‘तेरी खुशी है किसमे, तय कर ये रज़ा अपनी परेशान हो गया हूँ, दुआ बदल-बदल के.. शायद के कोशिशों से, घुट जाए दम भी मेरा, जलती है आग भी अब, धुँआ बदल-बदल के.. होगी तेरी […]
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‘तेरी खुशी है किसमे, तय कर ये रज़ा अपनी परेशान हो गया हूँ, दुआ बदल-बदल के.. शायद के कोशिशों से, घुट जाए दम भी मेरा, जलती है आग भी अब, धुँआ बदल-बदल के.. होगी तेरी […]
“गौर से देख तू इस दिल के उजड़े मंज़र को, है जो खंडहर कभी आबाद हुआ करता था.. वो जिसे ‘अदना सा शागिर्द’ लोग कहते हैं, वो कभी इश्क में उस्ताद हुआ करता था..” – […]
अपने पन की बगिया है ,खुशहाली का द्वार जीवन भर की पूंजी है ,एक सुखी परिवार खुशहाली वह दीप है यारों ,हर कोई जलाना चाहता है खुशहाली वह रंग है यार्रों ,हर कोई रमना चाहता […]
‘दिखा दिया ये तज़ुर्बा भी ज़िन्दगी ने हमें, हैं कितने शख्स ज़हर, और दवा है कितने.. न रोशनी को इल्म, न ही चिरागों को पता, है कितने बुझने और मंज़ूर-ए-हवा हैं कितने..’ – प्रयाग मायने […]
‘यही चलन सा हो गया है अब ज़माने का, हो जो खुदगर्ज़ी तो एहसान घट ही जाता है.. रास्ता कौन बदलता है किसी की खातिर, जो पेड़ बीच में आता है कट ही जाता है..’ […]
‘बे-लौस किस ज़ुबाँ से कहें आज बशर को, साये में बैठकर भी काट डाला शजर को..’ – प्रयाग मायने : बे-लौस – नि:स्वार्थ बशर – इंसान शजर – पेड़
सहनशीलता की तू देवी , हर किरदारों में ढल लेती, ‘मानुष’ तेरी महिमा का , करता गुणगान है , हे! सबला, तू महान है। अर्धांगिनी बनकर, तुने हर धर्म निभाया , बंद मकान को , […]
‘कुछ इस तरह ज़िन्दगी का फसाना बदल गया, वो क्या बदला कि सारा ज़माना बदल गया.. रिश्तों पर बेरूखी का असर कुछ यूँ हुआ, उसका रूठना बदला तो मेरा मनाना बदल गया..’ – प्रयाग
पतन हाँ पतन पतन की शुरुआत कब होती है , जब घमंड की पराकाष्ठा होती है, जब अपने से काबिल कोई नहीं दिखता है आँख में पट्टी बंधी होती है। जब व्यक्ति दूसरे की गुणवत्ता […]
शिक्षक सम संसार में हितकारी ना कोइ। सकल सृष्टि के भाग्य का एक विधाता सोइ।। कहिए द्विज, शिक्षक, गुरु या कहिए उस्ताद। परमेश्वर को पूजिए गुरु पूजन के बाद।। लेकर गुरु की चरण- रज मस्तक […]
श्याम का समय, बहुत जल्दी में थे वे लोग, तेज तेज कदमों में, अजीब सी हलचल, चेहरे पर रोनक, कुछ पाने की लालसा, एक के बाद एक, गुजर रहा था हर शख्स, मन में मेरे […]
‘गाँव में हाथ, कई हाथ थामे रखते हैं, शहर में खींचने को सिर्फ पांँव होता है.. तरक्की कहने को कितनी ही की हो शहरों ने, यूँ कुछ भी कह लो मगर गाँव, गाँव होता है..’ […]
‘ऐसे किरदार का यूँ भी है महकना वाजिब, कि नाम जिसका महज़ खुशबुओं से लिखा हो.. आखरी खत ये जो खाली सा नज़र आता है, यूँ भी हो सकता है कि आँसुओं से लिखा हो..’ […]
‘तेरे खयाल से बस ये सवाल पूछा है, किसी तरह से यूँ खुद को संभाल, पूछा है नही मिला है जब, कोई हमें अयादत को, तेरी ही बेरुखी से अपना हाल पूछा है..’ – प्रयाग […]
rajendrameshram619@gmail.com ************************ जलने दो हृदय की वेदना, विचलित मन से कैसे डरना | हो जीवन संताप दुखों का, फिर क्या जीना फिर क्या मरना || ~~~~~00000~~~~~ युद्ध अनघ है मन के भीतर, परितापों से प्राण […]
गांव की ज़िन्दगी ,अब पहले जैसी नहीं जहाँ रिश्ते तो हैं ,वह मिठास नहीं जहाँ मिट्टी तो है ,पर खुशबू नहीं जहाँ तालाब तो है ,पर पानी नहीं जहाँ आम बौराते तो हैं ,पर सुगन्ध […]
‘गुज़री कुछ यूँ कि अब तन्हाई से डर लगता है, हमें तो अपनी ही परछाई से डर लगता है.. गहराई अब तो समंदर की बेअसर हैं यहाँ, हमें तो इश्क की गहराई से डर लगता […]
अचानक से कर्ण में एक ध्वनि गूंजी , देखा तो भीड़ में कोई दम तोड़ रही थी, पालन हार अपनी जिंदगी की जंग लड़ रही थी, कटती अंग – प्रत्यंग के साथ काली घटा छा […]
बड़ी मुश्किल से बना हूँ टूट जाने के बाद, मैं आज भी रो देता हूँ मुस्कुराने के बाद.. तुझसे मोहब्बत थी मुझे बेइंतहां लेकिन, अक्सर ये महसूस हुआ, तेरे जाने के बाद.. ढूंढ रहा हूँ […]
रुकने नही दिया किसी की पलकों ने हमें, जब भी किसी की आँख का आँसू बने हैं हम..
