अबला समझने वालों को, मां…
आज तू हंस ले , खुलकर मुझ पर, मगर ,थोड़ा सा सब्र कर; अरी; सुन ! मेरी अभागी क़िस्मत! मैं सीख तुम्हें सीखलाऊंगा, मेहनत की…
निजी कामों के बीच हमारे हाथ से भी देश लिए कुछ योगदान हो जाये, मेरे भारत में अमन -चैन रहे, खुदा मेहरबान हो जाये।
शंका ना थी कोई भी,वो समाधान करने बैठ गए। हम तो बात करना चाहते थे,वो व्याख्यान करने बैठ गए।
मुस्कुरा मत इस तरह अंजान राही पर अधिक दर्ज होगा जब मुकदमा दण्ड पायेगा पथिक।
कहीं तो छुपा है, किसी ना किसी कोने में, दुबका हुआ सा, मौके की तलाश में, कम या फिर ज्यादा, मगर छिपा जरूर है, हर…
वो घड़ी है कौन सी जिस घड़ी खुश रहते हो तुम, अब घड़ी की जगह मोबाइल ने ले ली हर घड़ी उसी में गुम रहते…
उठो फिर से मेरे यारो, यहाँ कुछ काम करना है| शहर है जाम यदि यारो, कही से राह देना है लड़ो सरकार से भाई, हमें…
आपकी इस कदर है चाह हमें हर समय चाहते हैं पास रहें, खुशी हो, गम हो, या कयामत हो हर घड़ी आप दिल के पास…
आ ! मेरे पास आ , ओ री ! नींद, तुम्हें मैं लोरी सुनाता हूं , मुझे तो तुम सुलाती नहीं, चल मैं तुझे सुलाता…
श्याम का समय, बहुत जल्दी में थे वे लोग, तेज तेज कदमों में, अजीब सी हलचल, चेहरे पर रोनक, कुछ पाने की लालसा, एक के…
चलो होड़ लगाते हैं, ओ री! बारिश तेरी, मेरे नयन झरने से। ओह! मगर तुम हार जाओगी, ये झरना तो पूरी रात बहता है, और…
हे भारत!मातृभूमि! तेरे पर्वों को लाख नमन उन संतानों को लाख नमन जिन संतानों ने जान गंवा हमको सौंपा है चैन -अमन।
जीता था, खुश था मैं तेरे बिन भी तूने आकर मुझे इतना बदल दिया.. अब तेरे बिन एक पल नहीं है कटता आखिर तूने इश्क…
मीठी- मीठी बातें करते, मन में रखें बैर। ऐसे अपनों से दूर भले, उनसे अच्छे .गैर।
बहुत भीड़ है मन्दिर में, मस्जीद में शोर-शराबा है, मेरा हृदय महल बहुत खाली-सा यहां विराजमान हो जाओ, प्रभु! फिर मेरे लिए यहीं अयोध्या और…
दो डॉक्टर बर्ताव के ! एक कड़वी दवा खिलाएं, दूजा मीठी दवा पिलाएं, ‘मानुष’ मीठी से करें परेहज नीम ही नीरोगी होए।
कभी माँ का प्यार तो कभी बहन का प्यार। यही प्यार के रिश्ते में बना है हमारा घर संसार।। काश!!! यह पवित्र रिश्ते हम में…
एक दिन, ऐसे ही मैंने कोशिश की , खुद को खुद में ढूंढने की, अपने वजूद को ; गहराइयों में टटोलने की, अरे! कौन हूं…
एक दिन ऐसे ही मैंने कोशिश की , खुद को खुद में ढूंढने की, वजूद को गहराइयों में टटोलने की, अरे! कौन हूं मैं? लिंग…
जीवन क्या है? क्या है जीवन! लकड़ी का कोई फट्टा-सा, पेड़ का कोई पत्ता-सा कब टुट जाएं कुछ पता नहीं, मानो कोई गुब्बारा-सा तैरता मटका…
ओ कर्मनिष्ठ! तू दुःखी न हो खुद की क्षमता की कर पहचान दुनियां जो कहती, कहने दे उसकी बातों को मत दे कान।
नहीं आँचल कभी खिसकने दी वो अपने माथ से। आज देख रहे हैं सब उसको होकर यूं अनाथ से।।
आज न सुन रही थी न हीं पढ़ रही थी वो केवल लेटी थी। मेरी कविताओं को पढ़कर खुश होनेवाली बहू नहीं वो बेटी थी।।
एक बहना चली बांधने राखी अपने भाई के हाथ में। क्रूर काल ने बदल दिया इसे आखिरी मुलाकात में।।
वो मेरे सिर्फ अपने की अपनी थी। महसूस न होने दिया पराएपन को फिर मैं कैसे कहूँ नहीं अपनी थी।
एक बात भी न कर गई वो जाते हुए। हम सब को जग में छोड़ गई रुलाते हुए।।
बस यही सोचकर रोता हूँ मैं मौन -मौन। सबके हार गीले हैं आंसूओं से मेरी आँखों को पोछेगा आखिर कौन।।
मैं कवि हूँ, मैं फौलाद नहीं, सच कहता हूं, सच बात यही। जो सच से डरते हैं केवल कुढ़ते हैं वे सच बात यही।
चिंता त्याग प्रसन्नचित रह कविता तेरे साथ खड़ी, पूरी साथ न भी दे पाए तो भी ताकत बनी खड़ी।
तू जिंदगी ! दर्द भरे आसमान सी, मुसीबतें काले बादल है, मगर मैं ठहरा! हौसलों के रॉकेट सा , चीरता मेघों को जाऊंगा, जिंदगी तेरे…
छुपे सूरज क्षितिज में तो यकीनन शाम कहते हैं जहां जन्मे प्रभू उसको अयोध्या धाम कहते हैं हमारी आस्था देवों में कोई कम नहीं लेकिन…
दिशा तुम्हारे कदमों की कविता पहचाना करती है, तभी यदा-कदा लिखने को प्रेरित कवि को करती है।
अपनों की भीड़ में अकेली सी, खुद ही अपनी हूं मैं सहेली सी। किसी को अपना .गम बता के भी क्या हासिल, सुलझानी है खुद…
दुत्कार में सत्कार देती बेटियाँ दूसरों के हित मे जीतीं बेटियाँ, बेटियाँ में ही रमा संसार है बेटियों से ही बना संसार है।
मेरा सब कुछ ले ले तू बस अपना स्नेह मुझे दे दे दो बात प्रेम के बोल मुझे मैं इसी बात का भूखा हूँ, तेरे…
बरसात आ रही है फिर धूप आ रही है फिर बरसात फिर धूप, बारी – बारी से आ रही है, दोनों से ही तत्व हासिल…
अच्छी कवितायें मत लिखना मेरे दोस्त चंद पैसों में तोले जाओगे जैसे ही आगे बढ़ोगे तमाम तरह की गालियां खाओगे।
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.