पर्यावरण के दोहे
पर्यावरण बचाइए, हे मानव समुदाय सुख समृद्धि शांति, का है जो पर्याय नदिया पर्वत वन और, वन्य जीव समुदाय मानव दानव से हमे, कोई लेव…
पर्यावरण बचाइए, हे मानव समुदाय सुख समृद्धि शांति, का है जो पर्याय नदिया पर्वत वन और, वन्य जीव समुदाय मानव दानव से हमे, कोई लेव…
भारत माता कह रही, एक जुट हो सब लाल शत्रु की ईंट जवाव दो, पत्थर से तत्काल भारत माता कह रही, संकट में इंसान मत…
पाँच साल में अब नहीं, हो हर साल चुनाव बहती गंगा प्रेम की, होते दूर तनाव पढ लिख कर नौकर बने, या होते बेकार एक…
घर बनाने गए दो हाथ घर बनाने के लिए हाथ जोड़ते रह गए आखिर जबाब मिल ही गया काम नहीं तब से बनी हुई इमारत…
शक्कर पानी ज्यों घुले, ऐसे घुलमिल देश शर्बत पी लें शांति का, यह भारत संदेश भारत है एक बाग सा, कई प्रजाति के फूल औ…
हे धारित्री, पञ्च महाभूतों में से एक तुम, तुमसे ही उत्पन्न होकर भी मानव अछूता रहा तुम्हारी सहनशीलता के गुण से..!! काश! तुम्हारे धैर्य का…
प्रेम…. किसी को समझाया नहीं जा सकता। यह तो केवल एक अनुभूति है, जो स्वयं ही होती है। प्रेम स्वार्थहीन है, सागर सी गहराई लिए…
कल अचानक ही तुम्हारी तस्वीर पर आकर ठहर गईं मेरी निगाहें… और मैं उलझकर रह गयी तुम्हारी आँखों के तिलिस्म में ..!! गहरी ख़ामोशी समेटे…
नाम…. यही तो है हमारी पहचान, हमारे व्यक्तित्व की शान। नाम केवल एक नाम ही नहीं है, एक विशेष शख्सियत है… जिसे जानते हैं हम…
खूबसूरत सुबह तुझे प्रणाम है मेरा, सूर्य की रश्मियों को आज प्रणाम मेरा। खिल रही दिशाएं चहकते खग वृंदों, चमकती ओस बूंदो तुन्हें प्रणाम मेरा।…
माफी एक हुनर है, सत्य अहिंसा का पूरक है, राम कृष्ण ईशा को प्यारा है, बच सकते है शान तुम्हारे बिगड़े काम बने तुम्हारे झुक…
ये जो जिन्दगी है ना, बहुत ख्वाब दिखाती है। कुछ ख्वाब होते हैं पूरे, तो कुछ अरमान मिटाती है। तोड़ कर दिल कभी किसी का,…
दुनियाॅं के रंगमंच पर, हम सभी आते हैं अपना-अपना किरदार निभाने, किरदार निभाते-निभाते भूल ही जाते हैं.. कि एक दिन इस रंगमंच से, जाना है…
दुनिया के रंगमंच में कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो कभी किसी का ध्यान आकर्षित नही कर पाते… मगर उनके बिना अधूरी है कहानी की…
काश के इतना आसान होता ! दिल के जख्मों का भर जाना, तुझे देखकर तुझको भूल पाना बिन देखे तुझे रह पाना…
असम्भव है तुम्हें परिभाषा के दायरे में बांधना.. तुम हो वो सागर, जिसमें विलीन होता है व्याकुलता का दरिया.. या निष्प्राण मन के भीतर बसी…
गौरैया, जाने कहाँ उड़ गई तुम अपने मखमली परों में बाँध के वो सुबहें, जो शुरू होती थी तुम्हारी चहचहाहटों के साथ और वो शामें,…
ख़ामोशी की तह में, छिपा कर रखते हैं हम, अपने सारे ग़म। क्योंकि कर के कोलाहल, दिखाकर दुःख दर्द अपने नहीं मिटेंगे अन्धेरे ज़िन्दगी के।…
कठपुतली तो देखी होगी ना…. हाँ, वही काठ की गुड़िया। जिसकी डोर रहती है सूत्रधार के हाथों में, वह अपनी उँगलियों से जैसे चाहे, उसे…
संसार द्वारा रचित तुम्हारी महानता के प्रतिमान वास्तव में षड्यंत्र हैं तुम्हारे विरुद्ध…!! तुम सदा उलझी रही स्वयं को उन प्रतिमानों के अनुरूप ढालने में…
सुंदरता के प्रति हमारा उन्माद इतना अधिक रहा है कि हमनें तकनीकों का सहारा लेकर हर वस्तु को सुंदर बनाने का भरसक प्रयास किया…!! जबकि…
कुछ एहसास हैं जो आकर ठहर गये हैं ज़बान की नोंक पर… होंठो की सीमाएँ लाँघने को आतुर, बस उमड़ पड़ना चाहते हैं एक अंतर्नाद…
हम भ्रम पाल लेते हैं, “मैंने ही उसे बनाया है”, कभी सोचा तूने, भू-मण्डल किसने बसाया है। भाई ये सब कर्मानुसार ही, ब्रह्मा की माया…
मनचले ने रुपसी पर, तंज कुछ ऐसा गढ़ा, काश जुल्फ़ों की छांव में, पड़ा रहूं मैं सदा। रुपसी ने विग उतार, उसे ही पकड़ा दिया,…