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- याद कर लो सभी आज उनको जिनके यत्नों से आजादी पाई, यह जन्मभूमि भारत हमारी उस गुलामी से मुक्ति ले पाई। हर तरफ था अंधेरा घना कोई आशा न थी […]
हालत कुछ आज ऐसी बनी चलती जिंदगी से मौत उलझ गई, अकड़ कर वो कुछ यूं खड़ी मानो जिंदगी से बड़ी हो गई।। ऐ मौत, यूं ना तू मुझपे अकड़ बाकी है मेरी अभी सांसो […]
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- हर देश – वासी की ज़ुबान पर, आज जय – हिन्द का नारा है। ना .डाले कोई बुरी नज़र, ये वीरों ने ललकारा है । कारगिल का युद्ध हो, या […]
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- बहुत सारी वनस्पतियों में, बस एक ही है वो जादुई पेड़! हरा -भरा ,घना -निराला, अलग-अलग सी कलियां उसकी, खुबसूरत तने का ताना-बाना, रंग बिरंगी पत्तियां! देखो, अनोखा दृश्य बिम्ब […]
मेरी वफाओं का खुलकर सिला दिया उसने, न रखा एक भी, हर खत जला दिया उसने.. ‘दूर होने का फैसला क्या खुद तुम्हारा है ?’ मैंने पूछा तो कैसे सर हिला दिया उसने.. हमें भी […]
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- खुशी खूबसूरती और खैर- ख़ैरियत के साथ चलो मनाते हैं देश की स्वतंत्रता की वर्षगांठ । आजादी सौगात नहीं,अमर शहीदों की विरासत है रक्त बून्द से सिंचित,करना हमें जिसकी हिफाज़त […]
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:-
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कल ही लिपटे थे दामन से क्यूँ आज तिरंगा ओढ़ चले? दो कदम चले थे साथ अभी क्यों आज मुझे तुम छोड़ चले? अब प्रेम गगरिया को अपनी मैं आँखों […]
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कभी लहू तो कभी उनका कफ़न बन जाऊ स्वतंत्र दीप से जगमगाता हुआ चमन बन जाऊ ए आजादी तू घटा बनके बरसना और में तेरा भीगता हुआ गगन बन जाऊ […]
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- दृढ़ निश्चय लेके निकले मुसीबत को निकाला जड़ से उखाड़ ये देश भक्त हुए दुनिया में विख्यात जब लहू से लिखा इन वीरो ने भारत माँ का नाम करने आये […]
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कृतज्ञ देश है उन वीरों का जिसने लहू बहाया अपना देश की खातिर तन मन धन सब कुछ है लुटाया अपना बलिदान दिया है कितनी मां ने कितनी बहनों ने […]
अध ढकें तन को छिपाए दुनिया के बाजार में गुमसुम सी बैठी एक नारी लोग आते हैं और रुक कर आगे बढ़ जाते हैं हो रहा हो यहां कोई तमाशा जैसे किसी मनचले की नजरें […]
मैं बीता कल हूँ भले ही तुम्हारे लिए , पर किस के लिए तो आज हूँ मैं। तुम्हारी नजर में बेवफा हूँ। पर किसी वफ़ा का नाज हूँ मैं। स्वयं ठुकरा के मेरी बाहों को, […]
आजकल बड़े पैतरे आजमाने लगे हो तुम! मुझसे दूर जाने के… इतनी समझ आई कहाँ से तुम में? पहले तो तुम बहुत नादान हुआ करते थे… अच्छा तो अब ये भी मेरी संगत का असर […]
