सादगी भाती है

गरम चाय पीने से ताजगी आती है, तुम्हारे व्यक्तित्व की सादगी भाती है। सवेरा भी जरूर होता है राह दिखाने को अंधेरा भी मिटता है,…

°°°विश्वसनीयता…..

विश्वसनीयता *************** आज डायरी के अथाह पन्ने पलटने के बाद मिला मुझे एक ऐसा शब्द जिसके मायने ढूंढने, समझने और समझाने में जमाने गुजर गये…

गुत्थियां

कुछ भ्रांतियां ऐसी जो, हास्यास्पदसी लगती हैं कहावतें भी जीवन का, प्रतिनिधित्व करती हैं ज़मीं पे गिरी मिठाई को, उठाकर नहीं खाना है वो बोले…

मुस्कान आपकी

मुस्कान आपकी खिले फूल जैसी, भुलाने सक्षम है गम हमारे। वाणी में इतना मीठा भरा है, विरोधी भी हो जाते हैं तुम्हारे। चमकता हुआ बल्ब…

उनके बिन

मिला हुआ प्रेम खोना मत दिल मेरे जोर से तू रोना मत शूल चुभ जायें उनकी राहों में ऐसे बीजों को आज बोना मत। अब…

कोई तो है पास

स्याह काली रात किस तरह हो सितारों से मतलब की बात, कुंडली में अंकित ग्रह नक्षत्र, दिख रहे आकाश में, मगर भाग्य है अवकाश में,…

ले गए याद सभी

अंधेरे का गीत लिखूं या सुबह की आस लिखूं नींद आ-जा रही है, और कुछ खास लिखूं। स्वप्न हैं पास खड़े इंतजार करते हैं, बन्द…

पतझर

आंखे तेरी सब कह देती है हाले दिल बयां कर जाती है जो कह नही पाते हो जुबान से वही दर्द वो चुपके से बता…

सुनो वनिता

संसार द्वारा रचित तुम्हारी महानता के प्रतिमान वास्तव में षड्यंत्र हैं तुम्हारे विरुद्ध…!! तुम सदा उलझी रही स्वयं को उन प्रतिमानों के अनुरूप ढालने में…

वह नारी है

होली के रंगों सी मुस्कुराए, दीवाली के दीपों सी जगमगाए, बेटी बनकर घर महकाती है, बहन बनकर लुटाती है स्नेह बनकर वनिता और वधू दूजे…

अमृत कलश

स्वर्णिम किरणों के रेशमी तार मन सबके मनके जैसे वो हार कितना उसको है मुझसे लाड़ सुर संगीत लिए आता सबके द्वार सुनते हैं ऊज्ज्वलता…

यश

यूं ही नहीं मिलता किसी का साथ ये तो जन्मों जन्मों की अधूरी आश खेल कूद कर संगी साथी के संग खबर न हुई कब…

मरीचिका

सुंदरता के प्रति हमारा उन्माद इतना अधिक रहा है कि हमनें तकनीकों का सहारा लेकर हर वस्तु को सुंदर बनाने का भरसक प्रयास किया…!! जबकि…

प्रार्थना

प्रिय 2020 तेरी विदाई में अब क्या शब्द कहूं, हंगामेदार मौजूदगी की बातें किस मुंह से कहूं। कभी सुना और सोचा भी नहीं वो सब…

कचहरियां

अप्रमेय तथ्य है सदा से ही अविकल्प जीवन में शांति उन्हीं से पर है कायम प्रमाण सदन तो कुंठा से ही भरे हुए जीवन अवसाद…

मनु

मनु मनु तू दौड़ता रह निरंतर गलत, सही का कर अंतर ठोकरें मिलेंगी अनन्तर गिर, उठ फिर चल निरंतर मनु तू कौशिश कर निरंतर हार…

एहसास

कुछ एहसास हैं जो आकर ठहर गये हैं ज़बान की नोंक पर… होंठो की सीमाएँ लाँघने को आतुर, बस उमड़ पड़ना चाहते हैं एक अंतर्नाद…

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