जब भी मन घिर जाता है अपने अंतर्द्वंदों की दीवारों से, जब मस्तिष्क के आकाश में छा जाते हैं बादल अवसादों के…!! तब छांट कर…
एक महान विज्ञानी का कथन है… ‘हर क्रिया की बराबर किंतु विपरीत प्रतिक्रिया होती है’..!! प्रेम करने वाले इस तथ्य के जीवंत उदाहरण हैं…. समाज…
वो भटकता रहा लफ़्ज़ दर लफ़्ज़ गढ़ने को परिभाषायें प्रेम की, रिश्तों की, विश्वास की…!! और मैंने अंकित कर दिया हर एहसास उसके दिल में…
सांसारिक कुचक्रों में उलझ कर अपनी मौलिकता से समझौता करते मानव सुनो..!! अपने भीतर हमेशा बचा कर रखना इतना सा प्रेम…!! कि जब भी कोई…
यदि बाँधने जा रहे हो किसी को वचनों की डोर से, तो इतना स्मरण रखना कहीं झोंक न दे वचन तुम्हारा उसे उम्र भर की…
निकाल कर फेंक दिया है मैने अपने भीतर से हर अनुराग, हर संताप… अब न ही कोई अपेक्षा है बाक़ी औऱ न ही कोई पश्चाताप..!!…
जब भी प्रेम करने वालों को कोसा गया मैंने बंद कर लिए अपने कान… जब भी प्रेमियों पर अत्याचार किये गए मैंने मूँद लीं अपनी…
एक विरोधाभास रहा है हमेशा से हमारी कल्पनाओं और वास्तविकता के बीच..!! जहाँ कल्पनाएं सुख की मीठी नदी है, वहीं वास्तविकता दुःख का खारा सागर..!!…
मुल्क है हम हैं, समझ जा जमाने तू, देश माँ है, तू बेटा है, जुट रिश्ता निभाने तू। किसी भी हाल में भारत को हमने…
वे न बोले हम न बोले चुप रहे, सच के आगे आज भी हम छुप रहे, रोशनी में डाल कर पर्दा बड़ा बस अंधेरे के…
कब तलक फूंकती रहेंगी गाड़ियां कब तलक यह आग सी मन में रहेगी, कब तलक सब ठीक होगा देश में, कब दिखेंगे लोग सच्चे वेश…
ये सृष्टि हर क्षण अग्रसर है विनाश की ओर… स्वार्थ, वासना और वैमनस्य की बदली निगल रही हैं विवेक के सूर्य को..!! सुनो! जब दिन…
मुस्कुराहट प्रकृति की सुबह सुबह दिखती है उठो जागो जाग भी जाओ कहती है। साथ में चिड़ियों की चहचहाहट भी संगीत की लय में रहती…
मुक्तक-खाएंगे —————— अब बनाने वाले ही खाएंगे , कोई खाने वाला रहा नही, लगता है, सब दावत मे गए, या घर सब, रुठ के छोड़…
खुशियां सदा अमावस की रात की आतिशबाजी की तरह आईं मेरे जीवन में… जो बस खत्म हो जाती है क्षण भर की जगमगाहट और उल्लास…
अरी वो धूप तुम क्यों डर गई ठंडक से चीर कर आ जाओ हमें तपा जाओ, जीने की राह दिखा जाओ कुहरे को दूर कर…
न बोलिये बात ऐसी कि डर जायें हम, आपको देखकर चूक कर जायें हम। देखिए लाल आंखों से यूँ मत हमें, जिससे कि सचमुच सिहर…
नववर्ष की शुभकामनाएं हैं हमारी ओर से, जिन्दगी खुशहाल हो पल पल खिला हो आपका। स्वस्थ तन हो स्वस्थ मन हो खूब धन हो आपका।
नया आ गया.. पुराना साल हजारों दर्द दे गया कुछ सिखाया कुछ समझाया, और आँखों में आँसू दे गया नया साल आ गया…
गीत गाते हुए खिलखिलाते हुए यह सफर काट लो गुनगुनाते हुए। दूर करते हुए सारी नाराजगी दोस्तों से मिलो मुस्कुराते हुए।
आज दिन में हमें चाँदनी है दिखी, तार झंकार दे रागिनी है दिखी। बात करते नहीं तो करें मत मगर आंख में चाह की कुछ…
आप बेकार में यूँ खफा हो गए दुश्मनों के हमारे सखा हो गए, प्यार में जो संजोये थे पल आपके नफ़रतों में सभी वे अदा…
मुस्कुराहट बिखेरो न यूँ ठंड में विघ्न डालो नहीं आज आनन्द में, मन है कोमल, जरा भोलेपन में भी है आज डालो नहीं आप फिर…
तुम्हारे बिना पाना पाना नहीं है तुमसे अधिक कुछ खजाना नहीं है, तुम तो हो ताकत, तुम तो हो हिम्मत, तुम्हें पास रखना है गँवाना…
परम सुख मिलेगा ब्रह्मचर्य पालन करने से कुछ नहीं रखा है गंदे ख्यालतों में ।।1।। ————————————- अब तक जो करते आये हो गंदे काम सब…
मै उनके गली में दो गज़ ज़मीन मांगी एक आशियाना बनाने को उसने इतनी बड़ी शर्त रखी कि , मैं दंग रह गया सोचने लगा…
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