*15 अगस्त का महापर्व* कभी सोने की चिड़िया सा, ये हिंदुस्तान हमारा था ! जमी पर जैसे जन्नत था, जगत जग-मग सितारा था ! लुटेरों ने इसे न जाने, कितनी बार है लूटा ! जुड़ा […]
आजादी के जश्न में तो मनाता हर कोई है आजादी का मायना समझ सके तो कोई बात बने समाज जब संवेदनहीन हो जाये तब कोई संवेदना से बाते करे तो कोई बात बने तिरंगे के […]
जब भी कोई उम्मीद कभी, मेरे सर पर हाथ फिराती है .. माँ तेरी बहुत याद आती है.. माँ तेरी बहुत याद आती है.. कोई सतरंगी चादर गर, तेरी चूनर सी लहराती है.. माँ तेरी […]
आदाब जहाँ के वास्ते बेशक कोई वरदान है भारत फरिश्तों के लिए भी आरज़ू-अरमान है भारत यहीं जन्मी है दुनियाँ की पुरानी सभ्यता यारो सभी वेदों पुराणों का कोई सम्मान है भारत क़सीदा हो, रुबाई […]
जय हिन्द साथियो पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में हर रूप में हैं […]
कविता- चादर —————— रुक रुक सुनले जरा फिर, फिर से मै आता हूँ| सर सर टप टप आंसू बहता , रिम झिम सावन जस होता|| मिल न सके फिर , फिर से कदम, छोड़ गयी […]
आओ ना चलो, बात करते है, ये खामोशी तुम्हारी जान ही ना लेले आओ ना चलो, बात करते है एक अरसा हुआ तुमको देखे हुए, आओ ना चलो, मुलाकात करते है, आओ ना चलो, बात […]
ये बेबस सी दिखती है जो, ये उस निर्दोष की पत्नी है, जिसे संतों के संग कत्ल किया, ये उस खामोश की पत्नी है । क्या मिला है ऐसा कर तुमको, क्या हासिल कर ले […]
कविता :कुछ पल नीला आकाश ,आकाश में उड़ते पंक्षी सागर की लहरें ,लहरों पर चलती नाव रिमझिम बरसता पानी ,वो ओस की बूंदे मानो सब कुछ कह देती हों ऐसा लगता है रख लूँ ,समेट […]
गम-ए-हयात की खातिर या किसी बात की खातिर, हम तो खामोश रहे इक नई शुरुआत की खातिर.. कुछ रहे पास, खुदा से ये भी बर्दाश्त ना हुआ, उसने आंँसू भी ले लिए मेरे, बरसात की […]
मैं कब कहता हूँ फूलों की सेज मिले, मुझे तो कमल जैसी सुदृढ मन मिले l जो खिलता तो कीचड़ में है, पर दाग नहीं लगने देता दामन में l कब कहता हूँ पीड़ा रहित […]
मैं भी तो नन्ही कली हूँ, तेरे अंदर ही पली हूँ तू ही तो ज़रिया है माँ, मैं तेरे कदमों से चली हूँ बस मुझे इतना बता माँ, क्या मैं बेटे सी नही ? माँ […]
हुआ .गर विरोध तो क्या बिखर जाऊंगी? रफ़्तार करूं मैं दुगनी, और निखर जाऊंगी। जीवन में जीत हैं तो हार भी हैं, यही तो जीवन है, ज़िन्दगी का सार भी है। सागर है विशाल, लहरें […]
कविता- पहचान ——————– सुन्दरता मे सुन्दर हो, खुदा की बनाई मूरत हो, खुद पे इतना निर्भर हो, जब जब कोई समझाये अपने बच्चों को, बस आप ही उनके लिए उदाहरण हो| बिन चोट सहे, पत्थर […]
वो आसां ज़िंदगी से जाके इतनी दूर बनता है, कई मजबूरियाँ मिलती हैं तब मजदूर बनता है । वो जब हालात के पाटों में पिसकर चूर बनता है, कई मजबूरियाँ मिलती हैं तब मजदूर बनता […]
रात हो गई है बात हो गई है वर्षों से जिन में काफी दूरी बनी हुयी थी बिछुड़े दिलों में उनके मुलाक़ात हो गई है। दिन भर रही थी गर्मी उमस भरी हुई थी फिर […]
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